उत्तराखंडी ई-पत्रिका की गतिविधियाँ ई-मेल पर

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

Thursday, June 26, 2014

चलो रेल भाड़ा वृद्धि विरोध करला !

घपरोळया -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

घरवळि -सुणो ! क्या छंवां तुम परजामा मा जयां ?
मि -हैँ ? मि त क्या सुंदर अमेरिकी लिख्वारौ उपन्यास पढ़णु छौं।  अर  तू बुलणि छे मि परजामा मा छौं। 
घरवळि -ह्यां अमेरिका की सकासौरी नि कारो , पढ़ी लेखिक कबि भारत की सुध बि ले लिया कारो। 
मि -कनो , अबि बि हिंदी विरोध चलणु च ?
घरवळि -हाँ हिंदी विरोध त चलणु च पर हिंदी को अधिक प्रचलन या कम प्रचलन से हमर पुटकी सोग कम नि हूंद। 
मि -पर न्यूआर्क टाइम्स मा त कखि खबर नी च कि इण्डिया मा पुटकी सोग बच्युं च।
घरवळि -न्यूआर्क टाइम्स की छ्वाड़ा अर भारत टाइम्स पौड़ो। 
मि -क्या च भारत टाइम्स की हल्लाबोल खबर?
घरवळि -पता च सब विरोध मा ऐ गेन। 
मि -क्या सब रोड मा ऐ गेन ?
घरवळि -नै नै , अबि त अब सब टीवी मा विरोध जताणा छन ?
मि -बाई द वे ! विरोध क्यांक च ?
घरवळि - रेल भाड़ा वृद्धि का विरोध करणा छन। 
मि -कु कु विरोध जताणा छन ?
घरवळि -ममता बैणिक लोग इन तड़कणा  छन भुजद दैं जुंडळs दाण तड़कदन।    
मि -हाँ भूतपूर्व रेलमन्त्र्याणि ममता बैणि त रेल भाड़ा बढ़ोतरी ही ना रेल पटरी बढ़ान , ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल मार्ग बढाण पर बि तड़कदि। ममता बैणि वृद्धि शब्द से ही चिरड्यान्द!
घरवळि -समाजवादी पार्टी तो बबाल खड़ा करणै धमकी दीणी च कि यदि अल्पसंख्यकों तैं रेल मा रियायत नि मीलल तो उत्तर प्रदेश मा बलात्कार की घटनाओं मा असीमित बृद्धि ह्वे  जाली। 
मि -समाजवादी पार्टीक ले क्या , अफु त उत्तर प्रदेशौ बजट मा बेरोजगारी भत्ता , कन्यादान भत्ता अर लैपटॉप स्कीम खतम करणी च अर रेल भाड़ा बढ़ाण पर विरोध जताणी च।  
घरवळि -सि नवीन पटनायक बि विरोध करणा छन कि रेल भाड़ा बढ़ण से मंहगाई बढ़लि।  
मि -ओडीसा का मुख्यमंत्री से पूछो कि ओडीसा मा रेलमार्ग बढ़ानो वास्ता धन कखन आलो ? ओड़ीसा जन प्रदेश मा रेलमार्ग वृद्धि भारत की समृद्धि का वास्ता बहुत ही जरूरी च अर रेलमार्ग वृद्धि का वास्ता कै ना कै अकाउंट से पैसा आण जरूरी च। 
घरवळि -अपण कम्युनिस्ट नेता तो विरोध मा सरकारी बस -रेल जळाणो तयार बैठ्याँ छन पर कम्युनिस्ट कार्यकर्ता बुलणा छन बल अब हमसे भूखा पेट बस -रेल नि जळाये जांद।   
मि -भारतीय कम्युनिस्टों अर्थशास्त्र मेरी समज मा अब तक नि अयि।  कम्युनिस्ट सब चीज फ्री दीणो तयार बैठ्याँ छन किन्तु गौ बुरी चीज च जु यी भारतीयों तैं इन बतै साकन कि फ्री सर्विस याने मुफ्त सेवा का वास्ता धन उपलब्धि का क्या  साधन छन।
घरवळि -अपण नीतीश कुमार बि रेलभाड़ा वृद्धि की कड़क शब्दों मा आलोचना करणा छन। भमक्याणा छन नितीश कुमार जी ! 
मि -नितीश की आलोचना  मा असली दम च।  बिहार मा रोज बरोजगार पैदा हूणा छन अर वूं बेरोजगारों तैं रोजगार की खोज का वास्ता दिल्ली , मुंबई , गुजरात आण मा रेल भाड़ा वृद्धि से परेशानी तो होलि कि ना ?
घरवळि -हाँ बिचारा एक त बिहार मा रोजगार नी च अर फिर रेल भाड़ा वृद्धि ? बिचारा नितीश कुमार कु नराज हूण लाजमी च। 
मि -नितीश कुमार तैं दस साल पैल रेल भाड़ा वृद्धि पर ऊँका बयान का टेप दिखै द्यावो अफिक चुप ह्वे जाल। 
घरवळि -फिर अपणा भूतपूर्व  किंगमेकर  लालू यादव बि त विरोध करणा छन। 
मि -पॉलिटिकल जोकर लालू यादव तैं बिहार की ही पड़ीं होंदी तो भारत  कुदशा होंदी।  लालू यादव तो अर्थशास्त्र नाम को ही विरोधी च।
घरवळि -अर कॉंग्रेस बि रेल भाड़ा वृद्धि का पुरजोर विरोध करणी च। 
मि -सन 2014 कु पॉलिटिकल जोक ऑफ द यिअर या च कि जैं कॉंग्रेस सरकारन फ़रवरी 2014 मा रेल भाड़ा वृद्धि कु आदेश दे हो वाही कॉंग्रेस अब अपणो ही आदेस का विरोध करणी च।
घरवळि -सुणो ! तुम यी अमेरिकी किताब पढ़न बंद कारो। 
मि -क्यों क्या ह्वाइ ?
घरवळि -तुम आम जनता का विरोधी छ्वीं लगाणा छंवां। 
मि -देख जब तलक रोजगार मिलणो हो अर इनकम बढ़णो हो तो मूल्य वृद्धि तैं हरेक सहन कर सकद। 
घरवळि -ह्यां पण रोजगार मिलणा कख छन ?
मि -रोजगार का वास्ता नया प्रोजेक्ट्स चयणा छन अर नया प्रोजेक्ट्स का वास्ता पैसा चयेणु च अर रेलभाड़ा वृद्धि पैसा लाणो एक जरिया च। 
घरवळि -नै नई सरकार तैं पैल भआरतियों की इनकम बढ़ाण चयेंद , रोजगार का अवसर पैदा करण चयेंद फिर रेल भाड़ा बढ़ाण चयेंद। 
मि -नै पैल धन कु इंतजाम हूण चयेंद जांसे कि नया नया प्रोजेक्ट लग जावन अर ज्यादा इनकम वाळु कुण सबसिडी कम हूण चयेंद
घरवळि -नै पैल प्रोजेक्ट लगण चयेंदन जांसे से जनताक इनकम बढ़ अर मूल्य वृद्धि तैं पचै साकन ! 
मि -यांकुणि त चिकेन ऐग सिचुएसन याने अंडा पैल आयि कि मुर्गी पैल आयि अवस्था बुल्दन !


Copyright@  Bhishma Kukreti  21/6/2014   
    

*लेख में  स्थान व नाम काल्पनिक हैं