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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, June 26, 2014

चबोड़ 26

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                           कूटनीतिका  अर राजनीतिक सिग्नल , इशारा याने बुल्द बेटी कुण छौं सुणांद ब्वारी तैं छौं 

                                           घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )



                 उन त डा मनमोहन (सॉरी सोनिया जी ! सरकारी दस्तावेजुं मा प्रधान मंत्री राहुल गांधी ना मनमोहन जी ही छन ) सरकार बि राजनैतिक -कूटनीति सिगनल -संकेत -सैन भेजदी छे किन्तु लोग बाग़ बींगीक बि बौग सारी दींदा छा।  भौत सा दैं भारत का गृह मंत्रीन राज्य सरकारों कुण लेख कि आतंकवादी हमला बाद अल्पसख्यकों तैं सुदी -मुदि नि पकड़े जाव।  सिग्नल अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानो कुण छौ कि बीएसपी , एसपी , टीएमसी आदि पार्ट्युं तैं वोट नि देन बल्कण मा कॉंग्रेस तैं वोट देन मुसलमान त कॉंग्रेस का सिग्नल -सैन नि समझिन पर हिन्दू समझी गेन कि सिगनल कैकुण च अर उन भाजपा तै जितै दे। 
                2014 लोकसभा चुनाव मा पैल पैल नरेंद्र मोदीन कोलकत्ता मा भाषण दे तो बंगाल्युं  एक हाथ मा लड्डू (लोकसभा मा बीजेपी सांसद ) अर हैंक हाथ मा रसगुल्ला (बंगाल मा टीएमसी की सरकार ) शब्दों से ममता बैणि तैं मोदीन सिगनल दे कि मीतै तेरी आवश्यकता पोड़लि।   ममता त ममता बनर्जी च कैपर बि दया नि दिखांद।  ममतान सैन मा न सीधा बोलि दे कि 2002 कु अभियोगी दगड़ मेरि नि पटण।  तो जबाब मा मोदीन बंगलादेस्यूं किस्सा उठै दे अर भाजपा तैं फैदा मिल गे। 
  हालांकि मनमोहनी सरकार बि संकेत भेजदी छे किन्तु भ्रष्टाचार अर स्कैमों चलदा मनमोहन सरकार का सिगनल क्वी पकड़दो इ नि छौ।  कॉंग्रेसन संकेत भेजी बि छौ कि केजरीवाल , सिसोदिया , प्रशांत भूषण का NGOs तैं अमेरिकी कम्पन्यूं से डोनेसन किलै मिलदु अर केजरीवालन भारत का वास्ता इन क्या काम कौर छौ कि केजरीवाल तैं मेगासे अवार्ड मील ! कॉंग्रेस का सिग्नल आम जनता नि पकड़ साक। 
 पर भाजपा ये मामला मा भाग्यशाली च कि अबि जनता भाजपा का सिग्नल पकड़नी च। 
  अब द्याखो ना जैं संस्था कु काम हूंद कि सरकारी दफ्तरों से क्वी बि सीक्रेट लीक नि हो वीं इन्फोर्मेसन ब्यूरो का ऑफिस से एक सूचना लीक ह्वे गे।  ईं सूचना मा छौ कि कुछ अमेरिकी परस्त या पश्चिम देशों सहायक NGOs तैं भारत मा भौत सा प्रोजेक्टों मा अड़ंगा लगाणा छन कि भारत की आर्थिक दसा मा तीब्रता से सुधार नि ह्वावु।  यूं  देशद्रोही संस्थाओं का वास्ता कड़क सिग्नल छौ कि यदि तुमन संवेदनशील प्रोजेक्टों मा अड़ंगा लगाइ तो तुमर विदेशी चंदा आण पर रोक बि लग सकद।  जनता का बीच सिग्नल या रैबार बि पौंछि गे कि यी देशद्रोही NGOs देस  विकास रुकणा छन तो यूँ देशद्रोही NGOs की भकलौण मा कतई नि ऐन।  उन सिग्नल तो अमेरिका बि पौंछि गए कि हम भारतवासी तुमर चंदा की चाल तैं समझदा छंवां।
 उन आम जनता विदेश नीति का सिग्नल कम ही बिंगदि किंतु जब मोदी सरकारन अरुणाचल प्रदेश मा 50    मिल्ट्री चौकी खुलणै समाचार अर चीन सीमा  पर सड़क बणाणो बान रक्षा विभाग का वास्ता पर्यावरण आदि कि इजाजत आवश्यक नि रै गे जन सूचना जगजाहिर कौर तो जनता समझ गे कि सिग्नल चीन का वास्ता च कि ठीक च हम भारतीय तुमर दगड़ व्यापारिक संबंध बाढ़ाणो तयार छंवां किंतु हम तैं अपण बॉर्डर की बि चिंता च।  चीन सिग्नल -संकेत समझि गे अर वैन द्वीएक हैकपॉटर उत्तराखंड का सीमा मा उड़ाइ देन। 
 विदेश मंत्री बंगलादेश की यात्रा पर जाणि च तो भारतीय गृह मंत्रालय द्वारा बंग्लादेस्यूं तैं वीजा ऑन अराइवल पर अड़ंगा लगाइ दे।  याने मय बंगलादेश भौत सा लोगुं तैं संकेत भिज्याणा छन। 
संकेत तो श्रीलंका बि भिजणु च -कबि त अपण सीमा पर पकड़्यां भारतीय मछुवारों तै चौड़ छोड़ दींदु अर कबि देर करणु रौंद।  
सिगनल तो मोदी न अमेरिका बि भिजण शुरू करि ऐन। भारत सरकार अब अपण न्यूक्लियर प्लांटों मा इंटरनेश्नल वॉचडॉगुं तैं सरलता से प्रवेश करण देलि असल मा अमेरिका का वास्ता एक सिग्नल च।  
पैल जनता सिगनलु तै नि समझदी छे पर अब समजण लग गे कि कूटनीति मा बि " बुल्द बेटी कुण छौं सुणांद ब्वारी तैं छौं " जन वाकिया हून्दन । 



Copyright@  Bhishma Kukreti  25 /6/2014   
    

*लेख में  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । 

 Garhwali Humor in Garhwali Language about Signals in Diplomacy and international relations , Himalayan Satire in Garhwali Language about Signals in Diplomacy and international relations , Uttarakhandi Wit in Garhwali Language about Signals in Diplomacy and international relations, North Indian Spoof in Garhwali Language about Signals in Diplomacy and international relations, Regional Language Lampoon in Garhwali Language about Signals in Diplomacy and international relations , Ridicule in Garhwali Language about Signals in Diplomacy and international relations  , Mockery in Garhwali Language, Send-up in Garhwali Language about Signals in Diplomacy and international relations, Disdain in Garhwali Language, Hilarity in Garhwali Language about Signals in Diplomacy and international relations, Cheerfulness in Garhwali Language about Signals in Diplomacy and international relations; Garhwali Humor in Garhwali Language from Pauri Garhwal about Signals in Diplomacy and international relations; Himalayan Satire in Garhwali Language from Rudraprayag Garhwal about Signals in Diplomacy and international relations; Uttarakhandi Wit in Garhwali Language from Chamoli Garhwal about Signals in Diplomacy and international relations; North Indian Spoof in Garhwali Language from Tehri Garhwal about Signals in Diplomacy and international relations; , Regional Language Lampoon in Garhwali Language from Uttarkashi Garhwal about Signals in Diplomacy and international relations; Ridicule in Garhwali Language from Bhabhar Garhwal about Signals in Diplomacy and international relations; Mockery  in Garhwali Language from Lansdowne Garhwal about Signals in Diplomacy and international relations; Hilarity in Garhwali Language from Kotdwara Garhwal about Signals in Diplomacy and international relations; Cheerfulness in Garhwali Language from Haridwar about Signals in Diplomacy and international relations;




                      प्रवासियों ! पहाड़  विकास की बकबास करना बंद कीजिये !
                                            विचार -विमर्श    -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
जैसे ही पहाड़ों से हम मैदान में उतरते हैं और छोटी -बड़ी नौकरी पाते हैं हम पर अपने गाँव विकास का रणभूत लग जाता है। 
 
क्या मुंबई , क्या दिल्ली अर क्या नार्थ अमेरिका सब जगह  पहाड़ी संस्था बनाने में और पहाड़ विकास का नाम पर सेमीनार , गोष्ठी ऊर्यांण में  व्यस्त  जाते हैं और बहुत से प्रवासी जैसे  डा रामप्रसाद जी , डा बलबीर रावत जी जैसे वौद्धिक लोग रोज इंटरनेट पोर्टलों या फेसबुक में  रोज हजारों शब्द पहाड़ विकास के  नाम पर खर्च करते रहते हैं ।
किन्तु मुझे लगता है प्रवासियों और गाँव में रहने वालों के मध्य पहाड़ विकास  बारे में सोच में गहरा अंतर है। 
मेरा गाँव जसपुर (ढांगू , पौड़ी गढ़वाल ) एक आम गाँव है जहां खेती बंद हो चुकी है , बच्चों को ऋषिकेश -कोटद्वार में पढ़ाया जाता है 
इस बार ग्राम सभा चुनाव में में प्रधान के प्रत्यासी ने एक पैम्फलेट छापा जिसमे प्रत्यासी ने निम्न  15 कामो  लिए वोट मांगे हैं -


 १-गाँवों में रास्तों का पुनर्निर्माण ,
२- हर परिवार को शुलभ शौचालय दिलवाना 
३- मंदिरों के आधे अधूरे कार्य पुरे करवाना 
४- वृद्ध -विकलांग लोगों के पेंसन लगवाना 
 ५-गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करना 
६- शादी व्याह के लिए टेंट प्रबंध 
७- अधिक से अधिक स्ट्रीट लाइट लगवाना 
८- पानी की टंकियों की मरम्मत 
९- हर घर में पानी पंहुचाना 
१०- बरात घर निर्माण 
११- गाँव सुंदर व खुशहाल बनाना 
१२- बच्चो के लिए कोचिंग क्लास 
१३- कन्या धन व गौरी धन दिलवाना 
१४-चिकित्सा सेवा सही करवाना 
१५-जसपुर  सौंदर्यीकरण करना 


अधिकतर प्रवासी या संस्थाएं पहाड़ विकास गोष्ठी /लेखों निम्न बाते उठाते हैं -
१- गाव उजड़ रहे हैं कैसे खाली होते हुए गाँवों  से पलायन रोका जाय 
२- गाँव में रोजगार उपलब्ध किये जायँ 
 ३-खत्म होती कृषि के पुनर्स्थापना। बंजर धरती  को कृषि धरती में पुनः कृषि धरती में बदलना 
४- जल से /घराटों से  लघु स्तर पर विजली उत्पादन 
५- बागवानी व फूल उत्पादन 
६- वन उत्पादन को रोजगार व लाभ लेना 
७-सिंचाई के लिए साधन उपलब्धि 
 ८-शिक्षा में सुधार 
९- प्रवासियों को पहाड़ों में बसना 
१०- जड़ी बूटियों  को आर्थिक स्थिति सुधारने में योगदान  
११- चारा उत्पादन वृद्धि 
 १२-जंगली जानवरों से खेती रक्षा 
 १३-गाँवों में कम्प्यूटर प्रयोग , पुस्तकालय 
१४- ग्रामीण पर्यटन विकास 
आदि आदि 
उपरोक्त दो सोचों में अधिक अंतर क्या दर्शाता है ? निष्कर्ष  साफ़  कि गांवों में सिंचाई , कृषि , वैकल्पिक कृषि , रोजगार , पलायन पर रोक , उचित शिक्षा , विजली उत्पादन व वैकल्पिक ऊर्जा उत्पादन की कोई सोच है ही   नही है।  तो फिर हम प्रवासी फोकट में बकबास क्यों करते रहते हैं ?




Copyright@  Bhishma Kukreti  24  /6/2014   
                       मीन अपण ड्यारम मुर्गा बांधणाइ   

                  घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

मि -चचि ! त्वैकुण कथगा बोलि आल कि तू मिस काल नि कर्या कौर।  त्यार मोबाइलौ बिल मि मुंबई मा भरणु रौंद। 
चची -अरे ! काण्ड लग गेन।  इख गांव  मा मिस काल करणै आदत जि पड़ी गे।  त मि बिसर जांद कि त्वैकुण  फोन करणु छौं।
मि -अच्छा बता फोन क्यांकुण फोन किलै कार ?
चची -वु म्यार बिचार बौण गे कि चौक मा एक मुर्गा बंधे जाव। 
मि -अरे वाह ! यी त बढ़िया सोच च कि तख गां मा मुर्गी पालन करे जाव। 
चची -ओहो तू बि त
मि -चचि ! तू मुर्गी पालन करलि तो तू बि व्यस्त ह्वे जैलि।  गां वाळु तैं अंडा अर मुर्ग्युं बान इना ऊना दुसर गां नि डंडखण पोड़ल। 
चची -त्वै तै पता नी च अब रोज कोटद्वार बिटेन दूधक टेम्पो मा अंडा , ब्रेड , मक्खन अर मुर्गी बि आंदन तो अंडा -मुर्गी बान अब गांऊँ  मा नि डंडखण  पड़द।
मि -हाँ पर जब तू मुर्गी पालन करलि त लोगुं तैं गाँवी मा अंडा -मुर्गी मिलण मिसे जाल तो बढ़िया ह्वे जाल कि ना ?
चची -मै लगद तू अबि बि सुदबिज छे !
मि -नै। 
चची -त फिर मुर्गी पालन की छ्वीं किलै लगाणु छे।  अरे जब तेरी नौकरी लग त मीन खेती करण बंद करी छौ कि ना ?
मि - हाँ जनि मेरी नौकरी लग त गाँव वाळु सलाह पर तीन खेती करण बंद कार कि अब जब मन्योडर आइ जाल त खेती पर किलै हडका तोड़े जावन !
चची -अब जब सुंदरु (चचिक नौनु ) की नौकरी लग त मीन क्या कार ?
मि -तीन देखादेखी अर सकासौरी मा गौड़ी भैंस बेचीं देन। 
चची -ये जब दु दु कमाण वाळ ह्वे जावन त कैक दिमाग खराब हुयूं च जु मेनत कार।
मि -हाँ हम द्वी भायुंन बि ब्वाल कि बंद कौर सि खेती अर गौड़ -भैस पाळण।  
चची -जब तुमरि तनखा बढ़ तो मीन क्या कार ?
मि -तीन सग्वड़म साग भुज्जी बोण बंद कौर दे।   
चची -तो तू क्या समझणी छे मि मुर्गी पालन करलु ?
मि -पर त्वी   .... .... 
चची -अरे मी मुर्गी पालन करुल तो गां मा मेरी नाक नि कट जालि कि परिवार मा द्वी नौकरी करणा छन अर मि गुजर बसर का वास्ता मुर्गी पालन करणु छौं ? क्या ब्वालल लोग मेखुण ?
मि -हाँ पर तीनि त ब्वाल कि तू मुर्गा बाँधणी छे। 
चची -हाँ मीन मुर्गा बांधणो बात कार मुर्गी पालन की बात थुड़ा कार ?
मि -मुर्गा ? क्यांकुण चयाणु च मुर्गा ?
चची -सुबेर सुबेर बांग दीणो बान चयेणु च मुर्गा !
मि -सुबेर सुबेर बांग दीणो बान चयेणु च मुर्गा ? बांगक बान मुर्गा ?
चची -हाँ ! अचकाल बिजण मा तकलीफ ह्वे जांद।  क्वी सुबेर बिजाळण वाळ इ नी च।   भौत सा बगत त मि दुफरा मा बिजुद अर कबि कबि त दुसर दिन स्याम बिजुद। 
मि -पर द्वी घड़ी अलार्म वाळ छन।  एक मेकैनिकल अर एक इलेक्ट्रॉनिक घड़ी। 
चची -एक पर मि बार बार चाबी दीण भूल जांद अर दुसर घड़ी पर पता इ नि चलद कि कब बैटरी बदलण।  इनमा मि तैं कु  बिजाळलु ? 
मि -मोबाइल पर बि त अलार्म च ?
चची -अरे बिजोग पड़ जांद। मोबाइल मा 7 AM की जगा 7 PM सेट ह्वे जांद।  एक दिन मि मोबाइल कु अलार्म का चक्कर मा सुबेर सात बजिक जगा स्याम सात बजी बिजु। 
मि -हाँ त बगल मा कुटुंब की बोडी बि त च।  बोडी बि त बिजाळ सकदी च ? 
चची -हां पर तेरी बोडी  तै बि बिजाळण वाळ क्वी हूण   चयांद कि ना ? फिर हम द्यूराण -जिठाण छंवां तो हफ्ता मा एक दिन हम झगड़ा नि करदां तो हमर खाणक नि पचद।  त जब हम अबच ह्वे जाँदा त हम एक हैंक तैं बिजाळणो धै बि नि   लगौंदा।
मि -हाँ पर गां मा हौर बि जनन छन वो त बिजाळ सकदन कि ना ? 
चची -हाँ पर जब हमम कुछ काम नी च त हम सब समय बिताणो बान जब झगड़ा झगड़ा खिलदा तो वै टैम पर क्वी कै तैं नि बिजाळदु।  
मि -मतबल , सुबेर बिजणो बान मुर्गा आवश्यक च ? 
चची -हाँ ! घड़ी , मोबाईल , द्यूराण -जिठाण पर पूरा भरोसा ह्वे नि सकद त मुर्गा ही एक विश्सनीय चखुल च जै पर भरवस करे सक्यांद।
मि -त ठीक च  सुबेर सुबेर बांग दीणो बान बाँध दे मुर्गा चौक मा.  
चची -आज ही तू बीस हजार रुपया म्यार खाता मा ट्रांसफर कर दे । 
मि -बीस हजार रुपया मा मुर्गा ?
चची -ना ना ! बढ़िया मुर्गा तो द्वी सौ रुपया मा मील जालो।  मुर्गा कुण चौक मा मुरगाखाना बणाण पर बीस हजार रुपया खर्च आलो।
मि -ठीक च मी बीस हजार रुपया ट्रांसफर कर दींदु। 




Copyright@  Bhishma Kukreti  23 /6/2014   
    

*लेख में  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । 

Garhwali Humor in Garhwali Language about social and custom changes, Himalayan Satire in Garhwali Language about social and custom changes, Uttarakhandi Wit in Garhwali Language about social and custom changes, North Indian Spoof in Garhwali Language about social and custom changes , Regional Language Lampoon in Garhwali Language about social and custom changes, Ridicule in Garhwali Language about social and custom changes , Mockery in Garhwali Language about social and custom changes, Send-up in Garhwali Language about social and custom changes, Disdain in Garhwali Language about social and custom changes, Hilarity in Garhwali Language about social and custom changes, Cheerfulness in Garhwali Language about social and custom changes; Garhwali Humor in Garhwali Language from Pauri Garhwal about social and custom changes; Himalayan Satire in Garhwali Language from Rudraprayag Garhwal about social and custom changes; Uttarakhandi Wit in Garhwali Language from Chamoli Garhwal about social and custom changes; North Indian Spoof in Garhwali Language from Tehri Garhwal about social and custom changes; , Regional Language Lampoon in Garhwali Language from Uttarkashi Garhwal about social and custom changes; Ridicule in Garhwali Language from Bhabhar Garhwal about social and custom changes; Mockery  in Garhwali Language from Lansdowne Garhwal about social and custom changes; Hilarity in Garhwali Language from Kotdwara Garhwal about social and custom changes; Cheerfulness in Garhwali Language from Haridwar about social and custom changes;


                  दे दे बाबा एक कटोरी चून , अद्दा कटोरी झंग्वर , हंत्या पुजैक  सवाल च 

                    घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
एक जनानी - हे ममता दीदी ! इ क्या तू हमर गां कब ऐ अर रात कैक घौर ठैरीं छे ?
ममता - ये बिसनी !  मि त अपणि गाँव बिटेन  आणु छौं। 
बिसनी - हैं , ह्यां पण अबि त घाम तक नि आयि अर तू हमर गां पौंछि गे ? रतखुनी बि नि ह्वे होलि कि तू अपण गाँ बिटेन पैटी गे होलि हैं ?
ममता - भुली ! जै पर बितदी च ना वैकुण क्या दिन क्या रात ! बिजोग पड्युं च। 
बिसनी -हाँ मीन सूण च बल एक साल बिटेन तुम लोग बिपदा भुगणा छंवां बल !
ममता - नि याद दिला भूलि  , सन 2013 त मेरी ब्वे ! क्या क्या नि भुगण पोड़।  मेरी कुटुम्बै जिठाण अर मि बजार बिटेन इकदगड़ि एकी दुकान बिटेन दूधक थैली लांद छा।  मेरी जिठाण त दूध बि पींदी छे , दही बि जमान्द छे अर म्यार लयाँ दूध पर आंदि कीड़ पोड़ जांद छा। 
बिसनी - ये मेरी ब्वे !दूध मा चाहे थैलिक दूध हो बड़ो अपशकुन हूंद। 
ममता -वी त बुलणु छौं।  फिर पोरुक साल क्या सुंदर बीपीएल कु कार्ड ( below poverty line ) बणन वाळ छौ कि कैन लिखित भाँचि मारी दे कि म्यार कजै दिल्ली बड़ी नौकरी मा च। 
बिसनी - मि त बची ग्यों।   भलो ह्वेन पटवारी मामाक कि खूब कमाई हूणों बाद बि हम तै बीपीएल कार्ड मिल गे। पटवारी मामाक अर प्रधान ज्योरूक दया से मनरेगा स्कीम मा बि म्यार नाम च।
ममता -हमर त बुरा दिन चलणा रैन।  मनरेगा , जनरेगा , कुजाणकुरेगा जन सबि स्कीम बिटेन हमर नाम कटि गे।  बड़ो बुरो साल गुजर। 
बिसनी -हाँ इन स्कीमुं से नाम कटण से बड़ो अपशकुन ह्वेइ नि सकद।  कुछ टूण टण मण   नि कार ?
ममता -भौत कार पर कुछ नि ह्वे।  फिर बकीन बोल बल म्यार बड्या ससुर जीक हंत्या लगीं च। 
बिसनी - बड्या ससुर ? मीन त कबि नि देखिन !
ममता -हाँ वु दिल्ली रौंदा छा।  आज हम जु बि छंवां ऊंकी वजै से छंवां।  ऊनि त म्यार घुत्ता क बुबाजी तैं पढ़ै लिखै।  ऊ उखी दिल्ली ही खतम ह्वेन। क्वी दसेक  साल ह्वे गेन ऊँ तैं गुजर्यां। 
बिसनी -त अब आयि ऊंक हंत्या ?
ममता -हाँ , अब आइ ऊंक हंत्या। 
बिसनी - क्या बताइ  पुछेर -बकीन ?
ममता -क्या बताण छौ।  बड्या ससुर की मोरद दैं कोदाक रुटी , झंग्वर , अर गहथुं फाणु खाणै इच्छा छे पर बगैर कोदाक रुटी , झंग्वर , अर गहथुं फाणु खयाँ परलोक चली गेन।  
बिसनी -इ राम दा ! बिचारा बगैर कोदाक रुटी , झंग्वर , अर गहथुं फाणु खयाँ परलोक चली गेन ?
ममता -हाँ अर अब बाक मा बक्कीन बोल कि बड्या ससुरक आखिरी इच्छा पूर करण जरूरी च।  तो हंत्या घड्यळ मा पौन पश्वा तैं चुनाक रुटि , झंग्वर अर फाणु खलाण जरुरी च। 
बिसनी - हाँ ! अपण बड्या ससुर जीक आखिरी इच्छा हंत्या घड्यळ मा जरूर पूरी करी दे।  बिचारा अबि बि कोदाक रुटी , झंग्वर , अर गहथुं फाणु खुज्याणा होला।  
ममता -हाँ यांकी त रूण च 
बिसनी -ना ना ! तुमर बड्या ससुर जीन तुमकुण इथगा कार तो त्वे तैं ऊंकी इच्छा जरूर पूरी करण चयेंद। 
ममता -ह्यां पर कनकै बड्या ससुर जीक इच्छा पूरी करण ?
बिसनी - कनो जागरी नी मिलणु च ?
ममता -ना जागरी त मिल गेन पर समस्या कुछ हौरि च। 
बिसनी -ना ये दीदी , अपण बड्या ससुर जीक इच्छा पूरी करण आवश्यक च हाँ !
ममता -हाँ पर क्वादो चून , झंग्वर अर गहथ बि त चयाणा छन। 
बिसनी - कनो ?
ममता -हम तैं  त क्वादु , झंग्वर अर गहथ दिख्यां आठ साल ह्वे गेन।  
बिसनी -हाँ !
ममता -ब्याळि मि अपण गांवक न्याड़ ध्वार का सात गां घूम पर कै बि गां मा एक बि दाणी क्वाद , झंग्वर अर गहथ नि मील।  ऊना भौत सा बच्चोंन त क्वाद , झंग्वर अर गहथ कि दाणि बि नि देख।  अब आस मा त्यार गौं अयुं छौं कि इकै मुठ क्वाद , झंग्वर अर गहथ मिल जालो।
बिसनी - ये मेरी ब्वे    …
ममता -तू रुणि किलै छे ?
बिसनी - यां हमर गाँव वाळुन क्वाद , झंग्वर अर गहथ दिख्यां सात आठ साल ह्वे गेन।  अर हमर गां त छोड़  आस पास का कै बि गां मा  कुछ नि  मिल सकुद। पैल क्वाद , झंग्वर अर गहथ कोटद्वारम मील बि जांद छौ पर अब कोटद्वारम बि यी चीज नि मिल्दन।  
ममता -हैं ? तुमर क्षेत्र मा बि क्वाद , झंग्वर अर गहथक हरचंत ह्वे गे?
बिसनी -हाँ कखि बि नि मीलल।
ममता -अब क्या कौर मि।  जब कोटद्वारम नि यी अनाज नि मिलद त क्या कौरु?
बिसनी - बस एकी उम्मीद च।
ममता -कख ?
बिसनी -देहरादून …
ममता -देहरादून ? जब कोटद्वारम नि मीलल तो देहरादून मा कनकै मीलल ? 
बिसनी -ह्यां !  हिमाचल अर कश्मीर से जख्या , लुब्या ,क्वाद , झंग्वर अर गहथ देहरादून का दुकान्युं मा आंद। 
ममता -औ त कै तैं क्वाद , झंग्वर अर गहथ बान देहरादून भिजण ही पोड़ल 
बिसनी - हाँ देहरादून भिजण ही पोड़ल।
ममता -धन्य छन ऊ कश्मीरी अर हिमाचली लोग जु क्वाद , झंग्वर अर गहथ उगाणा छन। 
बिसनी -हाँ ऊंकी परताप सै हम गढ़वळी पहाड़ी अनाज खै लींदा ! 



Copyright@  Bhishma Kukreti  22/6/2014   
    

*लेख में  स्थान व नाम काल्पनिक हैं ।

Garhwali Humor in Garhwali Language about lack of Conventional Cereals , Himalayan Satire in Garhwali Language about lack of Conventional Cereals , Uttarakhandi Wit in Garhwali Language about lack of Conventional Cereals , North Indian Spoof in Garhwali Language about lack of Conventional Cereals , Regional Language Lampoon in Garhwali Language about lack of Conventional Cereals, Ridicule in Garhwali Language about lack of Conventional Cereals  , Mockery in Garhwali Language about lack of Conventional Cereals, Send-up in Garhwali Language about lack of Conventional Cereals, Disdain in Garhwali Language about lack of Conventional Cereals, Hilarity in Garhwali Language about lack of Conventional Cereals, Cheerfulness in Garhwali Language about lack of Conventional Cereals; Garhwali Humor in Garhwali Language from Pauri Garhwal about lack of Conventional Cereals; Himalayan Satire in Garhwali Language from Rudraprayag Garhwal about lack of Conventional Cereals; Uttarakhandi Wit in Garhwali Language from Chamoli Garhwal about lack of Conventional Cereals; North Indian Spoof in Garhwali Language from Tehri Garhwal; about lack of Conventional Cereals , Regional Language Lampoon in Garhwali Language from Uttarkashi Garhwal about lack of Conventional Cereals; Ridicule in Garhwali Language from Bhabhar Garhwal about lack of Conventional Cereals; Mockery  in Garhwali Language from Lansdowne Garhwal about lack of Conventional Cereals; Hilarity in Garhwali Language from Kotdwara Garhwal about lack of Conventional Cereals; Cheerfulness in Garhwali Language from Haridwar about lack of Conventional Cereals;

                                    चलो रेल भाड़ा वृद्धि  विरोध करला !

                                     घपरोळया -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

घरवळि -सुणो ! क्या छंवां तुम परजामा मा जयां ?
मि -हैँ ? मि त क्या सुंदर अमेरिकी लिख्वारौ उपन्यास पढ़णु छौं।  अर  तू बुलणि छे मि परजामा मा छौं।
घरवळि -ह्यां अमेरिका की सकासौरी नि कारो , पढ़ी लेखिक कबि भारत की सुध बि ले लिया कारो। 
मि -कनो , अबि बि हिंदी विरोध चलणु च ?
घरवळि -हाँ हिंदी विरोध त चलणु च पर हिंदी को अधिक प्रचलन या कम प्रचलन से हमर पुटकी सोग कम नि हूंद। 
मि -पर न्यूआर्क टाइम्स मा त कखि खबर नी च कि इण्डिया मा पुटकी सोग बच्युं च।
घरवळि -न्यूआर्क टाइम्स की छ्वाड़ा अर भारत टाइम्स पौड़ो। 
मि -क्या च भारत टाइम्स की हल्लाबोल खबर?
घरवळि -पता च सब विरोध मा ऐ गेन। 
मि -क्या सब रोड मा ऐ गेन ?
घरवळि -नै नै , अबि त अब सब टीवी मा विरोध जताणा छन ?
मि -बाई द वे ! विरोध क्यांक च ?
घरवळि - रेल भाड़ा वृद्धि का विरोध करणा छन। 
मि -कु कु विरोध जताणा छन ?
घरवळि -ममता बैणिक लोग इन तड़कणा  छन भुजद दैं जुंडळs दाण तड़कदन।    
मि -हाँ भूतपूर्व रेलमन्त्र्याणि ममता बैणि त रेल भाड़ा बढ़ोतरी ही ना रेल पटरी बढ़ान , ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल मार्ग बढाण पर बि तड़कदि। ममता बैणि वृद्धि शब्द से ही चिरड्यान्द!
घरवळि -समाजवादी पार्टी तो बबाल खड़ा करणै धमकी दीणी च कि यदि अल्पसंख्यकों तैं रेल मा रियायत नि मीलल तो उत्तर प्रदेश मा बलात्कार की घटनाओं मा असीमित बृद्धि ह्वे  जाली। 
मि -समाजवादी पार्टीक ले क्या , अफु त उत्तर प्रदेशौ बजट मा बेरोजगारी भत्ता , कन्यादान भत्ता अर लैपटॉप स्कीम खतम करणी च अर रेल भाड़ा बढ़ाण पर विरोध जताणी च।  
घरवळि -सि नवीन पटनायक बि विरोध करणा छन कि रेल भाड़ा बढ़ण से मंहगाई बढ़लि।  
मि -ओडीसा का मुख्यमंत्री से पूछो कि ओडीसा मा रेलमार्ग बढ़ानो वास्ता धन कखन आलो ? ओड़ीसा जन प्रदेश मा रेलमार्ग वृद्धि भारत की समृद्धि का वास्ता बहुत ही जरूरी च अर रेलमार्ग वृद्धि का वास्ता कै ना कै अकाउंट से पैसा आण जरूरी च। 
घरवळि -अपण कम्युनिस्ट नेता तो विरोध मा सरकारी बस -रेल जळाणो तयार बैठ्याँ छन पर कम्युनिस्ट कार्यकर्ता बुलणा छन बल अब हमसे भूखा पेट बस -रेल नि जळाये जांद।   
मि -भारतीय कम्युनिस्टों अर्थशास्त्र मेरी समज मा अब तक नि अयि।  कम्युनिस्ट सब चीज फ्री दीणो तयार बैठ्याँ छन किन्तु गौ बुरी चीज च जु यी भारतीयों तैं इन बतै साकन कि फ्री सर्विस याने मुफ्त सेवा का वास्ता धन उपलब्धि का क्या  साधन छन।
घरवळि -अपण नीतीश कुमार बि रेलभाड़ा वृद्धि की कड़क शब्दों मा आलोचना करणा छन। भमक्याणा छन नितीश कुमार जी ! 
मि -नितीश की आलोचना  मा असली दम च।  बिहार मा रोज बरोजगार पैदा हूणा छन अर वूं बेरोजगारों तैं रोजगार की खोज का वास्ता दिल्ली , मुंबई , गुजरात आण मा रेल भाड़ा वृद्धि से परेशानी तो होलि कि ना ?
घरवळि -हाँ बिचारा एक त बिहार मा रोजगार नी च अर फिर रेल भाड़ा वृद्धि ? बिचारा नितीश कुमार कु नराज हूण लाजमी च। 
मि -नितीश कुमार तैं दस साल पैल रेल भाड़ा वृद्धि पर ऊँका बयान का टेप दिखै द्यावो अफिक चुप ह्वे जाल। 
घरवळि -फिर अपणा भूतपूर्व  किंगमेकर  लालू यादव बि त विरोध करणा छन। 
मि -पॉलिटिकल जोकर लालू यादव तैं बिहार की ही पड़ीं होंदी तो भारत  कुदशा होंदी।  लालू यादव तो अर्थशास्त्र नाम को ही विरोधी च।
घरवळि -अर कॉंग्रेस बि रेल भाड़ा वृद्धि का पुरजोर विरोध करणी च। 
मि -सन 2014 कु पॉलिटिकल जोक ऑफ द यिअर या च कि जैं कॉंग्रेस सरकारन फ़रवरी 2014 मा रेल भाड़ा वृद्धि कु आदेश दे हो वाही कॉंग्रेस अब अपणो ही आदेस का विरोध करणी च।
घरवळि -सुणो ! तुम यी अमेरिकी किताब पढ़न बंद कारो। 
मि -क्यों क्या ह्वाइ ?
घरवळि -तुम आम जनता का विरोधी छ्वीं लगाणा छंवां। 
मि -देख जब तलक रोजगार मिलणो हो अर इनकम बढ़णो हो तो मूल्य वृद्धि तैं हरेक सहन कर सकद। 
घरवळि -ह्यां पण रोजगार मिलणा कख छन ?
मि -रोजगार का वास्ता नया प्रोजेक्ट्स चयणा छन अर नया प्रोजेक्ट्स का वास्ता पैसा चयेणु च अर रेलभाड़ा वृद्धि पैसा लाणो एक जरिया च।
घरवळि -नै नई सरकार तैं पैल भआरतियों की इनकम बढ़ाण चयेंद , रोजगार का अवसर पैदा करण चयेंद फिर रेल भाड़ा बढ़ाण चयेंद। 
मि -नै पैल धन कु इंतजाम हूण चयेंद जांसे कि नया नया प्रोजेक्ट लग जावन अर ज्यादा इनकम वाळु कुण सबसिडी कम हूण चयेंद
घरवळि -नै पैल प्रोजेक्ट लगण चयेंदन जांसे से जनताक इनकम बढ़ अर मूल्य वृद्धि तैं पचै साकन ! 
मि -यांकुणि त चिकेन ऐग सिचुएसन याने अंडा पैल आयि कि मुर्गी पैल आयि अवस्था बुल्दन !


Copyright@  Bhishma Kukreti  21/6/2014   
    

*लेख में  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । 




                      सोनिया जी ! मि तैं जरा  मुख्य मंत्री बणै द्यावदि !

                      घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )


घरवळि -सुणो ! क्या छंवां तुम मानसून आण पर बि सुनिंद सियां ?
मि -इख मुंबई मा क्वी हमर पुंगड़ पटळ छन जु म्योकुण मुंगरी बूणो उकरांत ह्वावु।
घरवळि -उ ठीक च पर उख दौड़ लगी च अर तुम अळगसाणा छंवां , लेजियाणा  (Lazy) छंवां। 
मि -हैं मीन त कखि  नि पौढ़ कि मैराथन दौड़ हूणि च ?
घरवळि -अहो ! मि मैराथन दौड़ की बात नि करणु छौं। 
मि -त क्यांक दौड़ हूणि च। प्याज इथगा बि मैंगा नि ह्वेन कि सब्जी मंडी दौड़ लगौं।
घरवळि -ह्यां मुख्यमंत्री कुर्स्युं  बान दौड़ चलणि च। 
मि -हैं कख च चलणि चीफ मिनिस्टर रेस ?
घरवळि -द लगाओ बल सुंगरुँ दगड़ मांगळ।  सरा दुन्या जाणि गे कि कख कख मुख्यमंत्री कुर्सी बान छौंपा दौड़ चलणि च अर तुम अनपढ़ जन बुना छंवां कख च चीफ मिनिस्ट्रै गद्दी बान रेस चलणि ! 
मि -बतादी त सै क्या हरीश रावत पर राहुल बाबा नाराज छन कि गौळै हड्डी किलै तुड़वाइ। क्या नीतीश कुमार माझी का काम से खुस नि छन ?   
घरवळि -औहौ ! मि बिहार की बात नि करणु छौं अर उत्तराखंड मा कॉंग्रेस तैं फेस लिफ्टिंग या फेस सेविंग की आवश्यकता थुका च। 
मि -फेस लिफ्टिंग ?
घरवळि -हाँ जब बि प्रदेसुं मा चुनाव नजदीक हूंदन तो भाजपा अर कॉंग्रेस फेस लिफ्टिंग का इनि काम करदि जन हम मेहमानो आण से पैल साफ़ सफाइ करदां अर कुर्सी इना -उना बदलदा। 
मि -औ जन उत्तराखंड मा भाजपान विधान सभा चुनाव आण से ठीक पैल द्वी दै बीसी खंडूड़ी तैं मुख्य मंत्री बणै छौ अर एक दैं दिल्ली मा सुषमा स्वराज तैं लीपा पोती ढंगढाळ मा मुख्यमंत्री बणै छौ अर फिर बि चुनाव हारी गे छा  
घरवळि -हाँ।  जब प्रदेश मा विकासहीनता , भ्रष्टाचार , स्कैम , निट्ठलापन , मंत्र्युं गैरजिम्मेदाराना काम से पार्टीकी की छवि प्रदूषित ह्वे जांद त ऐन चुनाव का बगत भाजपा अर कॉंग्रेस उजड्यूं कूड़ पर पुराणो  रंग रोगन लगांदि याने मुख्यमंत्री बदलदी कि जांसे लोग भ्रमित ह्वे जान , जनता बेवकूफ बण जावन , वोटरूं ध्यान अनाचार -भ्रष्टाचार से दूर ह्वे जावो। 
मि -औ ! त कख कख विधानसभा चुनाव नजीक छन ?
घरवळि -महाराष्ट्र , हरियाणा , झारखंड मा चुनाव नजीक छन। 
मि -वो तबि झारखंड मा लोगुं तैं मूर्ख बणाणो बान यशवंत सिन्हा चौदा -पंदरा दिन जेल मा रैन ? नाटकबाज ! स्वांग !
घरवळि -हाँ बुड्या तैं लगणु च कि झारखंड का लोग भकलौण  मा ऐ जाल। 
मि -तो फिर महाराष्ट्र अर हरियाणा मा बि मुख्य मंत्री बदल्याणा होला ?
घरवळि -हाँ ! सोनिया जिठाण यूँ प्रदेसूं मा छवि साफ़ करणो बान मुख्यमंत्री बदलणी च। 
मि -जब समय छौ त सोनिया बौन ध्यान नि दे त अब क्या ह्वाल।
घरवळि -ओहो पता च कॉंग्रेस तैं टेम्पोरेरी चीफमिनिस्टर चयाणा छन जौंकि छवि दूध जन उज्यळी ह्वावो अर जौंतैं हरियाणा अर महाराष्ट्र की टेम्पोरेरी कमान दिए जाव। 
मि -कॉंग्रेस मा त ये जनम मा भ्रष्टाचार अर कामगति का हिसाब से बेदाग़ छवि वाळ मुख्यमंत्री त मिल नि सकद।
घरवळि -तबि त मि बुलणु छौं कि तुम बि मुख्यमंत्री की रेस मा शामिल ह्वे जावो। 
मि -मि ?
घरवळि -हाँ तुमर छवि तो गंगा जन पवित्र च। 
मि -पर मि तै किलै सोनिया बैणि मुख्यमंत्री बणाली ?
घरवळि -कनो जब विजय बहुगुणा जन मनिख मुख्यमंत्री बण सकद तो तुम नि बण सकदा ?
मि -कॉंग्रेस का मुख्यमंत्री बणनो बान क्या क्या करण पोड़द ?
घरवळि -बस सोनिया का चमचों की दिन रात चमचागिरी करण पोड़द अर सुपिन मा बि रटण पोड़द कि सोनिया इज इण्डिया ऐंड इंडिया इज सोनिया अर दगड़ मा राहुल गांधी की जयजयकार बि जरूरी च 
मि -ठीक च मि अबि दिल्ली जांद अर मुख्यमंत्री की रेस मा शामिल ह्वे जांद।
घरवळि -हाँ पर आठ दस बोतल मक्खन की जरूर लीजैन। 




Copyright@  Bhishma Kukreti  20/6/2014   
    

*लेख में  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । 

Garhwali Humor in Garhwali Language on Congress Changing Chief Ministers , Himalayan Satire in Garhwali Language on Congress Changing Chief Ministers , Uttarakhandi Wit in Garhwali Language on Congress Changing Chief Ministers , North Indian Spoof in Garhwali Language on Congress Changing Chief Ministers, Regional Language Lampoon in Garhwali Language on Congress Changing Chief Ministers , Ridicule in Garhwali Language on Congress Changing Chief Ministers  , Mockery in Garhwali Language on Congress Changing Chief Ministers, Send-up in Garhwali Language on Congress Changing Chief Ministers, Disdain in Garhwali Language on Congress Changing Chief Ministers, Hilarity in Garhwali Language on Congress Changing Chief Ministers, Cheerfulness in Garhwali Language on Congress Changing Chief Ministers; Garhwali Humor in Garhwali Language from Pauri Garhwal on Congress Changing Chief Ministers; Himalayan Satire in Garhwali Language from Rudraprayag Garhwal on Congress Changing Chief Ministers; Uttarakhandi Wit in Garhwali Language from Chamoli Garhwal on Congress Changing Chief Ministers; North Indian Spoof in Garhwali Language from Tehri Garhwal on Congress Changing Chief Ministers; , Regional Language Lampoon in Garhwali Language from Uttarkashi Garhwal on Congress Changing Chief Ministers; Ridicule in Garhwali Language from Bhabhar Garhwal on Congress Changing Chief Ministers; Mockery  in Garhwali Language from Lansdowne Garhwal; on Congress Changing Chief Ministers Hilarity in Garhwali Language from Kotdwara Garhwal on Congress Changing Chief Ministers; Cheerfulness in Garhwali Language from Haridwar on Congress Changing Chief Ministers;


                नरेंद्र मोदी अर मंहगाई की आपसम  छ्वीं -बथ 

              घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

नरेंद्र मोदी (अफिक , मुस्करांद -मुस्करांद )- थोड़ा सा गुजरात मॉडल , थोड़ा सा विदेश नीति , थोड़ा सा कड़क प्रसासन अर यांमा मिलाये जाए अर फिर NGO पर लगाम, वांमा विरोध्युं कचुम्बर मिलाये जाए , फिर मिलाये जाए मंत्र्युं पर कसके  लगाम , वो अच्छे दिन हैं , वो ही अच्छे दिन हैं।  वाह रे नरेंद्र मोदी ! वेरी गुड सचमुच मां अच्छा दिन ऐ गेन ! 
अरे यी अच्छे दिन का मध्य  अंध्यर लेक कु आयि ?
मंहगाई - पहचान कौन ?
नरेंद्र मोदी -ज्वी बि छे , जरूर तू विरोधी दल या कै विदेशी फंडेड NGO की चाल छे। 
मंहगाई -मनमोहन सिंह तैं बि याइ गलतफहमी छे कि मि भाजपा अर विदेशी षड्यंत्र की देन छौं। 
नरेंद्र मोदी - क्या तू पाकिस्तानी करतूत छे ?
मंहगाई -पाकिस्तानी करतूत तो सीमा पर दिखेंदी।  इख पीएमओ मा पाकिस्तानी काळो  कुकर्मों क्या काम -काज ?
नरेंद्र मोदी -क्या तू दिल्ली मा बिजली संकट छे ?
मंहगाई -बजिली संकट का निवारण तो ऊर्जावान ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल करणु होलु। 
नरेंद्र मोदी -यां पर तू अदिखळ किलै छै?
मंहगाई -मि विरोधी दल का वास्ता अमूर्त मा मूर्त अर सरकारी राजनीतिक दल का वास्ता मूर्त मा अमूर्त छौं याने आज कॉंग्रेस , कम्युनिस्ट , TMC वाळ मि तैं देखि सकणा छन किन्तु भाजपा का नेताओं का आँख मै तैं नि देख सकदन। 
नरेंद्र मोदी -नरेंद्र मोदी आज कु सुपर मैन च वै तैं सब दिखेंद।  अवश्य ही तू कॉंग्रेस का भिज्युं क्वी भूत छे।
मंहगाई (अट्टाहास ) -हा हा ! राहुल गांधी बि इनि सुचद छौ कि मि भाजपा कु भिज्युं महारागस छौं। 
नरेंद्र मोदी -सूण ! त्यार खुट मा पड़दु तु बतै दि कि तू कु छे. कामक ह्वेल तो मि त्वै तैं कै प्रदेश कु राजयपाल तो बणाइ इ द्योलु।
मंहगाई (और जोर कु अट्टहास ) -मि मंहगाई छौं। 
नरेंद्र मोदी (अर्धचेतन अवस्था मा , जोर से चिल्लैक ) -ये नर्भागण , बिसैली नागण मि तेरी खोज मा छौ। 
मंहगाई (मुस्करांद ) -मीन ब्वाल नी च कि मि सरकारी दल का वास्ता मूर्त मा अमूर्त छौं।  इलै भाजपा का नेता खुज्याण पर बि मै तै नि देख सकदन।  
नरेंद्र मोदी -हाँ जब तलक चुनावुं रिजल्ट नि ऐ छा तब तलक त मि तैं तू हर समय दिख्यांदी छे किन्तु जनि मीन शपथ ले मि तैं लगद कि तू ईं दुनिया मा छैंइ नि छे। 
मंहगाई -पर तू तो मेरी खोज मा इ छे कि ना ?
नरेंद्र मोदी -हाँ उ मीडिया मा रोज आणु च कि मंहगाई बढ़णि च , अखबार अपण पैलो पन्ना काळु करणा छन कि मैंगै कु बज्जर पड़ी गे।
मंहगाई -तो ?
नरेंद्र मोदी -यां ते से गुजारिस च कि झट तू तौळ आ । पता च मीन प्रोमिस करि छौ कि अच्छे दिन आने वाले हैं।
मंहगाई -ठीक च तू डीजल , पेट्रोल की कीमत कम कर दे मि बढ़ण बंद करी देलु। 
नरेंद्र मोदी -मजाक , मसकरी बगत नी च।  डीजल -पेट्रोल की कीमत भैर देस वाळ निश्चित करदन।  अर फिर सि ईराक मा गृह युद्ध छिड़ गे तो पेट्रोल -डीजल का दाम असमान पौंचि गेन।
मंहगाई -तो डीजल -पेट्रोल पर सबसिडी दे दी। 
नरेंद्र मोदी -द लगा बल सुंगरुँ दगड़ मांगळ ! पेट्रोल अर डीजल मा सबसिडी दीणो कुण पैसा इ नि बच्यां छन।
मंहगाई -कनो ?
नरेंद्र मोदी -सि अपण चंद्रा बाबून अरबों रुपयों सब्सिडी दे आल , जयललितान मेरी आस मा भौत सा सबसिडी दे आलिन।  इनि हौर राज्य सरकार सबसिडी दींद नि अघाणा छन अर फिर भौत सा केंद्रीय सबसिडी अबि हमन दीणन।  इनमा पेट्रोल -डीजल पर सबसिडी बढ़ौल तो भारत बीच बजार मा ऐ जाल। 
मंहगाई -तो किसानुं तैं फसल मूल्य कम कर दे। 
नरेंद्र मोदी (रुणफती ह्वेक )  -क्या बकबास करणी छे।  मि त किसानु फसल मूल्य वृद्धि की योजना लेकि बैठ्युं छौं।
मंहगाई -तो सैकड़ों उद्योगपति जु सरकारी बैंको पैसा लोन का नाम पर हजम करिक बैठ्याँ छन ऊंसे  खरबो रुप्या मील जाल।  सुणण मा आई कि उद्योगपति एक लाख करोड़ से अधिक रुपया लोन का नाम पर खै गेन। 
नरेंद्र मोदी -ह्यां पर  यदि हम यूँ उद्योगपतियों पर कानूनी कार्यवाही करदा तो सैकड़ों साल लग जाल अर फिर उद्यम बढ़ाणो बान यूँ उद्यमियुं तैं खुस रखण बि जरूरी च।
मंहगाई -तो कुछ टैक्स कम करि दे। 
नरेंद्र मोदी -उनि बि फिस्कल डेफिसिट इथगा जादा च कि अब विश्व का बैंकर्स हम तैं लोन दीण से डरणा  छन। अब टैक्स कम करण मतबल आर्थिक स्थिति को सत्यानास !
मंहगाई -तो सरकारी गोदामुँक अनाज बांटी दे।  त्वी बि त अपण चुनावी भाषणु मा बुल्दु  छौ कि गोदामुँ मा अनाज सड़नु च किन्तु यूपीए सरकार अनाज बांटणी नी च। 
नरेंद्र मोदी -ह्यां मि त अनाज राज्यों कुण अबि भिजणो तयार छौं पर राज्य उठाणो तयार नि छन।
मंहगाई -किलै ?
नरेंद्र मोदी -राज्यों पास इथगा स्टोरिंग कैपेसिटी नी च कि वो एडिश्नल अनाज मंगै साकन।  फिर काण्ड लगीं छन।
मंहगाई -क्या ?
नरेंद्र मोदी -राज्य अनाज मँगाई बि ल्याल तो हमर माल गाडी इथगा माल इथगा जल्दी नि पौंछे सकदन। 
मंहगाई -तो सटोरिया अर जमाखोरों पर लगाम कसो। 
नरेंद्र मोदी -यु  काम तो राज्य सरकारों कु च अर राज्य सरकार का राजनीतिज्ञों तैं यी सटोरिया अर जमाखोर चंदा दींदन तो यूँ जमाखोरों पर हम क्वी कड़ी करवाई नि कर सकदां।
मंहगाई -तो अब क्या मन्शा च ?
नरेंद्र मोदी -कुछ ना ! बस रोज हमारा मंत्री टीवी मा बयान द्याला कि मंहगाई को रोकने के लिए कड़े से कड़े कदम उठाये जा रहे हैं।
मंहगाई -अर अफु तू क्या करिलि ?
नरेंद्र मोदी -मी इंद्र देव की पूजा करलु कि ये साल अच्छो खासा मानसून दे दे प्रभु।




Copyright@  Bhishma Kukreti  18/6/2014   
    

*कथा , स्थान व नाम काल्पनिक हैं। 


Garhwali Humor in Garhwali Language on Curbing Inflation , Himalayan Satire in Garhwali Language on Curbing Inflation , Uttarakhandi Wit in Garhwali Language on Curbing Inflation , North Indian Spoof in Garhwali Language on Curbing Inflation , Regional Language Lampoon in Garhwali Language on Curbing Inflation, Ridicule in Garhwali Language on Curbing Inflation  , Mockery in Garhwali Language on Curbing Inflation, Send-up in Garhwali Language on Curbing Inflation, Disdain in Garhwali Language on Curbing Inflation, Hilarity in Garhwali Language on Curbing Inflation, Cheerfulness in Garhwali Language on Curbing Inflation; Garhwali Humor in Garhwali Language from Pauri Garhwal on Curbing Inflation; Himalayan Satire in Garhwali Language from Rudraprayag Garhwal on Curbing Inflation; Uttarakhandi Wit in Garhwali Language from Chamoli Garhwal on Curbing Inflation; North Indian Spoof in Garhwali Language from Tehri Garhwal on Curbing Inflation; , Regional Language Lampoon in Garhwali Language from Uttarkashi Garhwal on Curbing Inflation; Ridicule in Garhwali Language from Bhabhar Garhwal on Curbing Inflation; Mockery  in Garhwali Language from Lansdowne Garhwal on Curbing Inflation; Hilarity in Garhwali Language from Kotdwara Garhwal on Curbing Inflation; Cheerfulness in Garhwali Language from Haridwar on Curbing Inflation;


                   गढ़वळयूं  से नेपाली अर बंगलादेशी संस्कृति बचाण आवश्यक च 
                घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
आमार सोनार बंगलादेश दैनिक  , पौड़ी अंक , दिनांक  16 जून सन 2114, कुछबि बार, पौड़ी ,  

           उत्तराखंड मा पिछ्ला सौ सवा साल से बस्यां नेपाली समाज अर बंगलादेशी समाज  भौत सा खतराऊँ सामना करणा छन।   ब्याळि मंत्री जंग बहादुरन (नेपाली ओरिजिन का)  अल्पसंख्यक मंत्री (ग्रामीण उत्तराखंड ) घना नन्द से भेंट कार अर ग्रामीण गढ़वाल मा अल्पसंख्यक गढ़वालियुं द्वारा बहुसंख्यक नेपाल्यूं  अर बंग्लादेस्यूं का अधिकार हनन की शिकायत कार। विदित ह्वावो कि ग्रामीण गढ़वाल मा अल्पसंख्यक गढ़वाली बहुसंख्यक बंगलादेशी-नेपाल्युं मध्य तनातनी पिछ्ला पिचहतर सालों से चलणि च। गढ़वाल का पुराणा बासिन्दा गढ़वाली यीं बात तैं नि पचै सकणा छन कि अब ग्रामीण गढ़वाल मा गढ़वाल्युं क्वी औकात नी च अर यीं निराशा मा गढ़वाली भौत बार नेपाली -बंग्लादेस्यूं पर लांछन हि नि लगांदन बल्कि भौत दैं आक्रमण करणै मुद्रा मा ऐ जांदन। 
            ज्ञात हो कि गढ़वाल से मॉस माइग्रेसन का कारण सन 2025 तक गढ़वाली गाँव खाली सि ह्वे गे छा।  इन मा गढ़वाल मा अयाँ नेपाली -बंगलादेशी मजदूरोंन अद्धा त्याड़ मा खेती करण शुरू कार अर कुछ साल मा सरा ग्रामीण गढ़वाल की कृषि भूमि पर बंगलादेशी अर नेपाल्युं कब्जा ह्वे गे।  किंतु कुछ गढ़वाली नौकरी का खोज मा भैर नि गेन अर प्रवास्युंन अपण बाप दादों कूड़ु पर कब्जा नि छ्वाड़  अर यांसे ही आज ग्रामीण गढ़वाल मा रोज कखि ना कखि गढ़वाली अर कर्मठ नेपाल्युं -बंग्लादेस्यूं मध्य लड़ाई झगड़ा चलणु रौंद।  बेकार का गढ़वाली अल्पसंख्यक हूण से अल्पसंख्यक क़ानून का गलत फायदा उठांदन अर भूमिवीर नेपाल्युं -बंग्लादेस्यूं पर झूठा आरोप लगैक पुलिस कम्प्लेंट करी दींदन अर यांसे क्षेत्र मा अनावश्यक तनाव फ़ैल जांद।  इनि जब ग्रीष्म ऋतु मा ना इखाक ना उखाक प्रवासी गढ़वालीनागराजा , नरसिंघ पुजणो समूह मा आंदन तो पिचहतर सालों से बस्यां कामगति नेपाली -बंग्लादेस्यूं से अपणी कृषि भूमि वापस मांगदन अर तू तू मै मै से बात अग्वाड़ी बढ़ जांद , बात हाथा पाई से लेकि मारा मारी पर पौंच जांद।  यांसे गर्म्युं मा ग्रामीण गढ़वाल मा क़ानून व्यवस्था चरमराई जांद।  यद्यपि ये बगत ग्रामीण कुमाऊं अर गढ़वाल मा अतिरिक्त पीएसी की बटालियन कु बि इंतजाम हूंद किन्तु फिर बि गर्म्युं मा प्रत्येक गां मा लड़ै -झगड़ा ह्वैइ जांद।  स्थानीय वासी नेपाली -बंग्लादेस्यूं बुलण च कि पीएसी बि अनावश्यक रूप से पक्षपात करदी अर बहुसंख्यकों की नि सुणदि अपितु अल्पसंख्यक गढ़वाल्युं तैं अधिक शरण दींदी , फेवर करदि।  
  भौत सा बगत बेकामौ गढ़वाली प्रवासी सौ -द्वी साल पुरण पेड़ पर अपण कब्जा जमाणै कोशिस करदन अर यांसे बि दंगा फसाद शुरू ह्वे जांद। 
  राणा दंग बहादुर अर निजामुद्दीन कमेटीन सरकार तैं सलाह दे छौ कि ग्रामीण अल्पसंख्यक गढ़वाल्युं तैं देहरादून -ऋषिकेश मा बसाये जाव जांसे ग्रामीण गढ़वाल मा शान्ति स्थापित ह्वे साक किंतु किदल जन कमजोर सरकार अल्पसंख्यकों की ही सुणदि अर बहुसंख्यक कर्मठ नेपाल्युं अर बंग्लादेस्यूं बातुं पर ध्यान नि दींदी। 
             परसि बहुसंख्यक समाज की एक मीटिंग मा चिंता व्यक्त ह्वे कि भौत सा बहुसंख्यक लोग अल्पसंख्यक गढ़वाल्युं नकल करिक नागराजा , नरसिंघ , घड्यळ पूजा करण लगि गेन अर यांसे खासकर बंगलादेशी संस्कृति खतम हूणै कगार पर च अर भौत सा नेपाल्युंन गढ़वाली रिवाज अपनाई याल तो नेपाली संस्कृति पर बि खतरा मंडराणु च।  मीटिंग मा एक मत छौ कि   गढ़वळयूं  से नेपाली अर बंगलादेशी संस्कृति बचाण आवश्यक च ।  
  





Copyright@  Bhishma Kukreti  17/6/2014   
    

*कथा , स्थान व नाम काल्पनिक हैं। 

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                           स्या देखो ! दूधs  फैक्ट्री टुटकी लगीं च 

                घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
हमर इलाका मा कथगा इ पुरात्व भवन उजड़ी -बिजड़ी हरचणा छन। इनि एक आधुनिक भवन बि अब आर्किओलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया का तहत आण वाळ च याने जु अब उजड़न वाळ च।  ये भवनकुण हमर क्षेत्र मा बुले जांद सि देखि लेदि दूध फैक्ट्रिक टुटकी लगीं च।  याने मिल्क प्लांट उजड़णु च।
हमर इलाका मा दूधौ फैक्ट्री कनकै लग वांपर कथगा इ लोककथा क्षेत्र मा प्रचलित छन पर हमर लोक साहित्य का चितेरा जन कि हमर क्षेत्र याने अजमेर पट्टी का लोक साहित्य विशेषज्ञ डा दिनेश बलूनी यूँ तैं लोककथा नि माणदन तो श्रीनगर तर्फां डा राजेश्वर उनियाल या मथि मुल्क का डा नन्द किशोर ढौंडियाल कनै यूँ सत्य कथाओं तैं लोककथा मानि सकदन।  डा बलूनी का माणन च कि चूँकि यूं कथा मा लोकसभा का वर्णन च त यी कथा लोककथा नि ह्वे सकदन। डा दिनेश  का समर्थन मा डा ढौंडियाल बि ऐ गेन अर ऊँन ल्याख कि लोककथाओं मा  लोकसभा ना राजा का दरबार हूण चयेंद। 
खैर लोग  डा बलूणी तैं ऊंक गाँव छोटी बागी, अजमेर मा ही , डा ढौंडियाल तैं कोटद्वार मा बि अर डा उनियाल तैं मुंबई मा बि गंभीरता पुर्बक नि लीन्दन तो हमर इलाका वाळ दूध फैक्ट्री की कथाओं तैं लोककथा ही बुल्दन। 
एक लोककथा इन च -
उन त हमर भूतपूर्व सांसद राहुल गांधी का अनुयायी छन अर ऊंन इथगा सालुं मा लोकसभा मा राहुल गांधी तरां एक दिन बि जिबडु नि ख्वाल।  पर वैदिन गलती से पार्टीन हमर एमपी याने सांसद तैं शून्य काल मा एक मिनट बुलणो समय दे द्याई। अर शून्य काल का एकदम बाद प्रधानमंत्री कु चीन सीमा विवाद पर बयान छौ तो स्पीकरन हमर सांसद तैं हिदायत दे कि एक मिनट से ज्यादा कतै नि बुलण।  प्रधान मंत्री बि संसद मा उपस्थित छा।  हमर सांसद तैं भाषण दीणो रोग त छौ पर पिछ्ला दस सालों मा लोकसभा मा मेज थपथपाणो अलावा बुलणो क्वी अनुभव नि छौ।  हमर सांसदन रुणफती भौण जन कि कै मूसो शरीर मथि तुमर खुट ऐ जावो उनि किरांदी भौण मा बोलि दे कि म्यार क्षेत्र मा दूध की बड़ी किल्ल्त च तो इख मिल्क प्लांट लगण चयेंद। उन त प्रधानमंत्री इन बेकार की बातों पर कतै बि ध्यान नि दींदा छा किन्तु हमर सांसद का चूहा जन रूण /किराण वाळ भौण से द्रवित ह्वे गेन अर ऊंन इन सांत्वना दे जन कि सांसद की ब्वै मरी गे हो अर ब्वाल ," आप ससंद समय का बाद अपणी मांग एक पन्ना मा लेखिक मै तैं म्यार कैबिन मा दे देन।  "
ससंद समय खतम हूणो बाद सांसद जी  प्रधानमंत्री कक्ष मा गेन अर दूध फैक्ट्री खुलणो एक अप्लीकेसन देकि ऐगेन।  जिंदगी मा पैल बार सांसद जीन जन भलाई का वास्ता अप्लीकेसन टाइप करे छे।  अप्लीकेसन पढ़िक प्रधान्मन्त्रीक निम्न सचिवन बोल ," इखमा फैक्ट्री कखम लगण कु स्थान नि लिख्युं च? " सांसद कु हमर क्षेत्र याने यमकेश्वर विधान सभा क्षेत्र की विधायिका से बहुत दिनों से खटपट चलणि छे अर हर समय क्या सुपिन मा बि सांसद जीक मुख से यमकेश्वर क्षेत्र वालों को देख लूंगा जन वाक्य आंदा छा तो रगाबगी मा ऊंन यमकेश्वर क्षेत्र कु नाम बोलि दे अर सचिवन बि विषय मा लेखी दे - यमकेश्वर में दूध फैक्ट्री खोलने का औचित्य। सांसद जी अप्लीकेसन देकि भैर ऐ गेन। 
इना प्रधान मंत्री का कक्ष मा चीन बॉर्डर पर मिलिट्री इनफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की अर्जेंट फ़ाइल बि मेज मा पड़ीं छे अर सचिव की गलती से यमकेश्वर मा दूध फैक्ट्री की अप्लिकेसन मिलिट्री इनफ्रास्ट्रक्चर की अर्जेंट फ़ाइल पुटुक चली गे। 
प्रधानमंत्री अर हौर सचिवुँन वीं अप्लिकेसन मा लेखी दे बल यमकेश्वर क्षेत्र चूँकि चीन बॉर्डर का नजीक च तो छै मैना मा ख दूध फैक्ट्री खोले जाव। चूँकि विषय चीनी बॉर्डर कु छौ अर अप्लिकेसन मा प्रधानमंत्री का सही छा तो हमर क्षेत्र मा मिल्क प्लांट खुलणो योजना द्वी दिन मा पास ह्वे गे।  चूँकि विषय मिलिट्री अर चीन बॉर्डर से संबंधित छौ , केंद्रीय बजट बि पास हुयुं छौ तो उत्तराखंड सरकार का प्रशासकोंन बीस दिन मा जगा बि ख्वाज अर बीस दिनों मा आर्किटेक्ट स्ट्रक्चर की रूप रेखा बि बणै दे।  जैकाम पर पांच साल लगदन उ काम बीस दिन मा ह्वे गे अर बाइसवाँ दिन से फैक्ट्री निर्माण कु काम बि शुरू ह्वे गे। 
चूँकि ब्लॉक प्रमुख अर ग्राम प्रधान आदि तैं यीं योजना से क्वी फायदा नि छौ त ऊंन ध्यान बि नि दे कि क्या हूणु च।  सांसद जी चिरडे गेन कि दूध की फैक्ट्री यमकेश्वर विधान सभा क्षेत्र मा लगणी च अर विधायिका चिरड़े गे कि जै क्षेत्र मा वीं तैं वोट नि मिल्दन ऊख फैक्ट्री खुलणि च तो दुयाक द्वी दिखणो बि नि ऐन कि दूध की फैक्ट्री कन बणनि च। 
चूँकि हमर गाँवमा स्थानीय मजदूर हर्ची गेन तो हमर क्षेत्र वाळु पर फरक बि नि पोड कि फैक्ट्री निर्माण हूणु च।  निर्माण ठेकेदार अपर दगड़ कोटद्वार से नेपाली , बंगलादेशी , पूर्वी भारत का मजदूरूं से समयबद्ध तरीका से फैक्ट्री निर्माण मा व्यस्त छौ। 
 पर धीरे धीरे गांवुं मा छ्वीं लगण बैठिन कि अब ये कूड़ से दुधै छवाया फुटल , कैन बोल बल मिलक फैकटरी से नळको जन दूध गाँव गाँव पंहुचाये जाल।  क्वी बुलणु छौ बल दूधौ फैक्ट्री से कूल गाडे  जालि अर तब दूध घर घर पौंछल। 
सरा क्षेत्र का लोग खुस छा कि अब रासन , शराब , चॉकलेट जन दूध बि गांऊं मा उपलब्ध ह्वे जाल। 
पैल पहल मास्टर लोगुंन कार।  उन अपण गौड़ी -भैंसी बेचीं देन कि जब फैक्ट्री से दूध मिलण लग जाल तो बेकार मा गौड़ी पाळणै   मेनत किलै करे जाव।  कुछ दिन वो बजार से दूध मंगाण गीजि गेन। 
मास्टरुं की  देखादेखी हौर लोग  बि अपण गौड़ी -भैंसी नजीबाबाद बेचीं ऐ गेन ।  अर अबै जनसंख्या आकलन मा हमर क्षेत्र का गांऊं मा एक बि गौड़ी -भैंसी नि पाये गे। सरा क्षेत्र गौड़ी -भैंस बिहीन ह्वे गे। 
इना दूध की फैक्ट्री अपण समय पर तैयार ह्वे गे।  चूँकि सांसद अर विधायिका मा गरुड़ -गुराव जन  बैर छौ तो दुयुं मादे दूध फैक्ट्री शुभारम्भ करणो क्वी बि तयार नि ह्वे। इख तलक कि स्थानीय नेताऊँ कैंची बि हर्ची गे छे। 
फैक्ट्रीक जनरल मैनेजरन लाल रिबन काटिक उद्घाटन कार। 
अब जब फैक्ट्री खुली गे तो स्थानीय लोग दूध खरीदणो फैक्ट्री ऐन पर फैक्ट्री मा दूध कु नामो निशाण नि छौ , उल्टां फैक्ट्री का कारीगर गाऊं मा दूध खरीदणो जाणा छा कि हम तैं दूध द्यावो हम दूध पैक करिक दूध बिचला। 
लोग बेहोश हूणा छा कि या दूध की कन फैक्ट्री च ज्वा दूध निर्माण की जगा लोगुं से दूध खरीदी करण चाणी च।  लोगुं तैं अब जैक पता चल कि दूध की फैक्ट्री माने दूध कु पास्चराइजेसन अर दूध कु पैकिंग।  ये मेरी ब्वे ! घ्वाड़ा चढ़णो खरीद छौ अर घ्वाड़ा बुकण पड़णु च। 
दूध फैक्ट्रीक कारिंदोंन क्षेत्रीय लोगुं से विनती कार कि गौड़ -भैंस पाळो अर दूध हमम ब्याचो।  पर हमर तरफां लोग अपण मान सम्मान की रक्षा मा अग्वाड़ी छन अर कैन बि गौड़ -भैंस पळण मुनासिब नि समझ अरे गढ़वाली अर दूध ब्याचल ? 
दूध फैक्ट्री तैं जब गाउँ से दूध नि मील तो कुछ समय बाद फैक्ट्री बंद करे गे अर फैक्ट्री मशीनरी कखि हौर जगा स्थानांतरित करे गे।  अब दूध फैक्ट्री भवन टूटी फूटी गे अर ऊख सुंगरुं बसेरा ह्वे गे। 
जख तलक लोगुं सवाल च ऊंकुण फैक्ट्री क उजड़न नई बात नी च।  गां मा हर साल एक प्रवासी कूड़ उजड़णि ही रौंद तो फैक्ट्री बि उजड़ी गे तो क्या ह्वे गे। यीं फैक्ट्री देखिक लोग बुल्दन - स्या देखो दूधै फैक्ट्री टुटकी लगीं च ! 
मॉरल ऑफ दि स्टोरी - स्थानीय लोगुं रजामंदी अर सम्मलितीकरण विकास योजना मा आवश्यक च। 








Copyright@  Bhishma Kukreti  15/6/2014   
    

*कथा , स्थान व नाम काल्पनिक हैं।  

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                                     तड़म लगलि या मंहगाई 


                    घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
मि त परिवार वाळ छौं , अपण लालू यादव बि बड़ो परिवारो मुखिया च त मैंगै से परेसान हूण लाजमी च पर जयललिता , ममता , मायावती , नवीन पटनायक अर नरेंद्र मोदी सरीखा जन इकुळया महानागरिक बि  मंहगाई की महामार से परेशान छन। 
  प्रधान मंत्री ह्वेक बि बिचारा नरेंद्र मोदी की  उन्नीस लाख रुपया सालाना तनखा च।  नरेंद्र मोदी बि मंहगाई से उद्वेलित छन।  अब जब दिन मा बीस मीटिंग हून्दन अर नरेंद्र मोदी कु बिगरौ च कि हरेक मीटिंग मा अलग रंग का कपड़ा पैरण पड़दन अर टेलर रोज कपड़ा व टेलरिंग का रेट बढ़ै दींदु।  इनि पंजाब का राज्यपाल महामहिम शिवराज पाटिल जी का हाल छन,  दिन मा कुज्याण कथगा ड्रेस बदलदन धौं।  इथगा कम तनखा मा इथगा ड्रेस द्वी महानगरिक कखन लाला ? दुयुं बीच मा जरूर बातचीत ह्वे होलि अर जरूर नरेंद्र मोदीन शिवराज पाटिल जी से सलाह बि ले होलि ," पाटिल जी ईं मंहगाई पर काण्ड लगल ! सन 2002 से मेरी तनखा मा ख़ास बढ़ोतरी नि ह्वे पर ड्रेस का भाव बीस गुणा बढ़ गेन।  जरा बतावो त सै कि यीं मैंगै तैं कनै कम करण ?"
पाटिल जीक जबाब होलु।," यि राम दा मै तैं जि पता हूंद तो मि मंहगाई से इथगा परेशान हूंद।  हम त सार लग्यां छंवां कि अब "अच्छा दिन ऐ गेन " तो मैंगै अफिक कम ह्वे जालि। "
यूं द्वी भद्र जनुं  इनफ्लेसन की परेशानी समज मा आण लैक च। 
अब लालू प्रसाद यादव की परेशानी कैक समज मा नि आण कि सन 1985 मा चारा का भाव क्या छया अर अब 2014 मा क्या बिजोग पड़ी गे।  बिचारा लालू अर राबड़ी देवी अपण भैंसुं तैं ढाढ़स दींदन बल ," यां जरा ये नितीश कुमार ऐंड कम्पनी की नया डुबण द्यावो फिर हम तुम सब्युं तैं हरा हरा चारा खलौला। हमर अर तुमर अच्छा दिन जरूर आला।  अबि कुछ दिन सूखा घास से ही काम चलै ल्यावो। " भैंस बिचारि बि क्या ब्वालन ऊँ तैं बि पता च कि सूखी घास का रेट बि अब कम नी च तो लालू यादव जी का बजट कु मंहगाई का कारण कुहाल छन। 
बहिन मायावती बि मंहगाई की मार से कम नि रंगत्याणि होलि।  जु जूतियां  कुछ साल   पैल तक हजारों मा मिलदी छे अब लाखों मा आणा छन अर इनकम का कुछ भरवस नि ह्वावो तो बहिन जी की  अकळाकंठी लगण ही च।  मंहगाई तो मंहगाई हूंद अब गरीबक जुत बि मैंगा अर बहिन जी की जूतियां बि मैंगी।  मंहगाई की चोट सब पर इकजनि पड़दि।  बहिन जीन नरेंद्र भाई से अबि मुलाक़ात नि कार किंतु जब बि मीलली त माया बैणिन बुलण ही च ," ये भै तीन त बोली छौ कि अच्छा दिन आण वाळ छन तो फिर अबि बि जूतियाँ मैंगी किलै भै ?"  चूँकि नरन्द्र मोदी जनान्युं मुख नि लगदन तो नरेंद्र मोदी मौन ही राला। 
अम्मा जयललितान त मंहगाई से लड़णो सरल तरीका अपनै याल।  अपण नाम याने अम्मा नाम से लूण तेल बिचण या फ्री दीण शुरू करी याल तो अवश्य ही जयललिता बैणि अपण ड्रेस का बान कै ना कै फैक्ट्री खरीद ल्याली पर अच्काल डूबीं से डूबीं फैक्ट्री खरीदण बि कम मुश्किल नी  च।, मंहगाई की मार कश्मीर से कन्याकुमारी तलक च। 
हाँ सि ममता बनर्जी अर नवीन पटनायक पर मंहगाई से क्वी फरक नि पड़ल किलैकि वु अपण ड्रेस एकी कलर का रखदन तो दुयुं पर मंहगाई से क्या फर्क पड़न ब्याळो झुल्ला आज बि पैन ल्याल तो क्या फरक पड़न ?
ए राजा अर सुरेश  कलमाड़ी बि मंहगाई की चपेट मा अयाँ छन अर मैंगै तै चट्टेलिक गाळी दीणा छन। 
जब कॉंग्रेस चुनाव हार तो ए राजा अर सुरेश कलमाड़ी खुस ह्वेन कि बेकार बैठ्याँ वकील कपिल सिब्बल अर पी चिदंबरम सस्ता मा मिल जाल किंतु जब कपिल सिब्बल अर पी चिदंबरमन अपण फीस बताई त ए राजा अर कलमाड़ी द्वी गस खैक बेहोश ह्वे गेन।  दुयुंक बुलण  छौ कि वकीलुं पुटुक भरणो थोड़ा हमन धोका धडी कार ! 
भूतपूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद बि कुत्ता बिल्लियुं भोजन मंहगा हूण से त परेशान छैं इ छन पर ऊँ तैं अब पता लगणु च कि दिल्ली मा मकानुं भाव इथगा ह्वे गेन कि या तो दिल्ली मा मकान ल्यावो या खाणा खावो , द्वी चीज एकसाथ हूण कठण च। 
जब आम लोगुं तैं पता चलद कि आम लोगुं परेशानी से ज्यादा हमारा भद्र लोगुं परेशानी अधिक च तो वो अपण परेशानी भूलिक भद्र लोगुं परेशानी से परेशान हूण बीसे जांदन।  





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*कथा , स्थान व नाम काल्पनिक हैं।  

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