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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, August 30, 2012

संसद क्या च ?


गढ़वाली हास्य व्यंग्य साहित्य  
 
                                 संसद क्या च ?

                           चबोड्या - भीष्म कुकरेती 

[गढ़वाली हास्य व्यंग्य साहित्य , उत्तराखंडी हास्य व्यंग्य, मध्य हिमालयी हास्य व्यंग्य साहित्य , उत्तरी भारतीय भाषाई हास्य व्यंग्य साहित्य , भारतीय क्षेत्रीय भाषाइ हास्य व्यंग्य साहित्य , दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय भाषाइ हास्य व्यंग्य साहित्य ,एशियाई क्षेत्रीय भाषाइ हास्य व्यंग्य साहित्य लेखमाला ]

 परसि म्यार नाती क मास्टर न    वै तै संसद पर निबन्ध लिखणौ  होम वर्क दे छौ. वैन निबन्ध ल्याख अर मीमा मीमांसा वास्ता लै ग्याई 
- ग्रैंड पा ! मीन  संसद पर यू ऐसे ल्याख जरा बताओ कि ठीक च कि ना !  .
-भौत बढिया . बोल क्या क्या लिख्युं च ?
- उन त  भारत मा नेतौं तै कट्ठा हुणौ भौत सी जगा छन पण कुछ खास दिनो मा  नेता संसद  भवन मा बि कट्ठा  हून्दन. 
-  भै संसद का नियम छन कि साल भर मा इथगा दिन संसद चलणि चयांद
- ठीक च मी जोड़ी द्योल. संसद सत्र से  पैल अखबार अर टी.वी. चैनलूं मा बहस होंदी कि   विरोधी दल रण नीति का तहत कन सरकारी पाळी तै छ्काणो बान, पटकनि द्याला अर कै तरां से सरकारी दल अपण बचाव खुणि  रण नीति बणाल़ा. मै लगद कि संसद एक युद्ध भूमि च. 
- नै नै ! संसद रण भूमि नी च. या त पवित्र कार्यपालिका क पवित्र  भूमि च 
-पण मीन टी.वी चैनलूं से यी सीख कि संसद भवन  रण भूमि च जख मा द्वी ख़ास पाळि हून्दन  जु लड़णो तयार रौंदन.
-बेटा ! गलत . निबन्ध क बान टी.वी चैनलूं पर विश्वास नि करे जांद. चल अगने बिल ..
- संसद मा स्कुलो तरां एक मोनिटर हुंद. जै तै सभापति बुले जांद .
- हाँ यू ठीक च .

- स्कुल मा हम अपण मोनिटर की बात सुणदां अर वैकु  बुल्युं माणदां  पण संसद मा भौत कम बगत पर सांसद अपण सभापति क बात पर ध्यान दीन्दन 

- नै नै इन नि लिखण.  यू  असंवैधानिक  बात च. आधिकारिक तौर पर सांसद सभापति क बुल्युं माणदन .
-पण मीन त टी.वी मा अणबुल्या सांसद देखिन . 

- ओहो ! टी.वी देखिक निबन्ध नि लिखे जांद. निबन्ध लिखणो कुण संविधान संबंधी किताब पढ़ण जरूरी च. अगने बोल 
- विरोधी दल अर सरकारी द्लूं मा हरेक बात पर झगड़ा हूंद. भौत बहस हूंद. पण जब बि सांसदुं तनखा बढ़ाणो बात हूंद  त सौब एकमत ह्व़े जान्दन. 
- पण यू वाक्य इथगा महत्व पूर्ण नी च 
-पण टी.वी वळा यीं बात पर दस दिन तलक ब्रेकिंग न्यूज दीणा रौंदन. 
-बेटा टी.वी वळा अपण चैनलों टी.आर. पी. क प्रति प्रतिबद्ध हुन्दन ना कि  संसद का प्रति . अगने बोल 
- हरेक सांसद द कु कर्तव्य च कि वु सभापति क माध्यम से प्रश्न पूछो . पण शून्य काल जख मा देस का मुतालिक महत्व पूर्ण सवाल जबाब होन्दन वै टैम पर  संसद खाली रौंद. मंत्री जी अर सवाल करण वाळ इ संसद मा दिख्यान्दन. 

-प्रश्न काल या शून्य काल त ठीक च पण संसद खाली रौंद नि लिखे सक्यांद  
- पण मीन लोकसभा अर राज्य सभा चानेल मा यि इ  द्याख 
- बेटा दिखण अर लिखण मा भेद हूंद, अंतर हूंद. अगने बोल 
- सासद प्रश्न पुछणो उद्योगपतियुं  से पैसा बि लीन्दन.
- ये इन लेखिल त्वे तै जेल ह्व़े जाली .

- पण मीन त एक टी.वी प्रोग्रैम  मा इनी द्याख कि सासद प्रश्न पुछणो  पैसा लीणा छन .
-अरे वु चनेलूं अपण चैनेल क टी.आर.पी. बढाणो बान स्टिंग ओपरेसन करदन .
-पण ददा जी जु मीन द्याख ?
- अरे पण सिद्ध त नि ह्वाई ना ?

- सतरा सालुं मा यू बि सिद्ध नि ह्वाई कि श्रधेय लालू प्रसाद यादवन चारा खायी त क्या ..
- नै जब तलक सिद्ध नि होंद तुम अपण  निबन्ध मा इन नि लेखि सकदा कि लालू जीन घूस खायी 
- त यि लोग टैम पर सिद्ध किलै नि करदन कि कें घूस खाई अर कें घूस नि खाई ?

-बेटा अपण निबन्ध पर ध्यान दे . इन बथों पर ध्यान देलि  तू ना तीन मा रैली ना तेरा मा . अगने बोल 
-अविश्वास या विश्वास मत का बान तिकड़म लड़ये जांद , कथगा इ टुटब्याग करे जान्दन. सांसदों कि खरीद फरोक्त  आम बात च . एक ऍम पी. क कीमत करोड़ो मा हूंद. 

- ये ! तू अखबार कुणि  समाचार लिखणि छे कि अपण स्कुल कुणि निबन्ध लिखणि छे? विश्वास  मत पर वोट देणो बान सासद घूस खान्दन कतै  बि स्कुलूं निबन्ध मा नि लिखे सक्यांद . असंवैधानिक बात स्कुलूं निबंधुं  नि लिखे सक्यांद .

-पण मीन त टी.वी मा यो इ द्याख .

- टीवी खबरूं अर स्कुलो पढ़ाई  मा फरक हूंद बेटा! चल अगने बोल 
- सांसद बिल की कौपी फाड़ सकदन जब कि आम जनता कुण यू काम गुनाह च 
- अरे बाबा यू क्या खनु खरपट   लिखणु  छे तू ?
- पण ददा जी टी.वी मा यू इ दिख्याई कि एक सासद लोकपाल बिल कि कौपी राज्य सभा मा फडणु च .

- ये म्यार बरमंड  नि तचा तू . क्वी क्वी धुर्या सांसद इन काम कौरी बि द्यालों त इन नि लिखे सक्यांद कि हर समौ इ काम हूंद. अब टी.वी न्यूज का आधार पर अगने क्या क्या लिख्युं च त्यार.

- संसद मा बहस कम घपरोळ जादा इ हूंद.  क्वी कैकि नि सुणदो . बिचारा सभापति किराणा रौंदन पण फिर बि क्वी चुप नि होंद. फिर जब बि कै तै संसद कि कार्यवाही बन्द कराण ह्वाओ त वो पार्लियामेंट क वेल मा ऐ जान्दन अर घ्याळ करदन अर संसद कुछ देर या सरा दिनों कुण स्थगित ह्व़े जांद .
-निबन्ध मा तीन यू सौब ल्याख

- ठीक च आज से मी ये केबल टी.वी क कनेक्सन इ बन्द करै दींदु . हेलो केबल टीवी वळु  ! अब्याक  अबि म्यार टी. वी कनेकसन काटी  दे। म्यार नाति इनि टी.वी समाचारुं क आधार पर निबन्ध ल्याखाल  त वैन फेल ह्व़े जाण .

(यू सिरफ़ एक व्यंग्य च , चबोड़ च ) 

Copyright@ Bhishma Kukreti 31/8/2012 
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