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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, May 12, 2014

गढ़वाली हास्य व्यंग लेख : सरकार या सर्रकार (हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या - गीतेश सिंह नेगी , मुम्बई )

" सरकार या  सर्रकार "
                                                                                     हंसोड्या , चुनगेर,चबोड़्या -चखन्यौर्या  - गीतेश सिंह नेगी 

अब्बा दा चुनौ कुछ अजीब ही ढंग से हूँणा छीं ,अब जब्कि चुनौ अपडा आखिर चरण मा पहुँची ग्यईं अखबार से लेकि समाचार ,इस्कूल ,दफ्तर,गौं ,बजार,खाल ,धार अर घार घार एक ही चर्चा च ,एक ही सवाल च -
अबकी बार ....... सरकार
प्रधान से लेकि प्रधानमंत्री सब्बि आज चुनौ प्रचार मा लग्यां छीं .लग्यां वी बी छीं जू ना प्रधान छीं अर ना प्रधानमंत्री पर फुका -अफ्फु अफ्फु खुण लग्यां त छीं सब ,हमल पूछ भैज्जी इत्गा रगरयाट क्यांकू ?
बल भुल्ला अब्बा दा सरकार बणाण
हमुल ब्वाल -कै खूण बणाण  सरकार ,सरकार त हर पांच साल मा बणदी चा ,अर भैज्जी  कब्बि कब्बि त कुबगतळ बी बणि जान्द फिर इत्गा पट्गा पटग किल्लैय ?
बल भुल्ला चाहे कुछ बी बोल  अब्बा दा सरकार बणाण ,
मिल ब्वाल ता पिछिल दा हमुल क्या बणाई छाई ? अपडू कपाल ?

अज्जकाल झण्डा से लेकि डंडा अर टुप्ली से लेकि कुर्ता-सुलार सब्बि फुल्ल डिमांड मा चलणा छीं ,कुछ दिनों खूण देश  मा रुजगार ही रुजगार च ,च्या से लेकि नोट,बोतल से लेकि मुर्गा बोख्ट्या सब प्रबंध
हुयां छीं बस आपम वोट हूँण चैणु च ,वा बात हैंकि च की भारत जन्न् लोकतांत्रिक देश मा लोकतंत्र आज बी अपडा हक अपडा अध्य्कार खुण बगत बगत थिचौरेणु च ,जुत्ता से लेकि चप्पल ,मर्च से लेकि स्याही
वेका मुख आँखों फर चुलैणी -लपौडेणी चा ,लोग बाग कुछ महीना पैल्ली तक आपदाळ छल्याँ ,डरयां ,सतायाँ ,मरयां छाई अर भ्रष्टाचार बरसूँ भटेय ये  मुल्का मन्खियुं फर इन्न चिबट्यूँ च जन्न् मसाण चिबट्यूँ  व्हा |
आज सब्बि पार्टी द्वी चीज ही खुज्याणा छीं -मुद्दा अर उन्ह फर चिबट्याँ वोट ,या बात बी सै च की असल मुद्दा गोल छीं ,सब्बि राजनितिक दल मोदी फर अर मोदी कांग्रेस फर पिल्चयाँ छीं |
पर भै हम क्या कन्ना छौ ?
बल भुल्ला हम सरकार बणाण  मा लग्यां छौ ,
मिल ब्वाल -किल्लैय  ?
बल भुल्ला हम्थेय विकास चैंन्द विकास ,
मिल ब्वाल -कैकु ,
बल द ब्वाला बल ,कन्न् कपाल लग्ग ,बेट्टा इत्गा बी नी पता त्वे थेय ,त्यारू कुछ नी व्हेय सकदु ,त्यारू विकास ता कत्तैय नी व्हेय सकदु 
मिल ब्वाल भैज्जी सरकार त बरसूँ भट्टी चलणी च ,अर विकास बी हूँण ही लग्युं च ,वा बात हैंकि च की विकास नेतौं ,मंत्रियों ,प्रमुखों ,प्रधनों ,अफसरों,ठेक्कदरौं अर पटवरियों कु हूँणु च ,
अच्छा त भुल्ला मतलब तुम्हरू कुछ विकास नी व्हाई इत्गा बरसूँ मा ?
ना भैज्जी सिन्न बात नी च ,हमर बुबा विकास खुज्यांद खुज्यांद परदेश तक पहुंची ग्यीन ,हम बी वे थेय वक्ख भटेय खुज्यांद खुज्यांद देश विदेश घूमिक यक्ख बम्बे मा चिबट्याँ छौ पर भै बुरु नी मन्या कक्ख च वू निर्भगी विकास बैठ्यूं मुख लुकैकी ? अर भैज्जी सुणा पिछिला २० बरसूँ मा म्यार -तुम्हर गौं मा क्या क्या विकास व्हेय ? जरा ब्वाला धौं ?
सड़क ,पाणी,अस्पताल -डाक्टर ,मास्टर ता नी पहुंचा पर हाँ पाणी से लेकि डांडी कांठीयूँ -अर जाडा जलडीयूँ ठेक्कदार जरूर पहुँची ग्यीं,

परसी कोटद्वार  भटेय अग्रवाल लाला कु फोन अयूँ  छाई,बल ठाकुर साब  गौंमा पुंगडा बाँझा छीं की चल्दा ?
मिल ब्वाल साब ना वू बाँझा छीं अर ना वू चल्दा छीं  ,कुछ चल्दा छीं पर चलणा बिलकुल नी छीं ,जक्खा तक्खी छीं ,ज्यदातर बाँझा ही छीं पर कुल मिलाकी वू कै कामा नी छीं
बल भै तब त एक काम कारा  , जू बाँझा छीं वू मी मा बिके दयावा ,
मिल ब्वाल किल्लैय ,क्या कन्न् आपल ?
बल विकास कन्न्
मिल ब्वाल कांडा लग्यां इन्न विकास फर ,ले देकी अब एक ही त सारु बच्युं च हम खुण सुख -दुःखौ बग्त मा  अर वे थेय बी तुम विकास क नौ फर ....ना भै  ना बिलकुल ना

अज्काल जक्खी देखा तक्खी नेता ,ठेकदार ,अफसर सब्बि विकास फर इन्ना चिबट्याँ छीं की जनता बरसूँ भटेय विकासै मुख दिखेय खुण तरसणी चा ,नेता अज्काल "रोड शो " करण मा लग्यां छीं ,वा बात हैंकि च
कत्गे जग्गाह  मा रोड खोजिक बी नी दिखेंदी
ब्याली मी नेता ब्वाडा खुण फोन कैरिक ब्वाल -ब्वाडा तुम बी कुछ " रोड शो " कारा ,
ब्वाडाळ कडकुडू सी व्हेयक ब्वाल - बेट्टा यक्ख बरसूँ भट्टी रोड नी बण साक अर तू " रोड शो " कि  उलटी बात कन्नू छे ,तू बी लाटू ही रै ग्ये रे
मिल ब्वाल ब्वाडा -राजनीति मा कत्गे धाणी कब्बि नी हुन्दी पर दिखाण सदनी प्वडदीं
नेता ब्वाडा -जन्कि
मिल ब्वाल -जन्कि विकास ,गरीबी हटावो अर भ्रष्टाचार मिटावो
नेता ब्वाडा -त फिर
ब्वाडा तुम भी कुछ अलग और नै कारा
नेता ब्वाडा -जन्कि
मिल ब्वाल - तुम बी सरया मुल्क मा "रगड शो " "रौल शो " "डांडी-कांठी शो " "खाल-धार शो " कैरा  अर धै लगैकि ,धाद मारिक बोल की मी रगड से लेकि रौल्युं ,डांडी-कांठीयूँ अर धार धार मा विकासै इन्ना
थूपड़ा लगोलू की हॉवर्ड अर ऑक्सफोर्ड वला पंगत लगैकि यक्ख विकास ध्यखणाकु आला ,तू बी मोदी थेय सब्बि पार्टियूँ जन्न् चुनौती दे कि अगर छे अप्डी ब्वे कु ता लैड चुनौ  म्यार यक्ख भटेय वू बी प्रधनी
कु ,तू बी बोल कि मी रौल्युं रौल्युं  ,गाड गदिन्युं  विकास कु  नै माडल ल्योलूं जू मोदी का गुजरात माडल से बी जबरदस्त व्हालू ,तू बी बोल कि मैम गढ़वालै विकासै इन्न इन्न योजना छीं कि सुणिक सिर्फ
प्रवासी गढ़वली ही दिल्ली ,बम्बे से बौडिक नी आला बल्कि भैरा मुल्का लोग बी रुजगार खुण गढ़वाल-कुमौं मा आला ,कांग्रेस पार्टी नेतौं जन्न् तू भी बोल कि मी म्यार आन्द ही गरीबी गढ़वाल से सदानी खुण
निबट जाली ,बिना सोच्याँ समझ्याँ तू बी बोल दे कि मी ५ रुपया मा पेट भोरिक खाणा प्रबंध करलू ,
चुनौ आयोग से बिना डरयाँ तू बी  बोल दे  " हर हत्थ बोतल ,हर मुख  कच्ची " ,जनता थेय दिखाणा बान तू बी पैल्ली अपडा बखरा हर्चणा कु नाटक कैर अर फिर अपडा पटवारी मा उन्थेय ढून्डवैकि-खुजीवैकि साबित कैर कि हमर यक्ख क़ानून व्यवस्था चौक चौबंद च ,
तू बी मुलायम सिंह ,मायवती ,ममता दीदी , जयललिता अर नितीश कुमार  जन्न् बोल कि देश कु अगिल प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी ना तू  ही बणण वल्लु छे ,
तू बी अरविन्द भाई जन्न् बोडी का खिलाफ अपडा ही घार मा धरना -हड़ताल फर बैठ अर वीं फर भकार लग्गा कि स्या मीथेय विकास करण से रोकण चाणी च ,हरिया दिदा जन्न् तू बी छाती ठोकिक बोल कि मी
यूँ गाड-गदेरौं ,डांडी -काँठीयूँ कु नौनु छौं ,अफ्फु थेय अफ्फी इन्नु पर्वत पुत्र बता कि हेमवतीनंदन बहुगुणा कि आत्मा बी शर्माण लग्गी जाव ,
अफ्फु थेय विकास पुरुष ,रेल पुरुष ,अर क्याफणी क्याफणी जत्गा किस्मौ पुरुष हुन्दी अर जू नी बी  हुंदा वू सब्बि बी बता ,
तू बी सुद्दी मुद्दी बोल दे कि मी हर घार अर हर धार अर रौल्युं -रौल्युं तक सड़क अर गाडी ही ना बल्कि ट्रेन लैकी औलू ,बोल दे कि लोग अब घास -पात ,पाणी अर लख्डू खुण बी ट्रेन मा बैठिक ही जाला -ल्याला  ,
बोल दे कि मी स्पेशल इकोनोमिक जोन  तर्ज फर "लिग्वडा उत्पाद जोन " , " च्यूं उत्पाद ज़ोन " बणोलू ,बोल दे कि मी "काफल पाको योजना " ,बेडू पाको बारामासा योजना " ल्योलू अर ग्रामीण क्षेत्र मा कुटीर उद्योग विकास खुण " छानियुं -छानियुं कच्ची निर्माण योजना " थेय वैध घोषित करलू यांक वास्ता लाइसंस व्यवस्था करलू ,
अब्बी बी बगत च राहुल गांधी से पैल्ली बोल दे कि मी पुंगड मा मोल सरै ,हैल-दंदालू लगै,गोर चरै ,लखुड फडै ,घास कटै ,पूजा पाठ ,औज्जीगिरी थेय मनरेगा मा शामिल कैरिक गढ़वाल मा बेरुज्गरी खत्म करलू अर सर्वश्रेष्ठ गुयेर, घस्येर अर कच्ची निर्माता थेय "राष्ट्रीय गुयेर श्री सम्मान " ,"राष्ट्रीय घस्यारी सम्मान " अर  " कंटर श्री सम्मान " से सम्मानित करलू ,
फिर देख मीडिया मा सरया दिन अर सरया रात त्वे फर्र ही चर्चा -खर्चा हूँण ,मोदी से ज्यादा तेरी अर त्यारा  "गढ़वाल विकास माडल " कि चर्चा हूँण ,त्वे थेय हराणा कु मोदी ,राहुल गाँधी ,अरविन्द अर सब्बि दल
एकजुट व्हेय जाला अर फिर तू बी छाती ठोकिक नारा दे देई ...अब्बा  दा
नेता ब्वाडा : यार बेट्टा यू कुछ जादा ही विकास नी हूँणु चा ,या सरकार च  कि सर्रकार

इत्गा सुणिक म्यार बर्मुंड तच्ची ग्याई ,मिल ब्वाल ब्वाडा तू रैण दे फिर ,त्वे से नी बणणी सरकार ,तू प्रधनी कैर बस  


Copyright@ Geetesh Singh Negi ,Mumbai  11/05/2014 


*कथा , स्थान व नाम काल्पनिक हैं।  

[गढ़वाली हास्य -व्यंग्य, सौज सौज मा मजाक  से, हौंस,चबोड़,चखन्यौ, सौज सौज मा गंभीर चर्चा ,छ्वीं;- महर गाँव निवासी  द्वारा  जाती असहिष्णुता सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; कोलागाड वाले द्वारा   पृथक वादी  मानसिकता सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;मल्ला सलाण  वाले द्वारा   भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; पोखड़ा -थैलीसैण वाले द्वारा  धर्म सम्बन्धी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;पौड़ी गढ़वाल वाले द्वारा  वर्ग संघर्ष सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; उत्तराखंडी  द्वारा  पर्यावरण संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;मध्य हिमालयी लेखक द्वारा  विकास संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य;उत्तरभारतीय लेखक द्वारा  पलायन सम्बंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; मुंबई प्रवासी लेखक द्वारा  सांस्कृतिक विषयों पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; महाराष्ट्रीय प्रवासी लेखकद्वारा  सरकारी प्रशासन संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य; भारतीय लेखक द्वारा  राजनीति विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; सांस्कृतिक मुल्य ह्रास पर व्यंग्य , गरीबी समस्या पर व्यंग्य, आम आदमी की परेशानी विषय के व्यंग्य, जातीय  भेदभाव विषयक गढ़वाली हास्य व्यंग्य; एशियाई लेखक द्वारा सामाजिक  बिडम्बनाओं, पर्यावरण विषयों   पर  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, राजनीति में परिवार वाद -वंशवाद   पर गढ़वाली हास्य व्यंग्य; ग्रामीण सिंचाई   विषयक  गढ़वाली हास्य व्यंग्य, विज्ञान की अवहेलना संबंधी गढ़वाली हास्य व्यंग्य  ; ढोंगी धर्म निरपरेक्ष राजनेताओं पर आक्षेप , व्यंग्य ,अन्धविश्वास  पर चोट करते गढ़वाली हास्य व्यंग्य  श्रृंखला जारी