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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, October 21, 2014

समर्थन ले लो ! समर्थन ले लो , फ़ोकट में ले लो

स्किट (चौंतरा स्वांग , लघु नाटिका )::: भीष्म कुकरेती 
ब्याळि 19 /10 /2014  कुण महाराष्ट्र विधान  चुनाव रिजल्ट आणो उपरान्त जब एनसीपी याने शरद परिवारो परिवारिक पार्टीन भाजपा तैं समर्थन दीणै बात कार तो हमर बिल्डिंग मा बच्चोंन एक चौंतरा स्वांग ख्याल।
 एनसीपी - समर्थन ले लो , बन बनिक समर्थन ले लो , राजनीतिक खलबली ले लो
एनसीपी - अरे क्वी बि नि बुलाणु च।  चलो मि  जोर से भट्यांदु .
एनसीपी - समर्थन ले लो , समर्थन ले लो , राजनैतिक हथियार ले लो !
पत्रकार -ये भै समर्थन क्या भाव चलणु च।  कति रुपया छटांग चलणु च? कति रुपया कीलो  चलणु च ? कति करोड़ प्रति विधायक चलणु च ?
एनसीपी -नै नै ! हम समर्थन का मोल भाव नि करदा।  हमर विधायक बिकाऊ नि छन।  बगैर शर्तौ समर्थन च।
पत्रकार -हाँ पर समर्थन की क्वी ना क्वी शर्त त होली ?
एनसीपी - इन न नी च पर उन च। 
पत्रकार -इन  नी च पर उन च,  कु क्या मतबल ?
एनसीपी -हम चांदवां कि महाराष्ट्र का विकास ह्वावो।
पत्रकार -ह्यां पर तुम पिछला दस सालों से अर शरद पवार तो पिछ्ला चालीस सालों सालों से बुलणा छंवां कि महारष्ट्र मा विकास ह्वे गे।  तो अब त महाराष्ट्र तैं विकासै जरूरत ह्वेलि ही ना। 
एनसीपी -हाँ उन त महाराष्ट्र  तैं विकासौ जरूरत नी च पर फिर बि हम महाराष्ट्र का विकास का बान बगैर शर्तुं समर्थन दीण चाणा छंवां। 
पत्रकार -वाह भली बात च। 
एनसीपी -हम पक्का राष्ट्रवादी जि छंवां। इलै हम भारतीय जनता पार्टी तैं समर्थन दीण चाणा छंवां।
पत्रकार -एक बात बतावदी बल जब एक एमपी सवाल पुछणो बि पैसा लींद तो तुम इथगा पुण्यात्मा कब बिटेन ह्वे गेवां ?
एनसीपी -हमर नीयत साफ़ च हम महाराष्ट्र का विकास चांदवां। 
पत्रकार -ह्यां पर राजनीतिज्ञ अपुड़ दांतौ लू (मैल ) बि फोकट मा नि दींदु तो घाघुं घाघ नेता शरद पवार बगैर शर्त का सुपिन मा समर्थन नि द्यालो। 
एनसीपी -हमर समर्थन अमूल्य च , बगैर मूल्य का च , सुदी ही च।
पत्रकार -सुणो ! सरा भारत की जनता जाणदी च कि एनसीपी का नेताओं का सिंचाई विभाग मा कथगा खिंचाई करीं च , महाराष्ट्र कॉपरेटिव बैंक  की कन लुटिया डुबाइं च , महासदन को गदन कन कर्युं च। 
एनसीपी -सब बकबास च। 
पत्रकार -जनता  जाणदी च कि एनसीपी नि चांदी कि महाराष्ट्र मा पिछ्ला दस सालों कु भ्रष्टाचार समिण  आवो तो तुम अब इन खेल खिलणा छंवां कि तुमर पाप छुप जावन। 
एनसीपी -बकबास !
पत्रकार -बकबास नहीं सत्य च।  अर अब जनता थोड़ा भौत अपण अधिकारुं प्रति सचेत ह्वे गे। 
एनसीपी -मै ऐसे बेकार के पत्रकारों के मुंह नही  लगता।  जा अपण रस्ता नाप। 
पत्रकार -भारत मा देर से ही सही पर पाप्युं तैं सजा त मिलदी च।  लालू , चौटाला अर जयललिता कु उदाहरण समिण च। 
एनसीपी -हम समर्थन देके रहेंगे।   तुमको जो बकना है बकते रहो ।

Copyright@  Bhishma Kukreti  20/10 /2014       
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लेख में  घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख  की कथाएँ चरित्र व्यंग्य रचने  हेतु सर्वथा काल्पनिक है



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