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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, January 9, 2013

नै जमानौ गढ़वळि कथाकार


भीष्म कुकरेती
(s= आधी अ )
जैदिन बिटेन मनिखोंम बोलि आयि दगड़म कथा बि आयि . कथा बुलण अर सुणन मनिखो ख़ास परविरति च। कथा कैं बात तैं भलि तरां बिंगाणो एक बिलखणि अर कामौ ब्यूंत च . इलै त हरेक समाजम अपण लोक कथा छन अर अग्वाड़ी बि रालि .पुराणि संस्क्रित्युं मादे मिश्री कथौं रिकौर्ड 3500 साल पैलो बच्यां छन। 2500 साल पैलाक यूनानी कथौं रिकौर्ड मिलदो . संस्कृतम बि 2500 साल पैलाक कथौं रिकार्ड मिल्दन।
गढ़वळि लोक कथौं पुराणों इत्यास च .महाभारतम जो बि गढ़वाळो बाराम लिख्युं च वो रचनाकारन असलि घटना अर लोक कथौं आधार पर इ लेखि . राहुल सात्याकृतन , डा पातीराम , हरी कृष्ण रतूड़ी , डा शिव प्रसाद डबराल जन इतियासकारोन बि भौत सा इतियासौ छ्वीं गढ़वळि लोक कथौं आधार पर लेखिन .
.                                         गढ़वळि लोक कथौं इकबटोऴया लिख्वार
गढ़वळि लोक कथौं बटोळन्देर अर विश्लेषकों मादे ओकले , तारा दत्त गैरोला , गोविन्द चातक , मोहन बाबुलकर , हरी दत्त भट्ट शैलेश, अबोध बन्धु बहुगुणा , भजन सिंग सिंग , चक्रधर बहुगुणा , वीणा पाणी जोशी, जय लाल वर्मा , भीष्म कुकरेती , डा अनिल डबराल, जग्गू नौडियाल , Surendra पुंडीर को नाम ख़ास छन . जौर्ज ग्रियर्सनो प्रयास से पंडित गुणा नन्द धष्मानान गढ़वाली लोक कथाक पैलि दै रिकोर्डिंग सन 1919 मा करी
                               नै जमानो गढ़वळि कथौं कथा
गढ़वळि गद्यौ पवाण (शुरुवात ) बाइबलो कथौं अनुवाद (1820औ करीब )अर गोविन्द घिल्डियालो हितोपदेसो अनुवाद (1895 करीब ) से लग 

सही मानेम नै जमानो (आधुनिक ) पैलि गढ़वळि कथा सदा नन्द कुकरेतीs लिखीं कथा 'गढ़वाली ठाट ' (विशाल कीर्ति, 1913 ) च। 'गढ़वाली ठाट ' कथा कथ्य; कथा बुणौट/कथा गात रचण; बचऴयाण ( डाइलोग ); वार्ता लगाणों ढंग -ब्यूंत ;चरित्र चित्रण;चरित्रोंम भेद बिभेद,तणाट/तनाव,कथाम अफिक अयुं उकाळ -उंधार; भाषा , निसाण्यु (प्रतीकों) से सै मनौ-रिखडा/मनम छैलु (बिम्ब ) बणान; तकरारो सै उपयोग को मामलाम 'गढ़वाली ठाट' दुन्याक उत्कृष्ट द्वी सौ कथाओं में से एक कथा च। कथा चबोड़, अर असलियतौ उमदा मिऴवाक़ च।
महान कथाकार सदानंद कुकरेतीऐ जगा दुन्याक कथा संसारम ब्लादिमीर नबोकोव, फ्लेंनरी ओ'कोंनर, कैथरीन मैन्सफील्ड , अर्न्स्ट हेमिंगवे, फ्रांज काफ्का, शिरले जैक्सन , विलियम कारोल विलियम्स , डी .एच लौरेन्स , सी. पी गिलमैन, लिओ टाल्स्टोय , प्रेमचंद, इडगर पो , ओस्कार वाइल्ड जन महानतम कथाकारों दगड़ च . 'गढ़वाली ठाट ' कथा संसार की सर्व श्रेष्ट प्रतिनिधि कथाओं मादे एक च
परुशराम नौटियालन 'गोपी ' जन द्वि कथा छ्पैन (1913-1936 ).
'पांच फूल' पैलो गढ़वळि कथा खौळ (संग्रह ): भगवती प्रसाद पांथरी क'पांच फूल' पैलो गढ़वळि कथा खौळ (1947 ) च जखमा पांच कथा छन .कथा सिखंदर्या (प्रेरणात्मक ) अर स्वांगदर्या (नाटकीयता ) छन .हां 'ब्वारी' असलियत्या (असलियतवादी) कथा च।
रैबारओ कथा खौळ (1956 ) रैबार पत्रिकाs कथा खौळम सतेश्वर आज़ादऔ सम्पादनम डा शिवा नन्द नौटियाल, भगवती चारण निर्मोही, कैलाश पांथरी , दयाधर बमराड़ा, कैलाश पांथरी , उर्बीदत्त उपाध्याय व मथुरा दत्त नौटियालऔ कथा छपिन .
उपन्यास रचनेर दयाधर बमराडाs कथा 'रैबार' पत्रिकाम छपी (1956)
डा शिवा नन्द नौटियालौ पांच छै कथा (1960 से पैलि ) छपिन अर नौटियालो कथौंम मथि मुलक्या ख़ास पछ्याणक दिखेंद . 'धार माकी गैणी ' प्रतिनिधि कथा च .
भगवती चरण निर्मोही कथा 'मैती' अर 'रैबार ' पत्रिकौम (सन 1970 से पैलि ) छपेन . कथा मयळि अर सिखंदर्या छन
उर्बीदत्त उपाध्यायौ द्वी कथा 'रैबार'म (1970 से पैलि )छपिन
काशी राम पथिकक शिल्पकार अर बिठुं बीच समाजौ अर संस्कृत्या संबंधुं सूद भेद लींदी कथा ' भुला भेजी देई' मैती'म (१९७७ ) छप .
भगवती प्रसाद जोशी 'हिम्वंतवासी ' को कथा खौळ 'एक ढांगा क आत्मकथा ' गढ़वळि कथौंम एक चमकदो -दनकदो जेवर च। छूटि छूटि बथों तै रौंसदार बणाणम जोशी होशियारुं हुस्यार कथाकार छन अर जोशी न गढ़वळि कथा संसार तै नयो ब्यूंत त द्यायि च त आम निसाण्यु से असरदार मनौ-रिखडा/मनम छैलु (बिम्ब ) जन्माणम बि जोशी बड़ो नामि , ब्यूंतदार कथा-रचन्देर च।
मोहन लाल नेगीs द्वी कथा खौळ -'जोनि पर छापु' (1967) अर 'बुरांश की पीड़' (1987) से गढ़वळि कथौम दौड़णै सक्यात आई . भौं भौं विषयुं कथा संवेदनशील अर लोकोक्युक्ति वळि छन .नेगी भाषौ खिलंदेर च .'जोनि पर छाप 'न आजौ गढ़वळि कथौं हिटाई बढै
आचार्य गोपेश्वर कोठियालो कथा सन 1970 से पेल युगवाणीम छपिन अर कथौंम टिहरी जिनाक छैलु (बिम्ब ) मिल्दो .
शकुन्त जोशीs कथा (1977 ) मैती 'म छपिन
चन्द्र मोहन चमोलीs 'सच्चा बेटा 'कथा बाडुळी '(1977)म छप
पुरुषोत्तम डोभालऔ पैलि कथा 'बाडुळी' (1979 ) पतड़ीम (पत्रिका ) छप अर डोभालन गां गौळु (समाज ) संबंधी पांच छै कथा लेखिन .कथा मयळि छन।
अबोध बंधु बहुगुणाs द्वि कथाखौळ छपिं छन (कथा कुमुद अर रगड्वात ). बहुगुणाs कथा बुद्धिवादी छन अर संस्कृतण्या भाषाम छन। बहुगुणा आखरुं खिलंदर च .
नित्या नन्द मैठाणीs कथा मौलिक मने जान्दन . शब्दुं मैनेजर च मैठाणी
गढ़वळि कथौं तै डमडमो करणम अर परिष्कृत करणम दुर्गा प्रसाद घिल्डियालो नाम अग्वाड़ि च .'गारी' (१९८४), 'म्वारी' (१९९८६) , और 'ब्वारी (१९८७ ) तीन कथागळ गढ़वळि कथौं खग्वळि, मुर्खल अर बुलाक छन। घिल्डियालो कथौंम समौ समाज रौंद अर जगा -डाळ -बूट कम।
प्रयोगधर्मी भीष्म कुकरेतीs कथौंम या त जनानी समस्या , चबोड़ या गां -गौळु समस्या रौन्दन . बीस पचीस कथौं मादे -दाता की ब्वारी कन दुखयारी , कैरा को कतल , बिठु पर भिड्याणो सुख , घुघोती बसोति (सम लैंगिक विषय ) चर्चा माँ रैन।कुकरेतीन विदेसी भाषों कथौं अनुवाद कौर .
रमा प्रसाद घिल्डियालो द्वि कथा हिलांसम छपिन अर द्वि कुछ कुछ समळौण्या बिरतांत लगदन
कुसुम नौटियालो द्वि कथा हिलांसम (1981-1982 ) छ्पेन .कथौंम गां -गौळ ,जगा अर प्रकृति मिऴवाक रौंसदार च
सुदामा प्रसाद डबराल 'प्रेमी ' कथा जिकुड़ेळि ( संवेदनशील), सरल रौंदन , कथौंम मुवारों प्रयोग बढिया च. डा. अनिलो मुताबिक़ भाषा ढबाड़ी (हिंदी -गढ़वाली ) च .सुदामा प्रसादों तीन कथागळ (संग्रह ) छपि गेन .
बीस पचीस कथौं रचंदेर डा महावीर प्रसाद गैरोलाs कथा सिखंदेरी कथा छन पण सरल छन .गैरोलाs कथाखौळ छप्युं च . भाषाम टिर्याळि सुबास खूब रौंद
बालेन्दु बडोलान नि बि होला त तीसेक कथा त छपै होला . कथौं विषय लोक कथौं जन छन अर ब्यूंत बि परम्परावादी च
सदानंद जखमोलाs पाच कथाएछ्पेन जन ' छौं को वैद (गढ़ गौरव १९८४)
प्रताप शिखरs कथा संग्रह 'कुरेड़ी फट गे ' (१९८९) मा कथौं घाळ च कथौं मा गां गौळो असलियत मिल्दी कति कथा रेखाचित्र बि बणी जान्दन , प्रताप शिखरs भाषा टिर्याळि च ज्वा एक खासियत च .
पूरण पंत पथिकs द्वि कथा कथा (हिलांस १९८३ व चिट्ठी २१ वां अंक ) छ्पेन . कथाओंम में कथात्व कम च विचार उत्प्रेरणा अर चबोड़ जादा च .
मनोविज्ञानी कथाकार काली प्रसाद घिल्डियालs दसेक कथा छ्पेन . काली प्रसाद की कहान्यूंम जटिल मनोविज्ञान मिल्दो जटिल मनोविज्ञान तै सरलता दीणम काली प्रसाद घिल्डियाल ब्यून्त्दार च .
जबर सिंह कैंतुरा 1985 उपरान्तो कथाकार च जैकि जण बारेक कथौं मा संघर्ष , मनिख्यात , मनिख चुषणै (शोषण ) खराब आदत विषय ख़ास छन। टिर्याळि क कथगा इ शब्द गढ़वळी बान नगीना छन .
मोहन लाल ढौंडियालs कथा हिलांसम (1985-1988) छपिन। कथा सिखंदेरी अर परम्परा वळो ब्यूँतो छन .
विजय सिंह लिंगवालs तीनेक कथा हिलांस (1988-89)म छपेन . कथा सरल छन अर कथौंम मुवावरादार छन
जगदीश जीवटs एकी रोंसेळि कथा दिखणम आइ (धाद , 1988)
विद्यावती डोभालs पांचेक कथा छपि होला अर 'रुक्मी' (धाद ,1989) चर्चा बि ह्वे
'चिन्मय सायर's ननि अर छ्वटि दसेक कथा चिट्ठी अर शैलवाणीम छपेन . कथा सारगर्भित छन . जादा सि समौ दिखांद (सामयिक ) कथा छन। कथौंम बदलपुर्या भौण च
विजय गौड़s 'भाप इंजिन (चिठी ) अति आधुनिक माने जांद
विजय कुमारs पांचेक कथा छपेन . एक बाळ -कथा बि छ . कथा जिकुड़ेळि अर आधुनिक छन
गिरधारी लाल थपलियाल 'कंकाल s एकी रौंसदार कथा 'सुब्यदरी ' (धाद १९८८)छप .
जगदम्बा प्रसाद भारद्वाज 'सच्चु सुख' (धाद १९८८ ) म छप अर . कथा अभिव्यक्ति कौंळो उम्दा नमूना च .
: प्रसिद्ध गढवाली कवि सुरेन्द्र पालऐ कथा 'दानौ बछरू' अर एवम 'नातो' (धाद १९८८) गढवाली कथा का नगीना छन .
मोहन सैलानीs कथा ' घोल' (धाद १९९०) एक कळकळि भौणै कथा च .
महेंद्र सिंह रावतs इकु कहानी गाणी (धाद १९९० ) छप . .
सतेन्द्र सजवाण : सतेन्द्र सजवाणs एक कहानी 'मा कु त्याग ' (बुग्याल १९९५ )मा छप .
बृजेंद्र सिंह नेगीs सन २००० उपरान्त 'उमाळ ' व छिट्गा' नाम से द्वि दो कथाखौळ छपिन कथौं विषय गाँव, मनिखों सम्बन्ध , अंधविश्वास , समस्या संघर्ष , जन छन जु आम मनिखों रोजै जिन्दगी से मुतालिक छन .. भाषा मुवावरेदार अर निपट सल़ाणी च।
ललित केशवानs पांच कथा छपी गेन जादातर कथा भूतों कथा छन अर सिरोंठी , इड्वाळस्यूंम घटित कथा छन .
ब्रह्मा नन्द बिंजोलाs आठेक कथा इना उना छपीं छन ' फ़ौजी की ब्योली ' कथागळ प्रकाशाधीन च कथा मार्मिक व गढवालऔ जन जीवन सम्बंधीं छन कथौंम चौन्दकोट्या भाषा साफ़ दिखेन्दि .
कन्हया लाल डंडरियालs द्वीएक कथा छपीं छन
लोकेश नवानीs चारेक कथा धाद, चिट्ठी , दस सालैक खबर सार (२००२) , मे प्रकाशित ह्वेन।.
गिरीश सुन्दरियालs छैएक कथा छपिन डा अनिल डबरालओ लिखण च बल इन कथा मादक, हृदयस्पर्शी , प्रगल्भ छन
डा कुटज भारतीs भुकण्या तैं घुरण्या ल़ीगे ' कथा (खबर सार , १९९९ ) रौंसदार हंसोड़ी लोक लकीरऐ कथा च .
वीणा पाणी जोशी एकि कथा ' कठ बुबा ' बिरतांत मिल्दो .
डी एस रावत : डी एस रावत की एक कथा 'छावनी' चिट्ठी पतरी , १९९९) मा छप जैंम बच्चा क नजर से सैनिक छावनी बिरतांत च .
वीरेन्द्र पंवारस तीन चार ननि कथौं बिरतांत मिल्दो
अनसुया प्रसाद डंगवालs अब तक दस बारह कथा छपि गेन (शैलवाणी ) . कथा सामाजिक विषयि छन हैं. भाषा चरित्रों हिसाबन छन कुछ कथा बंचनेरूं तै सुचणों मजबूर बि करदन
राम प्रसाद डोभालs २०००उपरान्त छपिन
सत्य आनंद बडोनीs एकि कथा मंगतू (चिट्ठी पतरी , २०००) दिखे .
विमल थपलियाल 'रसालs एक दार्शनिक कथा ' खाडू -बोगठया' ( खबर सार (२०००) छप
चंद्रमणि उनियालs चिट्ठी रूपम एक कथा 'रुकमा ददि ' चिट्ठी पतरी ' ( २००१) दिखे . .
अज्युं तलक प्रीतम अपछ्याणs पांचएक कथा २००० उपरान्त चिट्ठी पतरीम छपींन . कथा चबोड़ बि करदन त आजौ समौ बि दिखांदन
.
सर्वेश्वर दत्त कांडपालs 'खाणी 'दादी चाणी ' (चिट्ठी पतरी २०००) दिखे अर समौ बदलाव दिखान्दि
संजय सुंदरियालs द्वी कथा चिट्ठी पतरी (२००० परांत) छपिन .
सीताराम ममगाईंs ननि कथा ' अनुष्ठान ' चिट्ठी पतरी (२००२ ) छप .
पाराशर गौड़स चबोड़ी ननि ननि कथा इन्टरनेट पर छपीं छन। भाषा निपट असवाळस्युं की च अर कथा आधार अखबारी खबर छन .
गजेन्द्र नौटियालs एकि मार्मिक कथा 'मान की टक्क 'चिट्ठी पतरी' (२००६) मिल्दि
ओम प्रकाश सेमवालs  एक कथा खौळ 'मेरी पुफू' (2009) छपीं च अर हैंको छपण वळ च। कथा आदर्शवादी , सिखंदेरी , आशा जगांदी छन अर डांडा -कांठाओं (पहाडी विन्यास ) ऐना छन . भाषा इ ना विषयोंम बि केदारदूण ऐ पूरी छाप च .
जनान्युं संवेदनाओ तै दर्शाण वळी कथाकार आशा रावतज़s एक कथासंग्रह ( ' शैल्वणी' प्रकाशन कोटद्वार (2012 )म छपी गे कथा मार्मिक, समस्या मूलक छन , बचऴयात (संवाद) कथाम तेजी लांदन .
शेर सिंह गढ़देशीs लोक लकीरै (परम्परावादी) कथा 'नशलै सुधार' एक सुधारवादी कथा च (खबर सार (२००९)
सुधारवादी कथाकार जगदीश देवरानीs एक कथागळ (20120) छपी गे अर कथा बिलकुल आदर्शवादी छन। भाषा पर लंगूर-शीला पट्टी क प्यूरी छाप च
दिनेश ध्यानीs कथा खौळ 'न्यूतेर ' सन 2012म में प्रकाशित ह्वे अर यूंकि कथौं पर छ्वीं बथा बि खूब ( चर्चा ) लगिन .
उन त कविता अर नाटकुं बनिस्पत गढ़वळि कथौंम उथगा काम नि ह्वे जथगा हूण चएणी छे पण जथगा बि ह्वे अमूल्य च . विषयुंम भिन्नता , लिख्वारो अपणों अपणों ब्यूंत से लगद जु लिख्वार कथा विधा जिना आवन त गढ़वळि कथौंम बाढ़ आलि
सन्दर्भ :
१- भीष्म कुकरेती, २०११, गढवाळी कथाकार अर हौरी भाषाओं क कथाकार , शैलवाणी के (२०११-२०१२ ) साठ अंकों से बिंडी लंगत्यारी ( क्रमगत )लेख
२- अबोध बंधु बहुगुणा , १९७५ गाड म्यटयेकि गंगा, देहली (गढवाली गद्य साहित्य का क्रमिक विकास )
३- डा अनिल डबराल, २००७ गढ़वाली गद्य परम्परा ,
४- अबोध बंधु बहुगुणा , १९९०, गढ़वाली कहानी , गढवाल की जीवित विभूतियाँ और गढवाल का वैशिष्ठ्य, पृष्ठ २८७-२९०
५- ललित केशवान (२०१०) का भीष्म कुकरेती कुणि लम्बी चिट्ठी
६- अबोध अबन्धु बहुगुणा , २००० , कौंळी किरण
7- कई कथाकारों दगड़ फोन पर छ्वीं

Copyright@ Bhishma Kukreti January 2012