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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, February 11, 2018

बजट और सामजिक संस्थाओं , पत्रकारों व जागरूक उत्तराखंडियों से अपील !

अपीलकर्ता - भीष्म कुकरेती 
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  बंटना और धड़े में लड़ना मनुष्य की नियति है। पहले हम उत्तराखंडी खबड  में बंटे थे ओर अब भाका में बंट चुके हैं हैं।  हमने अपने चश्मे भी नेहरू परिवार और संघी परिवार के कांच के बना लिए हैं।  इन चश्मों के कारण अब हम लाभ या हानिकारक कारकों की पहचान करने में असक्षम हो गए हैं अब हम पकोड़े तलने वाले व्यापार की तौहीन करने से चौखम्बा की चोटी में पंहुचना चाहते हैं तो मनरेगा  जैसी योजना (जिसमे आमूल चल परिवर्तन की आवश्यकता है) को कोढ़ी साबित करने में तुले हैं।  उत्तराखंडी खबड की भयंकर बीमारी से तो छुटकारा नहीं पा सका किन्तु उसने एक और महामारी को अपने घर बुला लिया है और वह बीमारी है हर वस्तु , हर उद्देश्य , हर योजना को भाका के चश्मे से देखना।  
   कल बजट था तो सोसल मीडिया में दो ही प्रकार के गुलाब जामन बंट रहे थे।  बजट की तौहीन , बेज्जती और बजट का बिन जांच प्रशंसा।  क्योंकि हम भाजपा और कांग्रेस में बंट चुके हैं। 
    बजट कोई भाजपा वालों का नहीं है कि कॉंग्रेस वालों को लाभ नहीं होगा।  
      हम उत्तराखंडी बुद्धिजीवियों का कर्तव्य बन जाता है कि बजट से भविष्य में परिवर्तन को समझें और अपने समाज को समय के साथ अवसरों से लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें।  हमने मिडल ईस्ट में नौकरी के फायदे को समय पर नहीं पहचनाना , हमने सॉफ्ट वेयर में क्रांति को नहीं पहचाना और  इन सुअवसरों से फायदों से त्वरित लाभ उठाने में पीछे रहे। 
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           ----   बजट भविष्य की भविष्यवाणी कर रहा है ----स्वास्थ्य सेवा-
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सन 2018 -19 का बजट वास्तव में भविष्य की भविष्यवाणी कर रहा है और वह है स्वास्थ्य सेवाओं में क्रान्ति।  मोदी सरकार दुबारा जीते या ना जीते , मोदी सरकार की स्वास्थ्य सेवा नीति (10 करोड़ परिवारों को 5 लाख की गारंटी ) पहले यह योजना चाहे  घिसट कर चले या तेजी से चले किन्तु अब भारत में स्वास्थ्य सेवा में आमूल चूल परिवर्तन होना ही है।  2019 में बनने वाली दूसरी या यही सरकार अब इस नीति से पीछे नहीं हट सकती है।  जब मेडकल इंस्युरेन्स में तेजी आयी तो मेडिकल संस्थान खुलने  में तेजी आयी याने मेडिकल सर्विसेज में रोजगार के अवसर  बढ़े।  इसी तरह इस योजना से छोटे बड़े अस्पतालों में वृद्धि होगी फिर 1 .5 लाख हेल्थ सेंटर भी खुलेंगे।  याने यहां भी रोजगार पैदा होंगे। 
       -----डाक्टरी  ना सही मेडिकल सर्विस में अन्य रोजगारों को पकड़ें  ----
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  हेल्थ केयर सर्विसेज में जब परिवर्तन होंगे तो हेल्थ केयर संस्थानों को सौ किस्म से अधिक टेक्नीशियन व विशेष टेक्नीशियनों जिसमे फिनेंस मैनेजमेन्ट भी आता है की आवश्यकता पड़ेंगी।  मैं कोशिश करूँगा कि इन टेक्नीकल पदों के बारे में अलग से पोस्ट करूँ। 
   आज आवश्यकता है कि नॉन ग्रेजुएट उत्तराखंडी इन जॉब्स की और ध्यान दें और प्राइवेट या सरकारी संस्थाओं से आवश्यक ट्रेनिंग लें। 
   हेल्थ केयर जॉब्स कल एक क्रेज बनने वाला है जैसे सॉफ्ट वेयर या इलेक्ट्रॉनिक्स उद्यम में जॉब्स क्रेज बना था।  
 --- युवाओं को हेल्थ केयर में जाने के लिए प्रेरणा -
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 बुद्धिजीवियों का एक महत्वपूर्ण कर्तव्य है कि वे विभिन्न कार्यों व माध्यमों से से उत्तराखंडी  युवाओं को हेल्थ केयर प्रोफेसन में जाने हेतु प्रेरित करें
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  राजनैतिक कार्यकर्ताओं को राजनैतिक स्वार्थ छोड़ उत्तराखंडी युवाओं को हेल्थ केयर प्रोफेसन में आने हेतु प्रेरित करना चाहिए 
 सामाजिक संस्थाओं को जागरण हेतु आगे आना सामयिक मांग है। 

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     धनी उत्तराखंडियों के मेडिकल सर्विसेज में निवेश करना चाहिए -
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    जो उत्तराखंडी धनी व कर्मठ हैं उन्हें मेडिकल सर्विसेज व मेडिकल सर्विसेज ट्रेनिंग सेंटर खोलने में निवेश करना चाहिए।  
 हर उत्तराखंडी को गाँठ बाँध लेनी चाहिए के हेल्थ सर्विसेज में भविष्य है तो युवाओं को हेल्थ केयर सर्विसेज में जाने के लिए प्रेरित करना ही चाहिए।