उत्तराखंडी ई-पत्रिका की गतिविधियाँ ई-मेल पर

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

Sunday, July 29, 2012

हुस्यार कुखड़ी :गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य


गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य
                                         हुस्यार कुखड़ी
                                   चबोड्या - भीष्म कुकरेती
                        परसि मी दर्शनु बाड़ा क नाति क इख कुखडी लीणो ग्यों . पता नि  कथगा साखी ह्व़े गेन धौं ! हम गढ़वळि बामण कुखुड़ खाण मा सबसे अग्वाड़ी रौंदा, जड्डू मा दूद मा अंडा खांदा , जंगळ बिटेन दूसरों मार्याँ चूजा तक चपट कौरी जांदा पण मजाल च कि हम बामण कबि एक कुखुड़ बि पाळि लेवां . कुखुड़ पाळण से हमारो ब्रह्म तेज कम ह्व़े जान्दो अर कुखड़ो शिकार खाण से ब्रह्मत्व बढाई दीन्दा. . हम गुड़ से परेज करदवां पण गुलगुला अर गुड़जोळी सपोडिक खांदा. अब चूंकि हम बामण मार्याँ चिकन पर इ हथ लगौंदा अर ज़िंदा मुर्गी से छौं करदवां त सैकड़ो मुर्गी खाणो उपरान्त बि मि तै कुखड़ो आचारण, जीवन शैली बारा मा क्वी ज्ञान नी च. आज मीन स्वाच जरा कुखड़ो बारा म ज्ञान अर्जित करे जाओ.
मीन एक अनुभवी मुर्गी द्याख अर वीं तै पूछ - तुम कुखड़ो जिन्दगी मकसद क्या हूंद.
मुर्गी- जु हम जंगळ मा हूंदा त हमर मकसद रौंद बल हम खूब म्वाटो ह्व़े जौंवां अर फिर खूब म्वाटो ताजा चूजा पैदा कौराँ .उख जंगळ मा हम कुखड़ो कुण म्वाट हूण जिंदा रौणै गारेंटी होंद अर इख मुर्गीखाना या पोल्ट्री फ़ार्म मा म्वाट हूण मतलब ये नरक से जल्दी सोराग जाण . उख जंगळ मा हम प्रेम का वास्ता हैंकि मुर्गी या मुर्गा क तलास मा रौंदा इख मुर्गीखाना मा हम बचणो बान ढंढो (नाटकीय तरकीब) क तलास मा रौंदा.
मि- अरे ! इथगा फरक ?
मुर्गी - हाँ उख हम अपण चूजो या बच्चों बचाणो बान भौत सा लड़ाई लड़दवां . इख मुर्गीखाना मा हम यि हजार कोशिश करदां कि मनिख हम से पैल हमारो बच्चो की बळि चढै द्याओ
मि- अच्छा ! त इख तुमम बचणो क्या क्या ब्युंत / उपाय हून्दन ?
मुर्गी- जन कि जनि क्वी तुम सरीखा शिकर्या दिख्याई कि मि त कुण्या पर झुप ह्वेक लुकि जांद फिर म्यार बेटा या बेटी मारे जाओ मै तै दुःख नि होंद.
मि- तुम कुखड़ो तै कन कैक पता लगद कि आज भोळ तुमारि मौणि पर चक्कु चलण वाळ च?
मुर्गी- जब बि क्वी गाँ वाळ कै मिलिटरी वाळ तै खुज्याओ त समजी ल्याओ कि दारु पार्टी हूण वाळ च अर हमारि बळि चड़णो समौ ऐ गे. या जब प्रवासी गाँ मा अन्दन त हमारि बडी संख्या मा मौत आन्द. फिर कखी डौंर थकुलि क आवाज आओ त वां से बि अंदाज लगद कि मनिखो मा चिकन लेग पीस कि इच्छा जागी गे.
मी - त फिर तू अबि तलक कनकै बचीं छे
मुर्गी- एक त मि बरत धरणु रौंद. जां से मि म्वाटु नि ह्व़े जौं. चर्बीदार खाणक से मि परेज करदु .
मि- भौत बढ़िया
मुर्गी- फिर मि आउट डुवर ड्यूटी पर जादा जान्दो
मि -आउट डुवर ड्यूटी ?
मुर्गी- हाँ. जनि क्वी हम मुर्ग्युं तै दिखणो आन्द मि भैर कखि भाजि जान्दो.
मि- सही तरकीव!
मुर्गी- फिर कैजुअल लीव मि भौत लीन्दु .
मि -क्या ?
मुर्गी - हाँ , मि क्वी ना क्वी बहाना लेक मी कैजुअल लीव लीन्दु. जन कि हम मुर्गी जाणि जांदवां कि कै अंडा बिटेन चूजा ह्वालू अर कु अंडा बांज रालो. जंगळ मा हम बांज अन्डो क छोप मा नि बैठदां . पण इख मुर्गीखाना मा मि नॉन फर्टाइल अन्डो क छोप मा कथगा इ दिन बितै दींदु . फिर मेकअप कौरिक अपण सरैल पर खजी जन चकता पैदा करी लीन्दा या अपण फंकर झाड़ी दीन्दा जां से क्वी बि शिकर्या हम तै नि खरीदो. .
मी- क्लास !
मुर्गी -फिर मी मनिखो फिंक्यां बीडी सिग्रेटो टुकडा लगैक खै जांदू अर मै फर खांसी लग जांदि . इन मा ना त मेरो मालिक बेचीं सकदु अर ना इ क्वी खरीददार मै तै खरिदुद.
मि- एक्सलेंट !
मुर्गी- मर्त्यणा दिखाण त रोजाना क काम च .
मि- मनिख अर जानवरूं मा क्या अंतर च, भेद च .
मुर्गी- हम शाकाहारी जानवर कबि बि मांश नि खांदा. मान्शाहारी जानवर अपण जन्दगी बचाणो बान हैंक तै मारदो. तुम मनिख शाकाहारी ह्वेक बि मांसाहारी ह्व़े गेवां.अर तुम अपण जिन्दगी बचाणो बान ना अपण अहम या सवाद को बान जीवहत्या करदां .
मि- हाँ. अच्छा . हैंक जिन्दगी मा मनिख बणण चैलि क्या ?
मुर्गी- कबि बि ना .
मि- त हैंक जनम मा क्या बणण चांदि ?
मुर्गी- झांझ !
मि- हैं ! तू हैंक जनम मा मछर बणण चांदि ?
मुर्गी - बिलकुल मछर बणण चांदु
मि - अजीब नी च. मनिख क जोनी छोडि क मछर बणणो गाणि- स्याणि ?
मुर्गी- तुम मनिखुन जून ( चाँद) मंगल जीति याल भोळ परस्यूं सूरज तै बि जीति देला. पण तुम मनिखों मा मच्छर जीतणो पुन्यात नी च
Copyright@ Bhishma Kukreti 27/7/2012