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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, December 17, 2014

बल्द बुसड़ौ अर जंवै ससुराड़ौ , द्वी भैर नि आंदन !

Garhwali Vyngya , Garhwali Hasya,, Best  Harmless Garhwali Humor  , Satire, Wit, Sarcasm on Hospitality for Son in Law


                              बल्द बुसड़ौ   अर जंवै ससुराड़ौ , द्वी  भैर नि आंदन ! 
                                      चबोड़्या जंवै ::: भीष्म कुकरेती 

                 अब त पता नी कि गढवळि जंवै  ससुरास जाण पसंद करद छन कि ना , अबाक जंवैऊँ कुण  सैत च ससुरासौ मतबल ही मैत हुन्द धौं,  घरजवैंऊँ बात मि नि करणु छौं। 
     हमर टैम पर मतबल मेरी ज्वान्युं दिनुं बगत जंवै लोगुं बड़ी पूच हुंदी थै। म्यार टैम पर गाँव या शहर द्वी जगा जंवैऊँ बड़ी खिदमत हूंदी छे।  उन यदि दारु -सारू -फट्टी की सुरवा तैं खिदमत ब्वालो त आज बि   जंवैऊँ खिदमत   हूँदि च। 
            काका हाथरसी सरीखा कवि  बुल्दन बल जंवै अफुकुण बि अर ससुरासौ कुण बि भयकर जीव हूंद। जंवै ससुरास तैं चुसणो तयारी करदो थौ अर ससुराड़ वळ कम से कम चसुड़े जावन की तयारी करदा छा।  पर म्यार अनुभव कुछ अलग ही च। 
            हम जब छुट्ट छया तो गां मा जीजाओं /मामाओं (फुफाओं ) की आवभगत देखिक भगवान से प्रार्थना करदा छा कि हम तैं जल्दी से जल्दी बड़ कौर कि हम जल्दी से जल्दी जंवै बणिक ससुरासी सुख प्राप्त करवां। 
               जब बि रुकमा दादीक जंवै आणै खबर आदि छे तो रुकमा दादी पर रुणि -धाणि  , कणाट अर  रगबगौ रोग लग जांद छौ।  ल्वार -तमटा समेत  सरा गां भगवान से प्रार्थना करद छौ कि रुकमा दादीक जंवै तिसालो ही आवो कखि जंवै वर्सकुल आण लग गे त रुकमा दादी हर साल पता नी क्या से क्या कर देलि धौं।  जनि जंवै आणौ खबर आवो ना कि रुकमा ददि हरेकाक ड्यार इख तक कि ल्वारुं ड्यार बि जांदि छे कि यदि जरूरत पोड गे त दूध पौंछे देन।  यदि जरूरत पौड़ी गे तो।  निथर दादिक गौड़ लैन्द रौंदा ही छा।  फिर दूध अध्याय का बाद दुसर दिन ददि चार -पांच मौक इख जैक चौळ -दाळ कु इंतजाम करिक आंद छे।  बाई चांस जरूरत पोड़ जाव तो सब तैं हिदैत दींदि छे कि दाळ -चौंळ तयार रखिन।  तिसर  दिन रुकमा दादि साबण कु इंतजमाॉ वास्ता गांमा फिरदी छे कि यदि जरूरत पोड़ि गे तो जंवै कुण नयाणो साबण , दाढ़ी बणाणो नई ब्लेड तयार रखिन।  हमर गांवक पिपळो डाळ , बौड़ो डाळ अर उजड़्यां पगार गवाह छन कि कबि बि जरूरत नि पोड़ कि लोगुं तैं कुछ दीणो जरूरत ह्वे हो धौं पर हर बगत जंवै आण पर रुकमा ददि पर रौन्का धौंकि ह्वे इ जांद छे अर अपड गां त छोडो बुगठ्या इंतजामौ बान ददि दूसर गां बखरयॉँ तैं बि ततार देकि आदि छे कि यदि जरूरत पड़ जाव तो बुगठ्या तयार रखिन।  कबि जरूरत नि पोड किलकि तब गां मा चार पांच मौका बखर छया।  अर नब्बे सालक बीमार सासु तैं दिखणो अब बि उ फूफा आंद तो रुकमा ददि बजारम रैबार दीण भिजण नि बिसरदि कि जंवै आयुं च एक बांटी शिकार भेजि दियां। जंवै बि पुरण ह्वे गे , ददि बि बुडड़ि ह्वे गे पर जंवै की खिदमत करणै  भावना अबि बि जवान च। 
             रुकमा दादी लोगुं तैं जंवै आण से पैल एडवांस मा तंग करदि छे तो भुंदरा बोडी जब जंवै चौक मा पौंच जावो तब लोगुं तैं तंग करण ना लोगुं तैं बताण शुरू करद छे कि जंवै कै व्यक्ति कु जंवै नि हूंद अपितु सरा गौं कु जंवै हूंद ।   भुंदरा बोडि योगिनी रूप छे।  भुंदरा बोडि वर्तमान मा रौण वाळ मनख्याणि छे पर जंवैक खिदमत मा रति भर, बेथि भर बि कमि नि रौण दींदि छे ।  अधिकतर तब जंवै ससुरास स्याम दैं ही पंहुचदा छा;  वु जीजा बि हौर जंवैंऊँ तरां स्याम दैं पौंछदु छौ;  तब ससुराल पैदल जि आण पड़द छौ। हाँ त जनि दीदी अर जीजा पौंछन तो भुंदरा बोडि क्रियाशील हूंद छे। 
            स्याम दैं बोडि घन्ना दा तैं चार पांच मौक इक  भेजदि छे अर जु बि साग बण्यु हो एकै कट्वरी मंगै दींदी छे।  जीजा का वास्ता रुटी त ससुरास की ही हूंद छे , घी बि सासुक छुळि छाँचक इ हूंदी छे बस बनि बनिक भुज्जी दुसरौ घौरक हूँदि छे।  जंवै बि खुस , सासु बि खुस अर गांवळ बि खुस कि जु साग सुबेरौ कुण धरण छौ वु साग गांवक जंवै कुण काम ऐ गे।  जब तलक जीजा हमर गां रौंद छौ , जीजा द्वी बगत चार -पांच किस्मौ साग भुजिक मजा लींद छौ अर गांवळ तैं घमंड तबि बि नि हूंद छौ कि जंवैक इथगा बढ़िया तरह से सेवा टहल हूणि च। हाँ योगिनी रूपी भुंदरा बोडि कैक बि उधार -पगाळ नि रखदी छे।  गांमा कैक बि जंवै आव तो भुंदरा बोडि द्वी टैम बेनागा सागै या दाळै कट्वरि जंवैकुण भेजि दींदि छे।   
  सीजन का हिसाब से जंवै लोगुं कुण मैनो पैल व्यवस्था ह्वे जांद छे।  गर्म्युं बगत हो तो सुक्सा , अलु , पळिन्गु आदिक इंतजाम का वास्ता तयारी करे जांदी छे।  जु जंवै शिकर्या हूंद थौ वै जंवै की बड़ी पूछ हुंदी छे किलैकि बखर मारणो मौक़ा गाँवळु तैं मिल जांद छौ।  
 जैं मौक जंवैं टेक्नीकल एक्सपर्ट हूंद छौ वीं मौ तैं अपण जंवैक मेहमानदारिक फिकर करणै जरूरत नि हुंदी छे।  टेक्नीकल जंवैक   मेमानदारीक  जिम्मा गांवाळुक  हूँदि छे।  यदि जंवै पंडित हो , वैद हो , मांत्रिक -तांत्रिक हो , जागरी हो , जंदरौ सल्ली हो तो गांवळ बड़ी सेवा करदा छा। 
पंडित जंवै आण से सब अपण जन्मपत्री दिखाणो जंवै तैं अपण ड्यार भट्यान्द छा।  सब्युं राहु -केतु की दशा जंवैक आण से ठीक ह्वे जांद छौ।  द्वी चार मौ त  सत्यनारयण की कथा ही उरै लींद छे  
वैद जंवै तैं  बीमारी ठीक करणो ठेका मिल जांद छौ। 
मांत्रिक -तांत्रिक जंवैऊँ तैं छाया -दूधफूल पुजणो काम मिल जांद छौ। 
जागरी जंवैक प्रताप द्वी चारुंक नागराजा -नर्सिंग बि खुस ह्वे जांद छा। 
जंदरो सल्ली जंवैक ससुरास आण से जंदरों प्रोडक्टिविटी बढ़ जांद छौ किलैकि हरेक मौ अपण जंदर छिलवै ही लींदा छा।  
जब मि जंवै बौण तो म्यार ससुरास शहर मा छौ अर सच्ची बतौं त  शहरी सास ससुर कथगा बि जंवैक सेवा कारन , जंवै तैं कथगा बि दारु मा डुबै द्यावन वो मजा नि आंद जु मजा जंवै तैं पुरण जमन मा गांवक ससुराल मा आंद थौ। 

16/12/2014 Copyright Bhishma Kukreti , Mumbai India 

   *लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।

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