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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, March 31, 2014

पहाडुं समस्या समाधान त नरेंद्र मोदीम बि नी च !

भीष्म कुकरेती        

(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )  
 हिमाला पहाड़ मा समस्या तो सदियों से रै होलि किन्तु कमोवेश रूप से हिमाला भारतौ रक्षा कवच ही राइ।  पैल हिमाला भारतौ  बान समस्या साधन छौ ।  आधुनिक तकनीक अर नया नया सुख सुविधाऊं आण से हिमाला की जनता की मांग विकास ह्वे गे। हिमालयी लोग अब वही सुविधा का आकांक्षी ह्वे गेन ज्वा सुविधा मुम्बई का प्रावास्युं तैं सुलभ च।  किन्तु हिमाला तो हिमाला च अर समोदरो छाल तो समोदरो छाल च।  दुयंक अपणि भौं भौं बाण च याने अपणी विशेष प्रकृति च। याने जो विकास कृत्य समुद्री तट का वास्ता फलदायक छन वो हिमाला मा उपयोगी नि ह्वे सकदन।  
किन्तु हमारा हिमाला योजनाकार तो समुद्र तटीय विकास का स्कुल का ग्रेजुएट छन ऊँन हिमाला तैं क्या दे सकण ?
प्रधान मंत्री की दौड़ मा अचकाल मुलायम सिंग च , बैणि मायावती च , ममता भूलि च , जयललिता फुफु बि च। 
जरा यूं दीदी भुल्युं कु भूतकाल पर नजर मारो तो निष्कर्ष च  कै मा देश तो छ्वाड़ो अपण क्षेत्र याने अपण प्रदेस  कु विकास करणो ना त दूरदृष्टि च , ना क्षमता , लियाकत च अर ना ही क्वी यूं तैं भौतिक विकास की क्वी इच्छा शक्ति च।  विकास तैं यूँन कबि प्राथमिकता देहि नी च।  जयललिता तैं विकास की मोटर ब्रिटिश राज बिटेन दहेज़ मा मिलीं छे तो जयललिता का विकासहीन मानसिक दृष्टि कैक नजर मा नि आयी। 
ममता तो साम्यवादी तालाब  की मच्छी च तो वा विकास का बारा मा चिंतित बि नी च। 
मायावती या मुलायम उत्तर प्रदेस का  जातीय समीकरण बिठाण से भैर ही नि ऐ सकिन तो जु प्रदेस विकास तैं ही दिशा -निर्देशन दीण मा नाकामयाब ह्वावन वो हिमाला विकास नीति क्या जाणल ?
नितीश कुमार मा प्रशासनिक क्षमता बड़ी च किन्तु रेलमंत्री अर विहार मुख्यमंत्री का कार्य से साफ़ लगद कि नितीश मा औद्योगीकरण की क्वी अभिनव दूरदृष्टि नी च अर यही नवीन पटनायक , पृथ्वीराज चौहान हाल छन। प्रकाश सिंह बादल तो मायावती जन ही च। 
उत्तराखंड का भूतपूर्व मुख्यमंत्र्युं जनम पतड़ी से साफ़ लगद कि नारायण दत्त तिवाड़ी छोड़िक बकै सब कुर्सी का शौक़ीन छा।  कै तै बि हिमाला विकास की खोज -खबर बि नी च। नारायण दत्त तिवारी मैदानी इलाकों की खाशियत जाणदा छा तो ऊँन मैदानी इलाकों मा विकास की नींव अवश्य धार।  बाकी मुख्यमंत्री तो सिर्फ़ मोळ माटो मादेव छा।  यी सब याने कोशियारी , निशंक , खंडूरी , बहुगुणा चांदन कि पहाड़ घणा जंगळ मा तब्दील ह्वे जावन।  एक मा बि हिमाला विकास की क्वी सोच ही नी च तो यूंक  बारा मा बात करण बेकार च अपण समौ बर्बाद  करणो बरोबर च। 
अब आंदा हम राहुल गांधी पर जो भावी प्रधान मंत्री को दावेदार च या जु बि कॉंग्रेस समर्थित प्रधान मंत्री बणल वैन राहुल गांधी को मुख्त्यार ही बणन।  किन्तु जु राहुल गांधी ऐन चुनाव का बक्त चुनावी रैली करण छोड़ी पचास -साठ लोगुं बीच सिखणु ह्वावो कि मुरादाबाद मा बर्तन -शिल्पकारिता क्या हूंद या कोटा पत्थर काटणो मतबल क्या हूंद तो इन नेता जु समय की मांग ही नि समझ सकुद वै से भारत -विकास की आस  ही गलत च। जु सेनापति बीच युद्ध मैदान मा धनुष -बाण बणाणो कौंळ (कला ) सिखणु ह्वावो वै से हिमाला तो छोडो भारत विकास की उम्मीद करण बईमानी च। 
नरेंद्र मोदीन अफु तैं भारत कु प्रधान मंत्री समझी याल।  मानसिक रूप से शरद पंवार अर नरेंद्र मोदी मैदानी व्यवहारिक विकास जाणदा  छन। 
किन्तु नरेंद्र मोदी बि हिमाला विकास का समाधान नि लै सकदन। अर यांक सबूत विकास पुरुष (?) नरेंद्र मोदीन किसान चौपाल मा दे कि नरेंद्र मोदी तैं हिमाला पीड़ा कु पता बि नी च यद्यपि नरेंद्र मोदीन  जवानी मा सबसे अधिक काम हिमाचल प्रदेस मा ही कार। 
वैदिन वीडिओ कॉनफिरेंसिंग किसान चौपाल मा एक हिमाचल कु किसानन नरेंद्र मोदी से प्रश्न कार कि हिमाचल मा जंगली जानवर अर बढ़ीं मजदूरी से लोग सेव की या अन्य फलों की खेती बंद करणा छन तो आपम यूँ समस्याओं समाधानी  योजना क्या क्या छन।  बिचारा नरेंद्र मोदीन गोल माल जबाब दे अर प्रूफ दे ,प्रमाण दे , सबूत दे कि नरेंद्र मोदी तैं हिमाला समस्या का बारा मा चिंता ही नी च। 
फिर जगा जगा नरेंद्र मोदी 'जंगल बढ़ाने के लिए खेतों की मींडों में पेड़ लगावो ' जन नारा बि लगाँद।  नरेंद्र मोदी तैं कु बतालो कि मींडो मा पेड़ याने खेती कु बिनास ! 
देहरादून की रैली मा नरेंद्र मोदीन पर्यटन की बात छेड़ी किन्तु हिमाला सरोकार की क्वी बात नि कार , जम्मू की, हिमाचल या नेफा की रैलियों मा बि नरेंद्र मोदीन हिमालय सरोकार की क्वी बात नि कार अर सोनिया गांधी , राहुल गांधींन बि हिमालय संबंधी अपनी विशेष सोच नि बथाई । 
यूँ बत्तों से साफ़ पता चलद कि भारतीय शीर्षस्थ नेतृत्व हिमालय तैं  गम्भीरता se नी लीणु च। 
चीनन चीनी हिमालय मा हिमालय मा आमूल -चूल परिवर्तन कौर याल। हिमालयी पहाडों विकास केवल पहाड़ियों वास्ता आवश्यक नी च किन्तु भारतीय हिमालय कु हिमालय का हिसाब से विकास चीन तैं रक्षा अर आर्थिक दृष्टि से टक्कर दीणो बान अधिक आवश्यक च।    अत्यंत चिंता, भौत ब्याकुलता की बात च कि भारतीय शीर्षस्थ नेतृत्व हिमाला सरोकार का विषय मा सियुं च।
 

Copyright@ Bhishma Kukreti  31 /3/2014