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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, August 13, 2012

उन्ना देसी (विदेशी) हाथ- गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य


गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य
                       उन्ना देसी (विदेशी) हाथ
                             चबोड्या - भीष्म कुकरेती
विदेसी हाथ और व्यंग्य; विदेसी हाथ और गढ़वाली व्यंग्य;विदेसी हाथ और उत्तराखंडी व्यंग्य; विदेसी हाथ और मध्य हिमालयीभाषाई व्यंग्य;विदेसी हाथ और हिमालयी भाषाई व्यंग्य;विदेसी हाथ और उत्तर भारतीय भाषाई व्यंग्य;विदेसी हाथ और भारतीय भाषाई व्यंग्य;विदेसी हाथ और एशियाई भाषाई व्यंग्य]
मि तै लगुद सरा देस ये उन्ना देसी हाथ से बड़ो परेसान च . सि अपण महाराष्ट्र का मुख्य मंत्री पृथ्वी राज चौहाण का बयान त बाँचो. ग्यारा तारीख सन बारा क दिन आजाद मैदान मुंबई मा प्रदर्शनकार्युं न पाकिस्तानी झंडा फैराई अर तोड़ फोड़ कार त महाराष्ट्र का मुख्य मंत्री चौहाण जीन फट से बयान दे द्याई बल दंगा फिसाद मा क्वी उन्ना देसी (विदेशी) हाथ च .
सन सैंतालीस से पैल त हम तै पता छौ कि भारत कि गरीबी बदहाली मा उन्ना देसी हाथ च अर वु हाथ छौ ब्रिटिश हाथ.
पण गुरा लगिन कि देस स्वतंत्र ह्वाई अर हम तै हमर बर्बादी मा विदेशी हाथ इ दिख्यांद पण गौ बुरी चीज जु यु उन्ना देसी हाथ टैम पर दिख्याऊ धौं ! हमर देस का खैरख्वाह अर मंत्र्युं तै विदेशी हाथ का बारा मा तब पता चलद कि जब गुनाह ह्व़े जांद.
चीन न हम पर आक्रमण कार त पता चौल कि हम तै चीन कि मंशा क बारा मा पैल पता इलै नि चौल कि क्वी विदेशी हाथ नि चांदो छौ कि हम तै पता चौल कि चीन कि मंशा क्या च. विचारा कृष्ण मेनन अर नेहरु वै अज्ञात, अनाम, अविग्य , धुर्या विदेशी हाथ तै खुज्यान्दा खुज्यान्दा सोराग चलि गेन पण अब तक वै विदेशी हाथ कु पता नि चौल जैन हम तै पेशगी मा पता नि लगाण दे कि आखिर चीन हम पर आक्रमण की तैयारी कथगा सालो से करणु च . काण्ड लागल ये विदेशी हाथ पर जु अदिखळ इ रौंद.
पाकिस्तान कि लड़ाई उपरांत अपण लाल बहादुर शास्त्री रूस मा भग्यान ह्वेन . कथगा इ लोग आज बि खोज करणा छन कि लाल बहदुर शास्त्री कि मिरतु मा कवी उन्ना देसी हथ छौ अर कुछ बुल्दन बल देसी हथ छौ.
फिर जब जब कम्युनिस्ट पार्टी केन्द्रीय सरकार तै सहयोग दीन्दी छे त वु हाथ कमाक हूंद था पण जनि कम्युनिस्ट पार्टी केन्द्रीय सरकार तै फटकार लगाण मिस्याओ या केन्द्रीय सरकार का विरुद्ध ह्वाओ त कुज्याण फटाक से कवी उन्ना देसी हथ जनम ल़े लीन्दु छौ. उ त भलो ह्वाई कि रूस अर चीन मा बामपंथी क्रांति रुक ग्याई निथर कुज्याण रोज इ हमारा नेता हम तै क्वी ना कवी उन्ना देसी हाथ कि याद दिलान्दा धौं !
जय प्रकाश नारायण जब मैडम इंदिरा गांधी क विरोधी ह्वेन त इंदिरा गांधी तै इखम विदेशी हाथ इ दिख्याई उ बिगळि बात च वैबरी भारत अ जनता अपण भूरिण हाथ दिखदी छे अर वीं जनता क समज मा नि आंदो छौ कि अपण इ हाथ उन्ना देसी हाथ कनकैक ह्व़े ग्याई.
फिर रोज जब बोफोर का तोपुं मा घूस कि बात चल त फिर बुले ग्याई कि घूस कि बात उड़ाण मा क्वी उन्ना देसी हाथ च. जनता आज बि घंघतोळ मा च बल घूस मा उन्ना देसी हाथ छ्याओ कि घूसक बात करण वाळुक हाथ उन्ना देसी छयाई .
अब जब आतंकवाद्यू न अपण डेरा, डिसाण भारत मा लगाई त तब त जब बि आतकवादी अपघात ह्वाओ त बात उन्ना देसी हाथ पर ख़तम ह्व़े जांदी . अपघात मा भारतीय मोरी जान्दन अर हमारा नेता उन्ना देसी हाथ कि बात कौरिक अपण उत्तरदायित्व की इति श्री कौरी दीन्दन. उ नेता उन्ना देसी हाथ कि बात कौरिक से जान्दन, जनता बिचारी बि उन्ना देसी हाथ से डौरिक से जांदी अर अबि बि बिजां उन्ना देसी आतंकवादी हाथ भारत मा जगा जगा नाचणा छन. पण कुज्या ण हम तै इ हाथ नि दिख्यान्दन?.
नक्सलवाद अर माओ वाद का अपघातों मा बि नेताओं तै उन्ना देसी हाथ दिख्यांद .
कुछ दीन पैल तामिल नाडु मा न्यूक्लियर प्लांट का विरुद्ध मा लोग खडा दिकेहं त हमारि सरकार न बोल बल इखमा क्वी उन्ना देसी हाथ च . ह्वाल
ठीक च उन्ना देसी हाथ च पण जनता क बिंगण मा आज तक इ णि आई कि यू उन्न देसी हाथ ग्वारो च कि काळो या भूरिण च?
जनता इ बि पता नि लगै सकणि च कि यू उना देसी हाथ कथगा लम्बो च अर कथगा छ्वटु च . यू विदेसी हाथ म्वाटो च कि बरीक च ?
जनता पुछदी बि च कि यू उन्न देसी हाथ कथगा मजबूत च ? पण कुनगस च कि जनता तै कुछ पता इ नि चलुद कि यू उन्ना देसी हाथ कु गात क्वा च?
फिर जनता अफु तै पुछणि रौंद कि हम तै तबि किलै पता चलद कि उन्ना देसी हाथ भारत मा ऐ ग्याई जब क्वी अपघात ह्व़े जान्दो.
फिर जनता अपण आपस मा बचळयांदी बि च बल जब यू उन्ना देसी हाथ छें च त ये हाथ तै तोड़ी द्याओ, ये हाथ तै काटी द्याओ , ये हाथक बुगचा किलै नि बणान्दा हम?
फिर जनता बेहोश ह्व़े जांदी कि हमर इख जब RAW , सी बी. आई , आई.बी बि छन त इ लोग हम तै पैल किलै नि बथान्दन कि भैरों उन्ना देसी हाथ आण वाळ च .
फिर जनता अपण आपस मा इ बात करदि बल अच्छा जब अपघात ह्व़े जांद त फिर वै उन्ना देसी हाथक हमारि सरकार क्या करदि ?
अखबार बि उन्न देसी हाथ कि छ्वीं वैबरी लगान्दी जब अपघात हूँ अर फिर अखबार बि उन्ना देसी हाथ छोड़िक उन्ना देसी इन्वेस्टमेंट/निवेश का पैथर पोड़ी जान्दन.
पण अब समौ ऐ ग्याई कि हम अपघात से पैलि इ ये उन्ना देसी हाथ तै छिंडार देवां अर जड़ समेत काटी देवां.


Copyright@ Bhishma Kukreti 14/8/2012
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