सन्दर्भ : डा. विष्णु दत्त कुकरेती की पुस्तक नाथ पन्थ : गढवाल के परिपेक्ष में
इंटरनेट प्रस्तुति : भीष्म कुकरेती
३०- रची जे :जो वली दीजै सो बली लीज्ये : दैत्र दानो संघारो कीजै दानपति कौ राजा पारजा :जैसो बली दीजै :सम्या चक्र उधौ बणी जे पुज्यौ जौगणी सच्यानन्द : रीध सीध फुरौ सम्या कंध : श्री गुरु गोरषवाला : शगुरु चरणपादुकए न्मौन्मस्तुते : पांचो बली पात्र अर्गला बली पात्र :आगलो बली पात्र हीरदया सुधो बली पात्र दीलो को दीजै :चौसट्या गरामो की पूजा रंचीजे : जो बली दीजोसो बली लीज्यौ सम्याचक्र उधौ बणीज्ये :पुज्यौ जौगणी सच्यानन्द : रीध सीध फुरौ सम्या कंध : श्री गुरु गोरषवाला : शगुरु चरणपादुकए न्मौन्मस्तुते :छटो बली पात्र अर्गला I
३१- बली पात्र हीरदया सुधो बली पात्र : नर्ग कोट कौ दीज्या :ज्वाल्पा माहामाई की पूजा रचीजै :जो वली दीजै सो बली दैत्र दानो संघारो कीजै दानपति कौ राजा पारजा जैसो बली दीजै :सम्या चक्र उधौ बणी जे : पुज्यौ जौगणी सच्यानन्द :रीध सीध फुरौ सम्या कंध : श्री गुरु गोरषवाला : श्री गुरु चरणपादुकए न्मौन्मस्तुते : सातौ बली पात्र अर्गला I आगलो बली पात्र हीरदया सुधो बली पात्र मही मंडल को दीजै: भसमती माहा माई की पूजा रचींज्ये : देव दानो घारो कीजै :दानपति कौ राजा पारजा : जो वली दीजै सो बली लीज्ये :सम्याचक्र उधौ बणीज्ये :पुज्यौ जौगणी सच्यानन्द : रीध सीध फुरौ सम्या कंध I
३२- श्री गुरु गोरषवाला : श्री गुरु चरणपादुकए न्मौन्मस्तुते : आठो बली पात्र अर्गला बली पात्र :आगलो बली पात्र हिरदया बली पात्र सम्पति पाताल को दीजै : राजा बासुगी की पूजा रचीजे दैंत्र दानो संघारो कीजै दानपति कौ राजा पारजा जैसो बली दीजै :सम्या चक्र उधौ बणी जे : पुज्यौ जौगणी सच्यानन्द :रीध सीध फुरौ सम्या कंध : श्री गुरु गोरषवाला : श्री गुरु चरणपादुकए न्मौन्मस्तुते : नाऊ बली पात्र अर्गला : आगलो बली पात्र हीरदया सुधो बली पात्र : आसा को भणीजे : राजा इंद्र की पूजा रची जे :दैंत्र दानो संघारो कीजै दैंत्र दानो संघारोकीजै
......... बाकी आगे है
इंटरनेट प्रस्तुति : भीष्म कुकरेती
३०- रची जे :जो वली दीजै सो बली लीज्ये : दैत्र दानो संघारो कीजै दानपति कौ राजा पारजा :जैसो बली दीजै :सम्या चक्र उधौ बणी जे पुज्यौ जौगणी सच्यानन्द : रीध सीध फुरौ सम्या कंध : श्री गुरु गोरषवाला : शगुरु चरणपादुकए न्मौन्मस्तुते : पांचो बली पात्र अर्गला बली पात्र :आगलो बली पात्र हीरदया सुधो बली पात्र दीलो को दीजै :चौसट्या गरामो की पूजा रंचीजे : जो बली दीजोसो बली लीज्यौ सम्याचक्र उधौ बणीज्ये :पुज्यौ जौगणी सच्यानन्द : रीध सीध फुरौ सम्या कंध : श्री गुरु गोरषवाला : शगुरु चरणपादुकए न्मौन्मस्तुते :छटो बली पात्र अर्गला I
३१- बली पात्र हीरदया सुधो बली पात्र : नर्ग कोट कौ दीज्या :ज्वाल्पा माहामाई की पूजा रचीजै :जो वली दीजै सो बली दैत्र दानो संघारो कीजै दानपति कौ राजा पारजा जैसो बली दीजै :सम्या चक्र उधौ बणी जे : पुज्यौ जौगणी सच्यानन्द :रीध सीध फुरौ सम्या कंध : श्री गुरु गोरषवाला : श्री गुरु चरणपादुकए न्मौन्मस्तुते : सातौ बली पात्र अर्गला I आगलो बली पात्र हीरदया सुधो बली पात्र मही मंडल को दीजै: भसमती माहा माई की पूजा रचींज्ये : देव दानो घारो कीजै :दानपति कौ राजा पारजा : जो वली दीजै सो बली लीज्ये :सम्याचक्र उधौ बणीज्ये :पुज्यौ जौगणी सच्यानन्द : रीध सीध फुरौ सम्या कंध I
३२- श्री गुरु गोरषवाला : श्री गुरु चरणपादुकए न्मौन्मस्तुते : आठो बली पात्र अर्गला बली पात्र :आगलो बली पात्र हिरदया बली पात्र सम्पति पाताल को दीजै : राजा बासुगी की पूजा रचीजे दैंत्र दानो संघारो कीजै दानपति कौ राजा पारजा जैसो बली दीजै :सम्या चक्र उधौ बणी जे : पुज्यौ जौगणी सच्यानन्द :रीध सीध फुरौ सम्या कंध : श्री गुरु गोरषवाला : श्री गुरु चरणपादुकए न्मौन्मस्तुते : नाऊ बली पात्र अर्गला : आगलो बली पात्र हीरदया सुधो बली पात्र : आसा को भणीजे : राजा इंद्र की पूजा रची जे :दैंत्र दानो संघारो कीजै दैंत्र दानो संघारोकीजै
......... बाकी आगे है
मूल पाण्डुलिपि : पंडित मणि राम गोदाल कोठी वाले से प्राप्त
( पांडुलिपि 24 सेमी ० लम्बी और 23 . 5 सेमी ० चौड़ी है जो कि बाघ की खाल की जिल्द पर सुरक्षित है . कुल 88 पृष्ठ I कूर्माष्टक - प्रथम 34 पृष्ठ I 35 से 70 पृष्ठों में घटथापना मन्त्र हैं, अन्य फुटकर मन्त्र व कलुवा की रखवाळी हैं I 75 वें पृष्ठ में लिखा है -
(यह पुस्तक लिखतंग पंडित टीकाराम गोदाल पाटली ग्रामे संवत १९९१ (१९३४ ई ) के बैशाख २३ गते शनिवारी -यह पुस्तक पंडित मणिराम गोदाल कोठीवाले की है . यह पुस्तक कुर्माष्ट्क , घटथापना सम्पूर्ण न्म शुम्भु )
( पांडुलिपि 24 सेमी ० लम्बी और 23 . 5 सेमी ० चौड़ी है जो कि बाघ की खाल की जिल्द पर सुरक्षित है . कुल 88 पृष्ठ I कूर्माष्टक - प्रथम 34 पृष्ठ I 35 से 70 पृष्ठों में घटथापना मन्त्र हैं, अन्य फुटकर मन्त्र व कलुवा की रखवाळी हैं I 75 वें पृष्ठ में लिखा है -
(यह पुस्तक लिखतंग पंडित टीकाराम गोदाल पाटली ग्रामे संवत १९९१ (१९३४ ई ) के बैशाख २३ गते शनिवारी -यह पुस्तक पंडित मणिराम गोदाल कोठीवाले की है . यह पुस्तक कुर्माष्ट्क , घटथापना सम्पूर्ण न्म शुम्भु )
No comments:
Post a Comment
आपका बहुत बहुत धन्यवाद
Thanks for your comments