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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, October 27, 2014

महान कुमाउँनी कवि श्री ख्याली राम जोशी की कविताएँ

महान कुमाउँनी कवि श्री ख्याली  राम जोशी की कविताएँ
Poetries of Khyali Ram Joshi Great Poet of Kumaoni
(Presented by : Bhishma Kukreti )
दीवालिक य सुन्दर सा त्यार
जीवन में ल्यावो उज्याव अपार
लक्षमी जी आओ तुमार द्वार
शुभकामना करो हामरि स्वीकार
               
पल पल सुन्दर फूल खिलोकभ्भें नि हो कानोंक सामना
जिंदगी खुशियोंल भरी रवो,यै छू तुमुहैं हामरि शुभकामना
                         
जगओ दी और सार दुनी कें जगमगाओ
ल्हिबेर सीता माताकें रामज्यु आप आओ
हर घर हर द्वार में तुम यास दी जगाओ
हर गों हर द्वार अयोध्या जौस है जाओ


दाग तुमार फोचिनाक कभ्भें धुलो नि धुलो
भलाई करी तुमरि तराज में तुलो नि तुलो
आजबै कान पकड़ि लियो आपण ऐबों हैं बै
भोव के पत्त तुमार आंख लै खुलो नि खुलो
                    
चीनाक बणी दी और पटाखोंक वहिष्कार करो
ऐला दिवाई में आपण देशाक माट दगा प्यार करो
यमें मिली छू भारतीय मेहनतक चनण पिठ्यां
यनु दियांकें प्रज्वलित करि दिवाईक श्रंगार करो

तारों में यकलै चन्द्रमा जगमगों
मुश्किलों में यकलै आदिम डगमगों
काना देखि लै झन घबराया दोस्तो
काना में यकलै गुलाब खिलखिलों
         
ख़ुशी यदुग मिलो की आँखों आंशु जामि जाओ

टैम हवो यदुग सुन्दर कि बखत लै थामि जाओ

दोस्ती निभोंल हाम तुमु दगै कुछ यैस तरिकैल

कि दगाड़ बिताई हर पल जिन्दगी बणी जाओ
          
जदुग खूबसूरत आज रात्ति छी उ है खूबसूरत भोव हवो
जदुग ख़ुशी तुमार पास आज छन उ है ज्यादा भोव हवो
                      
कृपा बणी रवो तुमरि हमेसा आपण नानतिना पै हे बाबा भोले नाथ सदा।
म्यार मन मन्दिर तुम बिराजोगौरा माताक सांथ बाबा भोले नाथ सदा॥
           
हर सांस में हौनै रवो त्यर नामौक जाप बस जिंदगीक छू आश यै।
जब बटिक आयुं मी तेरि शरण में लागों हर पल तू म्यार पास छै॥

थ्वाड़ भौत जैकें अंग्रेजी ऐं उ हैं सारि दुनि बुलें जी-जी कें
किलै सब मैस देसि समझनि आपण पहाड़ी बुलाणियांकें
आब नानतिना कें लै दूर धरनि आपण पहाड़ीभाषा धे बै
यदुग लै के गलती हैगे महाराज हामरि पहाड़ी भाषा हैं बै
        
कदुग जल्दी बीति जांछी उ टैम जब इजाक पास रौंछी।
जब क्वे दुःख-सुख हौंछी इजाक काखि में ख्वर हौंछी॥
                 
दोस्तो तुमौर नि हौंण पर जिन्दगी में यदुग कमी रैं ।
मीचाहे लाख हसड़े कोशिश करूं पर आँखों में नमी रैं॥
                                        
ब्याव सूरज कें उछाण सिखें
दियैलौ पतंगा कें जगण सिखें
घुरिणीयां कें तकलीफ हैं पर
ठोकरै इंसान कें चलण सिखें
          
मांफ करि द्यों भगवान लै उकें
जनरी आपणी किस्मत ख़राब हैं
उनूं कें कभ्भें मांफि निमिलैनि
जनरी आपणी नियत ख़राब हैं
             
आजै कै दिन य पंजाबैकि धरती में पैद हौ छी एक यस लाल ।
जैल अंग्रेज राजाक जाड़ाकें हिलै बेर बणी गोच्छी उनौर काल॥
      
मी तुमु हैं बै कभ्भें नाराज है नि सकन
दोस्तीक रिस्त हमार ख़राब है निसकन।
तुम चाहे मिकें कदुगै भूलिबेर स्ये जाओ
मी तुमुकें याद करी बिना स्यी निसकन॥
     
वैण देखनी च्यलांकपर ऐ जानी च्येली,
नौणि खानी च्याल पर स्वस्त रौनि च्येली।
पढाई करूनि च्यलांक सफल हौनि च्येली,
ठोकर मारनी च्यालपर समाउनी च्येली ॥
             
स्वैण देखनी च्यलांकपर ऐ जानी च्येली,
नौणि खानी च्याल पर स्वस्त रौनि च्येली।
पढाई करूनि च्यलांक सफल हौनि च्येली,
ठोकर मारनी च्यालपर समाउनी च्येली ॥

जो घर में बुड़ बाड़ीक लिजी आदर न्हें,
समझो उ घराक नजीक लै भगवान न्हें।
भुलि जानि जो ज्योंन जी मै बाबों कें,
दुनी में उनूं है बेर नीच क्वे इंसान न्हें।
के कमाक ऊं कोठिमहलकार अगर,
मै बाबोंक रौंणाक लिजी घर बार न्हें।

चितैइक ग्वोलज्यु मी दास तुमर,तुमार चरणों में नमन बारम्बार छू।
पग पग पर हों तुमरि दयाक अहसासतुमार दर्शनोंक मोहताज छू ॥
                   
हिन्दी मेरि इमान छूहिन्दी मेरि पछ्याण छू।
हिन्दी छों मी देश लै म्यर प्यारा हिंदुस्तान छू॥

त्यार खुशियों मतलब म्यार लीजि,त्येरि मुखड़ेकि हँसि हैं मेरि इजा।
तुकें पत्त छू तेरि मुखड़ैकि उदासीमेरि हँसि कें लूटि लिजै मेरि इजा॥
                              
च्येलि पावण च्यलां हैबेर आसान छू
अगर नौक य हामौर समांज निहओ
च्येलियांकें पेट में यसिक क्वे निमारो
अगर चलीनक दैजौक रिवाज निहओ

इजाक पसिणल घर में खिलीं गुलाब
आपणी चाहत कें खुद कुतरि गे इज
जब बटिक ब्वारि ऐगे उ चुप चाप रैं
औलादक कौण छू आब सुधर गे इज

क्वे लै मुस्किलैकि आब कै कणी क्वेलै बाट निमिलन।
सायद आब घर बै क्वेलै इजाक खुट छुंई बेर निचलन॥

शिक्षक दिवस
इजैल दे हमुकें जनम
बाबु हमरि रक्षा करनी
लेकिन सच्ची मानवता
शिक्षक हमार जीवन में भरनी
सही और न्यायक बाट में हिटण
शिक्षक हमुकें बतौनी
जीवन में संघर्षों दगे लड़ण
शिक्षक हमुकें सिखौनी
ज्ञान दिपैकी जोत जगे बेर
मनमें हमार उज्याव करनी
बिद्या-धन दिबेर शिक्षक
जीवन हमार सुखौल भरनी
जिंदगी में कुछ बणण छौ तो
शिक्षकोंक सम्मान करो
मुनौव झुके बेर इज्जतैल तुम
शिक्षकोंकें प्रणाम करो|
के: आर: जोशी. पाटली (बागेश्वर)

मुखौड़ देखि लोग प्यार करनी,
आत्मा कें प्यार करों क्वे क्वे।
पाखमें चढ़ै खैंच लिनि सिड़ी,
ख़ुशी कैकी सहन करों क्वे क्वे।
डबल वालोंकि सब पुज करनी,
गरीबैकि हामी भरनी क्वे क्वे।
हाम तो याद धरनूं ससब्बों कें,
पर हमूं कें याद धरनी क्वे क्वे

कौनी की प्यार बिना जिन्दगीक गुजार निहुंन,
हौवो सांच प्यार तो वीकि बराबरि रीस निहुनि।
जब करनैछू प्यार तो दोस्तों दगा करो किलैकि,
दोस्तोंक प्यार में ध्वाक जसि क्वे चीज निहुनि॥

डुबि जानि किस्ती जबलै औनी तूफान,
याद रैजानि और बिछुड़ जानि इन्सान।
याद धरला दोस्तो भौत नजदीक पाला,
भुलि जाला तो दोस्तो ढुनैनै में रै जाला॥

        
आपण दिल में लुकी यादोंल सवारों तुकें
तू यहाँ देख तो आपण आँखों में उतरुं तुकें
त्यर नाम आपण होटों पै सजै राखौ मील
अगर से लै जौ तो स्वैणा में पुकारूं तुकें
                  
पैलिक आपण नानतीनांक पेट भरें इज
फिर बची खुची में आपण संतोष करें इज
मांगनी न्हें कभ्भें के आपण लिजी इज
आंचोव फैल्यैं आपण नानतिना लिजी इज
आपण नानतिना जिन्दगिक खातिर
आँशुऔंक फूल हर मौसम में बरसें इज
जिन्दगीक सफर में मुशीबतोंक घाम में
जब कें स्योव नि मिलन तो याद ऐं इज
         
दोस्त हमार बणनें रओ यदुग लै भौत छू,
सब हर बखत हसनें रओ यदुगै भौत छू।
हर क्वे हर बखत कैका दगाड़ रैनिसकन,
याद एक दुसरै कें करनें रओ यदुगै भौतछू॥

पाणील तस्वीर कां बनें
स्वैणोल तकदीर कां बनें
कै दगड़ी दोस्ती करो तो
सांच दिलैल करो किलैकी
य जिंदगी फिर कां मिलैं
           
इजाक पसिणल घर में खिलीं गुलाब
आपणी चाहत कें खुद कुतरि गे इज
जब बटिक ब्वारि ऐगे उ चुप चाप रैं
औलादक कौण छू आब सुधर गे इज
                
क्वे लै मुस्किलैकि आब कै कणी क्वेलै बाट निमिलन।
सायद आब घर बै क्वेलै इजाक खुट छुंई बेर निचलन॥

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