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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, September 29, 2014

साड्युं द्वारा जय ललिता कुण सांतन्वा पत्र !

 जयललिता कु वार्डरोब से खबरची ::: भीष्म कुकरेती 

जयललिता का वार्डरोब मा पुरणि साड़ी - अरे तुम नई जनरेसन से इथगा उम्मीद छे अर तुमन अबि तलक मैडम जयललिता कुण एक पस्त्यौ पत्र नि लेख साक ! जब कि वींक समर्थक अग्निदाह की तयारी करणा छन। वींक समर्थक हल्ला -गुल्ला करिक लौ ऐंड ऑर्डर की समस्या खड़ करणा छन अर हम हजारों साडी एक पत्र नि भेज सकणा छंवां ! 
हैंक पुरण साड़ी -हाँ शरम की बात च , बेज्जती की बात च , हमकुण जळणो बात च कि अम्मा तैं जेल मा बारा घंटा ह्वे गेन अर  अबि तक हम एक सांतन्वा पत्र बि भेज सकां !
एक नई फैसन की साड़ी -तो लिखे जाव आदरणीय     …… 
अदबुडेड़  साड़ी - यां रांड होली तेरी ! यु लेटर मीडियाक हाथ लग जाल तो क्या ब्वालल कि पक्षपातहीन साडी एक अपराधी कुण आदरणीय शब्द प्रयोग करणा छन।   
वै फ़ैसनेबल साड़ी -तो लिखे जाव कि हे !  बीच बजार मा  बेशरम , बिलंच ,प्रजातंत्र की कोढ़   .... 
दुसर फ़ैसनेबल साड़ी - बीच बजार मा सब्युं समिण जुत्यांण लैक    ....... हम तैं अत्यंत प्रसन्नता च , बड़ी खुसी च अर उत्साह माँ हम झुमणा छंवां   कि तू प्रजातंत्र का नाम पर काळो धब्बा , प्रजातंत्र विरोधी , तामिलनाडु इतिहास मा बेशरमी की रानी आज जेल मा छे।
एक गमगीन कलर की साड़ी -ओ निर्भागिओं हम पश्चाताप का रैबार भिजण चाणा छंवां अर तुम इन लगणु च जन कि क्वी आम भारतीय जयललिता का जेल जाण पर अति प्रसन्नता व्यक्त करणु हो धौं !
एक मध्य उम्र की साड़ी -हाँ हम तैं जयललिता जन भ्रष्ट नेताओं का वास्ता --------बीच बजार मा , बीच चौक मा सुक्यां जुतुं तैं भिगैक से जुत्याण, कंडाळिन झपोड़न ,   अर ऊंक मुख पर थक थुकण या म्वास लोपड़ण जन असभ्य , असंस्कृत  अर गैरसंवैधानिक  लफज प्रयोग नि करण चयेंद।  
बिलकुल नई साड़ी -पर यूँ देशद्रोही जन करम करण वाळ नेताओं, अधिकार्युं  वास्ता सभ्य , संस्कृत अर मुनासिब शब्द प्रयोग करण बि त पाप च कि ना ?
कुछ वर्ष पूर्व की साड़ी -हाँ ! ठीक च ! किन्तु  यूँ बदजात नेता , बदकार नेता -अधिकारी , बदचलन अर देश तैं दीमक जन खाण  वाळ लोगुं पर आम लोगुं गिच पर फिटकार आण त लाजमी च कि ना ?
एक मध्य उम्र की साड़ी - हाँ गुस्सा , आक्रोश अर निरासा मा आम लोगुं गिच पर भयंकर गाळी आली किन्तु हम जयललिता की हजारों की संख्या मा साडी छंवां तो हम जयललिता तैं गाळी नि दे सकदां। हम तैं जयललिता कु समर्थन मा आण चयेंद।
एक बहुत पुरण साड़ी - नै नै ! हम  भावुक आदिम नि छंवां जु नादानी , बेवकूफी अर भावना मा   अपराधी नेताओं का बेबसी मा , नासमझी मा अर पागलपन मा नेताओं का जघन्य पापयुक्त समर्थन करवां  ।   ये अंधभक्ति , अंध समर्थन अर अनाचार सर्मथन से ही यी करूणानिधि , यी ए राजा अर जयललिता देश -राज्य का   प्रजातांत्रिक अधिनायक बण गेन। 
एक साड़ी -हाँ हम तैं सही सोच का भारतीयों जन जयललिता या अन्य नेताओं -लालू , ओम प्रकाश चौटाला आदि की कटु आलोचना , कड़क काट अर भर्तसना करण चयेंद। 
युवा साड़ी -हाँ १ ल्याखो ! हे अपराधन जयललिता ! हम तो खुसी माँ पागल हूणा छंवां , प्रसन्नता मा अट्टाहास  करणा छंवां , नचणा छंवां कि ते सरीखी अपराधी , दोषी , गुनाहगार तैं सजा मील।  ठीक च देर से ही सही किन्तु त्वे तैं दंड , सजा अर जेल हूण से भारतीयों दगड हम तैं बि भारतीय न्यायपालिका , कार्यपालिका अर प्रजातांत्रिक मूल्यों पर गर्व च,  धमंड च अर सम्पूर्ण विश्वास च कि क़ानून के हाथ लम्बे होते हैं जो जयललिता सरीखी के अपराध को दंडित करने में सक्षम है !
सब साड़ी -हाँ हाँ ! जयललिता  सांतन्वा नही उलटा वीं कुण  अपमान करण वाळ ,  बेज्जती करण वाळ,  चिढ़ाण वाळ इन कड़ा वाक्यों प्रयोग कारो कि तामिलनाडु ना पूरा भारत का मंत्री -फंत्री , तंत्री -संत्री , बणिया -सणिया सब अपराध करण से घबडे जावन।  साथ मा एक चिठ्ठी आम जनता कुण बि चिट्ठी ल्याखो , पैगाम भ्याजो   अर जनता तैं सिखाओ कि यदि तुम अज्ञानतावश , मूर्खतावश , भावुकतावश जयललिता ,  लालू , चौटाला जन अपराधी नेताओं का समर्थन करिल्या तो अवश्य  तुम भी अपराध मा शामिल माने जैल्या अर तुम बि दंड का भागीदार बणिल्या   ! 
Copyright@  Bhishma Kukreti 28 /9/ 2014       
*लेख में  घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं ।
 लेख  की कथाएँ , चरित्र व्यंग्य रचने  हेतु सर्वथा काल्पनिक है 
  
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