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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, July 16, 2012

भगत सिंग पैदा हूण चयेंद गढवाली -हास्य व्यंग्य साहित्य

गढवाली -हास्य व्यंग्य साहित्य
                              भगत सिंग पैदा हूण चयेंद
                         चबोड्या - भीष्म कुकरेती
-- बल भुला परिवार की आन शान कि बात च .मुन्डीत को नाम की बात च . सिंयीं भयात तै बिजण चएंद. हम तै कुछ करण चयेंद .
--हाँ भैजी आप सै बुलणा छन, हम तै कुछ करण चयेंद .
--जा अपण नौन्याळु तै उख भेज जां से दुसर मुन्डीत का लोग हमर कूल नि त्वाड़ण . हमम एका हूण चएंद.
- भैजी अपण नौनु तै बि भ्याजो.
-- अरे त्वे पता i च बल मीन अपण नौन्याळ गंगा जी का जौ तरां पाळिन . इन मा कन कैक ऊं तैं दंगा फसाद मा भेजुं ? भै हमारि भयात मा इथगा नौन्याळ छन ऊं तै जाण चएंद.
--भगत सिंग सौब तै चयाणा छन पण अपुण इख ना, पडोसी क ड़्यार !
--- भाईओ ! म्यार नाम क्या बुन्या क्या कन्या च अर सामाजिक कार्यकर्ता छौं. मी ये बड़ो मच से आप सौबसे प्रार्थना करदो बल हम सौब तै अपण बच्चों दगड गढवळि मा बचळयाँण चयांद .
--क्या कन्या भैजि ! तुम अपण नौन्याळो दगड गढवळि मा किलै नि बचळयांदा?
---अरे दिमाग खराब हुयुं च म्यरो ! म्यार नौनो गढवळी बुलण से अंग्रेजी अर हिंदी खराब नि ह्व़े जालि !
--भगत सिंग सौब तै चयाणा छन पण अपुण इख ना, पडोसी क ड़्यार !
-- मि फुन्द्यानाथ आप सौब प्रवासी भाईयों से प्रार्थना करदो कि हम सौब तै साल भर मा अपण गा गढ़वाळ जाण चएंद अर उख अपण कूड़ो रख रखाव को पूरो इंतजाम करण चएंद
--फुन्द्यानाथ भैजी ! गाँ मा आपक कूड खंद्वार ह्व़े ग्याइ ? वै तै छाणा किलै नि छंवां ?
--दिमाग खराब हुयुं च म्यार ? जथगा पैसा मा मि गौं को कूड छाण या चिणण मा लगौल उथगा पैसा मा त ड्यारा दूण मा छ्वटि कोठी लगि जालि.
--भगत सिंग सौब तै चयाणा छन पण अपुण इख ना, पडोसी क ड़्यार !
- भाइयो मि अफलातून विचारक बुल्दु बल गढ़वळि संस्कृति बचाणो एक तरीका च बल हम तै परदेस मा बार त्यौहारों दिन गढ़वळि खाण पीण बणाण चएंद जां से बच्चों तै हमारि संस्कृति से परिचय हून्दो राउ.
--अरे अफलातून जी ! क्या बात आज मकरैणि दिन आपक इख पिजा अर चाइनीज चिकन नोड्यूल बण्या छन ?
--हाँ ! मेरो सरो परिवार मोडर्न विचारोंक जि च .
--भगत सिंग सौब तै चयाणा छन पण अपुण इख ना, पडोसी क ड़्यार !
-- मि महान गढ़वळि कवि धुन्धलो आप सबि साहित्यकारों तै धाद दीन्दो कि हम साहित्यकारों तै न्यूतो गढ़वळि भाषा म छपण चयेंद.
--अरे धुन्धलो जी ! बधाई हो आपक नौनो ब्यौ च . पण न्यूतो पत्र त हिंदी मा च
--हाँ यार म्यार द्वी चार कवि मित्र हिंदी का छन त ऊंक बान न्यूतो कार्ड हिंदी मा इ छपाण पोड़.
--भगत सिंग सौब तै चयाणा छन पण अपुण इख ना, पडोसी क ड़्यार !
- मि स्यूंसाट जी छौं अर मेरी राय च कि हम तै अपणि गढ़वळि संस्कृति क दर्शन हौरी लोगूँ तै बि कराण चएंद . जन कि ब्यौ काज मा गढ़वळि गाणा लगाण चएंद जां से दुसर कौम का पौणु तै पता लग जाओ कि हमारि संस्कृति क्या च .
-- आपक नौनो ब्यौवक बधाई हो स्यूंसाट जी. इ क्या वेस्टर्न म्यूजिक को गाणा?
--हाँ जी. म्यार सबि बौस ब्यौ मा अयाँ छन त ऊं तै त दिखाण इ पोड़ल कि म्यार समाज मोडर्न च
--भगत सिंग सौब तै चयाणा छन पण अपुण इख ना, पडोसी क ड़्यार !
- आण वाळ भगत सिंगों स्वागत च म्यार इख ना, पडोसी क इख.
Copyright@ Bhishma Kukreti 17/7/2012