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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, January 20, 2013

कुमाउंनी व गढ़वाली का तुलनात्मक अध्ययन


भीष्म कुकरेती
भीष्म कुकरेती ने ऐतिहासिक व सांस्कृतिक आधारों के आधार पर सिद्ध करने का प्रयत्न किया कि कुमाउंनी व गढ़वाली का विकास कनैती (कुलिंद ) व खस भाषाओं से हुआ और धीरे धीरे संस्कृत, ब्रज-राजस्थानी बोलियों व एनी भाषाओं के प्रभाव से उन्नत होती गयी। भीष्म कुकरेती ने संस्कृत व शौरसेनी को गढ़वाली की जननी कतई नही मानते व कुकरेती ने इसके लिए कई दृष्टान्त  भी दिए।
यह बात भी सत्य है कि कुमाउनी और गढ़वाली भाषाएँ बहिने हैं . इन दोनों भाषाओं की अपनी वैशिष्ठ्य्ता भी है और साथ में समानताएं भी हैं जिसका भीष्म कुकरेती ने सान्गोपीय ढंग से व्याकरणीय तुलनात्मक अध्ययन किया व दोनों की समानता व् वैशिष्ठ्य पर लेख भी लिखे। इसी प्रकार डा बिहारी लाल जालंधरी ने दोनों भाषाओं के व्याकरणीय व् ध्वनी का तुलनात्मक अध्ययन किया .

गढ़वाली और कुमाउंनी का पृथक पृथक अस्तित्व एवं समानता

प्रसिद्ध व्याकरण व भाषा शास्त्री डा भवानी दत्त उप्रेती का कथन सर्वथा सही है कि कुमाउंनी व गढ़वाली का स्वतंत्र अस्तित्व है . पर्याप्त अंश में दोनों भाषाओं में शब्दावली सामान होने के उपरान्त भी कुमाउंनी व गढ़वाली में पर्याप्त व महत्वपूर्ण उच्चारण भेद है .

कारकों ववचनों में समानता व वैशिष्ठ्य

मेवाड़ी , जयपुरी , कुमाउंनी व गढ़वाली में एकवचन पुल्लिंग में ओकारान्त और बहुबचन में आकारांत मिलने के कारण इन भाषाओं को शौरसेनी के समीप रखा जाता है। गढ़वाली व कुमाउंनी में तिर्यक कारक में भी ओकारांत का आकारांत हो जाते हैं . जब कि सर्वनाम भी अधिकाँशत: दोनों में समान ही होते हैं

कारक -------------हिंदी --------------कुमाउंनी ---------------गढ़वाली
कर्ता ---------------ने ----------------ले -------------------- ----- न , ल
कर्म --------------को ---------------कणि ,कन , कै , श----------तैं , थैं सणि,कुणि , कू , को
करण ------------से , द्वारा -------ले,पिति, कयल ,कयां -------- ,न , ल , से
संप्रदान ---------के लिए ------------हूँ , हुणि , खीं, खिन----------खुण,कुण, सणि , कु, कुतैं
------------------------------------ हीं , हिन , लिज्या
अपादान --------से ----------------हैं ,बटि , बै ------------------------चे (चुले ), ते , बटि,बटिन, मुंगै ,न बिटि
संबंध ----------का, के , की -----,--को, का , कि -------------------को , का , कि , रो , रा , रि , ऐ ,अ , इ
अधिकरण ------में , पर ----------में , माझ ------------------------मा , मद्ये (माँज, मंजेन ), मु

डा . भवानी दत्त उप्रेती के अनुसार कुमाउंनी और गढ़वाली में सर्वनाम -अविकारी व विकारी रूप अधिकतर समान हैं . अबोध बंधु बहुगुणा के अनुसार गढ़वाली में विकारी बहुवचन में हम , तुम , वु ,/उ ;वी ,स्यि आदि होते हैं तो डा उप्रेती के अनुसार कुमाउनी में हमन , हमून, तुमन , उनन , इनन या इनून आदि रूप प्रयुक्त होते हैं

गढ़वाली व कुमाउंनी छ व क्रिया का प्रयोग

दोनों भाषाओं में छ -रूप तत्व मिलता है और समानता के साथ दोनों में वैशिष्ठ्य भी मिलता है यथा -
-------------- कुमाउंनी------------------------------------- गढ़वाली ---------------------हिंदी
-----एकवचन ---------बहुवचन ----------------------एकवचन ------बहुवचन----------हूँ
-----छूं --------------------छूं ---------------------------छउं ,छौं -----छंवां /छा ----------हो
----छै ---------------------छौ --------------------------छै /छे /छई -----छयां /छा--------हैं
----छ --------------------छन -----------------------च /छ -----------छन-----------------थे (हम )
-----छियूँ/छ्याँ -----------छियाँ , छया --------------छयो /छयी -----छ्या/छयी----------थे (तुम )
-----छिये -----------------छिया -----------------------छयो ------------छया-------------------थे
-----छियो ---------------छिया -------------------------छयो ----------छ्या --------------------थे (वे थे )
छ के प्रयोग में वर्तमान काल में लिंग भेद दोनों भाषाओं में नही पाया जाता है . छ दोनों भाषाओं में सहायक क्रिया है .
जहां छ का प्रयोग नही होता है वहां गढ़वाली और कुमाउंनी में भूतकाल रूप रचना समान ही होती है यथा -
----हिंदी --------------गढ़वाली ------------कुमाउंनी
-----चला (मैं ) ---------चल्युं ------------- हिट्यूँ
------चले (तुम )-------चल्या ---------------- हिट्या
सामन्य भविष्य काल में ल रूप तत्व इस प्रकार होते हैं
------हिंदी ---------कुमाउंनी --------------गढ़वाली
-----चलूँगा -------हिट्लो , हिटुंलो------चलुलो /चलुल /हिटुल /हिटलो
-----चलेगा ------- हिट्लो---------------चललो /हिटलो /हिटल
-----चलेंगे ---------हिटुंला---------------चलला /हिटला

क्रिया रूपों में भेद

कई जगहों में दोनों भाषाओं में क्रिया रूपों में भेद भी पाया जाता है
-------हिंदी ----------कुमाउंनी ----------गढ़वाली
------चला -----------हिट्यो ------------चल /चौल /चलि गे /गयो
------नहीं है ---------न्हाति -------------नी च /छ
-----नहीं चाहता -----नी चान्युं -------नि चांदु /चांदो
-----मै मारा जाता हूँ---मारिजाछू------मरयाँणु छौं /मारये जांदु
----चलेंगी -------------चललिन -------चौललि /चलली
-----कांपने लगा ------कामण पैठा -----कमण / कंपण लगे /लग्या

क्रिया विशेषणों की विशेषता

क्रिया विशेषणों में कुमाउंनी व गढ़वाली में कालवाचक विशेषणों में पर्याप्त समानता है
स्थान वाचक क्रिया विशेषणों में पृथकता मिलता है यथा -
कुमाउंनी --------------------------गढ़वाली
याँ/यथ ---------------------------------यख/इख /इथैं
वां/उथ ---------------------------------वख /उख /उथै
काँ /कथ --------------------------------कख /कथैं
जाँजथ ---------------------------------जख /जथैं
इति -------------------------------इनै /इथैं
उति ------------------------------उनै /उथैं
कति -----------------------------कनै /कथैं
जति------------------------------जनै /जथैं

परिमाण वाचक क्रिया विशेषणों में भिन्नता

कुमाउंनी ---------------------गढ़वाली
एतुक -------------------------इथगा/इतुक
उतुक --------------------------उथगा/उतुक
जतुक -------------------------जतुक /जथगा /जतका
कतुक --------------------------कतुक /कथगा /कतना /कतका

आभूषण नामों में समानता और वैशिष्ठ्य

हिंदी -------------------------------------कुमाउंनी -------------------------गढ़वाली
हंसुली ------------------------------------सुत्ती /सुत-----------------------खग्वळि
पैरो का चांदी का बजने वाला आभूषण -- झांवर --------------------------झंवरि
हाथ का कड़ा जैसा आभूषण ----------------धागुलो -----------------------धगुल/धगुलि /धागुलो
हाथ का एक आभूषण -------------------------पौंछि ------------------------पौंछि
करघनी -----------------------------------------कमर-ज्योडि
नथ ---------------------------------------------नत्थ /नथ -------------------नथुलि
नासिका का आभूषण ------------------------बुलाक -------------------------बुलाक
अंगूठी ----------------------------------------अंगूठी ---------------------------अंगूठी

वस्त्र -नामों में समानता व वैशिष्ठ्य

हिंदी -------------------------------------कुमाउंनी -------------------------गढ़वाली
अंगरखा ----------------------------------अंगोड़ो/आंगोड़--------------------अंगुड़
लंहगा -------------------------------------घागरि/घागोर ---------------------घगुर/घगरि
वास्कट ----------------------------------भोट्टि/भोटि-------------------------फत्वी
धोती ---------------------------------------धोति ------------------------------धोति/धुतड़ा
पैजामा --------------------------------------शुरवाल------------------------------सुलार
कंधे से लेकर नीचे तक
पहना जाने वाला लडकों का पहनावा -------------संतराश----------------------संतराज
फ्राक --------------------------------------------झगुलि--------------------------- झगुलि
जनेऊ ------------------------------------------जने --------------------------------जंद्यौ

कुमाउंनी और गढ़वाली में घरेलु वर्तन

हिंदी -------------------------------------कुमाउंनी -------------------------गढ़वाली 
कटोरा ----------------------------------ब्याला -----------------------------कट्वर, कटोरा , कटोरी , कट्वरि
भदेली-----------------------------------जाम ---------------------------------भदेली
कढाई ------------------------------------कढ़े (ऐ पढ़ें ) ----------------------- कढ़े (ऐ पढ़ें )
बड़ा गहरा चम्मच ------------------------------डाडु ----------------------------------डाडु
करछी --------------------------------------पंड्योऊलो (औ ) ---------------------------कड़छुल/कड़छि/करछी
ताम्बे की गगरी ------------------------------फौन्लो -----------------------------गागर
ताम्बे/धातु की छोटी गगरी ------------------कुम्भि-----------------------------तमोळी
लोटा ------------------------------------------किशिणि/घंटि--------------------लुट्या/घंटि
लोटे के आकार का पात्र ---------------------गडुवा ---------------------------गडुवा (दोनो में ड़ पढ़ें )
दाल बनाने का कांसे का पात्र ---------------भडडू ---------------------------भडडू

कुमाउंनी और गढ़वाली में क्रायक अंग

हिंदी -------------------------------------कुमाउंनी -------------------------गढ़वाली
मुख के अन्दर का भाग -----------------खाप ------------------------------गिच्चु , मुख भितर , खबाड़/खब्वड़
मुख ---------------------------------------मुख ------------------------------ मुक
मुख का वह भाग जो होंठों से युक्त है -----थोल --------------------------थुबड़/थोबडु /थोबड
पैर -------------------------------------------खुट्टा /खुट-----------------------खुट्टा /खुट
पिंडलियाँ -------------------------------------गोद/नल्यो----------------------फिफन
बांह --------------------------------------------पांखुड़ ----------------------बौंळ /बौंळा /बौंळु
आंतें -------------------------------------------अनाड़---------------------------अंदड़
हड्डियां -----------------------------------------भांटी ------------------------हडक /हडका
हड्डी ----------------------------------------------हांड़ -------------------------हाड
कुमाउंनी और गढ़वाली में अंग क्रियाएं
हिंदी -------------------------------------कुमाउंनी -------------------------गढ़वाली
छींक ------------------------------------छिय्याँ /छीं -----------------------छींक/छिंकण
स्फुरण --------------------------------------फुरनो/फुरण --------------------कंपण
एक प्रकार की कंपकंपी-----------------------जकुरनो/जकुरण ---------------- कंपण
नासिका स्राव --------------------------------शिकान----------------------------सीम्प /सिंघान
कफ्फ ------------------------------------------खंकार ----------------------------खंकार
कान का मैल ----------------------------------कनगु ------------------------------कनsगू
दांतों का खट्टा होना ----------------------------कुणीनो ---------------------------दांत सिल्याण

हिंदी, कुमाउंनी और गढ़वाली भाषाओँ में वाक्य भेद

१-हिंदी - तुम पुस्तक पढ़ रहे थे
कुमाउंनी -तुम किताब पड़णौ छिया
गढ़वाली - तू किताब पढ़णु छौ /छयो
तुम किताब पढ़णा छ्या

२- हिंदी - मै फल खा रहा था .
कुमाउंनी -मै फल खाणौ छियुं
गढ़वाली - मि फल खाणु छौ

३- हिंदी - मैं पढ़ने जा रहा हूं
कुमाउंनी - मै पड़णहूं जाणयूँ
गढ़वाली -मी पढ़णो जाणु छौं

४- हिंदी - तुम घर जा रहे हो
कुमाउंनी -तुम घर जाणौ छा
गढ़वाली -तू घौर /ड़्यार जाणु छे /तुम ड़्यार जाणा छ्न्वां

५- हिंदी - वह बाजार जा रहा है
कुमाउंनी - ऊ बजार जाणौ छ
गढ़वाली -वु बजार जाणु च

६- हिंदी - वे मनुष्य पढ़ रहे हैं
कुमाउंनी -ऊँ मैश पड़णाईं
गढ़वाली - वो/वु मनिख पढ़ना छन

इस तरह हम पाते हैं कि दोनों भाषाओं में समानता भी है और अपना पृथक वैशिष्ठ्य भी विद्यमान है
सन्दर्भ सूची -
-अबोध बंधु बहुगुणा , १९६० , गढ़वाली व्याकरण की रूप रेखागढ़वाल साहित्य मंडल ,दिल्ली ( Structure of Garhwali Grammar)
बाल कृष्ण बाल , स्ट्रक्चर ऑफ़ नेपाली ग्रैमर , मदन पुरूस्कारपुस्तकालय , नेपाल(Structure of Nepali Grammar)
डाभवानी दत्त उप्रेती , १९७६कुमाउंनी भाषा अध्ययनकुमाउंनी समितिइलाहाबाद(Study of Kumauni Language Grammar)
रजनी कुकरेती२०१०गढ़वाली भाषा का व्याकरणविनसर पब्लिशिंग कंदेहरादून ( Grammar of Garhwali Language)
कन्हयालाल डंड़रियाल , गढ़वाली शब्दकोश२०११-२०१२ , शैलवाणी साप्ताहिक,कोटद्वारमें लम्बी लेखमाला (Garhwali- Hindi Dcitionary)
अरविन्द पुरोहित , बीना बेंजवाल , २००७गढ़वाली -हिंदी शब्दकोश , विनसरप्रकाशनदेहरादून (Garhwali hindi Dictionary )
श्री एम्'एसमेहता (मेरा पहाड़ ) से बातचीत
श्रीमती हीरा देवी नयाल (पालूड़ीबेलधार , अल्मोड़ा) , मुंबई से कुमाउंनी शब्दों के बारेमें बातचीत
श्रीमती शकुंतला देवी , अछ्बपन्द्र-बीस क्षेत्र, , नेपालनेपाली भाषा सम्बन्धितपूछताछ
१० - भूपति ढकाल , १९८७ , नेपाली व्याकरण को संक्षिप्त दिग्दर्शन , रत्न पुस्तक , भण्डार,नेपाल (Briefs on Nepali Grammar)
११कृष्ण प्रसाद पराजुली , १९८४राम्रो रचना , मीठो नेपालीसहयोगी प्रेसनेपाल(Nepali Grammar)
१२चन्द्र मोहन रतूड़ी , गढ़वाली कवितावली ( संतारा दत्त गैरोलाप्रविश्वम्बर दत्तचंदोला) , १९३४१९८९
13- Notes of Dr Achla Nand Jakhmola on Grammar book by Dr Bhavani Datt Upreti
14 भीष्म कुकरेती, 2012 कुमाउंनी , गढ़वाली एवं नेपाली भाषा-व्याकरण का तुलनात्मक अध्ययन