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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, March 1, 2018

जंगली लहसुन / डोंडो/ जिमु / डंडू का मसाला व औषधि उपयोग व इतिहास

History, Origin, Introduction,  Uses  of  Garlic Chives/Chinese Chives  as   Spices ,  in Uttarakhand 
 
उत्तराखंड  परिपेक्ष में वन वनस्पति  मसाला , औषधि  व अन्य   उपयोग और   इतिहास - 1                                             
  History, Origin, Introduction Uses  of    Wild Plant  Spices ,  Uttarakhand -   1                      
         
  उत्तराखंड में कृषि व खान -पान -भोजन का इतिहास --   90 
History of Agriculture , Culinary , Gastronomy, Food, Recipes  in Uttarakhand -90 
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 आलेख -भीष्म कुकरेती (वनस्पति व सांस्कृति शास्त्री ) 
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वनस्पति शास्त्रीय नाम - Allium tubersum 
सामन्य अंग्रेजी नाम - Garlic  Chives or Chines Chives 
हिंदी नाम -जंगली लहसुन 
नेपाली नाम -डुंडू 
उत्तराखंडी नाम - दोणो , जिमू  (हिमाचल ) 
 जंगली लहसुन  या जंगली दोणो कुछ ही क्षेत्रों जैसे मुनसियारी में मसाले के रूप में उपयोग होता है किन्तु औषधि रूप में अधिक होता है।  यह पौधा 2300 -2600 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय व चीन हिमालय में उगता है। इसकी एक सेंटीमीटर चौड़ी व बीस सेंटीमीटर लम्बी पत्तियां गुच्छों में उगती हैं और अपने भार से झुक जाती हैं।  फूल सफेद व गुलाबी होते हैं  
जन्मस्थल संबंधी सूचना - जंगली लहसुन के जन्म के बारे में वनस्पति शास्त्री एकमत नहीं हैं किंतु इस पौधे का जन्म हिमालय में ही हुआ इसमें दो रे नहीं हैं। 
संदर्भ पुस्तकों में वर्णन - चीन व  तिब्बत में जंगली लहसुन पिछले तीन हजार साल से उपयोग हो रहा है।  चीनी औषधि विज्ञानं की सोलहवीं सदी के पुस्तक में उल्लेख है।  भारत के निघंटु साहित्य में इस स्पेसीज से मिलते जुलते पौधों का जिक्र हुआ है 
औषधि उपयोग - 
 विटामिन सी से भरपूर , इसका उपयोग उत्तराखंड से बाहर कोलस्ट्रोल कम करने  , रतौंधी , नपंसुकता ,  आदि कष्टों में उपयोग होता है। बालों की आयु बढ़ाने , बुढ़ापा कम करने के लिए भी औसधि उपयोग होता है। पत्तियों के रस  फंगस आदि अवरोधक के रूप में प्रयोग होते हैं। 
कुमाऊं विश्वविद्यालय  के फरहा सुल्ताना , ए . शाह व रक्षा मंत्रालय हल्द्वानी के मोहसिन जैसे वैज्ञानिकों ने सलाह दी है की जंगली लहसुन का उत्तराखंड में बड़े स्तर पर कृषिकरण होना चाहिए 
                               मसालों में उपयोग 

  उत्तराखंड , हिमाचल , नेपाल व मणिपुर जहां जहां तिब्बती संस्कृति का प्रभाव है वहां वहां जंगली लहसुन की पत्तियों व फूलों , मूल का लहसुन जैसे उपयोग होता है याने छौंका , सब्जी -दाल-मांश -अंडे ,  में सलाद व नमक के साथ पीसकर , अचार बनाकर उपयोग होता है। 


Copyright@Bhishma Kukreti Mumbai 2018

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