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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, March 31, 2013

आत्मविश्वास


 आशा रावल  की भिजिं कथा
 
                                 अनुवाद :भीष्म कुकरेती 
 
             एक फैक्ट्री मालिक की नींद भूख सब खतम हुंयि छे, ब्यापार मा बडो घाटा ह्वे तो वै पर बड़ो करज पात चढि गे अर वैक समज मा नि आणु बल इं बुरी स्थिति से भैर आणों बान क्या करे जा। वो किम कर्तव्य की स्थिति मा छौ किलैकि हर समय करजदार वैक    पैथर पड़्या छा।
इनि उदास ह्वेको वो ब्यापारी  एक बगीचा मा बैठिक सुचणों छौ कि भगावन इन कौरि दया कि वो कुड़की/नीलामी से बच जा।
इथगा  मा अचाणचक बगीचा मा एक  बुड्या आयि अर ब्यापारी तैं पुछण लगि," तेरि सूरत बथाणि च बल तू   कें बड़ी कठिनाई मा छे?"
ब्यापारिन  अपणि खैरि (दुःख ब्यथा कथा ) बुड्या मा लगै।
बुड्यान बड़ो ध्यान लगैक व्यापारि ब्यथा सूण अर फिर ब्वाल," ओहो ! मै लगद मि तेरि मदद कौर सकुद। ले ये चेक ले अर अपण काम अग्वाड़ी बढ़ा। एक साल बाद हम द्वी येयि बगीचा मा मिलला अर तब तू मेरि पगाळ वापस बौड़े दे"
चेक व्यापारिक  हथम थमै वो बुड्या तेजी से बगीचा से भैर चलि गे।    
 डुबदो मनिखौ कुण कुणजौ पात सहारा जनि बात छे। व्यापारिन देखि कि वैक हथम सबसे बडो धनी वारेन  बुफेर को साइन कर्युं  बीस  लाखौ चेक छौ।  
पैल व्यापारिन निर्णय ले कि ये चेक तैं भुनैक कुछ समस्या दूर करे जावो। पण फिर व्यापारि न स्वाच कि ये बडो धनी क चेक तैं तो  कबि बि भुनाए जै सक्याँद तो वैन भविष्य को ख़याल करदो बीस लाखो चेक अपण तिजोरि पुटुक धौर दे।
व्यापारि  की मनोदशा मा अचाणक बदलाव ऐ गे अर विको सांस (साहस) माँ बढ़ोतरी हूण लगी गे। फैक्टरी को काम माँ क्या क्या बदलाव कर्याण से वैको भविष्य कन   सुखमय ह्वे सकुद।
व्यापारि  मा एक नयो किस्मौ उलार -उत्साह भोरे गे अर वैन कर्जदारों दगड़ नया ढंग से सौदा कार, नया ढंग से नया कर्जदार अर माल विक्रेताओं दगड़  सौदा कार तो वैको व्यापार कुछ ही मैना माँ फिर से चमकण बिसे ग्याइ। वैको व्यापार मा मुनाफ़ा बढ़ण लगि गे।
एक साल तक वैको पुरण उधार -पगाळ बि खतम ह्वे गे छौ अर बैंकम बि लाखों रुपया बच्यां छा।
ठीक एक साल बाद वो व्यापारि   धनी मनिखो चेक वापस करणों बान  वाई ही बगीचा मा गे   जख एक साल पैलि धनी बुड्यान चेक दे छौ।
धनी बुड्या  दस्तखत कर्युं वो ही चेक व्यापारी हाथ मा छौ।
इथगामा कुछ हि देरम धनी बुड्या आयि। व्यापारि चेक बुड्या तै पकड़ाण इ वाळ छौ अर अपणी सफलता की कथा बथाण इ वाळ छौ  कि  बुड्या पैथर एक नर्स भागदी भाग्दि आयि अर वीन बुड्या हथ पकड़दो ब्वाल," थैंक गौड!  पागलों अस्पताल बिटेन  भाग्युं पागल बुड्या पकड़ मा ऐ गे। निथर ये पागलन हमेशा की तरां सब्युंम बुलण छौ कि वो धनी वारेन बुफेर च अर फिर ये  पागलन  बीस लाखौ चेक फाड़ी  तुम तै   दीण छौ"
नर्स बुड्या तैं पकड़ी अस्पताल जिनां  ली ग्यायि    
इना व्यापारी आश्चर्य मा छौ कि वैन  नकली बीस लाख का चेक का सहारा अपुण व्यापार दुबर खड़ो कार।
 
कथा को मन्तव्य  - यीं कहानी असली मंतव्य च कि धन ना बल्कणम  हमारी दशा मा सुधार आत्म विश्वास ही लै सकुद