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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, June 3, 2010

ढुंगळ सवाद अर सहकारिता , सामाजिक सरोकार को प्रतीक

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ढुंगळ सवाद अर सहकारिता , सामाजिक सरोकार को प्रतीक
भीष्म कुकरेती
ढुंगळ को शाब्दिक अर्थ होंद जो रुट्टी /रोट/रोटी ढुंग (पत्थर ) मा धौरिक बणये जान्द . ढुंगळ डेड द्वी इंच म्वाटो अर डेड द्वी इंच को दाएमीटर की गोळ रोट खुणि बुल्दन
ढुंगळ, गढ़वाळ, कुमाऊं, नेपाल की एक सांस्कृतिक सामाजिक (सन्जैत ) सरोकार संबधी व्यंजन/खाणक च . ढुंगळ कबि बि डयार्म (घर ) नि बणदो . ढुंगळ या त ग्वाठ्म, रास्ता मा , या सामाजिक सवाद ल़ीणो बान ई बणये जांद . सरा गाँव वला गाँव से भैर कै चौरस पुंगड़ (जख बथौं नि आन्द ) मा एक साथ ढुण्गळ बणान्दन अब जू सब्बी गाँव वल़ा कट्ठा ह्वेक ढुंगळ बणाणो रिवाज पहाड़ीगाऊँ मा ख़त्म होणु च त यांको साफ़ अर्थ च अब सहकारिता मा कमी आणी च .
ढुंगळ बणाणो बान गुसा (गोबर क तवा जैसा ) , चपड पतलो पर मजबूत पत्थर चयांद .
पैल गूसों तैं एक जगह पर कट्ठा कौरिक अलाव जळये जांद आटा की लोई बणऐक, मोटी गुन्द्की तैं तिमल क लाबों पुटुक धरी क द्वी पत्थरूं क बीच धरे जांद अर फिर पत्थरूं तैं अलाव मा धौरिक तब तक पकये जांद जब तक भित्रो ऑटो पकी नी जाओ . पकणो बाद ढुंगलोँ बिटेन जल्यूं लाब , रंग्डू , म्वासु अलग करे जान्द .
ढुंगळ जादातर उड़द की दाळ मा ही खाए जांद . ढुंगळ ग्युं आटु या कोदो अर ग्युं क रल़ो मिसों कु ऑटो से बणद
प्रथा :
गाँव मा पैल यू निर्णय लिए जांद बल आज ढुंगळ बणाण . फिर दिन मा बचा लोग गुपळ/उप्पल /गुस्सो जमा करदन अर जख्म ढुंगळ बणाण उखम अलग जगा मा ढेरी बणेक धरी देन्दन . दाळ अर मसाला मिल्वाक (सभी क योगदान ) मा हरेक परिवार से लिए जांद . श्याम दें सब अपणो अपणो आटो की गुन्द्की ( Dough) ड़यार बिटेन लयान्दन. गुप्लूं क ढेर्युं मा आग लगये जान्द अर अलाव तैयार करे जान्द . दगड मा एक चुलू तैयार कौरिक उखम उड़द की सन्जैत दाळ बणये जान्द . अर ढुंगळ - दाळ बणणो उपरान्त सौब एक ही जगा मा बैठिक खांदन
आप तैं आश्चर्य होलू की ये सन्जैत भोज मा हरिजन अर बिट्ठ (सवरण ) दगड़ी होंदन , हाँ दाळ सवर्ण बणान्दन अर हरिजन अपण ढुंगळ अलग सि ढेर्युं मा बणादन .

Copyright@ Bhishma Kukreti, Mumbai, India 4th May 2010