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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, June 21, 2016

रुक जा ! रुक जा ! ना ना ! मैं तो राही उस मंजिल का

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                       रुक जा ! रुक जा ! ना ना ! मैं तो राही उस मंजिल का 
                                        चबोड़ , चखन्यौ , चचराट :::   भीष्म कुकरेती   

- नै नै 
- अरे क्या ह्वे गे  , चल्दू च 
- ह्यां न  ह्वां , न ह्वां , बिल्कुल ना। 
- ऊँ , क्या ह्वे गे 
-पर ब्याळक याद च ?
-हाँ पर जल्दी निपटै द्योलु ना 
- निपटाणै बात नी च।  
- घौरम कै तै पता नि चौलल 
-ह्यां पता चलणो बात नी च 
- क्या ह्वे गे।  थुड़ा सि त 
-पर ब्याळि तीन कसम ले छौ 
-कसम !  मि  त बौसक समिण रोज  कसम खांदु कि टैम पर काम निपटै द्योलु। 
-या कसम अर बौसाक समिण खईं कसम मा अंतर च।  
- फल तुड़णा  कुण लगदन , रिकॉर्ड टुटणा   कुण बणदन अर कसम तुड़णा कुण खये जांदन। 
-हां पर ब्याळि त वींक समिण कसम खाई। अपण घरवळि समिण खईं कसम ?
-चल्दू च। 
-पर अफिक अफु से बि त कसम खै छौ। 
- आज फिर सच्चिक कसम खै द्योलु। 
-अरे ठीक नी च।  रुक जा 
-पर  .. 
-रुक जा हाँ , घौरम बड़ो हंगामा ह्वे जाल हाँ। 
-नै रै मि तै विश्वास च आज नि ह्वालु। 
- बच्चा बड़ ह्वे गेन।  उंक त खयाल। 
- बस आज इ थुड़ा सि  अर आज का बाद माँ कसम फिर कबि ना। 
- ब्वेक कसम खांद अर  .. 
- सच्ची आज का बाद ना। 
- ह्यां पर 
- अरे स्यु सद्गुरु बार ऐंड रेस्टोरेंट ऐ गे।  पता नी आठ बजदन अर म्यार खुट अफिक बारक तरफ आण मिसे जांदन जन  गोरुक खुट अपण छन्नी तरफ  अफिक चलदन। 
- नि जा , नि जा , तीन दारु  पेकि ड्यार जाण अर घौरम हो हल्ला ह्वे जाण। 
- तो ठीक च।  मि बारा बजी बाद इ घौर जौल।  एक क्वाटर की जगा आज द्वी क्वाटर ह्वे जाल और क्या  पर घौरम शांति तो रैली तब।  


/6/2016 ,Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India 
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।

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