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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, January 13, 2013

म्यार गांवक नै राजकीय निशाण (चिन्ह )

गढ़वाली हास्य व्यंग्य
हौंसि हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा
                            म्यार गांवक नै राजकीय निशाण (चिन्ह )
                                           चबोड्या: भीष्म कुकरेती
(s=-माने आधा अ )
आज इ ना महाभारत इ बिटेन एक रिवाज च बल हरेक मनिख अर हरेक गां अपण राजकीय निशाण /चिन्ह घोषित इ नि करदो वाई निशाण तै अपणि पछ्याणक बणादु।म्यार गांs बि कथगा इ राजकीय निशाण था . हाँ पैल हमर गांवक राजकीय पछ्याणकौ चिन्ह या निशाण सैकड़ो सालम बदलदा छा अब साल द्वि सालम इ गौंs राजकीय निशाण बदल्याणा छन।

अब जन कि जब गुस्साम हमारा उदयपुर्या विधायक (अर प्रदेश मंत्री ) भग्यान जगमोहन सिंह जीन ढांगू-डबरालस्यूं वळु कुण बोलि 'यि खीरा (कद्दु )खाण वळा मि तै क्या वोट द्याला " त ढांगू - डबरालस्यूं पट्टी वाळुन अपण कूड़ो मुंडळो मा अपण स्वघोषित राजकीय निशाणी खीरा धरण शुरू करी दे अर जब बि क्वी कॉंग्रेसी दिख्यावो त वै तै खीराs दाण दिखांदा छा . तब बिटेन आज तलक ढांगू-डबरालस्यूं वळुन खीरा की निशाणी नि छोड़ी याने कि यि पट्टी अबि बि गैर्कोंगरेसी कौम च . हां यूं ढांगू-डबरालस्यूं पट्टी वाळुक कूड़ो मुंडळोम खीरा दाण खोजिक बि नि दिखेंदन अब ढांगू-डबरालस्यूं पट्टी वाळुक कूड़ो मुंडळोम खीराs जगा देसी कैक्टस दिखेन्दन अर अब जैक मुंडळम देसी कैक्टस नि जम्युं ह्वाओ समजी ल्याओ वो ढांगू - डबरालस्यूं पट्टीक नी च।ढांगू-डबरालस्यूं पट्टीs प्रवासी जब बि ड्यार जांदन वो अपण दगड बनि बनि देसी कैक्टस लिजान्दन अर अपण इ ना दूसरों कूड़ोम बि देसी कैक्टस लगैक ऐ जांदन . देसी कैक्टसन खीरा की राजकीय पदवी लूठि याल अर अब हमारो मुंडळो राजकीय निशाणी देसी कैक्टस ह्वे गे।चूंकि भौत सा प्रवासी गां नि जांदन , वो लोग नागराजा-नरसिंगो भेंट भ्याजन या नि भ्याजन पण वो हर साल अपण कूड़ो मुंडळो बान देसी कैक्टस या इम्पोर्टेड कैक्टस भिजण नि बिसरदन।

पैल हमर गौंक चरित्रौ राजकीय निसाणी 'गौड़ी' छॆ ज्वा राजकीय निसाणी बथांदी छे बल हम सीधा साधा दूसरों भलै सुचण वळा छंवां .अब या राजकीय निसाणी प्रजातंत्र की रक्छा करणों खातिर बदले गे अब गौंक पंच अर प्रधानो घौरम घट्यूं झंडामा राजकीय निसाणी मुसक्या चोर जन स्याळs फोटो छप्युं रौंद जो बथांद बल अब हम बि अब धुर्यापन, चोरी चपाटी , धोखाधड़ीम विश्वास करण लगि गेवां।

पैल हमर सीधो सच्चो, दयामय जीवन की राजकीय निसाणी घिंडुडि (गौरया ) छे अब हमारी मंशा की राजकीय निसाणी गरुड़ -चिलंग छन ज्वा बथांदी बल हम अब लूठा-लूठी का गुलाम ह्वे गेवां .
पैल हमर राजकीय पशु निशाणी बल्द होंद था अब राजकीय पशु निशाणी सुंगर ह्वे गे
पैल सुबेर बिजाऴणो खुणी हम कुखड़ पाऴदा छा अब हम तै गुणी बांदर बिजाऴदन अर घाम अयां भौत देर ह्वे गे की सूचना दीन्दन . गूणी-बांदर समय सूचक निसाणी ह्वे गेन।

पैल हमर दास संग्रान्दो नौबत बजैक दिन बार मैना सूचना दीन्दा छा अब हम अंग्रेजी कैलेण्डर पर ही भरवस करदा।
पैल लुट्या हमर हर कामौ निसाणी छौ अब प्लास्टिकौ बोतलन लुट्या भेळुन्द जोग कौरि आल.
पैल हिसरोंम भुज्याँ बुखणो /खाजों कुमराण हमारि निसाणी हूंदि छे अब हमर दांत कमजोर ह्वे गेन त मुंगर्युं,तोरs बुखण बुकाण कट्ठण ह्वे गे त हमन बहु राष्ट्रीय कम्पन्यु नमकीन बुकाण शुरू कार अर यांकी राजकीय निसाणी याने प्लास्टिकौ थैला हमारो चौक, गुठ्यार,गुरबट, चौबट, खल्याण अर पुंगड़ोम सुलभता से दिखे सक्यान्दन . या हमारी अमर राजकीय निसाणी च .हजारो साल बाद बि या निसाणी खतम नि ह्वे सकदी। प्रवासी यीं अमर निसाणी बड़ो संवाहक छन .
पैल हमारो गांवक राजकीय मिठै अरशा छौ अब प्रवास्युं दबाब से , प्रेरणा से कुछ हौर मिठै राजकीय पदम बैठ्यां छन अर अरशा आर्किओलौजिकल म्यूजियम जोग ह्वे गेन।

पैल हमारो राजकीय घास 'डड्यळ' छौ अब हमारो राजकीय घास 'लैंटीना' ह्वे गे।
पैल गंगा पर हमारो हक छौ अब सुणनम आयि बल गंगा पर हक्क उत्तर प्रदेश , हरियाणा अर दिल्ली सरकारूं च।
रिकार्ड बथान्दन बल हमारि राजकीय अर दुधबोली एकि छे याने गढ़वाली राजभाषा छे अब हिंदी हमारि दुधबोली ह्वे गे अर अंग्रेजी राजभाषा ह्वे गे
हमारो पैल एकि राजकीय पेय छौ अर वों छौ पाणि अब हम सौब पाणि बचाणों बान राजकीय पेय 'शराब' पींदा।

Copyright@ Bhishma Kukreti 13/01/2013