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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, January 30, 2013

देहरादुनs कायापलट

गढ़वाली हास्य व्यंग्य
हौंसि हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा
                                  देहरानदूनs कायापलट
                                    चबोड्या: भीष्म कुकरेती
(s=-माने आधी अ )
जु ड्याराडूण रौणा छन सि परेशान छन बल अब ड्याराडूणम इथगा परेशानी ह्वे गेन बल यू शहर रौण लैक नी च। जु ड्याराडूण से भैर छन वो परेशान छन कि वूं तै ड्याराडूणै परेशानी किलै नसीब नि होणि च। ड्याराडूण संबंधित जथगा बि छापा -पतड़ा (अखबार-पत्रिका) अर इन्टरनेट्या माध्यम छन वो ड्याराडूणौ कुव्यवस्थाs बाराम बताणा रौंदन।

मि घड़्याणु छौ बल जु मीम क्वी रिमोट कंट्रोल हूंद त मि ड्याराडूणs कायापलट कौरि दींदु।
पैल त मि जगा जगा हरबंश कपूर अर वैक नौन्याळो जन राजकरण्यौ बैनर /होर्डिंगों पर बैन लगायि दींदो कि ये भै! जु तुम राजनैतिक इथगा इ कामगति छंवां त तुम तै पब्लिसिटी जरोरात इ क्या च ? अर जु तुमन बथाणि आयिब ल तुम अपण ब्वेक पुटुकन इ जन सेवक ह्वेक आवां त बेशरम, निर्लज , लुच्चा , लफंगा, राजनीतिज्ञों ! होर्डिंग बैनर लगाणि इ आयि त नगरपालिकाs टैक्स भरो अर तब अपण बडै/ प्रशंशाs कर्दारा होर्डिंग लगावो। सरा भारतम लोगुं तै सबसे जादा परेशानी राजनीतिज्ञों बैनरों अर होर्डिंगो से हूंदी।

जैक बि ड्याराडूणम नगर -पालिका बगैर टैक्स भर्याँ वाल पेंटिंग होर्डिंग, बैनर राला वै तै सीधा तीन मैनाखुण बगैर सुणवाइ जेल करे जालो अर उख जेलम रोज यूंक पूठा डामे जावन । यूं बिलंच नियम तोड़ू राजनीतिज्ञों तै सुधारणो बस यो हि तरीका रै गे कि बिलंचो पूठों पर डाम धरे जाव।

चकरौता से परेड ग्राउंड तलक , रिसिकेस से रेस्पिना अर क्लैमिंटाउन से राजपुर तक रैपिड ट्रांसपोर्ट की रेल होली।
हेरक रिक्शा मीटर से इ चालल। जु रिक्षा वाळ मीटर से नि चौलल वैक लाइसेंस सद्यनो कुणि जब्त ह्वे जालो। पुलिस वाळो तें डंडा ना रोजाना तीन दै फ्रेश कळिक बुट्या बांटे जाला। कळि उत्पादन गढ़वालम बांज पड्याँ पुंगड़ोम ह्वालु।
ड्याराडूणम, जनता की अदा जगा त इनक्रोचमेंट जोग हुंयीं च। इनक्रोचमेंट करीं जगा खालि करैक जनता क वास्ता सड़क चौड़ी करे जालो। जु बि इनक्रोचमेंट करण वाळs बचावम आलो वैका कपाळ घंटाघरs चौकम जनता बीच ड़ामे जालो।

व्यापार बढ़ाणो पूरो इंतजाम करे जालो पण दुकानदार अर उद्योगपतियों तै साफ़ सफ़ै जुमेवारी उठाण पोड़लि। दुकान या व्यापारिक कार्यालयों समणि कचरा दिख्याइ ना कि दुकान या कार्यालयों मालिक तै (नौकर ना ) कचरा साफ़ करण पोड़ल अर दगड़म डंड का दगड़ मालिकौ कपाळ बि ड़ामे जाला। इन माँ सफाई आन्दोलन चलाणो अभियान रुकणो बान जो भि सामाजिक कार्यकर्ता या राजनीतिग्य डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर या सरकारी अधिकार्युं तबादला बात कारल वै तै नवम्बर से अप्रैल तलक छै मैनाखुण गंगोत्री, जमनोत्री, केदारनाथ या बद्रीनाथ भिजे जालो अर वांक खर्चा बि यूं फोकटिया , समाजविरोधी, सफाई विरोधि राजनीतिज्ञों या बुलणो ( तथाकथित) सामजिक कार्यकर्ता से इ उगाये जालो। सफाई अन्दोलब विरोध्युं तै गांधी मैदानम रोज कळि से झपोड़े जालो।

जो बि कार , रिक्शा या बस का ड्राइवर द्वी दें से जादा ट्रैफिक नियम त्वाड़ल वैक लाइसेंस जिन्दगी भरोकुण निरस्त त करे इ जालो वै से पैल परेड ग्राउंडम यूं ट्रैफिक नियम तोडूं तै कळि से झपोड़े जालो।
जो बि कारों भितर या बगैर परमिटो दुकनिम शराब प्याला /पिलाला वूं तै सद्यानो कुण ड्याराडूण से भैर खदेड़े जालो अर वां से पैल कळि से जरूर झपोड़े जाला (हालांकि यां से सबसे बिंडी नुकसान म्यार इ हूण किलैकि म्यार दगड़्या मी तै ड्याराडूणम शराब या त कारम या बगैर परमिटो होटलम पिलान्दन)।

ओ . एन .जी . सी क कार्यालय चकरौता, सर्वे इंडियाक कार्यालय कोटद्वार, सी . डी . ए कार्यलय भोगपुर शिफ्ट करे जालो अर उख विश्व स्तर का स्कूल -कॉलेज, विश्व स्तर की रौणे व्यवस्था बि करे जालि। यूं जगा फर वाल मार्ट का मौल खोले जाला।

ड्याराडूण म्युनिस्पल कौरपरेसन भंग किये जालो अर क्वी बि नगर सेवक नाम का जीव जन्तु ड्याराडूणम नि राला। भै नगर सेवक नाम का जीव जन्तु ही कुछ करदा त मितै ये लेख लिखणै जर्वत क्या छे?
ड्याराडूणम कुमाउनी अर गढ़वाल्यूं तै कुमाउनी अर गढ़वळि भाषाम इ बचऴयाण पोड़ल। जो अपण भाषाम बात नि कौरल वैक कपाळ डामे जालो अर लिख्युं रालो 'मी अपण भाषा विरोधी छौं। विजय बहुगुणा सरीखा लोगुं बान अपण भाषा सिखणों बाण विशेष स्कूल खोले जाला।

ड्याराडूणम नया कूड़ बणाणो इजाजत नि मीललि अर ना ही नया बासिंदों तै देहरादून रौण दिए जालो।
उत्तराखंड की राजधानी तुरंत गैरसैण शिफ्ट करे जालि। जो गैरसैण का विरोधी ह्वाला वोँ तै उत्तर प्रदेश भिजे जालो। गैरसैणो बान हरिद्वार अर उधम सिंह नगर फिर से उत्तर प्रदेशम मिलाये जावो त क्वी परवा नी च।
अब मी तै एक रिमोट कंट्रोल की जरूरत च बस! सोनिया गांधी या राष्ट्रीय स्वयं संघक रिमोट कंट्रोल मांगिक क्वी फैदा नी च। यूं दुयूंक रिमोट कंट्रोल जि कामक हूंदा त भारतक इन बुरा हाल हूंद? अब मी तै क्वी इन इंजिनियर चयाणु च जो मेखुण एक कारगर रिमोट कंट्रोल बणै द्यावो कि देहरादूनौ हालत बदले जावो। जापानक रिमोट कंट्रोल बढ़िया होंदन पण मैंगा भौत हूँदन , चीनक रिमोट कंट्रोल सस्ता हॊन्दन पण क्वालिटी ठीक नि होंदी अर भारतम त रिसर्च एंड डेवलपमेंटो काम इ नि होंद। ठीक च जब तलक रिमोट कंट्रोल नि मिलदो तब तलक मि मुंबईक बाराम इ सोचदु , जन मि मुंबई आणो बाद अपण जन्मस्थली गां जसपुर तै भूलि ग्यों उनि अपणी शिक्षास्थलि ड्याराडूणक बाराम बिसरण इ ठीक रालो ।

Copyright@ Bhishma Kukreti 31/01/2013