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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, March 12, 2013

मूर्धन्य हास्य कलाकार घन्ना भाई: एक अतृप्त कलाकार


प्रस्तुति : भीष्म कुकरेती
घन्ना भाई का नाम गढ़वाली सांस्कृतिक कार्यक्रमों व गढवाली फिल्मों में एक जाना पहचाना नाम है। घन्ना भाई अब गढवाली फिल्मों व ऐलबमों में भी जाना पहचाना नाम ह। 4/8/1953 को गंग्वाड़ा गाँव (पट्टी-गग्वाड़स्यूं, पौड़ी गढ़वाल) में जन्मे घन्ना भाई ने 1970 से स्टेज पर काम करना शुरू कर दिया था और दर्शकों को उनकी कॉमेडी पसंद आने लगी थी। फिर 1980 से श्री नरेंद्र सिंह नेगी के संग जुड़ने के बाद तो घन्ना भाई गढवाली स्टेज के बताक बादशाह बन गये। आज भी गढवाली स्टेज को घन्ना भाई का हास्य में कोई विकल्प नही मिल पाया है। घन्ना भाई ने बीजेपी के टिकट पर विधान सभा चुनाव लड़ा किन्तु चुनाव में हार गये। हाँ एक बात आज भी गौरतलब है कि लोगों यह पता है कि घन्ना भाई चुनाव हारे किन्तु उनके खिलाफ कौन चुनाव जीते वह बहुसंख्यकों को नही पता।

मेरी आज घन्ना भाई से फोन पर लम्बी बात हुयी जिसे मै साक्षात्कार रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ। बातचीत गढ़वाली में ही हुयी।

भीष्म कुकरेती- घन्ना भाई नमस्कार ! मै मुंबई से भीष्म कुकरेती बोल रहा हूँ और लेखक भी हूँ।
घन्ना भाई- नमस्कार नमस्कार। भै मैंने आपके लेख लेख पढ़े हैं।

भीष्म कुकरेती- घन्ना भाई मै आज केवल गढ़वाली गढवाली फिल्मों और ऐल्ब्मों के बारे में बातचीत करनी है जो इंटरनेट में छपेगी।
घन्ना भाई- दा बवालों ! बड़ी बात! कहिये क्या बात करना चाहते हैं।

भीष्म कुकरेती- आपने कई ऑडियो केसेट भी निकाले हैं जिसमे आपकी हास्य कला का अछा उभार है।
घन्ना भाई-याद ना दिलाओं उस बक्त की। केसेट का जमाना याने गढवाली संगीत और मिनी ऑडियो ड्रामाओं के लिए स्वर्ण युग।
भीष्म कुकरेती- जी आपने किन किन गढ़वाली-कुमांउनी फिल्मो-ऐल्बमों में काम किया?
घन्ना भाई- घरजवैं, कौथिग, बेटी ब्वारी, बंटवारु, ब्वारी हो इनि, सतमंगऴया, औंसी की रात, जीतु बगड्वाळ,चक्रचाळ जैसी फीचर फिल्मों में काम किया।

भीष्म कुकरेती- और डीवीडी फ़िल्में
घन्ना भाई- घन्ना भाई एम् बी बी एस ' घन्ना भाई चालबाज, 'घन्ना गिरगिट अर यमराज, भग्यान बेटी, भजराम हवलदार, अबेर आदि जैसी कई डीवीडी फिल्मों में बतौर हास्य कलाकार काम किया।
भीष्म कुकरेती- फिर अलबमों का क्या हाल रहे?
घन्ना भाई- दसियों गढ़वाली ऐल्बमों में कॉमेडी की।
भीष्म कुकरेती- आपने दर्द या मृत्यु पर कॉमेडी की है?

घन्ना भाई- मैंने मृत्यु आधारित हास -परिहास विषय पर शायद काम नही किया किन्तु मृत्यु पर भी दर्शक कैसे हंसते हैं की याद मुझे है।
भीष्म कुकरेती- यह कौन सा सिक्वेंस था कि ब्लैक कॉमेडी पैदा हो गयी?
घन्ना भाई- मेरे पिता जी की मृत्यु पर मैंने मुंडन किया हुआ था और उसी दौरान मुझे स्टेज पर कलाकारी करनी पड़ी। खल्वाट मुंड लिए मै जैसे ही स्टेज पर आया कि दर्शक हंसने लगे। जब उद्घोषक ने दुखदायी सूचना दर्शकों को दी कि चूंकि मेरे पिताजी का देहांत हुआ है और घन्ना भाई को मुंडन करना पड़ा तो दर्शक और जोर से हंसने लगे।
भीष्म कुकरेती- क्या दर्शक इतने असम्वेदनशील होते हैं?

घन्ना भाई-नही वे मेरे प्रति सम्वेदनशील ही थे कि मेरे दुःख से भी वो हंसना चाहते थे। हास्य कलाकार जब नामी कलाकार हो जाय तो दर्शक उसके हर मूवमेंट पर हंसना नही भूलते।
भीष्म कुकरेती- आपने किसी जाति पर आक्षेप से हंसी पैदा की है? जैसे मुझे याद है कि आपने एक नेपाली कुली के किरदार की नकल स्टेज पर की थी।
घन्ना भाई-नहीं किसी जाति पर आक्षेप याने रेसिज्म विषय पर मैंने कभी भी कॉमेडी नही की। जहां तक नेपाली करेक्टर की नकल का सवाल है वह दो भाषाओं गढ़वाली और नेपाली बोलने के अंतर से उत्पन की गयी कॉमेडी थी।
भीष्म कुकरेती- अवगुणों की खिल्ली उड़ाती कॉमेडी की?

घन्ना भाई- हाँ !स्टेज पर और कई फिल्मों-एल्बमों में कंजूस , पियक्कड़ प्रवृति के अवगुणों से उत्पन हास्य में मै साझीदार रहा हूँ।
भीष्म कुकरेती- कभी कभी कलाकार को स्क्रिप्ट की जगह स्वयं ही हास्य पैदा करने के लिए इम्प्रोवाइज या सुधार करना पड़ता है
घन्ना भाई- यह तो रोजमर्रा का काम है। स्टेज और फिल्मों -ऐलबमों में अक्सर ऐसा होता है कि मुझे स्वयं ही सम्वाद और अदायगी में तुरंत बदलाव करना ही पड़ता है।

भीष्म कुकरेती- आपने किन किन फिल्मों -एल्बमों में व्यंग्यात्मक हास्य या वैकल्पिक हास्य पैदा किया है।
घन्ना भाई-वैसे तो हरेक हास्य रचना में दर्द व व्यंग्य छुपा ही रहता है किन्तु भग्यान बेटी, अबेर में व्यंग्य कोटि का हास्य है।
भीष्म कुकरेती- शारीरिक मूवमेंट गति या शरीर के अंगो से से उत्पन हास्य के बारे में बताईये
घन्ना भाई- तकरीबन हरेक फिल्मों व ऐल्बमों में मेरे शरीर की गति व अंगो को अजीव तरह से गति देने से भी मैंने हास्य पैदा किया है।
भीष्म कुकरेती- उल जलूल परिस्थिति या परिधान से जन्मित हास्य भी आपने दिया है?

घन्ना भाई- हाँ ऊलजलूल हरकतें तो हास्य पैदा करती ही हैं तो स्टेज व फिल्मों में ऐसे किरदार निभाने ही पड़ते हैं। ऊलजलूल परिधान का एक उदाहरण 'बेटी ब्वारी' का है जिसमे मैं बुर्या (जुट का बड़ा बैग ) फना रहता हूँ।
भीष्म कुकरेती- कभी कभी कलाकार भावहीन होकर सम्वाद बोलता है और इसी भावहीन व संवाद अदायगी से हास्य उत्पन होता है।
घन्ना भाई- जैसे श्री सुरेन्द्र शर्मा कविता पाठ करते समय भावहीन चेहरा दिखाते है।
भीष्म कुकरेती- हाँ जी! अपने ऐसा किरदार किया है कि किरदार भावहीन हो किन्तु सम्वाद और भावहीनता हास्य पैदा करे।
घन्ना भाई-फिल्मों में तो नहीं किन्तु स्टेज में कभी कभी प्रयोग अवश्य किया है।

भीष्म कुकरेती- सामयिक घटनाओं पर फिल्मों या ऐल्बमों में हास्य पैदा किया है क्या?
घन्ना भाई- हाँ श्री नरेन्द्र सिंह नेगी जी के कई ऐलबमों में सामयिक विषयों पर मेरे किरदार ने हास्य और व्यंग्य दोनों पैदा किये है।
भीष्म कुकरेती- शब्द जाल या अलंकृत भाषा से भी हास्य पैदा किया जाता है।
घन्ना भाई- वैसे अभी तक मुझे मेरे सम्वादों से संतोष नही मिला।

भीष्म कुकरेती- किसी की बेज्जती से भी हास्य पैदा किया जाता है।
घन्ना भाई-जी हाँ स्टेज में और कई फिल्मों में मेरा किरदार किसी अन्य किरदार की बेज्जती करता है या कोई और किरदार मेरे किरदार की खिल्ली उडाता है तो हास्य पैदा हुआ है। दर्वड्या डीवीडी फिल्म में यह सब आपको मिलेगा।
भीष्म कुकरेती- पैरोडी के बारे में

घन्ना भाई-यह तो स्टेज और कई फिल्मों में हुआ है।
भीष्म कुकरेती- चापलूसी से भी हास्य पैदा किया जाता है।
घन्ना भाई-जी हाँ ! .बथौं' फिल्म में आपको चापलूसी से पैदा किया गया हास्य मिल जाएगा। घन्ना भाई के सिक्वेल्सों में भी कई जगह चापलूसी से मैंने हास्य पैदा किया है।
भीष्म कुकरेती- कभी कभी टैक्नोलोजी या किसी अपरिचित कार्य से भी हास्य पैदा किया जाता है।
घन्ना भाई-हाँ दोएक फिल्मों में जैसे मैं खाना बनाना नही जानता फिर जब खाना बनाता हूँ तो किस प्रकार मुझे उलझने होती हैं से भी हास्य पैदा किया है।
भीष्म कुकरेती- संगीत से भी हास्य पैदा किया जाता है।

घन्ना भाई-जी ! मेरे किरदार के कार्योकलापों में बैक ग्राउंड म्यूजिक इस तरह दिया जाता है की हास्य भाव को बल मिले।
भीष्म कुकरेती- घन्ना भाई कभी कभी दृष्य याने विजुअल्स ही हास्य पैदा क्र देते हैं।
घन्ना भाई-भीष्म जी ! गढ़वाली फिल्मों में मुझे ऐसे दृश्य याद नही हैं। मै तो फिल्मों में निर्देशक का शत प्रतिशत गुलाम होता हूँ। जो डाइरेक्टर कहता है मै अभिनय कर देता हूँ।

भीष्म कुकरेती- कभी कभी किसी वास्तु के पुनर्निर्माण में गलतियाँ दिखा कर भी हास्य पैदा किया जाता है, जैसे कोई चीज टूट जाय और उसे जोड़ना हो या ताजमहल को दुबारा बनाना जैसी घटनाओं से भी हास्य पैदा होता है। जैसे हिंदी में एक फिल्म बनी जिसमे फेक यूनिवर्सिटी बनाई जाती है और फिर हास्य व्यंग्य पैदा होता है।

घन्ना भाई-दा बवालों! ऐसे सोच के लेखक गढ़वाली फिल्म संसार में कहाँ हैं?
भीष्म कुकरेती- जी हमने हास्य के तकरीबन हरेक विधाओं पर बात की और यह साबित हुआ कि आपने हास्य की सभी विधाओं के किरदार निभाएं है। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे आपसे बात करनी का मौक़ा मिला।
घन्ना भाई- दा ब्वालो! मुझे भी आपसे बात करने में आनन्द आया।
भीष्म कुकरेती- गढ़वाली फिल्मों का भविष्य क्या है ?
घन्ना भाई-अन्धकार, जब तक पाइरेसी और मुफ्त में डाउनलोडिंग बंद नही होगी गढ़वाली फिल्मों और ऐल्बमों का भविष्य है ही नही
भीष्म कुकरेती- परिवार के बारे में भी बताइये

घन्ना भाई- पत्नी बीमार रहती है और घरेलू कार्य जैसे भोजन बनाना आदि का काम स्वयम मुझे करना पड़ रहा है। दो लडके इंजिनियर हैं और नौकरी करते हैं . मै कभी देहरादून या पौड़ी रहता हूँ।
भीष्म कुकरेती- क्या आप अपने हास्य कलाकारी काम से संतुष्ट हैं ?
घन्ना भाई-दा ब्वालो! मै बहुत ही अतृप्त कलाकार हूँ अभी भी मै ऐसा किरदार करना चाहता हूँ कि जो हास्य में अमर किरदार बन जाय।
भीष्म कुकरेती- कोई ख़ास विषय पर आप फिल्म बनाना चाहेंगे?
घन्ना भाई- जी मेरा सपना है कि मै ऐसी फिल्म में काम करूँ जिसमे मेरा किरदार शराब के नशे का गढ़वाल से जड़ नाश कर देता है। फिल्म को देखकर लोग पूरी तरह शराब पीना छोड़ दें।
भीष्म कुकरेती- घन्ना भाई आपने मुझसे इतनी देर तक बात की मै आपका आभारी हूँ
घन्ना भाई- धन्यवाद कुकरेती जी , फोन करदा रयां

Copyright@ Bhishma Kukreti 12/3/2013