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Wednesday, August 15, 2012

मुन्ना भाई शिक्षा मंत्री कनकैक बौणिन ?


गढ़वाली हास्य व्यंग्य साहित्य
                       मुन्ना भाई शिक्षा मंत्री कनकैक बौणिन ?
                             चबोड्या - भीष्म कुकरेती
[शिक्षा मंत्रालय और व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और गढ़वाली व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और उत्तराखंडी भाषा में व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और मध्य हिमालयी भाषा में व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और हिमालयी भाषा में व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और उत्तर भारतीय भाषा में व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और भारतीय भाषा में व्यंग्य; शिक्षा मंत्रालय और एशियाई भाषा में व्यंग्य लेखमाला]

मुन्ना भाई राजनीति मा पैल दें ऐन पण चुनाव जीति गेन. क्वी नि जाणदो कि वो जीत किलै छन अर जनता तै बि नि पता कि ऊन कैं बौळ मा मुन्ना भाई तै जिताई.
खैर जीति गेन त सरकारी दल का हूण ना जातीय गुणो क कारण ऊं तै मंत्री बणाण जरूरी ह्व़े ग्याई. ऊंक जातिक द्वी बड़ा बड़ा नामी गिरामी नेता राजनीति औ दंगल का खिलाड़ी छया पण बिजोग इन पोड़ कि एक नेता तै मंत्री बाणाये जांद त हैंक सरकार नि बणण दीन्दो अर हैंको तै मंत्री बणांण छौ त हैंको सरकार तै ज़िंदा नि छोड़दु. त हाई कमांड कि दृष्टी मा यांको एकी उपाय छौ कि मुन्ना भाई तै मंत्री बणाये जाओ .
मुख्यमंत्री और कुछ ख़ास लोग न   मंत्री परिषद निर्माण म इन मेहनत कार .
- चूंकि फलण नेता जी मुख्यमंत्री क पद का दावेदार छया त गृह मंत्री कि कुर्सी वूंकी पक्की ह्वेई .
- पण मुख्यमंत्री मी छौं अर फलण नेता न म्यार दगड बात इ नि करण त मी क्यांको मुख्यमंत्री . ऊं तै आधारिक अर उच्च शिक्षा मंत्रालय दे द्याओ .
-- फलण नेता शिक्षा मंत्रालय कु नाम सूणिक इ दुसर पार्टी नि बणै देला?
- ठीक च उद्योग मंत्रालय द्याओ . अब मि तै मुख्यमंत्री बणिक रौण त दुस्मानो तै घ्यू खलाण इ पोडल. "
" अब अलण नेता क क्या ह्वालू ?"
' अरे यू बि कम रागस नी च में खुणि . यें बि मि तै मुख्यमंत्री चैन से थ्वड़ा रौण दीण, पढ़यूँ लिख्युं भौत च तै तै शिक्षा मंत्रालय पकडै द्याओ "
" एक त वैन नि मानण . शिक्षा मंत्रालय द्योला त वैन बोली दीण पर्यटन विभाग क चेयरमैनि दे द्याओ . अर पार्टी फंड का वास्ता य़ी अलण जी बहुत इ कामगार च "
" अब मुख्यमंत्री रौण त मन मारण इ पोडल. अब क्या करे जाओ त तै मुंज मुन्जू तै पी .डबल्यु डी विभाग दे द्याओ "
"हाँ यू ठीक च पार्टी फंड कु जुगाड़ बि ह्व़े जालो अर इ खुस बि राला."
" अब इथगा घ्युयाळ विभाग दिए जाल त क्वी बि खुस ह्वालू."
' अच्छा उद्योग विभाग कु क्या ह्वाल?"
" 'सी' नेता जी छन ना ऊं तै उद्योग को बड़ो अनुभव च "
"नै नै ऊं तै उद्योग नि दिए जै सक्यांद . 'सी' नेता जी तै भौत इ जादा अनुभव च . इन मा 'सी' पर पार्टी क क्वी नकेळ नि रै जालो. इन कारो यूँ तै जल निगम विभाग दे द्याओ ."
' हाँ ठीक च. त उद्योग मंत्रालय मुन्ना भाई तै सौंपे जाओ?"
" नै भै नै ! अरे उद्योग मंत्रालय क वास्ता कुछ त अनुभव हूण चएंद कि ना ."
" त पवित्रा जी तै उद्योग मंत्रालय दिए जाओ ?"
"नै नै पवित्रा जी तै इथगा महत्व पूर्ण मंत्रालय नि दिए जै सक्यांद वा हाई कमांड कि कट्टर विरोधी क पाळी क च ."
"त शिक्षा मंत्रालय दे द्याओ "
" नै नै इथगा गैर जरूरी मंत्रलाय बि ठीक नी च . हाई कमांड चांदो कि वीं तै जादा महत्व पूर्ण ना पर जरा कम महत्व पूर्ण मंत्रालय दिए जाओ . हाई कमांड चांदो कि वा एक दिन हाई कमांड कि पाळी मा ऐ जाओ."
" त नगर निर्माण विभाग पवित्रा जी तै दिए जाओ."
' अछा हुन्यार नेता जी तै शिक्षा मंत्रालय दे द्याओ ."
नै नै हुन्यार नेता म्यार पाळि क छन . मीन अर हाई कमांड न यूँ तै कौंळ बचन दे छायो कि अपण पार्टी क इ करूड़ नेता जी तै हरै देल्या त बड़ो मंत्रालय दिए जालो. हुन्यार जीन हाई कमांड को कांडो करूड़ जी तै हरवाणो बान क्या नि कौर.ठीक च एक एम्.एल.ए कम ह्वाई पण हाई कमांड को एक कांडो त कम ह्वाई कि ना .हुन्यार जी तै शिक्षा मंत्रालय सरीखा कम महत्वपूर्ण मंत्रालय देक हम हुन्यार जीक बेजती नि कौर सकदा."
' त ठीक च हुन्यार जी तै हाई कमांड की फजीत दूर करणो उपलक्ष मा वन मंत्रालय दे दिए जाओ."
" हाँ इनाम मा वन विभाग ठीक रालो "
' अच्छा बकै मंत्रालय का वास्ता या लिस्ट हाई कमांड से अयीं च "
"त ठीक च त या लिस्ट फाइनल च न?"
" अरे अबि शक्षा मंत्रालय कै तै दिए जाओ यांक फैसला बि त करण . जै तै बि शिक्षा मंत्रालय द्योला त वैन अपण बेजती समजण ."
' अरे अर वु मुन्ना भाई तै बि त क्वी मंत्रालय दीण जरूरी च कि ना ?"
' अरे भौत बढिया ! मुन्ना भाई तै शिक्षा मंत्री बणै द्याओ "
हाँ यू ठीक च मुन्ना भाई अबि नै नै च त वै तै शिक्षा मंत्रालय पं मा कवी बेजती बि नि लगलि '

अर इन मा मुन्ना भाई शिक्षा मंत्री बौणिन .
Copyright@ Bhishma Kukreti 15/8/1989
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