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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, August 12, 2012

बाढ़ दिखणो बिगरौ !गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य

गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य
                    बाढ़ दिखणो बिगरौ !
                     चबोड्या - भीष्म कुकरेती
" सुणना छंवां ! आज मीन बाढ़ दिखणो जाण !'
" ममी ! प्लीज ! बाढ़ दिखणो तीन अर बुबा जीन जाण. अर जाजन दुफरा मा जाण . हम तै छै बजी किलै तंग करणि छे?"
" अरे ! टैम पर उठो . दिखणा नि छंवां कि कुज्याण कथगा सालुं बाद इथगा बढिया दिन आई कि जब मी त्यार बुबा जीक दगड बाढ़ या सुखा ग्रसित क्षेत्र कु दौंरा पर जाणु छौं. पांच साल विरोधी दल मा रैक त कुछ बि नि द्याख.अब जब वो मंत्री बौणि गेन अर वु बि आपदा मंत्री त ..."
" ममी अबि भौत टैम च हम तै सीण दे."
" अरे पर में बथाओ त सै कि मीन कु साड़ी पैरण ? कु कु जर जेवर पैरण?"
" ममी ! प्लीज आया तै पूछ कि क्या करण ? हम तै सीण दे. "
" वा बि त नि आई अबि . अरे में खुणि त उकरांत हुंईं च अर तुम अर त्यार बुबा जी सियाँ छंवां . अर तुमर डैडि क ल़े क्या च . वी खदर कु झुल्ला. परेशानी त मेखुण च कि क्या क्या पैरण?"
"ममी प्लीज .."
" अरे नौकरानी तू अब छे बिजणि ?"
"मेम साब आज त मि आधा घंटा पैलि ऐ ग्यों !'
" अच्छा सूण ! आज जरा स्वाळ पक्वड़ बणा ..."
" हैं ! मंत्र्याणि जी ! आज कौंटीनेंटल ब्रेकफास्ट नि पकाण ?"
" ना! ना ! आज स्वाळ पक्वड़ बणा "
" मंत्र्याणि जी ! आज गढ़वल्यु क क्वी त्यौहार च ? जु स्वाळ पक्वड़ पकाण ?"
'नै नै आज क्वी त्यौहार नी च . आज मि अर मंत्री जी बाढ़ ग्रसित क्षेत्र कु दौंरा पर जि जाणा छंवां. त ज़रा सगुन ह्व़े जाओ त ठीक च कि ना ?"
" हाँ ! हाँ ! मेम साब, फिर त आज त्यौहार से बि बड़ो दिन च . त कुछ स्वीट बि पकाण पोडल ?"
" ना ना स्वीट साट उ घंटाघर कु स्वीट सौप बिटेन मंगाई लीन्दा !"
" हाँ हाँ उ ठीक च ."
' अरे या आया कख मोरी ह्वेली ?"
" पण मेम साब आया त आठ बजी आँदी अर आप अबि बिटेन .."
" अरे पर इन शुभ दिन कब कब आन्द बड़ी मुस्किल से त इथगा बड़ी बाढ़ आई कि हम तै बाढ़ ग्रसित क्षेत्र दिखणो मौक़ा हाथ आई."
" हाँ मेम साब . इन दिन त भग्यान मंत्र्यु अर मंत्र्याणियूँ भाग मा इ आन्द .सी उ नि छ्या पैलाक मंत्री. बिचारी उंकी घर्वळी पांच साल तलक जग्वाळणि राई कि कबि त आली बाढ़ पण गौ बुरी चीज च कि एक दिन बि ये प्रदेश मा बाढ़ ऐ ह्वाऊ धौं."
" हाँ अब त वा मै देखिक जळणि होलि"
" जळणो बात इ च . वै क्या हौर मंत्र्युं घर्वळि बि जळणि होलि कि आपक कजे तै मंत्री बण्या छै मैना बि नि होई कि इथगा बडी बाढ़ ऐ ग्याई. "
" हाँ ! ग्विल दैण ह्व़े ग्याई"
' मेम साब ! उठाणो गाडि याल कि ना ?"
" हाँ हाँ! उठाणो त मीन वै दिन इ गाडि याल छौ जै दिन यि आपदा मंत्री बौणि छा कि हे ग्विल्ल, नरसिंग जु ए साल बाढ़ आली त मी खाडु सिरौलु ."
" औ त अब दशहरो मा खाडु मारे जाला."
' हाँ किलै ना "
" ये ल्याओ. आपकि आया बि ऐ ग्याई . मी त रूस्वड़ मा जान्दो "
' अच्छा सूण ज़रा स्वाळ पक्वड़ दिवता क ठौ मा धरणो अलग से धौरी दे . कखि बिसरी नि जै हाँ ! "
" हाँ .. हाँ जी, पैल दिवता ...मी त रूस्वड़ मा जान्दो "
' आया ! भलो ह्वाई टु आज पैलि ऐ गे."
" हाँ मीन जनि सूण कि आज आप अर मंत्री जी बाढ़ दिखणो जाणा छंवां त मि समजी ग्यों कि आप तै मेरी जरूरत होली. पैल त बधाई हो कि आप तै छै इ मैना मा बाढ़ दिखणो मौक़ा मिलणो च."
" थैंक यू ! यि सौब ग्विल, नरसिंग की मेहरबानी च ."
" अच्छा मेम साब ! कति बजे जाण जाजन ?"
" बारा बजि "
"औ त अबि त छै घंटा छें छन "
" अच्छा सूण ! वार्ड रोब बिटेन जरा बढिया सी साड़ी छांटी क ला जरा "
"मेम साब साड़ी त सुफेद इ पैरण पोडल ."
" क्या सुफेद साड़ी ! अर मि ?"
" हाँ मेम साब ! उ क्या च बाढ़ मा लोक मोर्याँ छन ना त आप तै बरजातक सोग जताण पोडल ."
" ओ हाँ ! त इन कौर ज्वा सबसे मैंगी सुफेद साड़ी च ना वीं तै ला."
"हाँ वा साड़ी चौलली ."
" अच्छा सूण जर जेवरात खूब पैरण पोडल . हैं! "
" नै नै मेम साब ! जर जेवरात उथगा जादा नि दिखे सकदा आज ."
' अरे त फिर यि जेवरात कब दिखौल मि ?"
" मेम साब ! आज त आप तै इन दिखाण कि आप भौत दुखी छन."
" त जरा इन बथादी कि दुःख मा कु कु जेवरात दिखाए सक्यान्दन ? त्वे तै त भौत सी मंत्र्युं घौर काम कु तजुर्बा च "
"मेम साब ! ए बगत पर जेवर सादा इ होन्दन . जादातर मंत्र्याणि इन बगत पर चांदी क सादा जेवर पैरदन. चंदी क जेवर सादा अर सरल दिख्यान्दन ना !"
" ठीक च जु बि जेवर पैरण जरा भैर गाडि दे अर फिर मि दिखुद कि कै तरां से पैरण .. जरा तब तलक मि अपण दगड्याण्यु तै फोन करदु कि मि बाढ़ दिखणो जाणु छौं "
" हलो ! रोड ठेकदानी जी ! मि मंत्र्याणि बुनु छौं . अछा सुणो मि बाढ़ दिखणो जाणु छौं जरा सहेल्यूं तै लेकि एयर पोर्ट ऐ जयां हाँ ! "
" बधाई हो ! ठीक च हम सौब तुम तै सी औफ़ करणो एयर पोर्ट ऐ जौंला !
" हलो ! सिंचाई विभाग कि ठेकादानी मि आज बाढ़ दिखणो जाणु छौं ."
" अरे मंत्र्याणि जी ! बधाई हो .इथगा बड़ो मौक़ा इथगा जल्दी मीलि गे."
" अच्छा सुणो ! जब मि बाढ़ देखिक एयर पोर्ट पर औंलू आप तै अपण सहेलीयूँ लेकी स्वागत कु बान ऐ जयां "
" मंत्र्याणि जी, इ बि क्वी बुलणो बात च . आपक स्वागत क बान बरात खड़ी राली . वोमेन मैगजीन की रिपोर्टर बि राला "
"आया जरा मि ब्यूटीपार्लर वळि तै बुलान्दु तु तब तलक सौब तैयारी कौर हाँ .हलो ! ब्यूटी पार्लर .. अछा जरा भली सी ब्यूटीसियन भ्याजो हाँ .. मीन आज बाढ़ दिखणो जाण त मेक अप देर तलक रौण चयेंद हाँ..""
"ए मुना क पिता जी ! मि जरा ब्यूटी पार्लर वळि तै भट्याणु छौं .आप क मेक अप बि करण कुछ?"
" मुना कि ब्व़े एक परेशानी च . ज़रा "
" द्याखो हाँ . बाढ़ दिखणो त जाणि च , चाहि कुछ बि ह्वाओ "
" हाँ भै हाँ. आपदा मंत्री ह्वेक मि इथगा बि नि कौर सकुद क्या ? पण जरा एक घंटा देर ह्व़े जाली "
" किलै मुना क पिताजी ?"
" जरा वो केन्द्रीय आपदा मंत्री क परिवार बि बाढ़ दिखणो आणु च बस एक घंटा देर से.."
" जु बि आणु च आण द्याओ.अब आपदा मंत्री क परिवार च त परिवार तै बाढ़ दिखणो बिगरौ त ह्वालो कि ना ? "

Copyright@ Bhishma Kukreti 10/8/2012 
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