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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, August 29, 2013

मौत का जागर

(गजल सम्राट मधुसुदन थपलियालै कुछ गजल )

मौत का जागर लग्युं छ आज ब्याळी 
जिन्दगी ह्वै ग्यायि डौंर -थाळी। 
आग चुल्लौं नांघी  कोठार पौंछी 
पाणी धैरी की   नजीकु छिल्ला बा ळी। 
तीस माणी , भूख पाथी, सात जीवन 
पुंगड़ी पटुळी सेरा सारी पांच नाळी। 
बाघ का जजमान बणगिन घ्वीड़ -काखड़ 
मनख्या -मनिख चैरिगे सरा हर्याळी। 
धगुला देखिक रौंस नि खै कागजूं मां 
दस्तखत त असली छन पण हाथ जाळी।
बौग्दु पाणी हेरी की निरसे ना  गैल्या   
तेरी गंगा होली त त्वैमा ही आली