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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, April 7, 2015

भारतवासियों द्वारा इतिहास के साथ माजक और धोखेबाज कायर की उपासना

Alexander Attack on India & Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur

                                        भारतवासियों  द्वारा इतिहास के साथ माजक और धोखेबाज कायर की उपासना 
         हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास संदर्भ में सिकंदर का भारत पर आक्रमण 

              Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur  Part  -   94  

                       
    

                     हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -94                       

                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती  
         330 BC में यूनानी आक्रांता सिकंदर ने परसिया को जीतकर उसकी राजधानी परसेपोलिस को नष्ट कर दिया।  और  भागों को जीतकर 327 BC की गर्मियों में भारत की और प्रयाण किया [मुकर्जी ] ।
उन दिनों उत्तरभारत भारत में तीन मुख्य राज्य थे और बाकी छोटे छोटे राज्य थे।  पश्चिम में छोटे छोटे राज्य थे किन्तु काबुल नदी घाटी का कोफेयस , सिंधु का उत्तरी राज्य शशिगुप्त  क का राज्य , ऊपरी कश्मीर का अभिसार राज्य, स्वात घाटी के छोटे छोटे गण  आदि राज्यों ने संगठित होकर सिकंदर को नही रोका  और अन्य क्षेत्रों का भी यही हाल था ।  
१- तक्षशिला - झेलम का पश्चिम भाग। 
२-पुरुवंशी या पोरस - झेलम व रावी दोआब 
३-नन्द साम्राज्य - रॉबी से पूर्व गंगा महान क्षेत्र।  हरिद्वार , सहारनपुर व बिजनौर नन्द वंश के अधीन था किन्तु  क्षत्रप या राजा के बारे में इतिहास रिकॉर्ड के हिसाब से मौन है।
                              क्षत्रपों की कायरता 
   शशिपाल ने सिकंदर की अधीनता स्वीकार कर ली। पुरुवंश से द्वेष के कारण तक्षशिला राज्य के राजकुमार आम्भी ने सिकंदर को भारत जाने का रास्ता दिया।   
 326 BC में सिकंदर ने झेलम पार कर पोरस नरेश को हराया।
                भारतवासियों द्वारा इतिहास के साथ माजक 

यह ठीक है कि युद्ध से पहले पोरस ने सिकंदर से बीरतापूर्वक डटकर युद्ध लड़ा और एक वाक्य 'कि सिकंदर !मेरे साथ वही वर्ताव करो जो राजा को राजा के साथ करना चाहिए ' से पोरस की सिकंदर से संधि हो गयी।  किन्तु उसके बाद पोरस ने भी सिकंदर को उत्तर भारत जीतने में योजना , सैनिक , छद्म कर्म [जासूसी ], रणनीति में तन -धन - मन से पूरा साथ दिया। (एज ऑफ इम्पीरियल यूनिटी - पृष्ठ 44 -50 ]
पोरस और सिकंदर की सेना को चिनाव नदी  पूर्व के अन्य राज्य जीतने में कठिनाई नही हुयी।  एक और पुरुवंशी राजा बिना युद्ध के ही गन्दिरिदे राज्य ( नन्द साम्राज्य ) की और भाग गया और उसके राज्य को पोरस राज्य में मिला लिया गया। 
 आश्चर्य है कि भारतवासी ऐसे कपटी , देशद्रोही राजा की  भूरि भूरि प्रशंसा करते हैं और उसकी वीरता पर फिल्म भी बनाई जाती है। 
भारतीयों द्वारा ऐतिहासिक सच के साथ इतना मजाक किया जाना हमारी मानसिकता का परिचायक है। 
  
* सिकंदर का आक्रमण शेष भाग में 

 ** संदर्भ - ---
वैदिक इंडेक्स
डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२
राहुल -ऋग्वेदिक आर्य
मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज 
घोषाल , स्टडीज इन इंडियन हिस्ट्री ऐंड कल्चर 
आर के पुर्थि , द एपिक सिवलीजिसन 
अग्रवाल , पाणिनि कालीन भारत
अग्निहोत्री , पंतजलि कालीन भारत 
अष्टाध्यायी 
दत्त व बाजपेइ  , उत्तर प्रदेश में बौद्ध धर्म का विकास 
महाभारत 
विभिन्न बौद्ध साहित्य 
जोशी , खस फेमिली लौ
भरत सिंह उपाध्याय , बुद्धकालीन भारतीय भूगोल 
रेज डेविड्स , बुद्धिष्ट इंडिया 

Copyright@
 Bhishma Kukreti  Mumbai, India 4/4/2015 
   History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  to be continued Part  --

 हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास  to be continued -भाग -

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