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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

Wednesday, January 8, 2014

उत्तर प्रदेस की सड्याण उत्तराखंड मा

  चुगनेर,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती        


(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
    
           उत्तराखंड उत्तरप्रदेस  से इलै बिगळे छौ , अलग ह्वे छौ कि उखाकी बीमारी उत्तराखंड मा नि रावन पण उत्तराखंड मा जु बीमारी वै बगत कम बि छे वु अब बड़ी तेजी से बढ़ी गेन। 
 एक बीमारी च  फॉर्म थर्टी सेवेन  या इंट्री फॉर्म।  बॉर्डर पर यु फॉर्म ट्रक वाळ तैं उत्तराखंड मा माल प्रवेश करद दैं दिखाण पोड़द अर उत्तरा खंड  सरकार का  टैक्स विभाग ये फॉर्म तैं माल आयात करण वाळ कम्पनी तैं अग्रिम रूप मा दींदी।   या पर्था शायद अंग्रेजूं या मुग़ल काल से चलणी च।  यांक मकसद च कि प्रदेस सरकार तैं पता चौल जा कि भैर बिटेन प्रदेस मा कथगा माल आइ जां से सेल्स टैक्स उगाइ मा गड़बड़ी नि ह्वावु।  अर सबि जाणदन इंट्री फॉर्म पद्धतिक बाद बि उत्तर प्रदेस या उत्तराखंड मा द्वी नम्बरो धंदा धड़ले से चलद। 
 घ्याळ दा जब राजनीति मा नि छा अर दिल्ली मा इन्वर्टर निर्माता का ड्यार ठैर्यां छा।  फिर ऊँन उख दिल्ली से उत्तर प्रदेस मा कण बगैर इंट्री फॉर्म का माल प्रवेस हूंद अर कनकै हूंद सब अपण आखुन दिख्युं छौ अर प्रदेस बॉर्डर पर इंट्री फॉर्म कु अनौचित्य बि द्याख। 
शिक्षा मंत्री बणणो बाद घ्याळ दान इंट्री फॉर्म बंद करणै बात कैबिनेट मीटिंग मा उठाइ तो विक्री कर विभाग मंत्री , उद्योग मंत्री ही ना आयातित मुख्य मंत्री बि भड़िक गेन कि शिक्षा मंत्री तैं अपण काम से काम रखण  चयेंद दुसरो काम मा दखल नि दीण चयेंद। 
 आज घ्याळ दा तैं उत्तर प्रदेस की सड्याण अपण कार्यालय मा दिखणो मील। 
घ्याळ दा अबि बि अपण ड्यार बिटेन ऑफिस पैदल ही आंदन। चूँकि घ्याळ दान टेलीविजन चैनेल  पत्रकारों तैं कबि नि बताइ कि वु पैदल आंदन तो सबि समजदन कि घ्याळ दा सरकारी गाड़ी से हि ड्यार बिटेन ऑफिस आंदन।  अचकाल टीवी चैनेल निर्णय लीन्दन कि मंत्र्युं तैं क्या करण चयेंद क्या नि करण चयेंद। 
हां त जनि वो गेट से ऑफिस कम्पाउंड मा ऐन त समिण विभाग कार्यालय का कारिंदा खड़ा छा।  घ्याळ दान समज शायद सबि कारिंदा सामूहिक रूप से घाम तप्वाइ करणा होला। जनि घ्याळ दा अगनै बढ़िन एक कारिंदा अग्वाड़ी खड़ ह्वे गे ," सर गुड मॉर्निंग ! हम तैं बड़ी परेशानी हूणि च !"
घ्याळ दान मजाक मा पूछ ," क्या जी ! खौतियाल जी घाम तपण मा कुछ परेशानी ?"
खौतियाल -नै सर ! अपण कार्यालय मा स्कूटर पार्किंग की बड़ी परेशानी हूणी च। "
घ्याळ दा - तुमन पैल कबि यु मुद्दा नि उठाइ ?
ख़ौतियाल - सर आज एक सेक्सन ऑफिसर अर लोवर डिवीजन कलर्क का बीच छाँव मा स्कूटर खड़ करण मा झड़प बढ़ी गे तो सब्युंक मांग च कि स्कूटर पार्किंग की व्यवस्था करे जावो। 
घ्याळ दा - ठीक च सब भितर जावो मि दिन मा यां पर डिसकसन करदु अर तुम लोगुं तैं बि बुलांदु। 
खौतियाल - ठीक च सर 
सबि कर्मचारी भितर चलण बिसे गेन। 
ऑफिस मा मंत्री जीक सरकारी प्राइवेट सेक्रेटरी माणावाल जी उपस्थित छा।  चीफ एज्युकेसन सेक्रेटरी रावत जी एक मीटिंगौ  बान मुख्यमंत्री कार्यालय जयां छा। 
घ्याळ दा - माणावाल जी !यु स्कूटर पार्किंग कु लफड़ा क्या च ?
माणावाल - सर जब उत्तराखंड बौण तो जू बि कार्यालय  बौणिन वू जल्दबाजी मा उत्तरप्रदेस का तर्ज पर हि बणिन अर जल्दीबाजी मा सन 1975 मा उत्तरप्रदेस का शिक्षा कार्यालय निर्माण  का वस्ता जु टेंडर रिलीज ह्वे छौ वो ही टेंडर उत्तराखंड का वास्ता रिलीज करे गे।  चूंकि सन 1975 मा साइकलुँ प्रचलन छौ अर स्कूटर पार्किंग या कार पार्किंग की जरूरत ही नि छे पण उत्तराखंड माँ शिक्षा विभागौ कार्यालय सन 1975 का हिसाब से बौण तो इक साइकल स्टैंड च पर स्कूटर पार्किंग या कार पार्किंग की ऑफिसियली व्यवस्था नी  च। 
घ्याळ दा -"ऑफिसियली व्यवस्था नी च "  कु क्या मतबल ?
माणावाल - मतबल तीन कार छोड़िक कार्यालय परिसर मा जु बि कार या स्कूटर पार्क हूंदन  वु अनऑथराइज्ड ढंग से पार्क हूंदन। 
घ्याळ दा -मतलब उत्तर प्रदेस से जु बि हमन उधार ले ऊ बि बीमारी ही लेन मय ब्यूरेक्रेटिक डिले ?
माणावाल - येस सर ! नो सर !
थोड़ा देर बाद रावत जी ऐन  रामा रूमी ह्वे। 
रावत - सर मीन सूण कर्मचार्युंन आपक घेराव कार ?
घ्याळ दा -घेराव ?
माणावाल - रावत जी। यू गॉट डिस्टॉर्टेड इनफोर्मेसन !
घ्याळ दा -डिस्टॉर्टेड इनफोर्मेसन ?
माणावाल - हां वु गांऊं मा नि हूंद छौ कि एक जनानी हैंक जनानी मा बुल्दी कि मरखुड्या ज्योरुन अपण कज्याण पर थप्पड़ लगाइ।  वा हैंक जनानि पंद्यरम बुल्दी बल मरखुड्या ज्योरुन अपण कज्याण खूब थपड्याइ फिर वा सूचना गोर मा या घस्यरुं बीच मा जांद त सूचना कु रूप बदले जांद कि मरखुड्या ज्योरुन अपण कज्याण थांतन   इथगा थींच  कि वा बिचारि खटला जोग ह्वे ग्यायि।    
रावत - मि तैं त फिकर ह्वे गै छै । 
घ्याळ दा - पर स्कूटर पार्किंग कु समाधान त हूण ही चयेंद। 
रावत - सर ! अवश्य . म्यार हिसाब से पीडब्ल्यूडी विभाग यीं दिशा मा काम करणु च तो अवश्य ही आठ मैना मा स्कूटर पार्किंग कु समाधान ऐ जालो। 
घ्याळ दा - मतबल म्यार घेराव अवश्य ही हूण ?
रावत - नेवर सर ! हम तब तलक कुण  एक इंटरनल कमेटी बणै दींदा। 
घ्याळ दा - इंटरनल कमेटी ?
रावत - एस सर ! मिस्टर माणावाल !  बीस कर्मचार्युं कि एक जिजांटिक कमेटी  बणाओ।  इखमा सबि कर्मचार्युं प्रतिनिधि हूण चैन्दान अर अधा से जादा कर्मचारी यीं कमेटी मा इन हूण चैन्दन जु  टूर पर जादा रावन कि छै मैना मा एक मीटिंग से जादा मीटिंग ह्वैइ नि साक अर जब तलक कमेटी की द्वी बैठक होली तब तक पीडब्ल्यूडी विभाग सौल्युसन लेक ऐइ जाल।   
घ्याळ दा - जिजांटिक कमेटी ? 
रावत - जी ! जां से फैक्ट फाइंडिंग अर फाल्ट फाइंडिंग मा देर हूंद रावो ।  मामूली विषय का वास्ता कमेटी जथगा बड़ी ह्वावो उखमा मतैक्य जादा हूंद अर हमेशा मीटिंग अनिर्णीत ख़तम हूंद। बिंडी बिरळ मूस नि मरदन। 
घ्याळ दा - कमेटी माने डिले द डिसीजन अर बड़ी कमेटी माने नो डिसीजन ऐट आल? कमेटी माने खिल्वणी -खिलौना।  हैं ? 
रावत - सर ! आइ ऐम नॉट परमिटेड टु कमेंट ऑन माइ बॉसेज रिमार्क्स 


                  
Copyright@ Bhishma Kukreti  9 /1/2014 



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