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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, January 29, 2013

साग- भुज्युं राजा को च ?

गढ़वळि बाल कथा -4
                  साग- भुज्युं राजा को च ?- खांडि ( भाग) -1
                                    भीष्म कुकरेती
एक दै साग -भुज्युंम जुध छिड़ी गे बल भुज्युं राजा को च ? जब वो अपण आपसम झगड़ा नि निबटै सकिन त वो एक बुडड़िम गेन।

बुडड़िन पुछि बल ," तुम कै हिसाब से राजा की पछ्याणक करण चांदा?"
भुज्युं बिटेन कथगा इ आवाज ऐन
"उमर को हिसाब से"
"न्है ! विटामिन की मात्राक हिसाब से"
"न्है , न्है मिनरल्स को हिसाब से"
" न्है! न्है प्रोटीन, फैट -वसा, फाइबर आदि क हिसाब से न्याय हूण चयेंद"

बुडड़िन बोलि बल ठीक च मि एकैक गुणक हिसाब से तुमारो झगड़ा निपटारो करे जालो।
सब्युंन बोले बल हां यो ठीक च।
बुडड़ि- अच्छा चलो उमर को हिसाब से दिखला कि हरेकाक कथगा बड़ी उमर च धौं! एक एक कौरिक अपण बाराम बथाओ!

मर्सू- म्यार बि हरा पत्ता होंदन अर पहाड़ोंम बरसातम मेरो पत्तों सागो बड़ी मांग रौंदी।
पहाड़ी मूळा- म्यरा बि हरा हरा पात होंदन अर बरसातम म्यार पत्तों बड़ी मांग होन्दि।मीमा अर पहाड़ी राइम जादा फर्क नि होंद

पिंडाळु पत्ता - बरसातम मेरो पत्यूड़/गुंडळ बणदन
खीरा पत्ता- म्यार पत्तोंन याने टुकलूंक भुज्जी बणदि अर फूलुंक पक्वड़
पहाड़ी पळिन्गु - जी मि हरो पत्तों वळ पाडि पळिन्गु याने पहाड़ी पालक छौं। मेरि खेति गढवाल अर कुमाउनी पाख पख्यड़ोंम होंद। हमार पत्तों भुजिs स्वाद मैदानी पलक से थ्वडा अलग होंद अर पहाड़ी लोक बुल्दन बल पाडि पळिङ्गौ स्वाद मैदानी पालक से जादा सवादि होंद।

पहाड़ी राइ- मी बि हरा पत्तों वळ पहाड़ी राइ छौं। मेरि खेति बि पहाड़ो पाख पख्यड़ोम इ होंद। म्यरो पत्तों स्वाद बि मैदानी राइ याने सरसों से अलग हूंद।

लया- मि बि हरा पत्तों वळ भुज्जि छौं अर मेरो स्वाद मैदानी सरसों जन ही होंद किलैकि मेखुण मैदानोंम सरसों बुल्दन।

ओगळ- मि बि हरो पत्तों वळ साग छौं। मेरो पत्तों बढिया साग बणदो। उन अब पहाड़ी लोग मेरि खेति नि करदन पण कबि बग्वाळ उपरान्त जब भुज्युं अकाळ होंदु छौ मि बड़ो कामौ साग छौ।

प्याजौ पत्ता - जब गर्म्युंम पहाड़ोम भुज्युं अकाळ ह्वे जांदो छौ त म्यार पत्तों से साग भुज्जि बणदि छे, अज्युं बि
पापड़ी- मि जंगली छौं, गदनोम पाए जांदु अर कुछ लोग म्यार पत्तों साग बणान्दन
लिंगड़-खुंतड़ - हम बि डाँडो जंगळोम हूंदा अर पुराणों जमानम गर्म्युंमा काम की भुज्जि होंदा था
सूंट, लुब्या, छीमि मूळा आदिक फोळि/ फुळड़- हम जब हरा रौंदा त हमारो साग बणदो
बुडडि - चलो तुम सौब हरा पत्ता छंवां। इन बथावा तुमर उमर क्या होंदि ?
सौब - जु हम अपण डाऴयूं दगड़ इ सुकि जांदा।

बुडडि- अर जब डाऴयूं से काटिक भुज्जि बान पत्ता रौंदा त तुमारि उमर कथगा रौन्दि ?
सौब - बस द्वी-तीन दिन। अर तीन चार दिन बाद हम ल्हतम डै जांदा।

बुडडि- मतबल उमर का हिसाब से पत्ता अर फुळड़ कम उमरि क भुज्जि छन। जावो अपण जगाम बैठि जावो। अब बारी च बरसाती लगलों वळ भुज्युं
लम्यंड, गुदड़ि, तुमड़ी, करेला, मिठ करेला आदि - हम बरसातम लगलों पर लगदां। लगलो सुकण पर हम बि सुकि जांदा अर मनिखों तुड़न पर हम द्वी चार दिनुम खराब ह्वे जांदा।

बुडडि- मतबल तुमारी उमर बि छ्वटि च।अब जरा फल वाळ भुजि अपण उमरो हिसाब त द्याओ!
बेडू-तिमल, क्याळा, घ्वाघा क कच्चा फल- हम जब कच्चा रौंदा त लोग हमर भुजि बणान्दन अर हमर कच्चा फल तीन चार दिन बाद खराब हूण बिसे जांदा
बुडडि- मतबल तुमारो बि उमर कमि च।

बसिंगु,क्याळा फूल - हम तुड़नो बाद द्वी तीन दिन से जादा ज़िंदा नि रै सकदां
बुडड़ि - मतबल तुमारो बि उमर कमि च। कंद मूल वळि भुज्युं बि सुणे जावु।
पहाड़ी मूळा- उन जब मनिख मै तै उपाड़दो त मि पांच छै दिनम कबासले जांदा। उपाड़नो बाद दुबर खड्यारण/गब्याण पर मेरि उमर तीन चार मैना तलक बढ़ी जांद
पिंडाळु, तैडू - हम पांच छै मैना तलक त ठीक रौंदा पण फिर हम गळण बिसे जांदा
अलु - जु मि पाड़ी अलु होलु त सालेक तक ठीकि रौंद पण जु मि मैदानि अलु रौलु त नौ मैना तलक ठीक रौंदु
खीरा - हमकुण मैदानोंम कद्दू /घपला बुले जांद। पकीं दशाम मि बारा तेरा मैना तलक खराब नि होंदु
प्याजक दाण - म्यार दाण खीरा से जादा दिन तलक ठीक रै जांदु

बुडड़ि - उमरो या ड्यूरेबिलिटी हिसाब से त प्याज भुज्युं महाराजा अर खीरा राजा ह्वाइ।
सबि - न्है ! न्है ! यो न्याय-निसाब ठीक नी च, कै माँ क्या क्या विटामिन , क्या मिनरल च यांको बारं बि सूत भेद लिये जाण चयेंद।
बुडड़ि - ठीक च कैं भुजिम क्या क्या विटामिन छन, क्या क्या मिनरल छन पर भोळ बात होलि।
सबि - हम सब भोळ औंला अर आपक न्याय निसाब सुणला

Copyright@ Bhishma Kukreti 30/1/2013
साग- भुज्युं राजा को च ?- खांडि ( भाग) -2 म जारी