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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, May 4, 2014

पौड़ी संसदीय सीट से चुनाव कु जितणु च ?

हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती        

(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

 पौड़ी बिटेन संपादक जीक फोन ऐ बल -भीषम जी ! जरा एक चरबरा लेख पौड़ी संसदीय सीट बिटेन कु चुनाव जितणु च पर चौड़ भ्याजो।  
छ ना बड़ी अजीब बात कि पौड़ी कु समाचार पत्र मुंबई वाळ कुण बुनु च कि पौड़ी बिटेन कु जितणु च पर अचकाल इनि हूणु च मुंबई क्या न्यू आर्क मा बैठिक नामी पत्रकार दार्जिलिंग या बाड़मेर मा कु चुनाव जीतल पर विश्लेषण करणा छन। 
मीन अपण क्षेत्र मा ग्रामीण पत्रकार संघ (बड़थ्वाल गुट ) कु महामंत्री नंदा दत्त बड़थ्वाल तैं फोन कार अर पूछ - भैजि ये चुनाव मा कु जितणु च ?
नंदा दत्त बड़थ्वाल - भै भीषम ! बस द्वी चार घंटा रुक जा।  मि श्याम तक बतै द्योल कि कु जितणु च। 
मि - हैं अबि रिसर्च अर अनैलिसिस पूर नि ह्वे। 
नंदा दत्त बड़थ्वाल - नै रै रिसर्च अर एनैलिसिस त वै दिन ही पुरि ह्वे गे छै जैदिन चुनाव तारीख डिकेलयर ह्वे छौ।  बस मि द्वी फोन की इंतजारी मा छौं। 
मि -क्या मतलब ? फोन की इंतजारी मा ? फोन आण से चुनाव जीतल प्रश्न कनकै हल ह्वे जाल ?
नंदा दत्त बड़थ्वाल - इन च आज या तो कॉंग्रेस वाळ या भाजपा वाळ मेरी कीमत दे द्याल तो मि उत्तराखंड कु एक पत्र मा , दिल्ली कु एक राष्ट्रीय पत्र मा खबर छ्पवै द्योलु अर एक टीवी चैनेल मा ऐनेलिसिसका साथ  सिद्ध करी द्योल कि क्वा पार्टी जितणि च। 
मि - कीमत ?
नंदा दत्त बड़थ्वाल - हाँ यदि कॉंग्रेस वाळ पचास हजार दे द्याल तो मी स्टेटिस्टिक्स का साथ बतौल  कि कॉंग्रेस कै कै क्षेत्र मा स्ट्रॉन्ग च अर कथगा वोट कॉंग्रेस तैं मिलणा छन। 
मि - अच्छा ?
नंदा दत्त बड़थ्वाल -  जु  भाजपा कॉंग्रेस से पैल पचास हजार  दे द्याली त मि वूं ई डाटाऊं  से सिद्ध कर द्योल कि भाजपा किलै जितणि च। बस आज कै ना कै पार्टीक फोन आण वाळ च।  तू स्याम दैं फोन कौर तो मि बतै द्योल कि क्वा पार्टी जितणि च।  
मि - पर उन ऑफ द रिकॉर्ड बतावो त सै कि को जितणु च ?
नंदा दत्त बड़थ्वाल - सच्ची बताउं त पता इ नि लगणु च कि को जितणु च। 
मीन डबरालस्यूं मा अति ग्रामीण पत्रकार संघ (बिष्ट ग्रुप ) कु चेयरमैन सुरेन्द्र बिष्ट तैं फोन कार अर पूछ - मामा जी ! ये चुनाव मा पौड़ी से कु जितणु च ?
सुरेन्द्र बिष्ट - साले सब चोर हैं।  सबकी जमानत जब्त हो जायेगी। 
मि -सबकी जमानत जब्त हो जाएगी ?
सुरेन्द्र बिष्ट - हाँ साले कोई भी फोन नही कर रहा है।  ना कॉंग्रेस वाले ना भाजपा वाले।  
मि - ना कॉंग्रेस वाले ना भाजपा वाले फोन नहीं कर रहे हैं कु  मतलब ?
सुरेन्द्र बिष्ट - अरे चुनाव से पैल द्वी पार्टीक ऐजेंटुंन आश्वासन दे छौ कि  'यह पार्टी जीत रही है ' का हरेक न्यूज छपण पर पचास पचास हजार रुपया मीलल पर अबि तलक कै हरामीक फोन नि आयि। 
मि -मामा जी ! त आपि ऐजेँटूँ तैं फोन कौरदि. 
सुरेन्द्र बिष्ट - साला सुदन लाल टमटा ने भाँचि मार दी होगी।  भाजपाक ऐजेंट बुलणा छन कि ये चुनाव मा मोदी पर इथगा खर्च ह्वे गे कि पेड  न्यूज का वास्ता बजट ही नी रयुं च।  इनि कॉंग्रेस का एजेंट बुलणा छन कि सोनिया अर राहुलक रैल्युं वास्ता ही बजट नी च त पेड  न्यूज का वास्ता बजट कखन लाण। पर मै लगद बजट उजट कुछ नी च साले सुदन लाल टमटा ने भाँचि मार दी होगी। 
मि - चलो ऑफ द रिकॉर्ड त बताओ कि क्वा जितणु च। 
सुरेन्द्र बिष्ट -यार भणजो कुछ पता इ नि चलणु च कि जनता कै तैं वोट दीण वाळ च। पर साले सुदन लाल टमटा को मै नईं छोड़ूंगा , मै भी अपने बाप का नही जो टमटा के पत्रकार संगठन को खतम नही करूंगा। 
मीन अति ग्रामीण पत्रकार संघ (टमटा ग्रुप ) कु महासचिव सुदन लाल टमटा तैं फोन कार। उदयपुर पट्टिक  सुदन लाल टमटा . सुरेन्द्र बिष्ट अर मि दगडि पड़दा छा।  सुदन लाल रिस्ता मा म्यार काका लगद। 
मि - ये सुदन काका ! ये बगत चुनाव मा क्वा पार्टी जितणि  च ?
सुदन लाल टमटा - भाड़ में जाय चुनाव , भाड़ में जाएँ पार्टिया।   आग लगे इन अखबारों पर। 
मि - कनो  क्या ह्वाइ ?
सुदन लाल टमटा - अरे सुरेन्द्रन कॉंग्रेस अर भाजपा का ऐजेंटूँ से "पार्टी की जीत पक्की" की न्यूज छपण पर पचास हजार की बात करि छे।  मीन कंपीटीसन मा बीस हजार रुपया की बोली लगै दे पर बिघन ह्वे गे। 
मि -क्या ?
सुदन लाल टमटा - अरे पैलक चुनावुं मा अखबार वाळुं दगड़ अग्रीमेंट हूंद छौ कि पार्टीक न्यूज छपण पर फिफ्टी फिफ्टी पर्सेंट बांटे जाल।  चुनावुं मा हम बि कमान्द छा अर अखबार वाळ बि कमान्द छा।  
मि - अब क्या ह्वे ग्यायि ?
सुदन लाल टमटा -अरे साले अखबार वाले बदमाशी कर रहे हैं। 
मि -क्या बदमाशी ?
सुदन लाल - अरे अब बीच चुनाव का बीच मा अखबार वाळ बुलणा छन कि हरेक न्यूज छपणा वास्ता चालीस चालीस हजार रुपया पैल भ्याजो।  अब क्या कौर मि ? ठेका बीस हजार मा हुँयुं च अर अखबार वाळ बुलणा छन कि चालीस हजार प्रति न्यूज लाओ। 
मि - पार्टीका एजेंटों से बात कारो। 
सुदन लाल - अरे द्वी पार्टीका ऐजेंट धमकी दीणा छन कि बीस बीस हजार मा न्यूज नि छपौल त वो मेरो पत्रकार संघ की सदस्य्ता ही खतम करै द्याला।  यु सीजन तो लॉस कु सीजन च। 
 मि -हाँ त्यार तो बड़ो नुक्सान ह्वे जाल। 
सुदन लाल टमटा -पर खुसी च कि सुरेन्द्र बिष्ट बि नी कमाणु च। 
मि -बाइ द वे , जितणु को च ?
सुदन लाल टमटा - पता इ नि लगणु च कि जनता कु रुझान कना च। 


Copyright@  Bhishma Kukreti  3 /5//2014 
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*कथा , स्थान व नाम काल्पनिक हैं। 
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