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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, June 29, 2010

मर्सू की हरी भुज्जी (चौली की हरी सब्जी ) बणाद दै सावधानी

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Ethnic , Food in Uttarakhand
मर्सू की हरी भुज्जी (चौली की हरी सब्जी ) बणाद दै सावधानी
Bhishma Kukreti
मर्सू बडो काम कु बरसाती अनाज च . मरसो आटो क अलावा भुज्जी क काम बि आन्द.
१- कुंगळ डांकुळी पत्तो की भुज्जी बणाणो कुणि मर्सू पता-तना तैं काटिक खूब धोये जांद जाँ से हरो, कड़ो पाणि भैर ऐ जाओ अर तब हरी भुज्जी बणये जांद
२- जब मर्सू बडो ह्व़े गे त हरी भुज्जी बणाण मा कुछ सावधानी बरतण पड़दो . कारण मर्सू क भुज्जी कड़ो ह्व़े सकद .
मरसो क पौधा /पत्ता/डांकुळ तैं तड़क्वणि (तेज मुसलाधार बरखा ) तौळ धरे जांद . जू बरखा नि हूँ त उसाए जांद जां से मरसो क कड़ो पाणि भैर ऐ जाओ .
फिर उसयुं मर्सू तैं ध्वे धैक भुज्जी बणये जांद .हाँ मर्सू क भुज्जी मा तडका भंगुल दाणु क ही दियांद
Copyright @ Bhishma Kukreti, Mumbai, India, 2010