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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, March 18, 2015

हरिद्वार, बिजनौर , सहारनपुर इतिहास संदर्भ में कुलिंद जनपद

Kulind Kingdom in Context History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur

                                           
                                             हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर   इतिहास  संदर्भ में कुलिंद जनपद 

                                           History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  Part  --79 


                                       हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर  
 इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -79   

                                                                   इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती  

                                         
                                                      
      महाभारत अनुसार कुलिंद जनपद गंगा जी का पर्वतीय क्षेत्र था।  यह क्षेत्र गंगाद्वार से बद्रिकाश्रम आदि तक फैला था। इसका अर्थ है कि बिजनौर व सहारनपुर का कुछ न कुछ क्षेत्रों का संबंध कहीं कहीं न कहीं कुलिंद से था। कुलिंद का राजा सुबाहु था।  कुरुक्षेत्र युद्ध का समय लगभग 1400 BC माना जाता है।  अतः सुबाहु को भी इसी काल का माना जा सकता। है 
उत्तर  कुलिंद कालीन सिक्के बहुत जगह में मिले हैं। पाणनि (550 BC ) ने अष्टाध्यायी में कुलुन का उल्लेख किया है जिसे कुलिंद जनपद माना जाता है । इसका अर्थ है कि कुलिंद जनपद 500 BC से पहले अस्तित्व में था। 
 महाभारत में कुलिंद का वर्णन गंगाद्वार के साथ हुआ यही किन्तु पश्चिम व पूर्व की और का वर्णन नदारद है।  हाँ कुलिंद का वर्णन नेपाल, त्रिगत के साथ बार बार आने का अर्थ है गढ़वाल, कुमाऊं व बिजनौर कुलिंद जनपद के भाग थे या सहभागी जनपद थे। संभवतया सहारनपुर का पूर्वी भाग भी महाभारतीय कुलिंद जनपद में था। बागभट्ट आधारित हेमचन्द्र के साहित्य में कुलिंद राज्य यमुना (कालिंदी नदी ) स्रोत्र की श्रेणियों को कुलिंद जनपद कहा गया है। जहां से कुलिंद जनपद यमुना -सतलज मध्य भी फिाला था (मोतीचनद्र , स्टडीज इन महाभारत ). 
ताल्मी अनुसार कुलिन्द्जन की भूमि सतलज , यमुना व गंगा का मध्य प्रदेश फैला था। 
बराहमिहिर अनुसार कुलिन्द्जनपद एमडीआर प्रदेश से पूर्व में भी था। 


 ** संदर्भ - ---
वैदिक इंडेक्स
डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२
राहुल -ऋग्वेदिक आर्य
मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज 
घोषाल , स्टडीज इन इंडियन हिस्ट्री ऐंड कल्चर 
आर के पुर्थि , द एपिक सिवलीजिसन 
Copyright@
 Bhishma Kukreti  Mumbai, India  15/3/2015 
   History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  to be continued Part  --79

 हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास  to be continued -भाग -
79
    
Kulind Kingdom in Context History of Kankhal, Haridwar, Uttarakhand ;Kulind Kingdom in Context History of Har ki Paidi Haridwar, Uttarakhand ;Kulind Kingdom in Context History of Jwalapur Haridwar, Uttarakhand ;Kulind Kingdom in Context History of Telpura Haridwar, Uttarakhand ;Kulind Kingdom in Context History of Sakrauda Haridwar, Uttarakhand ;Kulind Kingdom in Context History of Bhagwanpur Haridwar, Uttarakhand ;Kulind Kingdom in Context History of Roorkee, Haridwar, Uttarakhand ;Kulind Kingdom in Context History of Jhabarera Haridwar, Uttarakhand ;Kulind Kingdom in Context History of Manglaur Haridwar, Uttarakhand ; Kulind Kingdom in Context History of Laksar; Haridwar, Uttarakhand ;Kulind Kingdom in Context  History of Sultanpur,  Haridwar, Uttarakhand ;Kulind Kingdom in Context  History of Pathri Haridwar, Uttarakhand ; Kulind Kingdom in Context History of Landhaur Haridwar, Uttarakhand ;Kulind Kingdom in Context  History of Bahdarabad, Uttarakhand ; Haridwar;Kulind Kingdom in Context  History of Narsan Haridwar, Uttarakhand ;Kulind Kingdom in Context History of Bijnor; Kulind Kingdom in Context History of Nazibabad Bijnor; Kulind Kingdom in Context History of Saharanpur;
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