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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, February 11, 2018

कुछ बरजण , निषेध , मान्यता

Best  of  Garhwali  Humor , Wits Jokes , गढ़वाली हास्य , व्यंग्य )
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कुछ बरजण , निषेध , मान्यता 
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 चबोड़ , चखन्यौ , भचकताळ    :::   भीष्म कुकरेती   

 
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  गढ़वाळम तीन तरां की वर्जना (ताबोज ) छन।  सार्वभौमिक , गढ़वाळम प्रसिद्ध अर अति स्थानीय।  हम कुछ वर्जनाऊं तै छुड़दा अर वांसे बिंडी मुंड मा भार बढ़ै दींदा।  भार बढाण हमर आदत बण गे। 
    स्थानीय मान्यता बि कम इच्चि हूंदन क्या।  फलण मौक छांच नि खाण , फलण मुंडीत वळ तैं फौड़म भात नि पकाण दीण।  
    फबण बि कत्ति मान्यताऊं तैं जनम दींदी।  जन कि फलण गाँव बेटी नि दीण या फलण गाँवन ब्वारी नि लाण। 
    कैं दिशाम मुंड करिक सीणम बि कत्ति मान्यता छन।  जन कि हमर गाँव दक्षिण मुखी च त उत्तर दिशा म मुंड कौरिक सीण तैं अच्छु नि माने जांद।  दिखे जाव त या  वैज्ञानिक मान्यता च।  उत्तर दिशा याने कूड़ौ पश्च भाग अर कूड़ौ पैथर दिवाल या पख्यड़ हूंद तो लैंडस्लाइड या भ्यूंचळम कूड़ौ पैथरौ दिवाल गिरणौ ज्यादा अवसर हूंदन। 
      फिर कखमक पाणी नि पीण बि स्थानीय वर्जना हूंदन। जुंकळ पाणी , जूंक वळ पाणी , जुकाम वळ , निरोग पाणी नाम दिए जांदन पाण्यूं तैं। 
    धार/धरुड़ /पंद्यर मथि झाड़ा पिसाब नि करण अर धार/धरुड़ /पंद्यर मथि पेड़ नि कटण एक वैज्ञानिक मान्यता च।  उनी पाणिम  (कूल ) थुकण -झाड़ा -पिसाब करण वर्ज्य छौ। 
  चिड़ियों मुतालिक बि भौत सि मान्यता छन जन कि चखुलुं अंडा पर हाथ नि लगाण।  वास्तव मा इन मा प्राकृतिक चेतना व सुरक्षा कारण से  चखुल घोल छोड़ दींदन।  सवर्णों द्वारा  अंडा फुड़न महापाप किंतु शिल्पकारों पर यु पाप नि लगद मा भूमि मालिक हूण अर भूमिहीन हूणौ रहस्य छुप्युं च।  
     करैं कु  बसण बुरु अवश्य माने जांद किन्तु करैं तैं मारे नि जयांद। 
     मकान का समिण क्या अगल  बगल पर भांग , पिंडाळू , बेल , फलदार पेड़ बुरु माने जांद।  वास्तव मा या मान्यता अंग्रेजूं देन च।  अंग्रेजी शासनम स्वास्थ्य सुधार हेतु नियम बणये गे छा बल मकान का समिण या अगल बगल म क्या क्या पौधा -पेड़ नि बोये /लगाए जाण चयेंद।  सरकारी कारिंदा पासवान जु नियमूं अवहेलना करदा छा ऊं तैं डंड्यांद छा।  तो भौत सि मान्यता बण गेन। जन कि गौशाला /छनि गाँव से अलग हूण वळि मान्यता बि अंग्रेजी शासन मा स्वास्थ्य सुधार नियमों से बण।   
  मकान कखम लगाणम भौत सी मान्यता अर वैज्ञानिक या  अनुभव जनित मान्यता छे।  जन कि रात पेड़ तौळ नि सीण सही मान्यता  च 
        पशु -पक्षी संबंधी , पेड़ -पौधा संबंधी मान्यता बि भौत छन। 
      रात बगैर खायुं  सीण बुरु माने जांद छौ।  कखि दुसर गाँव जाण हो तो कबि बि नीन पुटुक नि जाण बि सही मान्यता च। 
      कम असल जाति बिटेन ब्वारी लयाण पर बेटी नि दीण मान्यता त गढ़वाळम आज बि चलणु च। यु कम असल शब्द वास्तव मा अंग्रेजूं देन च।  भूमि नाप मा नायब , असल , कम असल शब्द प्रयोग हूंद छा तो हमन जातियुं तैं बि यी विशेषण दे देन। 
    क्वी कखि यात्रा पर जाणु हो तो इन पुछण " कख जाणु /जाणी छे ?" गाळी  ही माने जांद छे।  सही वाक्य छौ " दौड़ कना ?". 
     शिकारमा  दूध दही वर्ज्य माने जांद छौ इक तक कि शिकार खाणौ बाद बि दूध दही वर्ज्य छे।  इन बुले जांद छौ बल शिकार का दगड़ दूध आधी खावो तो कोढ़ हूणो चांस छौ। रात दही व पळयो बर्जित छौ।  सही छौ। 
      क्वी गौड़ फुल्या हूण मिसे जाव त वीं गौड़ी दूध पीण बंद करे जांद छौ।  इनि भैंस लमंड जावो तो वीं भैंसी दूध बि वर्जित ह्वे जांद छौ। 
       दूध मुतालिक कति मान्यता छन जन कि दूध तैं सूरज नि दिखाण।  कुछ त तर्क छौ यीं मान्यता मा। 
   भैंस पर भूत रौंद अर गौड़ी पूँछ पकड्युं हो त भूत तो छ्वाड़ो ब्रह्म राक्षस बि नि लग सकद।  मान्यता छे बल जनान्युं तै लाल झुल्ला पैरिक बौण नि जाण चयेंद किलैकि भूत या छाया लग जांद। 
     एक मान्यता छे कि सवर्ण कुखुड़ नि पाळदा  छा।  वास्तव म मान्यता सवर्ण की नि छे अपितु मान्यता छे बल किसान तैं कुखुड़ नि पळण चयेंद।  सही बि च।  कुखुड़ पाळिल्या त सग्वड़म कुछ ह्वे सकद क्या ? 
     मरण पर त कथगा इ मान्यता छन जन कि भुट्यूं नि खाण , साल भर तक पूजा नि करण अर स्वाळ -पक्वड़ नि पकाण।  जै कुटुंब म मौत हो वै कुटुंब वळु दगड़ तेरा दिन तक सिवा -सौंळी नि लगाण। 
     मरण पर बात आयी त एक मान्यता छे बल यदि कुत्ता मड्वें दगड़ जावो तो मृतक तै स्वर्ग मिल्द बल। मृतक तैं लंगण महापाप माने जांद। 
  तलवार या हथियार नि नपाण चयेंद बि त मान्यता च कि ना ? फिर यदि हथियार नपै इ आल त हथियार तै समिण वळक गात पर छूंण आवश्यक हूंद।  
    पाटी -किताब -कॉपी पर खुट लगाण बर्ज्य च आज बि।  
    जनम मैना मा बाळ नि कटण , जनम दिनौ कुण दाड़ी नि बणान जन मान्यता त इतिहास ह्वे गेन। 
  आग म थुकण -पिसाब करण आज बि पाप माने जांद।  
  आम , खिन्न आदि  डाळुं का झिंकड़ नि लगाए जांद मान्यता त वैज्ञानिक मान्यता च। 
  ब्यौ  मा बर नारायण की भेष भूषा - अचकन , रेबदार सुलार , गोळ बौंळ वळ कुर्ता , पगड़ी , झालर असलम मुस्लिम संस्कृति की देन।   इनि नथुलि -बुलाक पैराण , ढोल बजाण मुस्लिम संस्कृति की ही देन च। 
      हल्दी हाथ से द्वार बाट तक रोटी, झंग्वर , खीर नि पकाण या बामणु मा हल्दी हाथ से लेकि द्वार बाट तक मटन मच्छी नि खाण वळि मान्यता अब अस्ताचल जोग ह्वे गेन। अस्ताचल पर बात ऐ इ त सूर्यास्त दिखण याने स्वीलाक घाम दिखण बि कख अच्छु माने जांद छौ अब तो लोग सूर्य अस्त दिखणो उत्तरी ध्रुव की यात्रा करणा छन जी। 
  जेठ -ब्वारी , मम्या ससुर -भणजौ ब्वारी की छौं क बारा मा आपक क्या ख़याल छन ? 
   अर नीली आँख का बारा म भौत सि मान्यता -भ्रान्ति त आज बि छन। 
   बाकी आप बतावो कि हौर क्या क्या मान्यता छन ? 
        
     
    
     
 
    

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30 /1 / 2018, Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India ,

*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ , चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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    ----- आप  छन  सम्पन गढ़वाली ----
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