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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, August 8, 2012

मंदी कि मार मा होशियार ! --गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य

गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य
                              मंदी कि मार मा होशियार !
                              चबोड्या - भीष्म कुकरेती
मार कत्ति तरां कि होंद . ब्व़े बाबू मार, मास्टरूं मार, मर्खुड्या दगड्यों मार, मर्खुड्या बल्दुं मार, कज्याण्यु मार . अर अच्काल सबसे बडी मार च मंदी की मार मतबल रिसेसन की मार. बकै मार थ्वडा देरी होंदी अर फिर बिसरये जांदि . पण मंदी की मार अर गुमचोट मा जादा फरक नि होंद.

भौत सा बंचनेरु चिट्ठी ऐन बल रिसेसन से बच णो उपाय बथाओ.

बंचनेरु सुविधा बान मीन मंदी क मार से बचणो कुछ ब्युंत खुजेन. यि ब्युंत इन छन
सबसे पैल त अपण घौरम मंदी क अर्थ सब्यूँ तै बथाओ. किलै अफिक सरा बोझ उठाये जाओ! संयुक्त परिवार मा रौण ह्वाओ त सब्यूँ तै परेसान हूण चयेंद .

दगड्यो अर रिश्तेदारों तै बर्थ डे गिफ्ट दीण सफाचट बन्द कारो अर यूँ मागन जथगा ह्व़े साको गिफ्ट की मांग कारो. गिफ्ट की मांग मा शर्माणो क्वी काम नी च .

गिफ्ट बचाणो बान दूसरों बर्थ डे मा नि जाण पण अपण बर्थ डे या अपण बच्चों brth डे मा सब्यु तै भट्याण.
जु कैक बर्थ डे मा जाण बि ह्वाओ त ब्वालो mi गिफ्ट मा विश्वास नि करदो बस आशीर्वाद मा विश्वास करदो.
अपण पैसों न पीण बन्द कारो अर दुसरो पीठ मा सत्तु छोळण सीखो . क्वी पिलाओ त पूरो मैना क कोटा एकी बैठक मा पूरो कारो .

पौण बणो पण पौण नि भट्याओ .
उधार मांगो पण उधार नि द्याओ

जु तुम नेता छंवां त मंदी कुण दुसर देस पर भगार लगाओ, भगार जोर से लगाओ की वु देस बि घबरै जाओ. जन की हमारा वित्त मंत्री भारत की मंहगाई तै अफ्रीका अर यूनान क दगड जुड़दन .
मंदी मा खुश होण जरूरी च . अफु आशा करण पण हैंको तै निराशा मा डाळण जरूरी च यां से आप दुसरो दुःख मा खुश होण से संतोष प्राप्ति करी सकदवां .

संयुक्त परिवार ह्वाओ त भायुं बच्चों कुणि खर्चा पर लगाम लगाओ अर अपण बच्चो तै मिठाई या चाकलेट रात द्याओ
औफ़िस मा अपण सबोर्डिनेटु तनखा कम करणो याँ से बड़ो बहाना नि ह्व़े सकुद. सबोर्डिनेटु तनखा कम कारो अर यां से अपण बौस तै पुळेक अपण तनखा बढ़ाओ।

जु तुमम कार च त सस्तो पेट्रोल डाळो . मंदी क बगत पर पर्यावरण कि फिकर बन्द कारो.
अपण क्रडिट कार्ड तै बैकं बोलिक ख़तम कराओ. पण दगड्यो क्रेडिट कार्ड से मौज कारो .
जु डुबण वाळ बैंक च वै बैंक से उधार ल़े ल्याओ कुज्याण ह्व़े सकद च उधार चुकाणो मौक़ा इ नि आओ
ब्यौ नि कारो बल्कण मा कंपैनियन शिप मा विश्वास कारो अर द्वी झण बगैर ब्यावक दगड़ी राओ
जु ब्यौ करण जरूरी ह्वाओ त टकों ब्यौ क संस्कृति दुबर शुरू कारो.
दाड़ी नि बणाओ बल्कण मा दाड़ी बढाओ अर प्रसिद्ध कारो कि यू नयो फैसन च
पुराणा धुराणा झूलों तै letest फैसन का नाम देकि पैरो .

नयाण धुयाण कम कारो अर शरीर की गंध -दुर्गन्ध तै पेरिश से लयुं परफ्यूम की गंध सिद्ध कारो.
उधार ल्याओ अर घी प्याओ अर घौरम डंडा धारो . उधार ल़ीण वाळ आवन त ऊं तै डंडा दिखाओ

Copyright@ Bhishma Kukreti 8/8/2012
गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य , जारी ...