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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, October 30, 2014

मैंगा अल्लु का तीन यार - बणिया जमाखोर , अधिकारी घूसखोर अर हरामी नेता

चबोड़ , चखन्यौ , घपरोळ ::: भीष्म कुकरेती 


टीवी ऐंकर - आज हम जगप्रसिद्ध भाजी /भुज्जि /सब्जी से मुखाभेंट करला अर मालुमात करला कि आखिर क्या कारण च कि अल्लु भुज्ज्युं राजा किलै च ?
टीवी दर्शक - आज भारत मा मैंगो  च इलै अल्लु भुज्ज्युं राजा च 
ऐंकर - अल्लु जी ! आपको जनम स्थान कख च ?
अल्लु -दक्षिण अमेरिका पेरू  क्षेत्र मा अर आठ दस हजार साल पैलि मनिख मेरी खेती करण सीखि गे छा। 
दर्शक -यां इतिहास जाणिक म्यार रुस्वड़म अल्लु थुका ऐ जाल !
ऐंकर -आप यूरोप मा कनै ऐ ह्वाला ?
अल्लु -स्पेनी लोग मि तैं पेरू बिटेन यूरोप लैन अर सोलहवीं सदी मा मेरी खेती  यूरोप मा शुरू ह्वे गे छे।  सत्तरहवीं अर अठारवीं सदी मा  मेरि गणत  यूरोपौ मुख्य भुज्युं मा हूण लग गे छे। 
दर्शक -यां यीं जानकारी से म्यार पुटुक थुका भर्याल !
ऐंकर -भारत मा कब प्रवेश ह्वे होलु ?
अल्लु -सत्तरहवीं सदी मा ब्रिटिश मिसिनरी वळ मि तैं भारत लैन। आज भारत कु स्थान आलू उत्पादन मा  चीन का बाद दुसरर  स्थान च। 
दर्शक -यां ब्रिटिश लोगुं बाराम बुले जांद कि ब्रिटिशर प्यार बि व्यापार का वास्ता करदन। 
ऐंकर -उत्तराखंड मा आपक प्रवेश कनकैक अर कै समौ पर ह्वे होलु 
अल्लु -1838 का करीब मेजर यंग न मेरी खेती देहरादून का पहाड्यूं मा शुरू करी छे। 
दर्शक -हाँ पर आज पहाड़ी लोग बि पहाड़ी अल्लु वास्ता तरसणा छन।  
ऐंकर -आपकी क्या खासियत च , याने 
अल्लु -याने ! न्युट्रिसनल वैल्यू क्या च ?
दर्शक -ठीक  भै एक मनुष्य जिंदगी  केवल अल्लु पर ज़िंदा रै सकद पर आज भारत मा अल्लु दिखेणा कख छन ?
ऐंकर -जी अल्लु जी ! न्युट्रिसनल वैल्यू !
अल्लु -इनर्जी च , कर्बोहाइड्रेट छन , मिनरल्स याने ट्रेस मेटल्स छन , लवण छन अर विटामिंन्स छन। 
दर्शक -ठीक च पर ऐन टैम पर त महंगा ह्वे जांद 
ऐंकर -इन बुले जांद बल अल्लु मा फैट याने वसा भौत हूँद ?
अल्लु -जी नही! यु लोग अज्ञानता का बस समझदन कि अल्लु मा फैट हूंद। मीमा मुंगरी , चौंळ , ग्यूं , सोयाबीन से बि कम फैट हूंद। 
दर्शक -सस्तो हो तो  बिंडी फैट बि चलल। 
ऐंकर -एक बात बताओ कि जब कि भारत मा 41 . 4 मिलियन मैट्रिक टन अल्लु हूंद फिर बि अल्लु इथगा मंहगा किलै च ?
अल्लु -कुछ मूलभूत  कारण छन। 
दर्शक -इकै करिक  बता !
ऐंकर -जरा बथावदी। 
अल्लु -सबसे पैल त या च कि किसान योजनाबद्ध खेती नि करदन।  जन कि ये साल अल्लु मंहगा ह्वे गे तो दुसर साल अधिकतर किसान अल्लु बुणो पैथर पोड़  जांदन अर एक साल अल्लु सस्ता ह्वेना कि दुसर साल बूंदि इ  नि छन.
दर्शक -द ल्या फिर से सरा दोष किसानो पर। 
ऐंकर -दुसर कारण ?
अल्लु -किसानो तै पैदावार /प्रोडक्टिविटी/यील्ड  बढ़ाणो बान ट्रेनिंग की कमी। अधिसंख्य  किसानुं तैं पता इ नी च कि कैं जातिक अल्लु बोण , कथगा खाद आदि दीण आदि आदि 
दर्शक -यां जै देस मा ट्रेनिंग तैं आफत समजे जावो  तो उख यी हाल होलु। 
ऐंकर -हैंक कमी ?
अल्लु -फिर जब अल्लु निकाळे जांदन तो खुदाइ मा ध्यान नि हूण से बीस -पचीस टका अल्लु चोटिला ह्वे जांदन। अर बर्बादी अधिक हूंद 
दर्शक -इखमा मा बि ट्रेनिंग चयेंद।  जै मजदूर तैं द्वी टैमौ भोजन नि मिल्द वै तैं समुचित औजार अर ट्रेनिंग कु द्यालु ?
ऐंकर -और ?
अल्लु -स्टोरेज  भण्डारीकरण  समुचित व्यवस्था नि हूण से हमर ड्यूरेबिलिटी कम ह्वे जांदी अर बर्बादी प्रतिशत बढ़ जांद। 
दर्शक -पर भण्डारीकरण व्यवस्था की जिम्मेदारी कैक च ?
ऐंकर -आप अचाणचक  मंहगा किलै ह्वे जाँदा ?
अल्लु -जमाखोर बणियों की जमाखोरी, सरकारी अधिकार्युं घूसखोरी अर कमीना नेताओं द्वारा जमाखोर अर घूसखोरो तैं प्रोत्साहन दीण से। 
दर्शक -मोदी जी ! अच्छा दिन कब आला ?



Copyright@  Bhishma Kukreti  30  /10 /2014       
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लेख में  घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख  की कथाएँ चरित्र व्यंग्य रचने  हेतु सर्वथा काल्पनिक है

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