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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, June 8, 2010

बौड़ी (बड़ी) कु साग

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बौड़ी (बड़ी) कु साग
भीष्म कुकरेती

बौड़ी (बड़ी ) को महत्व कुमौं गढ़वाल नेपाल भौत ई जादा च , बौड़ी कुमाऊं गढ़वाल नेपाल मा एक खाश व्यंजन च
बौड़ी बणाणो ब्युंत (तरीका) :
बौडी ऊड़द अर गहथ कु बणदो . उड़द की बौडी तै उड़दी अर गहथ की बौडी तै गथुड़ी बुल्दन
दाळ तै ठंडो पाणी माँ खूब भिजये जांद फिर पिसे जांद जै तै बौड़यूँ मस्यटु बि बुल्दन .
मस्यट मा पिस्याँ मसालों, पिस्याँ या दल्यां लौंग, काल़ी मर्च मिलये जांद
जादातर मस्यट मा भुज्यलू काटिक ठीक तरां से मिलाये जांद, पिंडालू /पिंडालू क डंठल भी मिलये जांद
फिर माल मसालों मिल्युं मस्यट क छोटी/ छ्वटी- छ्वटी गोल़ी बणये जान्दन अर घाम मा चार पांच दिन तलक सुकये जांद जब तक की बौडी सुकी नि जवान .
साग बणाण
बौड़यूँ तै थोड़ा सि देर कुण भिजये जांद फिर तेल मा खुड़कए (भूनना ) जांद जब तलक की बौड़ी भूरिण नि ह्व़े जावन. बौड़यूँ मसाला सवाद को हिसाब से ही डाल़े जांद.
बौड़ी तैं तरीदार सुको जन चाहो बणये जांद .
बौड़ी आलू, पिंडालू , प्याज क पतों, प्याज, पालक , मूला पत्ता/ घिंडकूं दगड बि बणये जांद

Copyright:@ Bhishma Kukreti, Mumbai, India, June 2010