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Wednesday, April 15, 2015

भुंदरा बौ का मौलिक अधिकार ना छीना जाय

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                            भुंदरा बौ का मौलिक अधिकार ना छीना जाय 
                   
                        चबोड़्या, चखन्यौर्या , हंसोड्या :::   भीष्म कुकरेती 

                    बिचरि भुंदरा बौका जोग इ इनि छन कि जब बि मौक़ा लगद अपण -बिरण बौका मौलिक अधिकार छिनण लग जांदन। 
              कुछ दिन पैल जब वा फलण पंचक विरुद्ध कुछ बुलण चाणि छे तो अपणोन रोकि दे कि क्या करणि छे स्यु कथगा बि बेशरम च पर छ त त्यार मुंडीतौ द्यूर च।  बस भुंदरा बौक मुख पर म्वाळ लग गेन। 
             कुछ दिन पैल जब वा गांवक प्रधानक बांठै धरण वाळ छे तो गाँववळुन ब्वाल बल ठीक च ग्रामप्रधान 2 G प्रसिद्ध ए राजाका दुसर औतार च पर छ त अपण जातिक जिठाजी अर भुंदरा बौक मुख पर अंतर्राष्ट्रीय ब्रैण्डक ताळु लग गे। 
           कुछ मैना पैल जब भुंदरा बौ ब्लॉक प्रमुखक बाब दादाओं तै स्वर्गमा गाळी पौंछाणै बान कूड़ो मुंडळम चढ़ि छे तो सरा क्षेत्र वळ घिरेक ऐ गेन बल यु क्या करणि छे ठीक च स्यु ब्लॉक प्रमुख बड़ो अन्यायी च पर छ तो त्यार रिस्तेदारक रिस्तेदारक तमोटा ना ? तो दूरक रिस्तेदार का कुछ लगद तो यांपर भुंदरा बौक मुख  सीमेंट से बंद करे गे। 
             मौलिक अधिकार मीलन या ना मीलन पर हैंकाक मौलिक अधिकार छीनणो अधिकार सब्युं मा छन अर मुख मारिक भुंदरा बौ अबि तलक अपण मौलिक अधिकार प्रयोग नि कार साक। 
अब भुंदरा बौ [कनि करिक बि ] ग्राम प्रधान बणि गे त सरा गां भुंदरा बौ का मौलिक अधिकारुं पैथर पोड़ि गे। 
अब कव्वा ककड़ाणा रौंदन अर ढाकरी चलणा रौंदन याने ढाकर्युं तै अनदेखी करणो मौलिक अधिकार च कि ना ?
यदि बाघ घुरणु हो तो भौत सा गूणी , बांदर क्या मूसुं  तै बि बाग़ की उपेक्षा करणो जैविक अधिकार च कि ना ?
          फिर यदि गांमां गंदगी फैलीं हो , माखुं भिंणभिणाट मच्युं हो अर यदि भुंदरा बौ गंदगी या माखुं पर ध्यान नि द्यावो तो भुंदरा बौ अपण जैविक अर संविधानिक अधिकारुं प्रयोग करणी हो तो लोगुं तै फोकट मा मिर्ची किलै लगद भै ?  ये भै उपेक्षा करण , अनदेखी करण या नजरअंदाज करण जैविक गुण छन तो गाँव वळ भुंदरा बौक पैथर पड्यां छन कि तू अपण मौलिक अधिकार की बात नि कर अर गंदगी पर ध्यान दे।  यु त भुंदरा बौ पर सरासर मानवीय अन्याय च कि ना ? पता नि मानव अधिकार वळ किलै सियां छन धौं अर हमारी ग्राम प्रधान का मौलिक अधिकारों छिन्याणो   चिंता किलै नि करणा छन ? भुंदरा बौक बुलण सही च कि ग्राम प्रधान कु अनदेखी करण मौलिक अधिकार च। 
            धार्मिक ग्रंथुं , कर्मकांडी पोथ्युं अर चिकित्सा पोथ्युं मा बि लिख्युं च बल चिंता कतै नि करण किलैकि चिंता चिता समान इ ना चिता कु सामान च।  भुंदरा बौ तै ग्राम प्रधान बणनो बाद ज्ञान जग , चेतना जागरण ह्वे याने बुद्ध प्राप्त ह्वे कि चिंता नि करण।  अर हमर गांवक बेकार लोग छन कि रोज सुबेर ल्याखम भुंदरा बौमा जांदन अर बुल्दन बल - तू हमर रोटी याने मनरेगा की चिंता कर ; तू हमारी स्वास्थ्य की चिंता कर ; तू हमारी शैली की चिंता कौर।  अब बताओ जैं तै बुद्ध प्राप्त ह्वे गे हो कि चिंता चिता सामान च त हमर गंवार गँवड्या बिचारी भुंदरा बौ तै चिंता की दावानल मा चुलाणो तयार छन।  क्या यो भुंदरा बौक मौलिक अधिकारों हनन नी च कि वा चिंताहीन जीवन बिताण चाणि च अर गंवड्या छन कि वीं भलमनखिण तै चिंतित करणा छन।  
                     एक मानवीय अधिकार च बहरा हूण।  बहरापन हमर मानवीय अधिकार च।  पर जब बिटेन भुंदरा बौ ग्राम प्रधान ह्वे तब बिटेन गाँव का मनिख इ  ना कुत्ता बि भुकणु रौंद कि भुंदरा बौ अणसुणि करणि च। यु तो भुंदरा बौ पर अत्याचार च भै।  बधिरता , बहरापन , बज्रबधिर हूण , निसुणन  , सुणिक बि अनसुनि करण हमर परम मौलिक अधिकार च अर यदि भुंदरा बौ तुमर शिकायत नी सुणनि च त क्वी गुनाह थुका करणि च अपितु उल्टां अपर मौलिक अधिकारुं सही प्रयोग करणि च अर जनता च कि घ्याळ लगाणी च बल ग्राम प्रधानि हमर नी सुणनि च।  
   अब आपि न्यानिसाब कारो कि यदि भुंदरा बौ अपण मौलिक अधिकारुं उपयोग, सदुपयोग ,  औचित्यपूर्ण प्रयोग करणि  च त गंवड्यों तै क्या जरूरत च कि वींक मौलिक अधिकारूं तै लूठ ? 
जनता सावधान -
हमारी ग्राम परधानी का मौलिक अधिकारुं का हनन ना करें प्लीज ! 


8/4/15 ,Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India 
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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