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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Saturday, July 23, 2016

क्या मुझे भी घोषित कर देना चाहिए ?

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                       क्या मुझे भी  घोषित कर  देना चाहिए ?
                                        चबोड़ , चखन्यौ , चचराट :::   भीष्म कुकरेती 
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घरवळि - म्यार जोग इ इन छा।  वी ले हूंद त आज  अवश्य डिक्लेयर कर दींदु। 
मि -हैं कु ?
घरवळि -तुम कुण क्वी बि ह्वावु।  कौन सा तुमन कुछ करण।  वू हूंद त जरूर  मेरी नाक बची जांदी।  मुहल्ला मा मुख दिखाणम बि शरम आणि च , हिटण कठण हुयुं च।    ..  
मि -अरे पर कु हूंद , कख हूंद अर क्या कौर दींदु 
मुन्ना - डैडी ! वो मम्मी के मायके मुहल्ले में नहीं हैं मैड अंकल !
मि -हाँ तो वैक क्या ?
मुन्ना - डैडी ! मम्मी उन्ही अंकल की बात कर  रही हैं।  अंकल जब बि सरकार की कोई घोषणा हो या सामयिक आंदोलन हो वो मैड अंकल वैसा कर देते हैं। 
मि -तो मम्मी दगड़ वैक क्या लीण दीण ?
मुन्ना -मम्मी की शादी की बात उन मैड अंकल से चल रही थी।  
मि - त ह्वाई किलै नी च ?
मुन्ना - अरे उस समय हिंदी आंदोलन चल रहा था और सब अंग्रेजी साइन बोर्डों को काला  कर रहे थे।  अंकल ने नाना जी का मुंह  काला कर दिया।  मुहल्ले में केवल नाना जी को अंग्रेजी बोलनी आती थी। बस शादी नही हुयी। 
घरवळि -अरे पर आज मि मुहल्ला मा ब्लाउज - साड़ी तौळ छाती चौड़ी कौरिक चल त सकुद छौ कि ना ? वैन अवश्य  डिक्लेयर कर दीण छौ।  पागल च पर सामयिक विषयों की वैल्यू त समजद च। 
मि -अरे पर क्या ह्वे ?
घरवळि -मिसेज कबाड़ी बि आज छप्पन्न इंची छाती चौड़ी करिक  दौड़नी  रैंदी , मिसेज चपड़ासी तो सब तै बताणी रौंदी। एक मी छौं जु मुख दिखाण लैक बि  नि रयुं छौं।  ऊंक कजे त अपण कज्याणि ख़याल रखदन।  रिटायर्ड चपड़ासी बि अपण वाइफक ध्यान रखणा छन। एक म्यारी भाग फुट्यां छन।  
मि -ह्यां क्या ह्वाइ ?
घरवळि -हूण क्या च।  सरा मुहल्ला मा कंट्रोल वळ , रद्दी -कबाड़ वळ, रिटायर्ड सेल टैक्स अधिकारी तो छैं इ छ्याई इख तलक कि द्वी भूतपूर्ब सरकार चपड़ास्यूंन बि भारी भरकम ब्लैक मनी डिक्लेयर कर दे।    
मि -तो क्या ह्वाइ ?
घरवळि -क्या ह्वाई ? क्या नि ह्वाइ।   हरेक जनानी मि तै पुछणि छन कि तुम कब ब्लैक मनी डिक्लेयर करणा छंवां?  कब ब्लैक मनी डिक्लेयर करणा छंवां?  अजकाल जैन बि ब्लैक मनी डिक्लेयर कार वैकि मुहल्ला मा जै जै कार  हूणि च।  
मि -पर मि हर साल इनकम टैक्स भरणु रौंद छौ तो मीम ब्लैक मनी हूणो सवाल इ पैदा नि हूंद।  मीम पिछ्ला तीस सालक  फॉर्म सिक्सटीन  पड्यां छन। 
घरवळि -पर कैन बोली छौ कि इनकम टैक्स भरो।  एबरयांकुण काम तो आंद।  पर मि नि जाणदु अब्याकि अबि ब्लैक मणि डिक्लेयर कारो।   
मि -ह्याँ पण , ब्लैक मनी कुण कमाण पोड़द अर बगैर इनकम टैक्स भर्यां पैसा घुमाण पड़द।  
घरवळि -मि नि जणदु इ सब।  इज्जत बचाणो कुण तुम तै कुछ करण पोड़ल।  
मि -ह्यां पण   .. 
घरवळि -मि कुछ नि जाणदु।  यदि तुमन ब्लैक मनी डिक्लेयर नि कार तो मीन फांस खै दीण।  मुहल्ला मा हर क्षण मेरी हंसी हूणि च कि तुमन अबि तक ब्लैक मनी डिक्लेयर नि कार।  तुम सबसे अधिक हूंच छंवां तुम सबसे  जयां बित्यां छंवां।   
मि -ह्यां पण जु टैम पर प्रत्येक कमाई कु टैक्स भरदो वैमा ब्लैक मनी नि रै सक्दो। 
घरवळि -मेसे अब बेज्जती नि सये जांदी।  जिल्लत की जिंदगी से बढ़िया तो मरण ही ठीक च।  तो म्यार फांस खाणो इंतजाम कारो।  
मि -अच्छा ! अच्छा ! इंतजाम करदो।  इन कौर हमर ब्यौ बाद का पिग्गी बैंक बक्सुड़ी ला।  
घरवळि -उख पर क्या च ?
मि -याद च पिग्गी बैंक मा वी पैसा पड्यां छन जु सर्कुलेशन से भैर ह्वे गे छा। अर दुकानदार तो छोडो बैंक वळुन बि यूँ पैसों तै लीण से इनकार कर दे छौ।   
घरवळि -हाँ अर वु सब पैसा बगतौ संग काळ बि हुयां छन। 
मि -एक दै गौण छा  ना हमन ? 
घरवळि -हाँ , दुंळ वाळ पैसा से लेकि अट्ठनी तक कुल सताईस रूप्या उन्नीस पैसा छन।  
मि -ठीक च।  मि ईं चेंज लेक इनकम टैक्स ऑफिस जांदू अर उख जैक रियल ब्लैक मनी डिक्लेयर कौरिक आंद। 
घरवळि -हाँ हाँ चौड़ जावो अर डिक्लेयर कौरिक आओ /  तुम इनकम टैक्स ऑफिस जावो अर मि मुहल्ला मा सब तै बथैक आंदु कि तुम बि ब्लैक मनी डिक्लेयर करणो इनकम टैक्स ऑफिस जयां छंवां। 
मि  ( अपणा इ मन मा )-क्या इनकम टैक्स वाळ ये ब्लैक मनी तैं स्वीकार कारल ? या ? पर फिर बि जाण मा क्या हर्ज च ? 

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23/7/2016 ,Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India 
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।

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