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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, June 12, 2016

पचास साल से खोये दाहिने हाथ की खोज ! सहायता कीजिये ना !

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                  पचास साल से खोये दाहिने हाथ की खोज ! सहायता कीजिये ना ! 
                             चटकताळ, चमकताळ, लाचार  :::   भीष्म कुकरेती   
-
स्यु -ये क्या छे अजीब सि भौण  मा रुणु ? या भौण मैदानी मनिखों भौण त नी च।  इख रूण बि हो त सलीका से रूण चयेंद - वीप  विद ऐन  एटिकेट। 
वु -हूँ ! त्यार बि  दै हाथ हर्चि जा तब दिखुल मि कि कन एटिकेट फैटिकेट हूंद धौं। 
स्यु -च -चु-चु ! ए ! हे कथगा दिन हुयां हाथ हरच्याँ ?
वु -पचास साल। 
स्यु -पचास साल ?
वु -हाँ पचास साल ह्वे गेन म्यार दैं हाथ हरच्याँ। 
स्यु - तो कामधाम ?
वु -ख़ाक हूण कामधाम।  द्वी हाथ जरूरी हूंदन जिमदारो करणो कुण।  पुंगड़ी बांजि -कूड़  उजाड़। 
स्यु - तो खर्च पाणी ?
वु - मनरेगा फनरेगा जन फोकटिया  स्किमुं से  कुछ तो मिलि जांद कि ना ? कबि कबि त एक पव्वा दारु इंतजाम बि। 
स्यु -अर तू अब खुज्याणि छे हरच्युं दैं हाथ ?
वु - ढूंढ मा त मि पचास साल से ही छौं। 
स्यु -पटवारी मा बि गे ?
वु -हाँ अर उख जैकी मेरी एक पुंगड़ी गे। बुरळ पड़ी जैन इन नीतियों पर। 
स्यु -कानूनगो ?
वु -उख द्वी पुंगड़ी खेत ह्वेन। भसम बि नी हूणि या कुव्यवस्था। 
स्यु - तो त्वै तै और मथि जाण चयेणु छौ। 
वु -तीन पुंगड़ी जाणो बाद हिम्मत नि ह्वे।  आग लग जैनि यीं करड़ी लालफीताशाही पर ,आजक  बिखोत द्याख भोळक मकरैनि देखि भैरों या लालफीताशाही !    
स्यु -तो कै डॉन मा जांदी।  अजकाल पुलिस फुलिस कि जगा डॉन भाई सस्ता इ नि हूंदन बलकणम प्रमाणिक बि हूंदन।  
वु -मि गढ़वळि छौं।  अबि बि हम तै न्याय दिबता ग्विल्ल -गोरिल पर विश्वास च कि कै दिन त रात खूलली।   
स्यु -गढ़वाळी छे तो त्वे तै त देहरादून जाण छौ ? 
वु -ड्यारा डूण बि कांड लगै छौ पर उक बि गुर्रा लग्यां छन। बज्जर पड्युं च वै डेराडूण मा।     
स्यु -कनो ?
वु -बारा पंद्रा साल से उख द्वी मदमस्त , पागल  सांडूं भयंकर,  बिकराल ,  , अनन्त समौ तक चलण वळि लड़ै चलणि च त क्वी सुणन वळ इ नि छन उख। कीड़ पोड्यां छन तख। 
स्यु -राजधानी च तो भी ?
वु -हाँ सरा उत्तराखंडs अधिकारी , लोक  साडुंक  मलयुद्ध मा मग्न छन तो क्वी सुणवाइ नी।   
स्यु -फिर तीन फरियाद तो लगाण छे ?
वु -लगाई छे ना। 
स्यु -क्या जबाब मील ?
वु -क्या मिलण छौ जन पटवरिन जबाब दे छौ ऊनि जबाब मील  कि बल - अपण बै हथ बि कटै दे जांसे कि समीकरण बरोबर ह्वे जाल। बदखोर , हरामी  साल्ले !   
स्यु - हैं ? देरादूण वळुन  ब्वाल बल दैं हाथ खुजणो जगा समीकरण ठीक करणो कुण बैं हाथ बि कटै दे ?
वु -हाँ।  वु बुना छन कि किलै छे पचास साल बिटेन हरच्युं हाथ तै खुज्याणो ?
स्यु -फिर ? 
वु -फिर मि दिल्ली औं। 
स्यु -तो ?
वु -त ऊंन बोली बल जब तक आर्थिक सुधार पूरा नि ह्वाल हम इन छुट -मुट समस्यावों मा समय बर्बाद नि कौर सकदां। काणा मादा ! 
स्यु -तो ?
वु -मि अपण दैं हाथ जु काम की तलाश मा कखि हर्चि गे छौ वै दैं हाथ  की तलास मा मुंबई औं। 
स्यु -त इखाक लोग बड़ा सहकारिता वळ छन।  ऊंन त त्यार दैं हथ तलासणम मुक़्क़मल सहायता कौर होली ? 
वु -केक सहायता ? कैमा बि एक छटांग  भरौ समौ नी च , सब भगणा छन बस अपण सुपिन पूर करणो हबस मा भागणा छन।   
स्यु -तो फिर ?
वु -त मि ब्याळि अमेरिकन काउंसिलिएट तै मीलु।  भौत मयळ छन , बड़ा मददगार छन।  सचमुच मा।  
स्यु -अमेरिकीन क्या ब्वाल ?
वु -वैन ब्वाल बल तू अपण ब्रेन हम तै दे दी तो हम सौ प्रतिशत त्यार दैं हथ खोजीक दे द्यूंला।   दगड़म प्रीमियम इन्स्युरेंस कम्पनी का बॉन्ड बि दे ऊन। 
स्यु -अच्छा तो अब क्यांकण रूणी छे ? इथगा जोर से। 
वु -वैन ब्वाल बल तू अपण ब्रेन हम तै दे दे अर हम त्यार दैं हथ खोजीक दे द्योला। 
स्यु -तो तीन ब्रेन ड्रेन कौर च कि ना ?
वु -हाँ स्यु भितर जैक मि ब्रेन देकि त आणु छौं ।  
स्यु - तो अब रुणैं बात क्या च ?
वु - जब बिटेन म्यार ब्रेन ड्रेन ह्वे मि तै लगणु इ नी कि म्यार सरैल जीवित बि च।  बस केवल आवाज आणि च अर बकै सरैल सुन्न पड्युं च।  
स्यु - यांकुणि बुदन बल - मरज  बढ़ता ही गया  ज्यों ज्यों दवा की । 

13/6/2016 ,Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India 
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।

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