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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, July 26, 2012

देवि दिवतौं पैथोलोजिकल रिपोर्ट

गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य
                       देवि दिवतौं पैथोलोजिकल रिपोर्ट
 
                                     चबोड्या- भीष्म कुकरेती
                    स्वर्ग लोक मा चिकित्सा सुविधौं हाल जाणणो परसि मै तै देवी दिवतौं वैद वैदराज धन्वन्तरी मतबल डा. धन्वन्तरी क अस्पताल ग्यों. डा. धन्वन्तरी वीर हनुमान तै देखिक आणा छया. मंदिरूं मा हर जगा लिख्युं रौंद बल जनान्यूँ तै हनुमान जीक छौं बरतण चएंद पन सौब जगा जनानी हनुमान जी पर भिड्यान्दन जां से हनुमान जी तै नयाण पड़द. अब एक दै ह्वाओ द्वी दै ह्वाओ त क्वी बि नए जाओ इख त हर बगत मंदिरूं मा क्वी ना क्वी जनानि हनुमान जीक खुट पर हाथ लगाणि रौंद अर बिचारा हनुआन जी तै छौं मिटाणो बान तलौ मा इ पड्यू रौण पड़द. अब इन मा बड़ा बड़ा चल्लि तक घिसे जान्दन त हनुमान जी त दिवता छन. बिचारा वीर ब्रह्मचारी बि निमोनिया का बीमार चलणा छन .
 
डा. धन्वन्तरी न पैथोलोजिकल रिपोर्ट देखिक श्रीनगर गढवाल का कमलेश्वर जी तै बताई बल तुम तै खड़ दिया पर बेवहज धुवां , अर नकली, बेकार घी , खड़ दिया क बाद इना उना पड्यु घी अर लिचड़ पिचड़ होण से अजीव सि एलर्जी ह्व़े गे. फिर आप पूरो साल भर ड़र्याँ बि रौंदा कि अब फिर से कीच -पीच होण. मी अंटी मड -कीच अर एलर्जी क इंजेक्सन अर अंटी नकली घीयक गोळि दीणु छौ सैत च कुछ असर ह्वे जाओ।
 
                पंढरपुर बिटेन बिठोबा देव त घबरयाँ छ्या. उंकी लम्बी मेडिकल रिपोर्ट देखिक डा. धन्वन्तरी न बोल, ' कुछ नि ह्व़े सकुद. इथगा सालू से वै मन्दिर मा द्यू बाति अर लोगुंक धूप बाति जळाण से उखाक दिवालु पर दु दु फुट म्वासो- काजल जम्युं च अर आप वै फगोसण्या , अमानुषिक वातावरण तै अब पचाण मा लाचार ह्व़े गेवां .मनिखुन सुदन नी च , मनिखुन अफु साफ़ रौण पण मन्दिर गंदो इ रखण . बस आप तै अब हमेशा योग मा याने साँस रोकिक अर आँख मूजिक इ इ रौण पोडल."
सौणौ मैना जौं जौं दिवतौं पूजा होंदी वु बेहोशी मा सि छया । डा. धन्वन्तरी न ब्वाल बल इखमा मि क्या कौर सकुद . कै बि तरां से तुम दूध मा नयाण अर दूद तै पचाण लैक ह्व़े गे छया. पण अब त अदा से जादा दूद मा चूना, इनसेक्टिसाइड, भौं भौं रसायन मिल्यु रौंद अर याँ से आप पर सद्यनौ खजी-रोग ह्व़े ग्याई .बस मलम वगेरा लीणा रावा बस थोड़ा देरौ कुण सेळि पोडि जाली। असल म यु रोग आपक डी.एन. ए. मा बसी गे त मीन हकीम लुकमान से बि पूछ वी बि बुलणा छया कि एक दै य़ी रसायन डी.एन.ए. मा चलि गे त तब कुछ नि ह्व़े सकुद.
 
भौत सा दिवता जौं जौं मा अच्काल मनिख मिठाई चढ़ान्दन ऊं पर मिठाई से त ना पर साइड इफेक्ट से यि दिवता बीमार इ चलणा छन. धरती क डाकटरो तरां डा. धन्वन्तरी बि जब ऊं तै क्वी बीमारी बिंगण मा नि आन्द त वो बोली दींदन कि वाइरल इन्फेकसन हुयुं च. डा. धन्वन्तरी न खुलासा कार बल चूंकि मंदिरूं मा मिठाई चढ़ान्दन अर फिर सालो तलक मंदिरूं मा सफै त हुंद नी च त वां से भौं भौं किस्मौ कीड मक्वड़ , बैक्टीरिया, वाइरस पैदा होणु रौंद अर फिर यि किसम किसम का बीमारी सौरान्दन . मनिख त यूँ कीड मक्वडु से ढबे गेन पण दिबतौं न त यो सोचि इ नि छौ मनिखों से पूज़ा कराण पर दिबतौं तै भौं भौं बीमारी से सामना करण पोडल
 
गंगा, जमुना त रुणी छ्या इन लग णु छौ जन बुल्यां यि द्वी बैणि खबेस ह्वावन . रंग बदरंग, कुरंग छौ. यूंक सरैल से गुवाण, चिराण , मुताण. केमिकल्याण आणि छे .डा. धन्वन्तरी न वूं दुयूं तै दूर एक छ्वाड़ मा बिठाल्यु छौ . अर नाक पर बड़ो सी कपड़ा बांधिक दूर से इ गंगा, जमुनाक दगड बचळयाणा छया. दुयुंक एकी राड़ घाळि छे कि हम दुयुं तै सूर्य मण्डल ना कखी दुसर ब्रह्मांड म ट्रांसफर कारो, जख इ द्वी अपणी पवित्रता बरकरार रखि सौकन
.
छ्वटा छ्वटा मंदिरूं करोड़ो दिवता मानसिक रोगी हुयाँ छया. युं दिबतों रोग च दुसर से जळण. कुछ मन्दिरों मा त लोग लाखो तादात मा जान्दन पण यू तै पुछदि इ नी छन. बस यू दिबतौ पर जळणो रोग लगी गे. इखमा करोड़ो कुल दिबता बि छन . ऊँ तै जलन होंद कि जन गढ़वळि अपुण कुल दिबता त बिसरी गेन पण बड़ा बड़ा मंदिरूं मा हर साल चाट घाळिक जान्दन. डा. धन्वन्तरी क कौन्सिलर डाक्टर यूँ दिबतौ ढाढस दिलाण मा लग्याँ छन कि फिकर नि कारो एक दिन यूंक बि बौडिक आलु.
 
इना बड़ा बड़ा मंदिरों दिबता ऐड़ाट भुभ्याट करणा छया बल हे इश्वर हम तै पाप से बचाओ , हम तै पाप से बचाओ . अब जब पापी अनाचारी, भ्रस्टाचारी भक्त यूंक मंदिरों मा सोना जेवरात का मुकुट चढ़ाणा छन अर जब यि दिवता भ्रष्ट, अनाचार्यू चढ़यूँ मुकुट पैर्दन त इ दिबता अफु तै पापी समजण बिसे जान्दन . डा. धन्वन्तरी क कौन्सिलर डाक्टर यूँकि बि कौनसेलिंग मा लग्यां छन
 
आदि देव महादेव तै दूध, घी, फलों अर फूलों से एलर्जी छे त ऊन मनिखो तै बताई छौ कि ऊंको लिंग मा पाणी अर बिल्पतरी चढायो जाव .पण मनिख दुसरों तै रौब दाब दिखाणो बान दूध, फल, फूल कुछ बि चढ़ाणा रौंदन अर देवाधिदेव एलर्जी से भैर इ नि ऐ सकणा छन.
भौत सा दविता जन कि गणेश जी, देवी जी तै कंदूड़ो रोग ह्व़े ग्याई. भक्तो क दिनरता, जगरता को घ्याळ से यूँ दिबतौं क कंदूड़ो जळपटि फटि गे.
 
सब दिवता अर डा धन्वन्तरी न फैसला कार बल अब त ईश्वर से इ मिलण चएंद . तैबारी नारद जी दिखे गेन. बिचारा ! सुखिक कठक बण्या छन ., इन्टरनेट क आण से अब ऊं मा कुछ काम त रै नि गे त थ्वड़ा भौत कूरियर इना उना ली जान्दन. सबि दिवतौं न ब्वाल कि हम सौब ईश्वर से मिलण चाणा छंवां त जरा ईश्वर जीक दगड अप्वाइंटमेंट फिक्स कारो.
 
नारद जीन एक पन्ना दिखाई. पन्ना मा ईश्वर को एक रैबार छौ- मि यूँ मनिखो चाल चलन, आचरण से परेशान ह्व़े ग्यों त मि अब कै हैंको ब्रह्माण्ड बणाणो दूर भौत दूर जाणो छौं अर यीं दै मीन मनिख नि बणाण .
Copyright@ Bhishma Kukreti 26/7/2012