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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, August 28, 2012

कलजुगी कंस को नाश

डॉ नरेन्द्र गौनियाल  

भोगीसिंह जनि-जनि पैसा-पत्ता वल़ो ह्वै ,उनि वैन अंट-शंट काम करणा शुरू कैरि दीं.धन-सम्पति बढ़दी गे अर दिमाग बि आसमान मा चढ़दू गे.खुद बि छक्वे दारू पीणि अर अपणा रागस गणों तै बि पिलाणी..दारू पिलैकी अपणा सब काम करवै दींदु छौ.इलाका मा सबि भला-बुरा काम अपणा जिम्मा.जख बिटि बि हो,जनि कै बि हो पण रुप्या ऐ जएँ..सबि जोगी मरीं अर मेरो पतड़ो भरीं,इनी मिशाल करि दे..पटवारी-कानूनगो तै दारू पिलाणि,घूस देणी अर लोगोँ की सम्पति हथ्याणि..बस यी काम ह्वैगे छौ वैको.लोगोँ तै छक्वे दारू पिलैकी झूठी गवै दिलाणि अर सीधा-सदा लोगोँ तै परेशान करणू.

         जमीन -जैदाद अर रूप्या-पैसा कु अति लालच मन्खी तै रागस बणे दींद.अच्छो-भलो आदिम तै बि पापी अर महा पापी बणे दींद.भोगीसिंह बि इनु समझंदु छौ की सरि दुन्य की सम्पति मेरि च.अर जु नि छा ऊ कै बि ढंग से ह्वै जा..रागसी समाज मा क्य नि ह्वै सकदु.? भोगीसिंहन बि क्वी कसर नि छोडि.हद त तब ह्वैगे जब वैन अपणी कक्या भैणी अर वींकु नौनु तै बि नि छोडि.उंकी जमीन-जैदाद तै अपणी बतैकी हड़पी दे.दारू पिलैकी झूठी गवै दिलै अर पटवारी-कानूनगो तै घूस देकी,दारू पिलैकी अपणो काम पक्कू करि दे..अपणी भैणि अर भणजा की जैदाद हडपी की वैन बड़ो नाम समझी.ऊंतई ऊ आंख्युं कु खैड़ जनु देख्दु छौ..गौं-गल्य़ा,पास-पड़ोस वल़ा दारू की घूँट मा बिकणा का कारण क्वी कुछ नि बोल्दा छा,बल्कि वैकि हाँ मा हाँ मिलान्दा छा.दारू बाज द्वी-चार लुंड-गुंड वैका दगड दिन रात ही रैंदा छाया.

          द्वापर मा कंस जनो पापी कु नाश त कृष्ण का रूप मा विष्णु भगवान जि कु अवतार से  ह्वैगे..ये कळजुग मा क्वी अवतार त नि ह्वै.पण ह्वै सकद विष्णु भगवानजि मथि बिटि ही सबकुछ देखदा होला.भोगी सिंह तै कुछ साल बाद ही कैंसर ह्वैगे..वैको दगड़ो करण वल़ा बि क्वी त मरि गीं,क्वी बिमार ह्वैगीं,क्वी दिन-रात दारू पेकि हर्बी गदन जुगा हूणा छन.भोगी सिंह बि अपणी मौत की इंतजारी करणू.कज्याणि वैकि कोढ्या ह्वैगे.कुकर्मों मा साथ दीण वल़ा लड़िक-ब्वारी की निंद हर्चि गे.कुछ दिनों बिटि ऊ पगले गीं.भोगी सिंह कु पापों कु भर्युं घड़ो अफ्वी फुटण लगी गे.

          डॉ नरेन्द्र गौनियाल ..सर्वाधिकार सुरक्षित  .narendragauniyal@gmail.com