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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Friday, December 12, 2014

पुटुक भौरिक खलाण -पिलाण अर आखिरैं भट्यूड़ तोड़ दीण

Best  Harmless Garhwali Humor  , Satire, Wit, Sarcasm


                    पुटुक भौरिक खलाण -पिलाण अर आखिरैं भट्यूड़  तोड़ दीण 

                           रामबांसौ कांड, किनग्वड़ॉ   कांड अर  बरछा  ::: भीष्म कुकरेती

 मनिखौ मन का भितर क्या च , मन क्या   सोची द्याल अर मन क्या हमसे क्या बुलै द्याल का बारा मा त ब्रह्मा बि नि जाणि सकुद। 
मन अजीब व्यवहार करद जन कि हम सरा ढिबरी मुंडदवां अर पूछै दैं नराट कर दींदा। 
 मन की थाह लीण कट्ठण च अर हम थाळी मा बनि बनिक , दिखण मा बिगरैल , सवादि व्यंजन सजौंदा  अर थाळी सौरण से पैल व्यंजनुं मा थक थूकि दींदा। 
मन क्या बुलै दीन्दु यु मन तैं बि पता नि चलद।  हम बुल्दां बल उन त अलार्म घड़ी बड़ी काम की चीज च पर यार जब बि मि तैं बढ़िया नींद आदि तबि या नरभगण  ठिक अपण टैम पर बज जांदि।  
अब जरा तौळक वाक्यों पर टक्क लगावदी  -
अब एक बुलणु छौ बल हिमालय मा सब गुण छन , बड़ो लाभकारी च पर भै हिमालय पर एकि कमी च कि हिमालय मा बरफ गिरदी। 
स्या ब्वारी उन त बड़ी कामगति च , दु दु बिठक घास लयांदि पर जब तैं भूख लगदि ना स्या कुत्ती ह्वे जांदी। 
बेटी तैं ससुरास भिजण से पैल ब्वै अड़ान्दि बल ये ब्वै ससुरासम बड़ो सेवा टहल मन से कौरि , सब्युं तैं आदर दे पर खबरदार जु हर समय सासुक बुल्युं मानि। जंवै तैं कब्जा मा करिक रखी। 
उन त स्या ब्वारी बड़ी भली च , मयळि च पर कांड यी लगीं छन  कि स्या गंगपुर्या च। 
हाँ हमर पंडीजी बड़ा बढ़िया पूजा करदन , श्लोक समजैक बुल्दन पर क्या बुलण तौंक नाक तिमलौ दाण  जन म्वाट च। 
बैंक से भौत फैदा छन पर बैंक बिद्दौ समय पर छतरा दींद अर बरखा समौ पर वापस ले लींदु। 
गौड़ी लमडणौ उथगा दुख नी च , गौड़ी मोरणो सोग ने च पर दुःख या च कि गौड़ी दगड़ दौंळि  बि चलि गे। 

इनि तुम बि बतावो कि हम कथगा दैं पैल कैतै खलौन्दा , पिलौंदा अर फिर वैक भट्यूड़ तोड़ि दींदा ? 


11/12/14 ,Copyright Bhishma Kukreti , Mumbai India 

   *लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।