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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, January 28, 2013

बनि बनिक ब्यौs पौण (मेहमान)

गढ़वाली हास्य व्यंग्य
हौंसि हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा
                           बनि बनिक ब्यौs पौण (मेहमान)                    
                              चबोड्या: भीष्म कुकरेती
(s=-माने आधी अ )
आप कखि बि , कबि बि कै ब्यौम जावो आप तै तरां तरां का पौण सबि ब्यौम मिलि जाला। कुछ मेमानुं लक्छण इन छन।

आव भग्त्या या गेट कीपर पौण: इ पौण चाहे ब्योलाs तर्फांन ह्वावन या ब्योलिs तर्फांन ह्वावन यि तुम तै वेडिंग प्वाइंट या मांगल्य हौलौ गेटs समणि खड़ा मीलल।यि पौण इन लगद जन बुल्यां यूँ तैं हौर पौणु आव भगत करणों ठेका दिए गे हो। कुछ जनम जाति बाटो दिखन्देर हूंन्दन जो लोगुं तै बथाणा रौंदन बल भितर जाणों रस्ता क्वा च या ब्योला -ब्योलि रिसेप्सेन पर बैठि गेन कि ना।कुछ कुछ कुछ नि करदन बस गेटs न्याड़-ध्वार लंग्यड़ बरोबर खड़ रंदन। कुछ इना उना इन रिटणा रौंदन जन बुल्यां इ कैतैं खुज्याणा छन या कैकि जग्वाळ करणा छन।
जौंक पूठाs पर था नि होंद: इन पौण कखिम बि अधा मिनट तक ना त बैठ सक्दन ना इ खड़ा रै सकदन। रिसर्च पर अरबों रूप्या खर्च कौरिक दुनिया भरो गोंद बणाण वळि कंपनी फेल ह्वे गेन पण इन पौणु खुट या पूठ पर था (ठहराव या आधार) लीणो क्वी गोंद नि बणै सकिन।

रगरट्या पौण: बस यूं पौणु तै कुज्याण केको रगर्याट लग्युं रौंद धौ बस हर दें , हर बगत जल्दी बाजि इ करणा रौंदन। कति दें इ पौण रगर्याटमा ब्योला -ब्योलि तै भेंट दींद बिसरि जांदन या बगैर खयां द्वी चारों तै लमडैक-पतेड पत्याड़िक भैर अटकिक ऐ जांदन। अमूनन हरेक ब्यौमा रगर्याटम यी लोग खाणक जरूर खतदन या रगर्याटम दुसरs घरवऴयूं हाथ पकड़िक भैर गेट तक खैंचि बि लै जांदन।अर फिर जब वा जनानि बुल्दि बल "यां जब मै तै खैंचणो बगत छौ तब तुम गोरम जल्दि बाजिम गौड़ी या बखरितै खैंचण मिसे जांदा छा" तब यूं तै पता चलदो बल यूंन कुबगत पर रगर्याटम कै तै खैंचि द्याइ !

चिपकदा पौण: यि पौण जखम बैठि जाला अंत तलक उखमि बैठ्या मीलल।
जी दुखाण वळ पौण: कुछ पौण जथगा देर बि राला उथगा देर कैको मोरणो या दुख्यर होणो की इ छ्वीं लगांदन। यूं से हूणी-खाणी छ्वीं लगदि नि छन।

अग्ल्यारि लिन्देर पौण या पंगत तोडु पौण: इन पौण पंगतम पैथर नि रै सकदन अर जखम बि पंगत ह्वावो पंगत तोडि अग्वाड़ी जांदन अर क्वी हैंक पौण पंगत तोड़ी द्यावो त यी अगलर्या पौण वै तै अडांदन बल लैन तोड़न से इ इंडियाक छ्त्यानाश होणु च।

दुंळ खुजनेर (छिद्रोन्वेषी), निंदक या नुक्श बतांदेर: यूंक काम सब्युं तै ब्यौम क्या क्या कमि छन बथाणो हूंद याने यी जनम जाति दुंळ (छिद्र) खुजनेर हूंदन। दुंळ खुजनेरूं असली धरम निंदा करण इ होंद।
तुलना करदरा : यी हौर पौणु तै वर्तमानम नि रौण दींदन बस अलाणो शादिम त इन ह्वे छौ, फलणो शादिम तन ह्वे छौ कि बात करणा रौंदन। यूं तुला राशिक लोगुं तै लगद कि यी सुणण वाळु तै मजा दीणा छन जब कि यि हौरुं वर्तमानs मजा बिगाड़णा रौंदन।

गपोड़ी पौण: यूंको काम बस बड़ी बड़ी गप मारणों हूंद
गढ़वाल प्रेमी पौण: यी चालीस पैंतालिस साल से मुंबई या दिल्ली जोग हि हुंयां छन पण मानसिक रूप से गढ़वाल से भैर नि ऐ सकदन अर रूणा रौंदन बल "गढ़वाल की संस्कृति खतम हूणि च , अब त ब्यौमा पाणि क्वी नि पींदो सबि दारू पींदन"।
भिंट्याण वळ पौण: बस यी पौण ज्वी बि मिल्दो वै पर भिंट्याण मिसे जांदन। कबि कबि आदतन अर गल्तिम अपणी घरवळि पर इ भिंटे जांदन अर पुछदन,' ये मेरि लाडि ! कथगा सालों से मिलणि छे तू ! बुड्या ठीक च?"
खौंळेण वळ पौण: यी पौण हेरक बात पर खौंऴयाणा रौंदन अर हरेक बात पर बुल्दन " न भै यां ! न्है यार ! क्या बुना छां? अच्छा ? हे मेरि ब्वे!"

खुचरट्या पौण: यूंक एकी काम होंद बस खुचर्याट करण।
सदाबहार पिछ्ल्वाड़िक पौण: इन लगदो कि यि लोग नौ ना दसों या ग्यारों मैनाम पैदा ह्वे होला या यूं तै यूंकी ब्वेन पिछल्वाडि बाड़ी खलै ह्वालो। यी पौण हमेशा ब्यौमा ड्वाला उठांद दै (विदाई ) इ आंदन।
उन हौर तरां पौण बि होंदन पण मि जरा एक शादि म जाणो छौं त उख बिटेन ऐक मि हौर तरां पौणु बाराम बथौल।

Copyright@ Bhishma Kukreti 29/01/2013