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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, April 28, 2015

अहोगंग (हरिद्वार ) संदर्भ में बौद्ध विद्वान मोग्गलिपुत तिस्स का इतिहास

History of Buddhist Monk Moggaliputta  Tissa/ Son of Moggalik   of Ahogang (Haridwar )

                                अहोगंग (हरिद्वार )  संदर्भ में  बौद्ध विद्वान मोग्गलिपुत तिस्स  का इतिहास 

                            Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur  Part  -
111       

                       
    

                         हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  111                     

                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती  
    अशोक को बौद्धमत प्रचार हेतु प्रेरणा देने वाले स्थविर मोग्गलिपुत (Moggaliput Tissa  थे।  बुद्ध के बाद उपलि , दासक , सोनक , सिग्गव , तथा चंडवज्जि पश्चात मोग्गलिपुत (Moggaliputta Tissa) ही बड़े विद्वान माने जाते हैं। कहते हैं कि मोग्गलिपुत (Moggaliputta  Tissa) तिष्यब्रह्मा के अवतार थे।
          

               मोग्गलिपुत (Moggaliputta Tissa 327 -247 BC   )  धर्म पर विप्पति टालने हेतु मोग्गली नामक ब्राह्मण के घर पाटलिपुत्र में जन्म लिया।  सोलह वर्ष की वय में मोग्गलिपुत(Moggaliputta Tissa ) ने शिक्षा , कल्प , निघंटु , इतिहास , तीन वेदों का ज्ञान प्राप्त कर लिया था।  
             सिग्गव व चंडवज्जि ने मोग्गलिपुत (Moggaliputta Tissa) को दीक्षित किया था।  अल्पकाल में ही मोग्गलिपुत (Moggaliputta Tissa ) ने बौद्ध धर्मग्रंथों का ज्ञान प्राप्त कर लिया।
      मोग्गलिपुत तिष्य (Moggaliputta Tissa )  ने अशोक व अशोक के पुत्र को बौद्ध ज्ञान दिया था।  अशोक  राजयभिषेक के समय   मोग्गलिपुत तिष्य (Moggaliputta Tissa ) /तिस्स  साठ साल की थी।   मोग्गलिपुत तिष्य (Moggaliputta Tissa )  के प्रेरण से हीअशोक ने अपने परिवार वालों को मगध से बाहर बौद्ध  धर्म प्रचार हेतु भेजा। 
       जब बौद्ध मठ व भिक्षुक आमोद प्रमोद में लिप्त हो गए और मोग्गलिपुत तिष्य (Moggaliputta Tissa )  /तिस्स आदि विद्वानो के समझाने से भी बौद्ध विद्वान व भिक्षु नही माने तो  मोग्गलिपुततिष्य (Moggaliputta Tissa )  खिन्न होकर अहोगंग (कनखल , हरिद्वार के पास की पहाड़ी ) पर्वत पर चले गए और एकांतवासी हो गए। 
अशोक ने पहले चार मंत्रियों को मोग्गलिपुत तिष्य (Moggaliputta Tissa )  /तिस्स को लाने अहोगंग (कनखल हरिद्वार ) भेजा किन्तु मोग्गलिपुत तिष्य (Moggaliputta Tissa   तिस्स पाटलिपुत्र नही आये। 
फिर अशोक ने आठ मंत्रियों व हजार स्थाविरों को  मोग्गलिपुत तिष्य (Moggaliputta Tissa /तिस्स के पास अहोगंग ( कनखल ,  हरिद्वार के पास की पहाड़ी )  भेजा।   मोग्गलिपुत तिष्य (Moggaliputta Tissa )  पाटलिपुत्र आने के लिए तयार हुए। मोग्गलिपुत तिष्य (Moggaliputta Tissa   नाव  से गंगा मार्ग से पाटलिपुत्र पंहुचे जहां बीच गंगा में अशोक ने  मोग्गलिपुत तिष्य (Moggaliputta Tissa   स्वागत किया।  
अशोक ने मोग्गलिपुत तिष्य (Moggaliputta Tissa )  की अध्यक्षता में बौद्ध धर्म की तृतीय संगीति का आयोजन किया। 
नौ मॉस के गहन विचार के बाद मोग्गलिपुत तिष्य (Moggaliputta Tissa )  ने अशोक को बौद्ध धर्म के प्रचार हेतु मगध से बाहर कार्य करने की सलाह दिया।
मोग्गलिपुत तिष्य (Moggaliputta Tissa   ने तृतीय संगीति के बाद निम्न स्थविरों को विभिन्न क्षेत्रों में भेजा -
मज्झंतिक स्थविर - कश्मीर , गांधार 
महादेव स्थविर -महिषक मंडल (इंदौर )-
रक्षित - महाराष्ट्र का  कोंकण व उत्तरी कनारा 
धर्मरक्षित - नर्मदा से महाराष्ट्र 
मंज्झिम - हिमवान या हिमालय क्षेत्र 
सोणक , उत्तर स्थविर - पेगु  , वर्मा 
महेंद्र व चार स्थविर - श्री लंका व अन्य द्वीपों के लिए 


 ** संदर्भ - ---
वैदिक इंडेक्स
डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२ व महावंश
राहुल -ऋग्वेदिक आर्य
मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज 
घोषाल , स्टडीज इन इंडियन हिस्ट्री ऐंड कल्चर 
आर के पुर्थि , द एपिक सिवलीजिसन 
अग्रवाल , पाणिनि कालीन भारत
अग्निहोत्री , पंतजलि कालीन भारत 
अष्टाध्यायी 
दत्त व बाजपेइ  , उत्तर प्रदेश में बौद्ध धर्म का विकास 
महाभारत 
विभिन्न बौद्ध साहित्य 
जोशी , खस फेमिली लौ
भरत सिंह उपाध्याय , बुद्धकालीन भारतीय भूगोल 
रेज डेविड्स , बुद्धिष्ट इंडिया 

Copyright@
 Bhishma Kukreti  Mumbai, India 28/4/2015 
   History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  to be continued Part  --

 हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास  to be continued -भाग -

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