उत्तराखंडी ई-पत्रिका की गतिविधियाँ ई-मेल पर

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

Wednesday, December 10, 2014

पंजाबी -सिंधियों , बिहारियो , नेपाळी ! मि तैं जड़नाश हूण से बचाओ !

Garhwali Humor  , Satire, Wit, Sarcasm on Endangered Garhwal Hill Radish 


                    पंजाबी -सिंधियों  , बिहारियो  , नेपाळी  ! मि तैं जड़नाश हूण से बचाओ !                      

                                        खुजनेर चबोड़्या ::: भीष्म कुकरेती 

घिंडक्या मू ळा -ये ब्वै ! नि बचण मीन , खतम ह्वे जाण मीन ! पता नी  दिबतौं बसै बात छ बि कि ना ? 
देव द्वारपाल -यां त्वैकुण कथगा दैं बोलि याल कि चुप रौ यु देवलोक च , इख पृथ्वी जन घ्याळ नि करे जांद। 
घिंडक्या मू ळा -यां जरा दिबतौं पर इन बीतलि तब बुलल कि चुप कन रये जांद धौं। 
देव द्वारपाल -तिसर पहर ह्वे गे अर तेरि  सुबेर बिटेन एकि रट लगयीं बल नि बचदु , मीन पट्ट  खतम ह्वै जाण , मीन डायनासौर ह्वे जाण।  
घिंडक्या मू ळा -ह्यां ! जब तेरी बि निपटात , उकटात , बंश बरबाद  हूणै नौबत आलि तब दिखुल मि कि तु  कन चुप्प रौंद धौं !
देव द्वारपाल -ह्याँ पर जब तलक तेरि बारी  नि आंद तब तलक त चुप रौं। 
घिंडक्या मू ळा -कब तक आल म्यार नंबर ?
देव द्वारपाल -पर्यावरण मंत्रालय का गढ़वाळ विभागौ दिबता जब फ्री ह्वाल तो ही तेरि बारि आलि।
घिंडक्या मू ळा -पर कब आलि? पर्यवरण दिबता कब मे से मिल सकदन ?
देव द्वारपाल -मेर समज से त अगला साल ऐ जालि।
घिंडक्या मू ळा (जोर से किड़कताळ मरदो ) -क्या ? म्यार नंबर अगला साल ? मतबल मि पर्यावरण मंत्रालयौ गढ़वाळ विभागौ दिबता तैं अगला साल ?
देव द्वारपाल -हाँ ! अगला क्या ! सैत च तिसर चौथ साल बि लग सकद।
घिंडक्या मू ळा -अरे इन क्या बिजोग पड्युं च कि देवलोक का दिबतौं मा बि पृथ्वीलोक का मंत्र्युं तरां समय नी च। 
देव द्वारपाल -अरे तुमर पृथ्वी लोक का मंत्र्युं -संत्र्युं का वजै  से तो देवलोक का दिबता व्यस्त छन। उख पृथ्वी लोक मा मंत्री व्यस्त छन अर इख दिबता व्यस्त छन।
घिंडक्या मू ळा -कथगा वनस्पति दरख्वास्त लेक पर्यावरण देवलोक का भीतर जयां छन ?
देव द्वारपाल -देख गढ़वाळ का बीस पचीस दाळ -अनाज तो साल भर पैल भितर गे छा अर अबि तलक उंकी बारि नि आयि।
घिंडक्या मू ळा -दाळ -भुजी -अनाज का बीजुं से पैल हौर कु कु गेन ?
देव द्वारपाल -जंगळ की कुल मिलैक तीन सौ से अधिक वनस्पति छन जामादे औषधीय वनस्पति ज्यादा छन जौंक बि त्यार तरां बंशनाश हूण वाळ च।
घिंडक्या मू ळा -और कु कु छन ?
देव द्वारपाल -फिर सौएक चखुल बि सर्वथा खतम हूणै नजीक छन।  फिर जंगली जानवर छन जु अवश्य ही खतम ह्वैइ जाल।  कीड़ा -पुतळयुं तो गणत इ नी च।  
घिंडक्या मू ळा -हाँ तो म्यार नंबर छै मैना मा त ऐ जाल कि ना ?
देव द्वारपाल -अर जु दस बीस नदी छन जन गंगा , जमुना या मंदाकिनी सब प्रदूषण से खतम हूणै सिकैत लेक अयाँ छन।
घिंडक्या मू ळा -मंदाकिनी ? नाम मंदाकिनी अर इथगा फमफम करदि कि पोर वींन हजारेक  आदिम मारि देन 
देव द्वारपाल -अरे वीन वैचारिक क्वी दोष नी च मनिख वींक दगड़ इथगा अन्याय कारल तो वा बि क्या करदि।  द्वी साल पैल वा बि त्यार तरां म्यार समिण खड़ी छे तो वीन अपण दुःख -दर्द -पीड़ा सुणै छौ।
घिंडक्या मू ळा -अर वा अबि तक भितरी च ? अबि तक वींक बारि नि आयि ?
देव द्वारपाल -ना ! वीं से पैल भितर अरशा , खट्ट्या जन चालीसेक पारम्परिक गढ़वळि भोजन जड़नाश की सिकैत लेकी पर्यावरण विभाग मा जयां छन।
घिंडक्या मू ळा -पारम्परिक भोजन अपण खात्मा की सिकैत लेक पर्यावरण विभाग मा ? 
देव द्वारपाल -हाँ ! देवलोक मा बि पृथ्वीलोक तरां पहाडुं अवहेलना हूंद।  गढ़वाल या पहाडुं सब समस्याओं बान एकी मंत्रालय च अर वैक नाम च पर्यावरण विभाग !
घिंडक्या मू ळा -पर फिर बि म्यार नंबर आण मा इथगा देरी किलै ?
देव द्वारपाल -अरे गढ़वळि लोककथा , लोकगीत , लोक आण बि खतम हूणा छन तो वी बि अपण दुःख लेक पर्यावरण विभागम जयां छन।
घिंडक्या मू ळा -लोकगीत ?
देव द्वारपाल -हाँ ! लोकसाहित्य बि त खतम हूणु च।
घिंडक्या मू ळा -तो बि द्वी साल तलक म्यार नंबर किलै नि आलु 
देव द्वारपाल -पारम्परिक भांड -कूंड , खटला , कूड़ , तिबारी सब कुछ तो निबटणा छन।  अरे  घट -जंदर अर हौळ -ज्यू , दाथी जन पारम्परिक कृषि औजार बि वंश खात्मा की अर्जी लेक भितर जयां छन। 
घिंडक्या मू ळा -मतबल गढ़वाळ बिटेन हजारों चखुल , जीव जंतु , पेड़ -पौधा , चीज बस्तर अपण बंश निबटणो सिकैत लेकि इख अयाँ छन ? 
देव द्वारपाल -हाँ ! गढवाळम संस्कृति मूलक सैकड़ों चीज खतम हूणा छन तो सब सैकड़ों की संख्या मा फरियादी बणिक देवलोक अयाँ छन।
घिंडक्या मू ळा -अब म्यार क्या ह्वालु ? 
देव द्वारपाल -ह्यां पर तेरी क्या समस्या च ? त्यार स्वाद तो सवादी च तो फिर त्वै तैं बंश खात्मा कु भय किलै हुयुं च ?
घिंडक्या मू ळा -मेरि समस्या बड़ी अजीब च।  सब मेरि भुजि खाण चांदन , सब म्यार पत्तौं भुजी खाण चांदन सब म्यार सुक्सा खाण चांदन। 
देव द्वारपाल -या तो भली, सकारात्मक  , उत्साहवर्धि  बात च। 
घिंडक्या मू ळा -हाँ ऋषिकेश , कोटद्वार , देहरादून क्या दिल्ली मा बि मेरी बड़ी डिमांड च ?
देव द्वारपाल -तो फिर क्यांक दुःख ? क्यांक रुण ? क्यांकि शिकायत ?
घिंडक्या मू ळा -मि तैं गढ़वाळम  बूण वाळ क्वी नी च। 
देव द्वारपाल -हैं ?डिमांड च , मांग बि च अर घिंडक्या मूळा बूण वाळ नी च ?
घिंडक्या मू ळा -हाँ ! म्यार बीज बजारम उपलब्ध नि छन। 
देव द्वारपाल -क्या बजारम बीज उपलब्ध नि छन कु क्या मतलब ?
घिंडक्या मू ळा -अब गढ़वळि लोग वांकि फसल उगांदन जांक बीज ऋषिकेश , कोटद्वारम उपलब्ध हून्दन जन मैदानी मूली कोटद्वार -ऋषिकेशाक बजारम मिल जांद तो सब मैदानी मूली बूणा छन अर मि तैं क्वी नी बूणु च। 
देव द्वारपाल -पर त्यार बीज किलै नि उपलब्ध छन ?
घिंडक्या मू ळा -म्यार बीज पैदा करण वाळ बूड -बुड्या इ ख़तम ह्वे गेन अर नई साखी म्यार बीज पैदा नि करण चांदन। 
देव द्वारपाल -किलै ?
घिंडक्या मू ळा -उ क्या च कि म्यार बीजौ बीज पैदा करणो बान पैल म्यार घिंडक काटिक अळगौ भाग मिट्टी मा खड़्यारण पोड़द।  
देव द्वारपाल -तो ?
घिंडक्या मू ळा -तो क्या क्वी बि गढ़वळि अब इथगा मेनत नि करण चाँद कि म्यार बीज पैदा कार। 
देव द्वारपाल -हूँ ! वास्तव मा या अजीब समस्या च कि मांग , डिमांड ह्वेक बि क्वी घिंडक्या  मूळाक बीज पैदा नि करणु च। 
घिंडक्या मू ळा -तबि त मि डर्युं छौं कि आठ दस सालुंम मेरि जड़नास ह्वे जाण , म्यार बंशनास ह्वै जाण , मीन बि बिलुप्त वनस्पति की श्रेणी मा ऐ जाण। 
देव द्वारपाल -हाँ फिर लोग ब्वालल कि Once upon a time there was hill radish in Garhwal
घिंडक्या मू ळा -कर लेदि मजाक उजाक ! 
देव द्वारपाल -त्वै तैं नेपाली , बिहारी अर बंग्लादेस्यूं दगड़ पंजाबी , सिंधी अर बणिया इ बचै सकदन । 
घिंडक्या मू ळा (हाथी जन चिंघाड़ ) -क्या ? गढवळि छोड़िक नेपाली , बिहारी अर बंग्लादेस्यूं दगड़ पंजाबी , सिंधी अर बणिया पहाड़ी मूळा बचै सकदन ?
देव द्वारपाल -हाँ !
घिंडक्या मू ळा -कनकैक ? गढवळि छोड़िक नेपाली , बिहारी अर बंग्लादेस्यूं दगड़ पंजाबी , सिंधी अर बणिया पहाड़ी मूळा बचै सकदन ?
देव द्वारपाल -देख तू  जू नेपाली , बिहारी अर बंग्लादेसी गढ़वाळम छन उंसे प्रार्थना कौर कि वु तेरी खेती कारन , त्यार बीज पैदा कारन। 
घिंडक्या मू ळा -अर पंजाबी , सिंधी अर बणियोंसे क्या प्रार्थना करण ?
देव द्वारपाल -पंजाबी , सिंधी अर बणिया त्यार मार्केटिंग कारल।
घिंडक्या मू ळा - तीन सही राय दे।  मि नेपाली , बिहारी अर बंग्लादेस्यूं से प्रार्थना करदु कि वु मेरि खेती कारन अर दगड़म  पंजाबी , सिंधी अर बणियोंसे प्रार्थना करूद कि वु म्यार मास मार्केटिंग कारन। सलाह का वास्ता धन्यवाद।  अब मि तैं गढ़वळि , प्रशासन  अर दिबतौं सरपरस्ती की क्वी आवश्यकता नी च। Now with the help of Non Garhwali I will survive !



10/12/14 ,Copyright Bhishma Kukreti , Mumbai India 

   *लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।

Best of Garhwali Humor in Garhwali Language on Endangered Garhwal Hill Radish   ; Best of Himalayan Satire in Garhwali Language on Endangered Garhwal Hill Radish ; Best of  Uttarakhandi Wit in Garhwali Language on Endangered Garhwal Hill Radish ; Best of  North Indian Spoof in Garhwali Language on Endangered Garhwal Hill Radish ; Best of  Regional Language Lampoon in Garhwali Language on Endangered Garhwal Hill Radish ; Best of  Ridicule in Garhwali Language on Endangered Garhwal Hill Radish   ; Best of  Mockery in Garhwali Language  on Endangered Garhwal Hill Radish ; Best of  Send-up in Garhwali Language on Endangered Garhwal Hill Radish   ; Best of  Disdain in Garhwali Language on Endangered Garhwal Hill Radish ; Best of  Hilarity in Garhwali Language on Endangered Garhwal Hill Radish   ; Best of  Cheerfulness in Garhwali Language  on Endangered Garhwal Hill Radish ;  Best of Garhwali Humor in Garhwali Language from Pauri Garhwal on Endangered Garhwal Hill Radish   ; Best of Himalayan Satire in Garhwali Language from Rudraprayag Garhwal on Endangered Garhwal Hill Radish   ; Best of Uttarakhandi Wit in Garhwali Language from Chamoli Garhwal on Endangered Garhwal Hill Radish   ; Best of North Indian Spoof in Garhwali Language from Tehri Garhwal on Endangered Garhwal Hill Radish   ; Best of Regional Language Lampoon in Garhwali Language from Uttarkashi Garhwal on Endangered Garhwal Hill Radish   ; Best of Ridicule in Garhwali Language from Bhabhar Garhwal on Endangered Garhwal Hill Radish   ; Best of Mockery  in Garhwali Language from Lansdowne Garhwal on Endangered Garhwal Hill Radish   ; Best of Hilarity in Garhwali Language from Kotdwara Garhwal on Endangered Garhwal Hill Radish   ; Best of Cheerfulness in Garhwali Language from Haridwar  on Endangered Garhwal Hill Radish ;