चबोड़्या -- भीष्म कुकरेती
भूत -भगवन ! मि त भूतलोक मा बेदिक्क्त छौ , बेख़ौफ़ छौ , अलमस्त छौ, आपन मि तैं किलै बुलाइ ?
भगवान - त्यार चुनाव ए सालो सबसे सर्वश्रेष्ठ भूत मा ह्वे।
भूत -तो ?
भगवान -तो क्या त्यार सुकर्मों हिसाब से त्वे तैं मृत्युलोक याने मनुष्य योनि मा भिजे जाल।
भूत -नही महाराज ! मि भूत इ ठीक छौं।
भगवान -हैं ! दिबता बि मनुष्य लोक मा मनुष्य योनि मा जन्म लीणो बान घोसपेच लगाणा रौंदन अर तु बुलणु छे कि भूतलोक इ ठीक च।
भूत -हे परमेश्वर ! एक बि काम मनुष्य इन नि करद जु मनुष्य का लैक काम व्हावन।
भगवान -जन कि ?
भूत -एक हों तो मि बतौँ। मनिख हरेक कर्म मनुष्य -बिमुखी करद।
भगवान -क्या ?
भूत -अब द्याखो आपक नियमुं हिसाब से क्वी बि जानवर बेमाता का दूध नि पे सकुद। किन्तु मनिख बेमाता तो छोडो दुसर जानवरों दूध चसोड़ -चसोड़िक पे जांद।
भगवान -हाँ पर……
भूत -पर क्या भगवन ! कथगा इ पर छन ये मनिख पर
भगवान -हूँ !
भूत -जरा स्वाचो ! आपन मनुष्य का दांत अर आंत इन नि बणैन जाँसे मनिख मांश भक्षण कर साको। किंतु संसार मा सबसे अधिक मांश मनिख ही खांद !
भगवान -लेकिन……
भूत -लेकिन क्या ! यी ना आपन एकी आंत इन नि बणै छे कि यु ग्यूं -चौंळ पचै साकु , किंतु आज संसार मा मनिख सबसे अधिक ग्यूं -चौंळ की ही पैदावार करद
भगवान -हाँ किंतु
भूत -किन्तु क्या ईश्वर ! आपन मनिख तैं इन नंग या इन दांत नि दे छा कि यु हैंक जानवर या अपण कौम मनुष्य तैं मार सको। किन्तु हे देव ! आज मनुष्य ही इन जानवर च जु सबसे अधिक अपण भाई बंधुओं हत्या करद । युद्ध मनुष्य का वास्ता वर्ज्य छौ किन्तु मनुष्य युद्ध मा लिप्त च।
भगवान -ठीक च , पर देवलोक का नियमानुसार त्वे तैं मनुष्यलोक मा मनिखौ गाणी मा जाण इ पोड़ल।
भूत -ना ना !
भगवान -नही ! जाण इ पोड़ल।
भूत -वै भगवान कु बच्चा ! तेरी औकात छ क्या च ? पंडित , मुल्ला , पादरी , मठाधीश नि ह्वावन तो त्वे तैं कु पूछल ?
भगवान -हे शठ भूत ! तू म्यार क्रोध तैं नि जाणदि। जा मि त्वे तैं श्राप दींदु कि तू वापस भूत ह्वे जा।
भूत -ओए ! बकबास त नि छै ना करणु ? मि तैं सुदि त नि छै डराणु ? यु श्राप बदल त नि सकद ना ?
भगवान -नही ! अब तू कभी भी मनुष्य नही बन पायेगा।
भूत -धन्यवाद प्रभु ! श्राप प्राप्ति का वास्ता मीन आप तैं गुस्सा दिलाई।
भगवान (अपड़ि मन मा ) -हैं ! शरीफ भूत बि मनुष्यों तरां चालबाजी करण मिसे गेन ?
Copyright@ Bhishma Kukreti 15/10 /2014
*लेख में घटनाएँ , स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख की कथाएँ , चरित्र व्यंग्य रचने हेतु सर्वथा काल्पनिक है
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