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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, July 16, 2012

तु सतपुळि केकु ऐ छै प्रतिमा --सतपुली लोक गीत माला - ३

(इन्टरनेट प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती )
 
तु सतपुळि केकु ऐ छै स्याळी प्रतिमा ?
मि नाक कि नथुलि गड़ाणु
ऐ छौ जीजा ' हरसिंगा'
वै सुनार उखि बुलौलु
त्वेखुणि नथुलि गडौलु
घर जा स्याळी प्रतिमा
घर जा स्याळी प्रतिमा
त्वे बगैर मन णि मंद
अब जम्मा मी घर नि जांदु
मान जीजा' हरसिंगा '
मि नाक कि नथुलि गड़ाणु
ऐ छौ जीजा ' हरसिंगा'
तु सतपुळि केकु ऐ छै स्याळी प्रतिमा ?
तु सबकी समणि आँदी ,
इन्नि बात मी नि सुवांदी
घर जा स्याळी प्रतिमा
तेरी याद जब मी आन्द
अफ्वी मी थै खेंचि लांद
मिन क्या कन त्वी बतौ
मी गळा कि हंसुळि गड़ाणु
ऐ छौ जीजा ' हरसिंगा'
तु सतपुळि केकु ऐ छै स्याळी प्रतिमा ?
छ्क्वे ह्वेग्युं मि बदनाम
सर्या दुन्या मा मेरि हाम
घर जा स्याळी प्रतिमा
पैलू मीकु माया ज्वड़दि
फिर दुन्या से केकु डरदि
बोल जीजा हरसिंगा
मेरि बौ मारली मै घर जा स्याळी प्रतिमा
तेरी दीदि ह्व़े मेरि बौ स्याळी प्रतिमा
मि अफुखुणि साड़ी मूल्याणु ऐ छौ जिजा
हरसिंगा
तु सतपुळि केकु ऐ छै स्याळी प्रतिमा ?
 
आभार- तोताराम ढौंडियाल, धाद, जून १९९०