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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, January 29, 2013

विजय बहुगुणा जीक दगड़ उद्योग नीति पर इंटरव्यू

गढ़वाली हास्य व्यंग्य
हौंसि हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा
                                 विजय बहुगुणा जीक दगड़ उद्योग नीति पर इंटरव्यू
                                    चबोड्या: भीष्म कुकरेती
(s=-माने आधी अ )
अचकाल फेस बुकs खबरों से कुछ पता इ नि चलदो बल खबर सही खबर च, दुस्मनो कि नेताओं तै बदनाम करणों बान झूटी खबर उड़ाईं/उछाळि च; नेताओंs जन सम्पर्क को बान उच्छाळि खबर च या क्या च ? अब सि फेस बुकम एक खबर द्याख बल उत्तराखंडs मुख्यमंत्री श्री विजय बहुगुणा जी चौड़ (शीघ्र) एक उद्योग नीति लाण वाळ छन या घोषित करण वाळ छन। ठीकि च क्वी बि मुख्यमंत्री ह्वावो वो पैल प्रशासनम चुस्ती लाणों बान अधिकार्युं थोकम बदली करदो जां से ट्रांसफर उद्योगम उच्छाला आंदो अर इन बुल्दन बल नेताओं अर अधिकार्युं ड्यार रुप्योंन दबल-कुठार भरे जांदन। अब जब उत्तराखंडs मुख्यमंत्रीम करणों बान कुछ काम नि ह्वावो त वो उद्योग नीति घोषित करदो।
मीन कल्पना कार बल जु मि उद्योग नीति पर विजय बहुगुणा से मुखाभेंट (इंटरव्यू) करलु त वा मुखाभेंट इन होलि। मुखाभेंट हिंदीम इ होलि।

मि- विजय जी बधाई हो बल आप उत्तराखंडो बान एक उद्योग नीति लाण वाळ छन।
विजय बहुगुणा- जी सोनिया जीक फजल से, राजीव का आशीर्वचन से अर बुबा जीक पुण्यो परताप से मि शीघ्र ही राज्य उद्योग नीति घोषित करलु।
मि- बुगण जी ! मि ...
विजय- यी बुगण को च ?
मि- जी गावुंमा बहुगुणाओं तै अबि बि बुगण करिक भट्यान्दन।
विजय - पण म्यार ख़ास सलाहकारोंन त इन बथाई छौ बल हम बंगाली छंवां अर कबि नि बतै बल हम बुगण बि छंवां
मि- अछा ! छ्वाड़ो। जरा इन बतावो बल पहाड़ो का वास्ता पर्यटन उद्यम नीति क्या च? खासकर पौड़ी, पिथौरागढ़ जन जिला जख पर्यटन कम च उखाकुण क्या नीति होलि?
विजय - जरा मि नीति फ़ाइल देखिक बतांदु हां! वाह -नैनीताल देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश अर सितारगंज का पपर्यटन विकासो वास्ता बजट दुगणों करे जालो।

मि- सर ! मि पहाड़ोंम पर्यटन उद्योग विकास की बात पुछणु छौं।
विजय-क्या नैनीताल देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश अर सितारगंज नि छन?
मि- सौरि सर नैनीताल देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश अर सितारगंज मैदानि हिस्सा छन।
विजय - पण म्यार ख़ास सलाहकारोंन मि तै बथै इ नी च बल नैनीताल देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश अर सितारगंज पहाड़ी इलाकाक नि छन। यांक मतलब या च मि तै हौर बि सलाहकारों जर्वत पोड़लि।
मि- अच्छा सर! पहाड़ोम रोजगार नि होण से पहाडुंम पलायन एक बड़ी समस्या च। पहाड़ी गावों से पलायन रुकणो बाण पहाड़ो बान आपक क्या उद्यम नीति च?

विजय- हाँ ! भलो हो इंडियन प्लानिंग कमिसन को। रोजगार का अवसर बढ़ाणो बान योजना आयोगन उद्धम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून अर सितार गंज को बजट दुगणों करी दे।

मि- पण सर! उद्धम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून अर सितार गंज त मैदानी हिस्सा छन अर मि पहाड़ोंम उद्यम लगाणों सवाल करणु छौं जां से पहाडुं बिटेन पलायन रुकि जावो।

विजय- हैं गजब ह्वे गे म्यार खास सलाहकारोंन त मि तै बतै इ नी बल उद्धम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून अर सितार गंज मैदानी भाग छन। मि तै कुछ हौर ख़ास सलाहकार भट्याण पोड़ल जौं तै उत्तराखंड को भूगोल पता हो।
मि- सर ! पहाड़ोंम खेति पाति खतम होणि क्या चौपट ही ह्वे गे। जरा इन बताओं कि आपकी नई उद्योग नीतिम पहाड़ों बान कृषि उद्योग नीति क्या च?
विजय- हाँ ! कृषि विकासौ बान बासमती, रासमती, गेंहूं, अरहर, चना की खेती तै प्रोत्साहन दीणों बान बजट बढ़ाये जालो।

मि- पण सर ! बासमती, रासमती, गेंहूं, अरहर, चना की खेती त मैदानों खेति च। मि पहाड़ों खेति बाराम पुछणु छौं।
विजय- पण मेरो बिंगणम नि आयो कि म्यार ख़ास सलाहकारोंन मि तै किलै नि बतै बल बासमती, रासमती, गेंहूं, अरहर, चना की खेती त मैदानों खेति च। कुछ हौर सलाहकार भट्याण पोड़ल।
मि- चलो मि समजि ग्यों कि आप बि भूतपूर्व मुख्य मंत्र्युं बाटो पर ही चलणा छौंवा।
विजय- नै नै .
मि- चलो जाणि द्यावो। जांद जांद एक सवाल च . भाषा नीति क्या च ?
विजय- उर्दू तै त हमन राज्य भाषा दर्जा दियाल। बस अब चौड़ (शीघ्र) ही बंगाली तै बि राज्य भाषौ दर्जा दिए जालो .
मि- सर ! हजारों साल पुराणी राजकीय भाषाओं गढ़वाली अर कुमाउनी भाषौं बाराम क्या नीति च?
विजय- हैं ! गढ़वाली अर कुमाउनी भाषा हजारों साल पुराणि राजकीय भाषा छयी ?
मि- जी सर।

विजय- पण म्यार ख़ास सलाहकारोंन मि तै बतै इ नी च बल गढ़वाली अर कुमाउनी भाषा हजारों साल पुराणि राजकीय भाषा छ्या। कुछ हौर ख़ास सलाहकार भट्याण पोड़ल।
मि- जी यि ख़ास सलाहकार कखक छन?
विजय- जी यि खास सलाहकार इलाहबाद बिटेन अयाँ छन।कुछ हौर ख़ास नया सलाहकार भट्याण पोड़ल।
मि- अर नया सलाहकार कख बिटेन भट्येल्या?
विजय- इलाहाबाद बिटेन अर कखन। मी अबि रीता तै फोन करदो कि सलाहकारों की एक हैंकि खेप भेजी द्याव

Copyright@ Bhishma Kukreti 30/01/2013
[भैरों ! मुखाभेंट कल्पना माँ इ ह्वे। )