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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, August 29, 2012

तिमलौ डाळ -गढ़वळि बाल कथा

गढ़वळि बाल कथा

                     तिमलौ डाळ
                      भीष्म कुकरेती

एक गांवक पुंगड़ मा एक तिमल क डाळ छौ .

एक ननु नौनु उख जान्दो छौ अर रोज तिमलौ ग्व़ाळ तै दिखदु छौ पण डाळ चौढ़ नि सकदु छौ त गर्म्युं मा भ्युं पड्या तिमलौ दाण टिपदो छौ अर अफकुण अर अपण परिवारो कुण तिमल ड़्यार लै जान्दो छौ. तिमलौ दाण सवादी हूंदा छा.
फिर जडडू अर वसंत मा ग्व़ाळ पराक नना नाना काचा तिमल तोडिक ड़्यार लयांद छौ अर परिवार तिमलौ भुज्जी खांद दै तिमलौ बड़ी बडे करदा छा. इना तिमल बि पुळयांदो छौ कि उ कैक काम आणु च .

अब जब ननु बडू ह्वाई त एक दिन वैन तिमल कुणि ब्वाल," मेरी ब्व़े न मै तै त्यार लाब तुड़णो भ्याज"
तिमलन पूछ," पत्तौं क्या करण तुमन ?"

" ब्व़े बुलणि छे बल तिमलौ लाबान पत्तळ बि बणौला अर कुछ लाबुं तै उसेक लैंदी गौड़ी कुणि पींडु बि बणाण " नौनौ जबाब छौ

तिमल न पुळेक ब्वाल ," अरे मि कैको काम औं त मि तै बडी खुसि हून्द्। तू म्यार ग्व़ाळ बिटेन मीमा चौड़ अर म्यार लाब तोड़ी ल़े . पण हाँ जरा ध्यान से हाँ. म्यार कथगा इ फौंटि कमजोर बि होन्दन , जरा सी जादा गर्रू ह्वाओ त टुटि बि जान्दन हाँ. त ध्यान से चौड़ अर लाब तोड़ "

ननु खुसी खुसी डाळ मा चौड़ अर लाब तोडिक ड़्यार चली गे .

फिर एक दिन नौनु जवान ह्वेक आई अर बुलण बिस्याई ," ड़्यारम आग जळाणो लखड़ इ नी छन . "
तिमल भौत पुळयाई अर बुलण लगि ," ठीक च जा जु बि म्यार सुक्यां फौंटि छन ऊं तै काटी लेदी . जरा ध्यान दे हाँ कि म्यार लखड़ भम्म से जगी जान्दन. त आग जळान्द दै म्यार लखड़ भौत काम आन्दन।"
जवान अब नौनु अध बुढेड़ / प्रौढ़ ह्व़े गे छौ. अर तिमल बि प्रौढ़/अड बुधेड़ ह्व़े गे छौ .

एक दिन वी नौनु अध बुढेड़ /प्रौढ़ ह्वेक आई अर बुलण बिस्याई,' : हमर इख जग्गी च . खूब लखड़ चयाणा छन "
तिमल हौरी बि पुळयाई अर वैन ब्वाल," ठीक च जु बि अब सुक्यां फौंटि बच्यां छन वूं तै काटी दे ."

अद बुधेड़ बड़ा बड़ा फौंटि काटी क चलि गे. तिमल अब नंगमुंड्या ह्व़े गे छौ . फिर बि तिमल खुस छौ कि ओ कैको काम आणो च.

फिर अद बुदेड़ बुड्या ह्व़े ग्याई अर इना तिमल बि बुड्या ह्व़े ग्याई . त बुड्या न तिमलौ ग्व़ाळ काटी अर ड़्यार ली ग्याई . तिमल अप न जिन्दगी से बड़ो खुस छौ कि या जिन्दगी कै ना कैको काम आई.

फिर एक दिन बुड्या आई अर तिमल क ग्वळक से बुलण बिस्याई बल ," अब जवान तिमल कख मीलल ?"
तिमलौ ग्वळकन ब्वाल," हं ! इख मा मि तेरी क्वी मदद नि कौर सकुद. जब म्यार छ्वटा छ्वटा बच्चा बुट्या छया त तीन वूंकी देख भाळ नि कौर , अपण गोरुं से ऊँ तै नि बचाई अर ओ सौब मोरी गेन या उगटि गेन '
बुड्या उदास ह्व़े ग्याई बल अब वैकी नई साखि, नई जनरेसन बगैर डाळौ क्या कारलि.

तिमलौ ग्वळक भौत इ उदास ह्व़े ग्याई कि अब मनिख बगैर डाळ क क्या कारल ? तिमल क ग्वळक सुचणु छौ कि कास मनिख समौ पर डाळु रख रखाव क बारा मा चित्वळ ह्व़े जाओ त इं दुनिया मा डाळु कबि बि कमि नि ह्वेली.

Copyright@ Bhishma Kukreti 30/8/2012