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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, March 31, 2013

आधार कार्ड मिलण: साहसिक, रोमांचकारी किस्सा


गढ़वाली हास्य -व्यंग्य 
सौज सौज मा मजाक मसखरी 
हौंस,चबोड़,चखन्यौ 
                                       
                             आधार कार्ड मिलण: साहसिक, रोमांचकारी किस्सा           
                                     
                                       चबोड़्या - चखन्यौर्याभीष्म कुकरेती
(s = आधी अ )
 
                   जब पैल पैल आधार कार्ड बणनो बात शुरू ह्वे तो मजाक का रूप मा शुरू ह्वे। सब्युन ब्वाल बल नेता लोगुन पैसा खाणों बान एक हैंकि  बुग्याळ की रचना कार। जैदिन राजस्थान मा मनमोहन सिंह जी अर सोनिया जीन आधार कार्ड बांटिन आधार कार्ड की बात मजाक से अफवा मा बदल गे अर  गैस सिलिंडरों दाम  बढ़ण से त अफवा बजार मा उच्छाला ऐ गे। रुस्वड़ बिटेन प्रेस्सर कुकर की सीटी मा, धुंवा माँ   आधार कार्ड का बारा मा अफवाओं की ही छ्वीं लगदी छे। तैबरि तलक हमर परिवार आधार कार्ड तै मजाक कार्ड ही मांणदों छौ।फिर जब जोर की अफवा आइ बल बुजर्गों आधार कार्ड से मोफत मा राशन, इख तलक कि बुड्यों तैं पेन्सन पट्टा बि मीलल तों बगैर आधार कार्ड को रौण असह्य ह्वे गे। मुहल्ला का रस्तों पर लोग दिखाण बिसे गेन,"  ओ फार द्याखो तै मा आधार कार्ड ऐ गे तबि तो छाती बटन खोलि , छाती चौड़ी कौरि जाणों च।" अच्काल जो बि रस्तों माँ रौब से चल्दो तो लोग समजि जांदन कि तैन आधार कार्डो फॉर्म भौरि आल। रासनक दूकान मा जु बि  बिंडी ज़ोर से हल्ला करदो  तो दुकान दार अंदाज लगै दीन्दो कि यु रासन कार्ड धारक ही ना आधार कार्ड धारक बि च।
      
                  हमर बिल्डिंग मा जब बि क्वी परिवार पसीना मा लत पथ , भूक से परेशान पण मुख पर जीत को उत्साह ,आंखों मा मालिकाना घमंड की चमक  खुटोंम कुछ प्राप्ति को रगर्याट,   गेट  भितर आवो तो सब बिल्डिंग वाळ समजि लीन्दन बल स्यु परिवार आधार कार्ड को फॉर्म भौरिक ऐ ग्याइ। वीं रात यु परिवार भैर बिटेन खाणों मंगांद तो जैमा आधार कार्ड भरणो रसीद च वो एकाधिकार खतम हूणों जलन का बशीभूत अर हौरि परिवार हीन  भावना से ओत प्रोत ह्वेका  बरजात जन बगैर छौंक्यां खाणा खांदन।

     हम मरद जो दिन माँ नौकरी करदां वूं तै बिल्डिंग मा अर मुहल्ला मा नयो सामाजिक जाति बणनै खबर रात अपण जनान्युं से चलद। मि तैं अर म्यार नौनु तै ब्वे अर घरवळि  से पता चौल बल अब हम निखालिस पहाड़ी ब्राह्मण नि रै गेवां बल्कणम अब हम निम्न वर्ग  का नागरिक ह्वे गेवां। मुंबई मा हम कथगा इ दै निम्न  श्रेणी नागरिकों श्रेणी मा अवां धौं  -जब हमम रासन कार्ड निछौ, जब हमम दूधो कार्ड नि छौ, जब हमम गैस को कार्ड नि छौ। जब हमम वोटिंग कार्ड नि छौ, जब हमम पासपोर्ट नि छौ तों बगत बगत पर हम बिल्डिंग मा निम्न श्रेणी  गणत मा आवां।    
           
  आधार कार्ड की रसीद नि होण से हम बीच मा फिर से निम्न वर्ग का  ह्वे गे छया। मुहल्ला का रस्ता मा हमर परिवार मुंड तौळ कौरिक चलदा छा किलैकि हमम आधार कार्ड फॉर्म भरणो रसीद नि छे।  अब शरम से भैर आणो एकि विकल्प छौ कि हम बि आधार कार्ड बणौवां।
    
                   आधार कार्ड बणानम  सबसे पैलि परेशानी या आयि कि आधार कार्ड का फॉर्म कख मिल्दन? जौंक कार्ड भरे गे छा ऊंमा गेवां तो कैन हम तै अळगसि, नालायक की पदवी दे। कैन डराइ बल आधार कार्ड इन सुदि नि मिल्दन। कैन बथै बल  कि वो तो  कै  नगर सेवकको  पछ्याणक से फॉर्म ल्है छ्याइ   पण  कैन बि नि बताइ कि आधार कार्डो फॉर्म कख मिल्दन। क्वी बि आधार कार्ड होल्डर नि चांदो छौ कि दुसर बि आधार कार्ड का मालिक बौणो।

 हमर मुहल्ला मा एक चणा बिचण वाळ च जो अघोसित पूछ ताछ केंद्र च। वै चणा वाळन पचास रुपया मा बथाइ बल एक म्युनिस्पल स्कूलम फॉर्म मिल्दन। उन वैमा फॉर्म छया जो वो पांच सौ रुपया फी फॉर्म दीणो तयार छौ। पण पांच सौ प्रति फॉर्म हमर बजेट से भैर छौ। हां वैन मै पर इथ्गा मेहरवानी जरूर कार बल जु बथाइ कि फॉर्म लीणों रासन कार्ड जरूर लिजाण।
                 तो मि दुसर दिन  कोलम्बस बौणि  म्युनिस्पल स्कूल खुजणो सुबर सुबर मय रासन कार्ड घर  बिटेन दही -गुड़ खैक ग्यों। मि बीसेक आदिम्युं तै पुछिक कै बि तरां से रिबड़ राबिड़िक  वीं स्कूल पौन्छु। आज पता चौल कि मुंबई मा कोचिंग क्लास , प्राइवेट टयूटरो पता लगाण सरल च पण  म्युनिस्पल स्कूल खुज्याण भौति कठण च। 
        
          स्कूल भीतर  जाण तो कठण छौ किलैकि उख भैर मील तलक तीन लैन लगीँ छे। मीन द्वी तीन आदिमों  तै पूछ बल यी केकि लैन छन तो सब्युंन ब्वाल इनक्वारी से पता लगाओ। अब मीन इनक्वारी क पता पूछ तो पता इ नि चौल कि कख बिटेन इनक्वारी करे जावो। वो तो भलो ह्वाइ जो उपुण एक दलाल घुमणु छौ वेन दस रुपया मा इथगा बथाइ बल इनक्वारी पंगत क्वा च। मि इनक्वारी  लंगत्यार मा खड़ो ह्वे ग्यों। स्याम चार बजि मि इनक्वारी काउन्टर तलक पौन्छु अर वैन बथाइ कि रासन कार्ड दिखाण से फॉर्म मीलल अर फिर फॉर्म मा जो बि लिख्युं च वै हिसाब से कागज पत्र लाओ। उखमि जाण बल  सुबर आठ बजे से नौ बजेक बीच ब्वार अर भुप्यारो (बुधबार अर  गुरु वार ) कुण केवल कुल जमा पांच  सौ फॉर्म ही बंटे जांदन।
           
   जन जन दिन बितणा छया हमारि सामाजिक स्तर /पदवी मा निरंतर गिरावट आणि छे। स्टॉक मार्किट या सट्टा बजारम नुक्सान बर्दास्त ह्वे जांद पण सामजिक स्तर मा गिरावट सबसे जादा असह्य  होंद। ब्वार आण तलक सरा परिवारम बड़ी उक्रांत -उठापोड़ राइ। खैर ब्वार आइ अर मि दही -गुड़ खैक फॉर्म लीणो छै बजी सुबेर म्युनिस्पल स्कूल ग्यों तों पाइ कि लोग द्वी बजे रात से ही लैन लगैक खड़ा छा। खैर मी बि स्कूल से एक मील दूर तक जयीं लैनम लगी ग्यों। उन हम सब्युं तै पूरो भरवस छौ कि आज तो फॉर्म मिलण से राइ पण क्वि बि रणछोड़ दास बणनों तयार नि छौ अर सबि क्वीनम लग्युं गुड़ चाटणो जन कोशिस मा लैनम खड़ा रौंवां। सवा आठ से पंगत अगनै  सरकण लगि तो हम आस्तिक ह्वेका भगवान पर विश्वास करण मिसे गेवां।  पण ठीक  नौ बजे हल्ला से जाण बल  फॉर्म खतम ह्वे गेन , हमर भगवान पर  विश्वास खतम ह्वे ग्याइ अर हम सौब फिर से नास्तिक ह्वे गेवां।   

    भुप्यार रात मि  चटै, पाणि बोतल  अर द्वी परोठा लेक स्कूल औं तो उख पैलि लोग लैन मा चटै लेक पोड्या छया। कुछ जो अग्वाड़ि दस बजे ही ऐ गे छया वो से गे छ्या। मीन बि लैन मा चटै बिछै अर पोडि ग्यों।  कार्डन वर्ग अंतर खतम करी दे छौ। सबि वर्गों लोग लैन मा पोड्या छा। जौमां टैबलेट , आइ पैड या स्मार्ट फोन छौ वो  व्यस्त छया।

    सुबेर तलक कथगा इ दै ऊंग आयि नींद खुल कि क्वी पैथरौ में से  अगनै नि ई जावो। अदनिंद  मा बार बार आधार कार्डो सुपिन आंदो छौ अर कार्ड नि मिलणो सुपिन आंदो छौ तो मि  बर्र करिक  बिजि जांदो छौ अर हरेक इनि बार बार बर्र बर्र करिक बिजणा छा। सैत च जौंकि पियिं छे वूंकि नींद नि बिजणि छे। सुबेर सबि कोशिस मा लग्यां छा कि झाड़ा पिसाब रोके जावो। स्कूलम भैराक लोग झाड़ा पिसाब नि करी सकदा छा तो लोग अपण अग्वाड़ी -पैथर का आदिम से मिन्नत अर आज्ञा लेकि दूर  कखि झाड़ा पिसाब करी आणा छा। मीन झाड़ा त रोकि दे पण पिसाब पर मेरो बस नि चौल अर  मि  अपण ऐथर पैथर वाळु  से आज्ञा लेकि पेशाब्  कौरि औं। अफवा गरम  छे कि आज बस तीन सौ फौरम बंटल तो इन बि अफवा उड़ कि आज फौर्मुंन नि बंट्याण। कुछ लोग बस मुंह जवानी लड़णा छ्याइ। समय छौ कि अग्वाड़ी नि बढ़णो छौ अर पैथर लाइन छे कि कम नि होणि छे, बढ़दि जाणि छे।     
         
 खैर कै बि तरां सवा आठ बजे हलचल शुरू ह्वे अर फॉर्म बंट्याण शुरू ह्वेन। उचमुचि, उक्रांत, प्रतीक्षा से मन विचलित छौ अर कखि आज फॉर्म नि मिलल को नकारात्मक अंदेसा से ब्लड प्रेशर कम हूणु छौ , शरीर सुन्न होणु छौ। खैर मि मंथर चाल से खिड़कीम पौंछि ग्यों अर भगवान  अशीम अनुकम्पा से मि आधार कार्डक फॉर्म मिलि गेन। खुसी ? इंदिरा गांधी तै बंगलादेशऐ लड़ाई  जितणो उथगा  खुसी नि ह्वे होलि जथगा खुसि मैं तैं आधार कार्ड क फॉर्म मिलण पर ह्वै।    

          जनि मि फॉर्म लेक बिल्डिंग मा औं कि कुछ लोगुं तै भनक लगि गे कि मि आधार कार्डो फॉर्म लीणों जयुं छौ तो कुछ लोग मै पर रूसे क्या भड़कि गेन कि मीन ऊं तैं किलै नि भट्याइ। मीन त ना पर ब्वैन ऊं तैं याद दिलाइ कि ऊंन बि वोटर कार्ड या वरिष्ठ नागरिक कार्ड बणान्द दै  हम तैं नि भटे छौ।  
   अब बिल्डिंग मा हम सरयूळ बामण त ना पण पुड़क्या बामणु पदवी पर ऐ गे छया। ब्वैन ब्वाल बल हम अब मुहल्ला मा मुख दिखाण लैक ह्वे गेवां।
पैल हमन फौर्मुं फोटोकॉपी बणाइ।बड़ी तरकीब, धैर्य  से हमन फोटोकापी को फॉर्म भौर फिर हमन एकैक करीक असली फॉर्म भौर। जब सौब फॉर्म भरे गेन  तो मि स्कूल ग्यों अर मीन दलाल तै बीस रुपया देकि पता लगाइ कि कु दिन फौरम जमा करणों च।
 फिर मि चटै, पाणि बोतल अर परोठा लेक द्वी बजि रात स्कूलम ग्यों। रात भर उखि पड्यु रौं। सुबेर मेरि जगा लीणों म्यार बडों नौनु आइ। मि घौर औं। फिर नौ बजे हम सबि परिवार वळा  अपण जगा मा गेवां। तीन बजि हमर नम्बर आइ। उन तो सब काम लाइन से हूणु छौ पण बीच बीच मा भारतीय संस्कृति का दर्शन बि हूणु छौ याने जौन इकै हजार फॉर्म पर अतिरिक्त सेवा कर दे वो बगैर लाइन का ही भितर जाणा छया।

भितर कम्प्यूटर मा हमन हेरकान ठीक से जांच कार कि सूचना ठीक से भरीं च कि ना। फिर म्यार हथों छाप कम्प्यूटर पर  लिए गे अर आखिरैं अंगूठा का छाप लिए गे।
 आखिर हम तै एकै रसीद मील कि हमन सरकारी स्तर पर आधार कार्ड भोरि आल।
  जब हम स्कूल से  आधार कार्ड भरणो  रसीद  लेकि भैर अवां तो हम तै लग बल हमन जग जीती आल।
बिल्डिंग मा जौं जौं मा आधार  कार्डो रसीद छे ऊंन हम तै वधाई दे अर 'आधार कार्ड इन पेंडिंग क्लब' माँ शामिल कार अर मीन ऊं तैं खुसी मा दारु पार्टी द्यायि तो ब्वैन अर घरवळिन जनान्युं तै केक पार्टी दे अर बच्चों मा चौकलेट बांटे गे।            
  
Copyright @ Bhishma Kukreti   1/4/2013